Gadkari और Rajnath का टिकट काटेंगे Modi ? BJP में कई बड़े नेता नाराज | Deepak Sharma | - Kabrau Mogal Dham

Gadkari और Rajnath का टिकट काटेंगे Modi ? BJP में कई बड़े नेता नाराज | Deepak Sharma |

नमस्कार मैं दीपक शर्मा और मेरे
youtube1 लिया मोदी जी की गोद में बैठ गए
या फिर यह साहब है उम्र में नितीश से बहुत
कम है जयंत चौधरी और यह पश्चिमी उत्तर

प्रदेश में जाट वोटों को लेकर एक चुनौती
बन रहे थे कहीं ना कहीं इनका भी हिसाब हो
गया
आज यह भी गोद में जाकर बैठ गए एक और साहब

है अब यह झुकने को तैयार नहीं थे यह थोड़ा
नितीश कुमार और जैन चौधरी से अलग थे इनका
ऐसा हिसाब किया इस बार चुनाव के लिए मोदी
जी ने इनको निपटा ही दिया लेन लेकिन

दोस्तों यह बात तो अपोजिशन की विपक्ष की
है क्या भीतर पार्टी के भीतर भी बीजेपी के
भीतर भी मोदी जी को चैलेंज मिल रहा है
मोदी जी कुछ लोगों से कुछ नेताओं से बेहद

परेशान है और उनका भी हिसाब करने जा रहे
हैं और पार्टी के भीतर यह शख्स है रवि
शंकर प्रसाद और कभी यह मोदी के आंख कान
हुआ करते थे आज इनको ये पता नहीं कि इनको

इस बार टिकट मिलेगा कि नहीं मिलेगा बड़े क
दावर नेता रविशंकर अब एक और या मदर एंड सन
मां और बेटे बहुत ही ताकतवर आप कह सकते
हैं शख्सियत है जहां तक राजनीति की बात है
मेनका गांधी और वरुण

गांधी इनका भी मोदी जी लगता है हिसाब करने
जा रहे क्य पता नहीं कि इनको टिकट मिलेगा
कि नहीं
मिलेगा एक और हैवी वेट राजनाथ

सिंह इनको भी बहुत निश्चित तौर पर नहीं
पता है कि टिकट मिलेगा इस बार कि नहीं मिल
लेगा भले ही दो बार पार्टी के अध्यक्ष हो
लेकिन एक शख्स ऐसा है जिससे वाकई मोदी जी

बेहद परेशान है मोदी खुद मानते हैं गुजरात
लॉबी खुद मानती है कि अगर राह में कोई
कांटा है 24 के बाद तो ये शख्स है नितिन
गडकरी हिंदुस्तान में आज की सरकार में

मोदी की सरकार में डिलीवरी करने वाला नंबर
एक आदमी उस नंबर एक आदमी से इसलिए परेशानी
है
उसकी शख्सियत बड़ी है दिल थोड़ा नरम है

वाजपेई जैसा वह मॉडरेट है वो डिलीवरी करना
जानता है उसकी डिलीवरी मोदी जी के लिए
सबसे बड़ी परेशानी तो सवाल इस बात का है
कि गडकरी का क्या होने जा रहा है अब

बीजेपी के जो जानकार है जो भीतर से बीजेपी
को जानते हैं उनका यह कहना है कि वैसे तो
उत्तराधिकारी मोदी जी के जो उत्तराधिकारी
हैं उसमें अमित शाह ही नंबर एक है और हो

सकता है कि अगर संघ चल जाए तो यह भी हो
सकते हैं योगी आदित्यनाथ लेकिन सच्चाई यह
है कि मोदी को अगर कोई रिप्लेस कर सकता है
उत्तराधिकारी नहीं सक्सेसर नहीं कोई

रिप्लेस कर सकता है सब्सीट्यूट कर सकता है
24 के
बाद तो फिर वो नितिन गडकरी और शायद इसी
वजह से नितिन गडकरी और नरेंद्र मोदी के
बीच 2014 के बाद से रिश्ते बहुत अच्छे

नहीं दोनों में कम्युनिकेशन गैप है बातचीत
बहुत कम होती है नरेंद्र मोदी बहुत कम
मशवरा लेते हैं नितिन गडकरी से और कहीं ना
कहीं साफ झलकता है कि मोदी गडकरी से खुश

नहीं है गडकरी मोदी से खुश नहीं है और
जहां तक गडकरी की बात है बहुत आउटस्पोकन
है बेबाक बोलते हैं बिंदास बोलते हैं और
अक्सर कैमरे पर कुछ ना कुछ ऐसा बोलते हैं

जो लगता है मोदी पर तंज है जैसे उनकी हाल
फिलहाल की आप स्पीच देखिए दो दिन पहले की
जहां उन्होंने कहा है कि कि जो काम करने
वाला होता है जो आदमी डिलीवरी करता है काम

करता है सरकार में उसका सम्मान नहीं होता
कोई भी पार्टी की सरकार है पर एक बात बहुत
अच्छी होती है एक बात पक्की होती है कि
अच्छे काम करने वालो को कभी सम्मान नहीं

मिलता और बुरे काम करने वालों को कभी सजा
नहीं मिलती इसी का नाम सरकार होता है कि
अच्छे काम करने वालों को कभी सम्मान नहीं
मिलता दोस्तो यहां पर दो बड़े सवाल टू बिग
क्वेश्चन पहला क्वेश्चन

नितिन गडकरी आप राजनाथ सिंह को भी गिन
सकते हैं रविशंकर रूडी मुख्तार अब्बास
नकवी वरुण गांधी मेनका गांधी इनकी फिर कभी
बात होगी ये दो हैवी वेट्स की पहले बात

करते हैं नितिन गडकरी और राजनाथ सिंह दो
चीजें हो सकती इनके साथ एक टिकट ही काट दे
मोदी जी जड़ से ही उस समस्या को खत्म करते
मट्ठा डाल दे मठा डालने का मतलब है टिकट

ही ना दे और दूसरा इनको अगर टिकट दे जैसे
2014 में लाल कृष्ण अडवाणी और मुरली मनोहर
जोशी को टिकट दिया था दिया था और दोनों
जीत के पहुंचे भी थे लेकिन मोदी जी ने

दोनों को शपथ नहीं लेने द यहां तक कि
मुरली मनोहर जोशी स्पीकर बनना चाहते थे
नहीं बनने दिया आडवानी जी राष्ट्रपति बनना
चाहते थे नहीं बनने दिया दोनों को किनारे

कर दिया तो सवाल इस बात का है कि क्या
नितिन गडकरी या राजनाथ या और हैवी वेट्स
जिनके बाद में नाम मैं ले सकता हूं क्या
नितिन गडकरी और राजनाथ को टिकट देंगे

लेकिन बाद में शपथ नहीं होने देंगे या
टिकट ही काट देंगे बड़ा सवाल है बिग
क्वेश्चन है और मैं अपने एक्सपर्ट अशोक
वानखेड़े टाइगर के साथ मैं कोशिश करूंगा

आज पूरी तरह से इसको डाइस सेक्ट करूं कि
आखिर बीजेपी के भीतर य जो बगावत का धुआ है
ये बीजेपी को कहां ले जा रहा है किस
रास्ते पर ले जा रहा है इंडिया एलायस की

बात तो रोज ये जो धुआ है कहां ले जा रहा
है और इस धुए में जो एक आकृति दिखाई दे
रही है नितिन गडकरी राजनाथ मेनका गांधी
वरुण गांधी रविशंकर प्रसाद प्रकाश

जावड़ेकर मुख्तार अब्बास नकी शहनवाज हुसैन
कई चेहरे कई चेहरे इस धुए पर भी बात
करेंगे लेकिन पहले मूल
सवाल कि गडकरी के साथ मोदी जी ने कहीं ना

कहीं खौफ जदा होकर परेशान होकर नाखुश होकर
गडकरी के पर किस तरह मोदी जी कतर चले गए
जरा मोदी जी की कैची गडकरी के परों पर चली
है पहले उस पर बात कर लेते हैं चंद सेकंड
में अब दोस्तो अगर आप पीछे मुड़कर मोदी

सरकार का उदय देखते हैं या मोदी सरकार जब
स्थापित हुई इसने शपथ ली तो नितिन गडकरी
वाकई आप कह सकते हैं मोदी राजनाथ सिंह ए
नंबर थ्री नितिन गडकरी नंबर फोर अमित शाह

और बाकी बहुत से लोग थे उसमें आप कह सकते
नंबर तीन के पोजीशन पर नितिन गडकरी थे अगर
राजनाथ सिंह गृह मंत्री थे सुसमा सौराज भी
तब थी अरुण जेटली भी थे लेकिन गडकरी नंबर

तीन थे उसकी वजह यह थी कि ऐसा लगता था आधी
सरकार वही चला रहे हैं उनके पास
मिनिस्ट्री ऑफ सरफेस ट्रांसपोर्ट और
हाईवेज था उनके पास रूरल डेवलपमेंट

पंचायती राज मंत्रालय था उनके पास एक टाइम
पर वाटर रिसोर्सेस जल संसाधन था उनके पास
मिनिस्ट्री ऑफ शिपिंग
थी और एक वक्त ऐसा भी था 2019 के बाद उनके
पास माइक्रो स्मॉल मीडियम एंटरप्राइज सब

इंपोर्टेंट मिनिस्ट्री जी हा लघु उद्योग
मध्यम उद्योग वो भी उनके पास थी लेकिन
धीरे धीरे धीरे पर कतर चले गए और आप यकीन
मानिए जो आदमी चारचार मंत्रालय चला रहा था
जिसकी तूती बोल रही थी आज उसके पास सिर्फ
एक

मंत्रालय आज नितिन गडकरी की हैसियत
एक बहुत ही आप कह सकते हैं लो प्रोफाइल
मिनिस्टर के तौर पर ये अलग बात है कि वो
डिलीवरी कर रहे सिर्फ एक मंत्रालय अब

दोस्तो बात एक मंत्रालय पर आकर खत्म नहीं
हुई दरअसल बात एक मंत्रालय देकर या एक
मंत्रालय तक सीमित करके कहानी वहां से
शुरू हुई और कहानी ये शुरू हुई कि 2022
अगस्त में गडकरी जी को बीजेपी के

पार्लियामेंट्री बोर्ड आप कह सकते हैं
बीजेपी की सबसे बड़ी एपेक्स बॉडी है
पार्लियामेंट्री बोर्ड बीजेपी
पार्लियामेंट्री बोर्ड बीजेपी संसदीय

जिसके अंडर में सेंट्रल इलेक्शन कमेटी भी
आती है जो उम्मीदवारों का चुनाव करती
बीजेपी पार्लियामेंट्री बोर्ड आप कह सकते
हैं कि सबसे अहम फैसले जो पार्टी के होते
हैं वो लेती

है मोदी और अमित शाह ने तय किया कि इस
पार्लियामेंट्री वोट
से नितिन गडकरी को दरवाजा दिखाना होगा और
दरवाजा दिखा दिया उनको एग्जिट कर दिया
बाहर कर दिया ही वाज

ड्रॉप्ड बहुत शॉकिंग न्यूज थी और इतना
अपमान नितिन गडकरी जो राष्ट्रीय अध्यक्ष
रह चुके थे जिनकी सदारत में मोदी जी को
कहीं ना कहीं हाईलाइट किया गया था
प्रधानमंत्री की रेस

में इस पावरफुल आदमी के भर गतर दि सड़क पर
ला दिया इतना बड़ा अपमान का घूंट टकरी ने
अपने करियर में कभी नहीं पिया होगा जो उस
वक्त उनको सामना करना पड़ा 2022 में और

उसके बाद धीरे-धीरे मोदी जी ने जितने भी
अहम फैसले थे हर अहम फैसले से टकरी को
किनारे कर दिया कोई भी अहम फैसला होता है
या तो अमित शाह लेते हैं या मोदी जी लेते

हैं कभी-कभी उसमें निर्मला सीतारमन आ जाती
है कभी-कभी उसमें नड्डा शामिल हो जाते हैं
यहां तक कि एस जयशंकर जो विदेश मंत्री हैं
य अनुराग ठाकुर जैसे जूनियर मंत्री भी वह

भी मोदी के फैसलों में शामिल रहते हैं
टकरी नहीं और जहां तक लोकसभा राज्यसभा में
बड़े डिबेट्स जहां पर बोलने की बात है
नितिन गडकरी बस आगे की सीट पर बैठे रहते

हैं उनको बोलने नहीं दिया जाता ना राजनाथ
बोलते हैं ना नितिन गडकरी बोलते हैं जितनी
बड़ी बहस है उसमें स्मृति रानी तक को मौका
मिलता है निशिकांत दुबे जैसे जैसे लोग

जिनकी चर्चा करना भी बेकार है निशिकांत
दुबे बोलते हैं स्मृति रानी बोलती है
अनुराग ठाकुर बोलते हैं विधी बोलता
है कटक और राजनाथ सिंह बहुत कम बोलते हैं

तो यानी कहीं ना कहीं जुबान पर भी ताला है
सवाल इस बात का है कि जिस आदमी को आप अर्श
से फर्श पर ला रहे हैं क्या टिकट की लिस्ट
से सूची से भी नितिन करिएगा नाम काट दिया

जाएगा डिलीट कर दिया जाएगा उनकी फाइल
डिलीट कर दी जाएगी यहां तक टिकट का सवाल
है उनको लड़ने नहीं दिया जाएगा चुनाव
नागपुर से या फिर अगर चुनाव लड़ने दिया

जाएगा और जीत कर अगर टकरी आते हैं क्या वो
मंत्री बनेंगे या वो मुरली मनोहर जोशी
बनेंगे मुझे लगता है एक बड़ा सवाल है
उसमें राजनाथ पर भी हम जरूर डिस्कस करेंगे

डिबेट करेंगे राजनाथ का क्या होगा गडकरी
का क्या होगा बाकी जो थे उन पर फिर कभी
बात करेंगे मेनका गांधी वरुण गांधी राजीव
प्रताप रूढी रविशंकर शकर प्रसाद इन पर बात

होगी लेकिन दो इंपॉर्टेंट हैवी
वेट क्या गुजरात लॉबी इनसे कंफर्टेबल नहीं
है और क्या वाकई हिसाब हो जाएगा मुझे लगता
है दो ही स्थितियां है टिकट देना या ना

देना और दूसरी स्थिति है टिकट देकर बैठा
देना शपथ नहीं देना क्या होने जा रहा है
और क्या वाकई नितिन गडकरी कहीं ना कहीं वो
जो बगावत का धुआ है उसके प्रतीक बनते जा

रहे हैं जिसके पीछे आज की तारीख में
वसुंधरा राज भी खड़ी है
और सबसे ताजा जो चेहरा है वो शिवराज सिंह
चौहान का है जो बहुत नाराज है तो क्या हम

ये माने कि अगर गडकरी को टिकट नहीं दिया
जाता
है तो मोदी जी परेशानी खत्म कर रहे हैं या
बगावत पढ़ा रहे हैं मैं सीधे मैं इन

सवालों को लेकर सीधे अशोक वानखड़े टाइगर
के पास चलूंगा और टाइगर वो शख्स है जो
नागपुर की सियासत भी समझते हैं दिल्ली की
सियासत भी समझते हैं मुझे लगता है उनसे

मुफीद और उनसे बेहतर इस विषय पर कोई नहीं
बोल सकता टाइगर को सुनते हैं और कोशिश
करते हैं कि जो बड़ा सवाल है कि क्या
गडकरी के पर कतरे जाएंगे राजनाथ के पर

कतरे जाएंगे और एक बगावत की शुरुआत होगी
प्रॉब्लम स्टार्टस और प्रॉब्लम एंड्स फर
मोती चलते हैं सीधे अशोक वानखड़े टाइगर के
पास

टाइगर सबसे
पहले जिस तरह से मोदी जी को लगता है कि एक
भारत रतन देने से पार्टी टूट सकती इंडिया
एलायस टूट सकता है करपुरी ठाकुर को दिया

तो नितीश कुमार जो है उनके दामन में आ गए
और आज चौधरी चरण सिंह को दिया तो पोता
भागता भागता आया उसने ट्वीट किया कि दिल
जीत लिया मोदी जी तो जैन चौधरी भी गए उधर

नितीश कुमार चले गए इंडिया एलायस को कमजोर
कर दिया है मोदी जी जिस तरह से झगड़ा करा
रहे हैं बंगाल में वो भी जबरदस्त अधि रंजन
जो है मोर्चा संभाले हैं बीजेपी के बी टीम

बन के क्या मोदी जी को लगता है एनसीपी
तोड़ने के बाद शिवसेना तोड़ने के बाद
इंडिया अलायंस को कमजोर करने के बाद एक
छत्र राज होगा और इस एक छत्र राज

में जो भाजपा के पुराने छत्र है गटक और
राजनाथ सिंह इनका वही हाल होगा जो 2014
में हाल किया था मुरली मनोहर जोशी और
अडवाणी क्या आपको लगता है कि भजन लाल और

मोहन यादव जैसों की टीम चाहते हैं मोदी जी
और क्या बड़े बड़ों पर गाज गिर सकती है
मोदी गिरा सकते हैं बहुत लोगों को टिकट
नहीं देंगे इस बार

देखिए दीपक भाई हर इंसान के दो चेहरे होते
हैं एक चेहरा वो होता है जो अपने बच्चों
के सामने व रखता है और विश्वास भरा लबालब
रहता है वह पिता और कोई भी चीज हो बेटी की

शादी अरे कर देंगी चिंता मत करो बेटा बेटी
की अरे सब हो जाएगा एजुकेशन सब हो जाएगा
कॉलेज का एडमिशन सब हो जाएगा अंदरूनी अंदर
उसको पता था कि उसके पास विश्वास उस जगह
नहीं

है और दूसरा चेहरा ये उसका है कि इधर उधर
हाथ मारते रहता है कहीं से लोन की
व्यवस्था कर कहीं से कुछ कर कहीं से कुछ
कर कहीं से कुछ एक्स्ट्रा इनकम आने का

प्रयास कर वो चेहरा इसलिए होता है कि वह
अपने घर के सामने बताना नहीं चाहता कि मैं
कमजोर
हूं और अंदर से टूटा हुआ रहता है वर्तमान

में नरेंद्र मोदी जी की स्थिति
वैसी अंदर से बेह टूटे हुए
हैं और बाहर अपने कार्यकर्ताओं को यह
बताना है इसलिए अबकी पार 400
पार

यदि मोदी जी विश्वास से लबालब भरे
होते तो पांच पांच भारत रत्न नहीं बांटने
होते मोदी लबालब भरे
होते तो जयंत एक छोटा पुर्जा था उस गठबंधन

का उसके लिए एक भारत रत्न देना नहीं
पड़ता यदि मोदी जी विश्वास से लबालब भरे
होते तो सुरेन को जेल में नहीं डालते और
जेल के मुहाने पर केजरीवाल को नहीं जाकर
रखते यह भगदड़

है मैंने पहले भी कहा 272 की स्थिति मिलना
मुश्किल हो रही है जी आप यदि यह कहेंगे कि
हमें वहां से बहुत सन्मान मिल रहा है मतलब
बिहार मेरे पास है पूरा नरेंद्र मोदी जी

की गारंटी है और बिहार मोदी जी के साथ है
तो फिर नीतीश रहे ना रहे क्या फर्क पड़ता
है जी उत्तर प्रदेश की राम मंदिर के बाद
80 सीट आने वाली है तो जयंत रहे ना रहे
क्या फर्क पड़ता

है 80 सीटों के लिए जयंत की जरूरी है इसका
मतलब राम मंदिर काम नहीं कर रहा है जयंत
क्यों
आए वह इसलिए नहीं आए कि भारत रत्न

दिया जैन को संभाल नहीं पा रहे
अखिलेश यह अखिलेश की जिम्मेदारी थी जैन को
संभालने
की वो नहीं संभाल पाए तो वो एक कमजोर दुआ
देक उन्होंने अपनी तरफ लिया रास्ता बनाने

के लिए भारत रत्न दिया हम भारत रत्न देते
उसके नाम आद सकते हो आप वही उन्होने पहले
किया क्या भारत रत्न के पहले क्या भारत
रत्न के पहले यह तय नहीं हो रहा था कि

नीतीश बाबू जाने के रास्ते पर है कई बार
आपने और हमने भी जब रिक डिस्कस किया कि
नीति समझ में नहीं आ रहा
है र मैं असली सवाल पर आ रहा हू और मैं

चाहूंगा आज कि जो मैं सवाल पूछू उसका
ऑब्जेक्टिव आंसर दीजिएगा अगर एक लाइन का
सवाल तो एक लाइन का उत्तर फिर मैं ली महा
प्रश्न प आऊंगा यक्ष प्रश्न प आऊा पहला

प्रश्न क्या मोदी जी सवाल सुनिए क्या मोदी
जी गडकरी से कहीं ना कहीं बहुत खुश नहीं
रहते क्या मोदी गडकरी से खुश नहीं
रहते सवाल इतना ही है मोदी जी के और गडकरी
जी के बीच में भयानक तनाव

है तनाव है संवाद हीनता की स्थिति बनी हुई
है संवाद हीन बस इतना ही चाहिए था मुझे
जवाब संवाद हीनता बनी हुई है तनाव बना हुआ
है मेरा सवाल नंबर सप्लीमेंट्री क्वेश्चन

अगर तनाव है अगर दोनों एक दूसरे को कंपीटर
मानते हैं खुश नहीं है दोनों के बीच में
बातचीत नहीं होती कम से कम दिल से नहीं
होती कैबिनेट में मोदी आते हैं जब तो

गडकरी वहां कुछ बोलते नहीं जितनी भी
कमेटियां हैं जो बड़ी कमेटियां
पार्लियामेंट्री बोर्ड सेंट्रल इलेक्शन
कमेटी सब में से गडकरी को निकाल दिया

गडकरी से मंत्रालय छीन लिए इसका मतलब आप
सही कह रहे हैं कि कहीं ना कहीं कोल्ड वार
है अगर यह कोल्ड वार है सवाल अगर यह कोल्ड
वार है तो क्या मोदी जी को लगता है कि इस

आदमी से खतरा हो सकता है आगे यह आदमी अगर
मैं थोड़ा सा भी कमजोर हूंगा तो ये आदमी
कहीं ना कहीं मुझे चोट कर सकता है या इस
आदमी को आगे बढ़ाया जा सकता है गडकरी को

क्या मोदी जी को ऐसा लगता है व्हाट यू
प्रूम आपकी क्या गडकरी जी ने भैस थोड़ी
मारी है मोदी की
मोदी जी का क्या नुकसान किया गडकरी ने वो

तो उनके मंत्रिमंडल में सबसे काम करने
वाले मंत्री है उनके कामकाज पर तो मोदी जी
वोट मांगते
हैं यह डर है मोदी जी
को मोदी जी को जब अपने आप पर आत्मविश्वास
विश्वास नहीं है इसलिए हर एक को अविश्वास

की दृष्टि से देखता
है जी मोदी जी को डर है यह आपने
कहा मोदी जी को भयावह डर है ठीक ठीक टाइगर
आपने पहला सवाल का जवाब दिया कि दोनों में
बनती नहीं है मोदी जी और गडकरी में संवाद

कम्युनिकेशन ना के बराबर है बहुत औपचारिक
फॉर्मल रिलेशन ये आपका पहला स्टेटमेंट था
दूसरा आपने जवाब दिया कि गडकरी का जो कद
है वो भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे जब

मोदी जी मुख्यमंत्री थे गडकरी का जो काम
करने और डिलीवरी का स्टाइल गडकरी का जो
विनम्रता है उनका मॉडरेट फेस है उससे कहीं
ना कहीं मोदी डरते हैं मोदी को अब मेरा
यक्ष प्रश्न अगर संवाद हीनता है अगर
कंपटीशन है अगर ईर्ष्या है और अगर डर है

यह आदमी कभी भी मेरे लिए खतरा बन सकता है
अगर इस तरह की
मनोस्क्यू पार्लियामेंट्री बोट मोदी के
कब्जे में पार्टी मोदी के कब्जे में नड्डा
मोदी के कब्जे में आरएसएस मोदी के कब्जे
में तो जिस तरह से अडवाण और जोशी का हिसाब

कर दिया था क्या गडकरी का हिसाब कर सकते
इट्स गोल्डन चांस फॉर मोदी क्या गडकरी का
टिकट कट सकता
है तो फिर महाराष्ट्र में से एक सीट मिलना
मुश्किल हो जाएगी 48 में

से कई राज्यों में लोग गडकरी को बुलाएंगे
गडकरी खुल के बात
करेंगे तो इससे अच्छा है गडकरी को टिकट दो
और पूरा जोर लगाओ कि गड़क हार
जाए पैसा लोग लगा दो तो फिर गडकरी अपनी

सीट जिताने के चक्कर में उलझे रहेंगे अपने
नागपुर में मतलब गडकरी को टिकट दो और
गडकरी हार भी
जाए इसकी व्यवस्था करो जो उन्होंने जय
नारायण व्यास के साथ

किया गुजरात मेंब जयनारायण
जयनारायण व्यास को मुख्यमंत्री बन सकते थे
मोदी के बाद मोदी का उत्तराधिकारी माना जा
रहा था लेकिन मोदी चाहते थे कि आनंदी बहन

बने तो जयनारायण व्यास को हरवा दिया
परिसीमन कर दिया उनकी कंसी का ये चाह रहे
आप टिकट दो लेकिन हार जाए हार जाए लेकिन
गडकरी का एक है कि गडकरी को टिकट दिया तो

गडकरी जीतने की तो गारंटी है विदर्भ के और
एक दो सीट निकाल सकते हैं क्योंकि गडकरी
अपने पार्टी के साथ कभी गद्दारी नहीं
करेंगे चाहे मोदी जी हो चाहे कोई भी

अध्यक्ष कोई भी हेड हो गडकरी पार्टी कभी
छोड़ेंगे नहीं गडकरी पार्टी के साथ
गद्दारी नहीं करेंगे लेकिन गडकरी को जिसने
तकलीफ दी

गडकरी उसको घर तक छोड़ के आते यह गडकरी का
इतिहास
अच्छा यस घर तक छोड़कर आते हैं जो मतलब
तकलीफ
देता गड़क छोड़ते
नहीं क्या आपको लगता हैने गडकरी ने किसी

भी पॉइंट ऑफ व्यू पर किसी भी वक्तव्य पर
अपने को प्रधानमंत्री का उम्मीदवार घोषित
नहीं
किया वो कई बार कह चुके कि मुझे बिल्कुल

प्रधानमंत्री नहीं बन है मुझे बस काम करना
है जो भी मंत्रालय मिले उसम लेकिन वो काम
करना चाहते हैं जी टागर यहां एक सवाल और
गडकरी के साथ जो कुछ हुआ यह बात सही है

आपकी कि वो डिलीवरी करने में उनका कोई
तोड़ नहीं है आज की तारीख में विपक्ष भी
मानता है मैंने राहुल गांधी को देखा है कि
वो तारीफ कर रहे हैं गडकरी की मैंने

विपक्ष के कई नेताओं को सदन में सुना है
कि गडकरी काम करते हैं और अगर किसी सरकार
में किसी नेता की सबसे कम आलोचना होती है
तो गडकरी है और गडकरी सबका काम करते हैं य

बात एकदम सही है आपकी लेकिन यहां पर एक
सवाल मैं पूछना चाहर और य सवाल मेरे जहन
में नहीं मेरे दोस्तों के जहन में भी होगा
जिस गडकरी से चार मंत्रालय छीन लिए गडकरी

के पास चार पांच मंत्रालय थे शिपिंग
मिनिस्ट्री थी जल संसाधन था बहुत से
मंत्रालय आज गडकरी जी के पास सिर्फ एक
मंत्रालय वन सिंगल तो उनके तीन चार

मंत्रालय खत्म किए उनको बदनाम किया उनको
कहीं ना कहीं रेस किया उनको एक तरह से आप
कह सकते हैं कहीं ना कहीं अपमान का घूंट
पीना पड़ा गडकरी को और उसके बाद जो पार्टी

का जो बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष र उसको
आपने पार्लियामेंट्री बोर्ड से निकाल दिया
छोटे-छोटे छुट भए नेते चंगू मंगू टाइप के
लोग पार्लियामेंट्री बोर्ड में बैठे हैं

और गडकरी को आपने दरवाज दिखा दिया गडकरी
आज की तारीख में सेंट्रल इलेक्शन कमेटी
में नहीं ना वो इलेक्शन कमेटी में है ना
पार्लियामेंट्री बोर्ड में है उनकी कोई

हैसियत नहीं है पार्टी में पार्टी के बहुत
से फैसले होते हैं जहां पर मैं देखता हूं
पियूष गोयल जा रहे हैं धर्मेंद्र प्रधान
जा रहे हैं अनुराग ठाकुर जैसे लोग वो जा

रहे हैं कहीं पर गडकरी जी नहीं दिखते उनको
सदन में बोलने नहीं दिया जाता निशिकांत
दुबे जैसे नेता जो है व उद्घाटन भाषण दे
रहे हैं बहुत से ऐसे सांसद है जो जुमे

जुमे जिनको दो दिन हुए राजनीति में वो लोग
सदन में बोल रहे हैं गडकरी को बोलने नहीं
दिया जा रहा गडकरी कांट स्पीक गडकरी कां
सिलेक्ट गडकरी कांट इलेक्ट गडकरी इ नोवेयर

इन द डिसीजन क्या आपको लगता है कि ऐसे
आदमी को अगर टिकट दे देते हैं और वो जीत
के आ जाता है तो मोदी जी अगली बार मंत्री
नहीं बनाएंगे अगर मोदी जी जीत गए आपको

लगता है हां यह बात हो सकती है अगली बार
मोदी जी आएंगे तो य ट उनको मंत्री नहीं
बनाएंगे ये हो सकता है इस बारे में मैं
उके साथ अडवाण जोशी जैसा स्वभाव हो सकता

है हां बिल्कुल हो सकता है इनके साथ हो
सकता है लेकिन गडकरी को यदि आप मंत्री
नहीं बनाओगे तो फिर गडकरी पार्लियामेंट
में बोलेंगे देखिए के बाकी लोगों में

जिनके नाम लिए आपने मुरली मनोहर जोशी या
आडवानी जी ये राष्ट्रीय नेता थे इन्होंने
बीजेपी के लिए अपने आप को खपा या लेकिन
उन्होंने कोई अपनी कांसटेसी नहीं बनाई ऐसी

जाए वो बिचारे गुजरात में जाकर इनके भरोसे
जीतते थे गडकरी का ऐसा नहीं है गड़क ने
अपनी कंसी बना के रखता है आपको ऐसा लगता
है कि चलिए ठीक है मोदी जी अभी 400 पार और
370 इस तरह की बातें कर रहे मोद जी अगर

जरा सा भी 272 के नीचे आए अगर 272 के
क्योंकि देखिए फैसला मैं फिर कह रहा हूं
बारबार अपने दोस्तों से फैसला जनता को तय
करना है पीपल हैव टू डिसाइड ना अशोक
वानखड़े को डिसाइड करना है ना मुझे डिसाइड

करना है ना ही मोदी जी को डिसाइड करना है
वोटर तो जो लोग देख रहे हैं वही है वही जज
है अगर 272 के नीचे आ गए मोदी जी अगर आ गए
तो आपको लगता है गडकरी खतरा बन सकते हैं

और गडकरी को बैकिंग करने वाले राजनाथ सिंह
हो सकते हैं रावी शंकर प्रसाद है राजीव
प्रताप रूडी है प्रकाश जावड़ेकर है शहवाज

हुसैन है मुख्तार अब्बास नकवी है वसुंधरा
राजे है अब तो शिवराज सिंह चौहान खुलेआम
बगावत पर उतर आए तो यह जो बागी नेता है
मेनका गांधी भी है वरुण गांधी भी है एक

बहुत लंबी लिस्ट है जो लोग मोदी से खुश
नहीं है मुंह पर भले बोलना पड़े क्योंकि
मोदी जी के साथ संख्या बल है उनके पास
स्ट्रेंथ है सदन में लेकिन अगर मोदी जी ने
कोई गलती करी या दाव

खाए तो फिर इधर से गडकरी जी कहीं ना कहीं
मौका नहीं
छोड़ेंगे क्यों छोड़ेंगे आपने पहली बात
कही कि गडकरी गडकरी जी को इतनी कमेटियों
से निकाला न से 303 सांसद है बीजेपी के

लोकसभा में उसमें से 200 सांसदों के दिल
पर गडकरी राज करते
हैं
ह दो हर राज्य का सांसद उनसे आकर मिलता है

क्योंकि उसके कांसी में व काम करते हैं
किसी भी सांसद को रात को 3 बजे भी फोन आया
तो अटेंड करते हैं संवाद हीनता उन्होंने
पार्टी से छोड़ी नहीं है गडकरी संगठन से
निकले हुए आदमी है हर राष् प्रदेश का

अध्यक्ष गडकरी से बात करता है हर
मुख्यमंत्री गडकरी से आकर बात करता है और
जब व्यक्तिगत तौर से बात करता है तो व
व्यक्तिगत ही बात करता है वह अपनी

प्रताड़ना भी बताता है सब लोग करते हैं और
फिर आप एक दूसरी बात कह रहे थे यदि 272 से
नीचे आएंगे तो गडकरी के साथ ये सब लोग हो
जाएंगे क्या दीपक भाई यदि दो के नीचे मतलब

250 के नीचे यदि बीजेपी आती है तो आपको
सरप्राइज होगा जो लोग सबसे मोदी के करीब
है वह सबसे पहले गडकरी के साथ हो जाएंगे
बाप
रे क्योंकि यह अपॉर्चुनिटी लट है मोदी जी

के पास आंकड़ा है तो मोदी मोदी करते हैं
जैसे ही आंकड़ा मोदी जी के हाथ से निकल
जाएगा और इन्ह लगेगा कि दुहा इधर दिख रहा
है राजनाथ बाद में बोलेंगे लोग बाद में

बोलेंगे ये जो साथ वाले मंत्री जो कल से
बिल्कुल मोदी जी मोदी जी कर रहे थे वो
सबसे पहले जयजयकार लगाना शुरू कर देंगे और
वो सवाल उठाएंगे मोदी जी प और बताने का

प्रयास करेंगे गडकरी जी को कि देखिए हम
आपके साथ है सर सबसे पहले मैंने पूछा कि
आपकी वजह से पार्टी हारी
है आप य टाइगर यह कहना चाह रहे हैं कि

क्योंकि मोदी के पास स्ट्रेंथ है उनके पास
सांसद है 300 से ज्यादा सदन में वो बहुत
मजबूत है इस वजह से लोग झुके हुए हैं दिल
से मानने वाले लोग कम है डरे झुकना झुकता

है आदमी इज्जत देने के लिए ये डरे हुए हैं
शब्दों का चयन डरे हुए
हैं जी डरे हुए हैं एक चीज और आखिर में
चलते चलते मुझे लगा कि यह सवाल भी बहुत
मौजू हो गया है क्योंकि आपने कई राज आज
खोले

हैं राजनाथ सिंह राजनाथ सिंह दो बार केबीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उनका तो कद
गडकरी से भी बड़ा है और अगर राजनाथ नहीं
मोदी जी की ताज की उनको प्रधानमंत्री का

अभियान समिति का अध्यक्ष बनाया फिर उनको
तलवार भी भेट करी उन्होने और जब वो जीते
तो गुलदस्ता भी दिया राजनाथ के साथ जो
व्यवहार है राजनाथ भी खामोश है व कहीं
बोलते नहीं है ना ही उनको बोलने दिया जाता

है व भी सदन में चुप बैठे रहते मोदी जी के
बगल में चुपचाप बैठे हैं जो इतना अच्छा
वक्ता कहा जाता वो कुछ नहीं बोलता आजकल
सदन क्या राजनाथ भी आपको लगता है अंदर ही

अंदर बहुत खुश नहीं है नहीं नहीं राजनाथ
भी डरे हुए हैं राजनाथ जी को अपने बेटे के
भ राजनीतिक भविष्य की चिंता है गडकरी को
बेटे की चिंता नहीं है भविष्य की राज
राजनीति में उने अपने बच्चों को लाया ही
नहीं राजनीति

में राजनीति से दूर
रखा गडकरी ड़ से नहीं डरते गक इकम टक्स से
नहीं डरते गडकरी सीबीआई से नहीं डरते बहुत
हो गया पूर्ती
पूर्ती जिने बो उने भी मांगी बाद में सवाल
य है कि राजनाथ सिंह जिनको स्टैंड लेना

था राजनाथ सिंह जैसे नेताओं की वजह
से मोदी
जी अपनी पूरी आयरन ग्रिप ला पाए क्योंकि
जिस राजनाथ सि को बोलना चाहिए था आवाज
उठानी चाहिए थी उनकी आवाज खामोश हो गई ो

राजनाथ जी से बहुत देश को अपेक्षाएं थी और
राजनाथ र होने के बाद गडकरी अकेले पड़ गए
गडकरी आवाज उठाते हैं गडकरी बोलते हैं जी
गक किसी चीज को रोकते नहीं शाहजहां की तरह

उनको नजर बंद कर दिया जाता मैं दूसरी चीज
आपने जो बात छेड़ी टाइगर जो मैं समप करू
तो मैं देख रहा हूं कि मोदी जी का एक
युद्ध जो है व इंडिया ला या विपक्ष के साथ

है एक बहुत ही सामने जो लड़ाई दिख रही है
और एक युद्ध अंदर है बीजेपी के यानी एक
लड़ाई बाहर इंडिया लाइन से और एक लड़ाई
क्या बीजेपी में अंदर अंदर है क्या बीजेपी

में भी बगावत है भीतर ही भीतर और क्या
वहां कई लोग मौके का इंतजार कर रहे हैं कि
मोदी कमजोर हो तो हम लपके उस प्लेस को उस
स्पेस को भरे क्या आपको लगता है दो फ्रंट
पर लड़ाई है बीजेपी की बाहर लड़ाई इंडिया

से है और अंदर अपनों से
है अंदर की लड़ाई बड़ी है दीपक
भाई अंदर की लड़ाई बी सबसे बड़ी लड़ाई
अंदर की
है मोदी जी की अविश्वसनीय इतनी बड़ गई
मतलब मोदी जी इतना अविश्वास करने लगे हैं

कि आज अकेले है पार्टी में मैं दिल से बता
रहा हूं आपको मेरी जितने लोगों से बात
होती है वोह किसी पर विश्वास नहीं रखते
उनका अमित शाह पर भी विश्वास नहीं उनका

संघ पर भी विश्वास
नहीं उनको पता नहीं क्यों बार-बार यह फियर
साइकोसिस है कि मेरे को हटाने के लिए एक
षडयंत्र रचा जा रहा है मेरे को निपटाने का
प्रयास हो रहा

है जी तो शायद इसीलिए यही कारण है एक एक
वोट पर नजर है एक एक सीट पर नजर
है जी और कई बार हमें भी ताजुब लगता है कि
व बोलते कुछ है करते कुछ

है टाइगर आज आज आज आपने बहुत सी चीजें
बताई और आपने कहा कि इंडिया अलाइन से तो
सामने सामने लड़ाई है मोदी वर्सेस राहुल
गांधी कह लीजिए या एनडीए वर्सेस इंडिया कह

लीजिए लेकिन आपने कहा कि एक लड़ाई बीजेपी
के भीतर भी है और उसके जो आपने कारण बताया
वो मुझे लगता है कि बहुत हैरत अंगेज कारण
है कि इस तरह का जो एक अविश्वास मोदी को

हो रहा है और जिस तरह से नाराजगी भीतर ही
भीतर बढ़ रही है और बहुत से लोगों का वो
टिकट काटने जा रहे हैं हो सकता है 35 से
40 प्र सांसदों का टिकट काट द जिसमें कुछ
सूरमा और महारती हो और गटक भी हो सकते हैं

हो सकता है राजनाथ भी हो बहरहाल य जो अंदर
का द्वंद है बीजेपी का मुझे लगता है यह एक
बड़ी कमजोरी है जिसे गोदी मीडिया नहीं
दिखाती लेकिन टाइगर आज आपने उस रोशनी डाली
और बहुत मैं कह फ्लैशलाइट किया अने पूरा
उस अंधेरे को आज सामने लाए हैं आप कैमरे

पर मैं आपके इस बेबाकी और इस बेधड़क बोलने
की जो आपकी जो ताकत है जिसके लिए आपको
टाइगर कता उसको मैं सलाम करता हूं सलूट
करता हूं सो नाइस ऑफ य कमिंग टू दिस
प्रोग्राम एक्सप्लेनिंग द थिंग्स थैंक यू
सो मच सर
और

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