maa kalratri sandesh1 - Kabrau Mogal Dham

maa kalratri sandesh1

है तुम्हारे जीवन में अलग प्रकार के खतरे को लाना चाहता है जीवन में नकारात्मक बढ़ाना चाहता है किंतु तुम मेरे

अनन्य भक्त हो मैं कभी भी ऐसा होने नहीं दूंगा मैं उनकी किसी भी चार्ज हूं नहीं होने दूंगा मुझ पर जो विश्वास है

मैं उसे अटूट विश्वास का नहीं होने दूंगा वह तुम्हें प्रगति करते हुए देखा नहीं सकते अपनों के रूप में मैं तुम्हारे दुश्मन बन बैठे हैं भीतरी मन से कभी उनके लिए कुछ भी गलत विचार नहीं लेट किंतु मैं तुम्हारे जितने अच्छे

नहीं है वह तुम्हारा भला नहीं होने देना चाहते किंतु मेरे बच्चे तुम्हें किसी से भी भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है नीतू केवल कुछ बातों पर गौर करने की आवश्यकता है तुम्हें ध्यान से देखना है की कौन वास्तव में तुम्हारा

अपना है और कौन वास्तव में पराया है मेरे बच्चे पराया के लिए कभी भी अपनों को दुख देना सही नहीं होता तुम अपने हृदय से पूछो क्या जो वास्तव में तुमसे प्रेम प्रेम करते हैं परवाह करते हैं कर भी रहे हो छोटी बातों पर

झगड़ा करने से नाराज होकर चिल्लाने से बेवजह का शक मन में पालने में से कड़वाहट क्या तुम याद करते हो उसे दिन को जब तुम्हें प्रेम के लिए तड़पते रहते थे उन दिनों में तुम खुद को कितना अकेला और हारा हुआ

महसूस करते थे वास्तव में तुम्हें या नसीब हुआ तो क्या तुमने इतनी कदर की तुमसे ना मिलने से पहले

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