7. ?️ मां कालरात्रि ?️ कालरात्रि आज तुम्हें दिव्य दर्शन देने आई है ?️ - Kabrau Mogal Dham

7. ?️ मां कालरात्रि ?️ कालरात्रि आज तुम्हें दिव्य दर्शन देने आई है ?️

मेरे बच्चे मुझे कुछ भी नहीं छिपा है मेरे बच्चे मैं तुमसे जानना चाहती हूं तुम्हें साहस कहां से लाया इसके बाद भी

तुम्हारे अपनों ने भी कभी तुम्हारी अहमियत को नहीं समझा जब जब तुमने सत्य और धर्म को चुना है तब हमारे

अपनों से दूर होने लगा है और अनेकों अनेक चुनौतियों का सामना तुम करते चले गए कभी गिरे तो कभी समय कभी बहुत मुस्कुराया तो कभी गाने के पीछे आंसुओं को छुपा लिया पर तुम मुझसे तो कभी भी नहीं मुझे भी

तुम्हारा दर्द महसूस होता है मेरे बच्चे तुम्हारे सीने में जो छुपा दर्द है और जो प्रेम है वह दोनों ही में महसूस करती हूं आज मैं हां देना चाहती हूं कि तुम सफल हो गए तुम्हारी जीत लाख चुनौतियां तुम्हारे समक्ष क्यों ना आखरी हो

जाए परंतु तुम उन सब को गिरते हुए सफल होंगे मेरे बच्चे तुम्हें शीघ्र ही अत्यंत सुखात समाचार मिलेगा परम सौभाग्य प्रारंभ हो जाएगा मेरे बच्चे केवल एक बात समझ रखना मेरे साथ जो कुछ भी हुआ है कोई हद तक लाने

के लिए बेहद आवश्यक इसलिए कभी खुद पर संदेह मत करना मेरे बच्चे तुम्हें जिन लोगों ने पीड़ा दी है को धन्यवाद कहो अपने हृदय से क्षमा कर दो तुम्हें तकलीफ देने वाले को सजा अवश्य मिलेगी मैं तुम्हें किराती नहीं

तो आज तुम आकाश में विचरण करने के काबिल कैसे होते हैं मेरे कई बार चुनौतियां पुण्य आत्माओं के लिए वरदान सिद्ध हो जाती हैं क्योंकि तुम भी पुण्य आत्माओं में से एक हो मेरे बच्चे तुम्हारे जीवन में सब कुछ

अचानक बदलने वाला है तुम्हारी बरसों की मनोकामना है पूरी होने वाली है पूरा होने की उम्मीद तुम छोड़ चुके थे बहुत चल सच होने वाला है तुम्हारा जीवन इस आने वाले बदलाव थे देश के लिए बदल जाएगा मेरे बच्चे यह

सब कुछ एक नहीं हुआ है तुम स्वयं नहीं जानते कि तुम्हारी प्रार्थना में कितनी शक्ति है तुम्हारा प्रेम भाव कितना प्रभावशाली है इसी सच्चाई और प्रेम

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