Jai Mata Ki | जय माता की Episode 49 | सभी असुर आए माता से युद्ध करने - Kabrau Mogal Dham

Jai Mata Ki | जय माता की Episode 49 | सभी असुर आए माता से युद्ध करने

[संगीत]

[संगीत]

नहीं बन आप प्रकट होने का कश ना

करें इन सबका अंत

मैं

[संगीत]

[संगीत]

करूं

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

आइए आइए वीरवर असुर योद्धाओं स्वा स्वागत

है महारथियों

ऐसी टेढ़ी दृष्टि से मुझे क्या देख रहे

हो सुना है तुम लोगों ने इंद्र वरुण अग्नि

वायु कुबेर और यम आदि सभी दिग बली देवताओं

के छुड़ा दिए सबको स्वर्ग से खदेड़

करर न जाने कहां भगा दिया

सुना है तुम में से एक के बल का पारावार

नहीं है

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

ना

परंतु मुझे तुम लोगों के बल पौरुष पर

संदेह हो रहा

[संगीत]

है देवताओं को पछाड़ वाले वह पराक्रमी

योद्धा कोई और होंगे तुम में से एक भी

योद्धा ऐसा हो ही नहीं सकता नहीं नहीं

कदापि नहीं सुमुखी क्यों व्यर्थ बकवास

करती है हम वही अद्वितीय वीर है जिन्होंने

इंद्र ही नहीं परंतु अपनी परम शक्ति से

ब्रह्मा विष्णु और महेश को भी भयभीत कर

दिया है यह असमा विराल दाम रतिका विकमन

महाबली धम और मैं प्रबल पराक्रमी चिर

हू तुझे हमारी वज्र दे और विकराल रूप को

देखकर यह भी प्रतीत नहीं हो रहा कि हम वही

प्रचंड दैत्य

है नहीं तनिक भी नहीं क्या तनिक भी नहीं

हां मैं कैसे विश्वास करूं तनिक सोचो तुम

ही सोचो भला मैं अकेली एक अबला नारी और

तुम इतने सारे भीम काय मुंडे अस्त्र

शस्त्रों से लेस होकर चारों ओर से मुझे

खेरे खड़े

हो क्या ये वीरों के लक्षण हो सकते

हैं छी छी छी यह लज्जा जनक कार्य वीरों को

शोभा नहीं देते ऐसे कर्मों से तो कायरों

के हृदय भी द्रवित हो जाते

हैं

क्या इसी बल पराक्रम से तुमने ब्रह्मा

विष्णु महेश को भयभीत किया छी छी छी कुछ

तो लज्जा करो असुर वर घमंडी

स्त्री बेचारे दुर्मुख को उसकी सावधानी के

कारण घायल क्या कर दिया दद से मतवाली होकर

प्रलाप किए जा रही है हमारे स्वामी

महिषासुर महाराज ने यदि तुझे जीवित बंदी

बनाकर लाने का आदेश ना दिया होता तो हम

तेरी जीवा खी

क्या मुझ स्त्री की जीभ खींच

लेते अबला स्त्रियों पर ही पराक्रम की धाक

जमाते हो मंत्री

संभवत आज तक तुम्हें कोई योद्धा टकराया ही

नहीं तभी तो एक निर्मला नारी पर शासन

चलाने की धमकी दे रहे

हो मुझे तो तुम्हारी बुद्धि बल विवेक सभी

पर दया आ रही है व्यर्थ देवताओं ने

तुम्हारे बल का लोहा मानकर अमृत को नचा

दिया मुझे तो तुम्हारे जंगली गेंडो जैसे

शरीर मात्र पोले ढोल जैसे रिक्त प्रतीत हो

रहे हैं ए दुष्ट सावधान अब यदि एक शब्द भी

बोलने का दुस्साहस किया तो तेरी ऐसी

दुर्गति करूंगा कि सारी स्त्री जाद कहां

बटेगी

[संगीत]

[हंसी]

आश्चर्य महान आश्चर्य एक अबला पर आतंक

स्थापित करके तुम क्या सिद्ध करना चाहते

हो तुम सब पौरुष हीन भीरू हो

भीरू क्यों अपनी दंत पंक्तिया तुड़वा करर

कुरूप होना चाहती है

पीलो अब इसे क्षमा मत करो इस नीच वाचा

दुष्टा के हाथ मोड़कर बांध दो और इसके केश

पकड़ कर घसीट कर रत से बा दो ये अब दया की

पात्र नहीं है वाह दुष्टों वाह किसी असहाय

बल हीन नारी को सताने को ही तुम्हारी भाषा

में पराक्रम कहा जाता

है तुम्हारे जैसे श्रिगल और भेड़ियों को

ही असुर कहा जाता है यह आज सिद्ध हो गया

असुर

वरो इस निर्लज का मुख चकड़ लो और इस

दुष्टा की शील अस्मिता और मान का मर्दन कर

डालो भले महाराज मसर हमें क्षमा ना करें

तामरा तुम तो स्वभाव से ही जघन्य पापी हो

ओ पापामा

बलात्कारी मैं भी तो देखूं तुम्हारी

क्षमता कितनी

है एक गाय को चारों ओर से घेरने वाले

हिंसक भेड़ियों कुछ तो वीरता की मर्यादा

को मान दो यदि अपने बल पर इतना ही अभिमान

है तो करके मेरे सामने आओ

आओ अपने वाग के पाण और चितवन चलाकर हमें

अपने रूप माधुरी से मोहित मत कर तेरे रूप

और सौंदर्य का यवन पान हमारे असुरा पति को

करना है इसी कारण हम तुझे जीवित पकड़ने

हेतु विवश है हे

दुष्ट तूने दुर्मुख और प्रधाना मत्य को

धोखा दिया अब तू हमें मूर्ख नहीं बना सकती

न इसे गत की तरह झपट कर पकड़ लो और बना

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

लो

[प्रशंसा]

[संगीत]

[प्रशंसा]

निर्लज पापियों सावधान तुम्हारी कु

कृतियों का अंत आ गया है बाबा आचार्यों

तुम्हारे बोझ से धरती तस्त हो चुकी है श

ग्रही धरती की धूल तुम सबका रक्त पीकर

अपनी तृष्णा बुझाए

गी

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

माता कीय माता कीय माता की

[संगीत]

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