4 सच्चाई जिन्हें मां काली अपने भक्तों के सामने जरूर लातीं हैं - Kabrau Mogal Dham

4 सच्चाई जिन्हें मां काली अपने भक्तों के सामने जरूर लातीं हैं

ओम नमः

शिवाय जय माता महाकाली

की

मित्रों मैं आचार्य चंद

प्रकाश परम कल्याण साधन य चैनल में आप सभी

का हार्दिक स्वागत करता

हूं हमारी आज की चर्चा का विषय है कि जो

भी

लोग माता महाकाली की सेवा करते हैं भक्ति

करते हैं उनकी पूजा उपासना आराधना करते

हैं तो माता

महाकाली अपने भक्तों

को इन चार सत्यों से जरूर अवगत कराती है

चार सत्य कौन से

हैं वीडियो में मैं आगे

बताऊंगा वीडियो बहुत ही

इनफॉर्मेटिव और उपयोगी साबित होगा

इसलिए आप हमारे साथ अंत तक बने

रहे ताकि आप इस विषय को बारीकी से समझ सके

तो मित्रों यह संसार क्या

है संसार ऊर्जा का सघन आच्छादन है यह

संसार मात्र ऊर्जा है एनर्जी है जो हमारे

चारों तरफ

हमारे मनीषियों ने हमारे ऋषियों मुनियों

ने विभिन्न देवी देवताओं के नाम से इंगित

किया

है

उसमें हम बात करते

हैं शक्ति और शिव

की भगवान शिव इस संसार

के आदि गुरु

है सारा ज्ञान सारी

शक्तियां भगवान शिव समाई हुई है क्योंकि

वह शक्ति के देवता

है और माता महाकाली उनकी प्रमुख शक्ति

है ठीक

है इन माता

महाकाली की जो भी साधना करता है जो भी

व्यक्ति महाकाली को मां मानते हुए एक चीज

ध्यान रखना हमेशा जो मैं कहने जा रहा हूं

उस चीज को विशेष रूप से नोट कर लेना

कि शक्ति की उपासना कभी शक्ति के रूप में

मत

करना वरना पछताना पड़ता है कुछ ही विले

साधक ऐसे हैं जो शक्ति को शक्ति के रूप

में प्राप्त कर पाते हैं वरना शक्ति को तो

सिर्फ शक्तिमान ही संभाल सकते हैं भगवान

शिव ही संभाल सकते हैं बाकी संसार में कोई

ऐसा नहीं है जो शक्ति को संभाल सके इसलिए

जब भी आप साधना करें

तो माता काली की जब साधना करें तो विशेष

ध्यान रखें उन्हें मां के रूप में

ही उनसे माता का ही रिश्ता बना कर के आगे

चले तब व अपने स में वात्सल्य रूप में

आपको वह सब कुछ प्रदान करेंगी जो एक बच्चे

को

चाहिए आप बच्चा बनिए उनके सामने आप साधक

मत

बनिए बनने में बहुत विघ्न आएंगे और माता

महाकाली का जो स्वरूप है व बहुत ही भयंकर

है उसके तेज को बर्दास्त कर पाना आज के

मानव के लिए असंभव

है तो मित्रों माता महाकाली को आप मां के

रूप में ही

पूजिए यदि आपने अपना पूर्ण समर्पण जिस

तरीके से बच्चे का पूर्ण समर्पण

अपनी मां के प्रति होता है ठीक उसी तरीके

का समर्पण यदि आपने माता महाकाली के समक्ष

कर दिया तो माता महाकाली कभी

भी अपने भक्त की रक्षा करने में उसे ज्ञान

देने में उसका मार्गदर्शन करने में पीछे

नहीं रहती और एक

बात माता कभी बच्चे का अनिष्ट नहीं कर

सकती अनिष्ट होते हुए नहीं देख सकती

कुपुत्रो जाय

कोज माता कुमाता न भवती पुत्र तो कुपुत्र

हो सकता है परंतु माता कभी कुमाता नहीं

होती संसार में ऐसी कोई मां नहीं है जिसने

अपने बच्चे का अहित किया हो खुद परेशानी

उठाई होगी लेकिन बच्चे का कभी अहित नहीं

किया तो आइए

बात करते हैं उन चार महा सत्यों की जिनकी

जानकारी माता महाकाली अपने भक्त को देती

हैं जरूर देती

हैं बताने से पहले मेरा एक निवेदन है यदि

आप इस चैनल पर पहली बार विजिट कर रहे हैं

तो कृपया चैनल को सब्सक्राइब करें और बेल

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ले ताकि आने वाली हर वीडियो का नोटिफिकेशन

आपको सबसे पहले प्राप्त हो हो

जाए तो पहला सत्य क्या है जिससे माता

महाकाली अपने भक्त को अवगत कराती हैं

सच्चाई सामने रखती हैं वह है गुरु रूप

में माता महाकाली की जब कोई पूजा करता है

उपासना करता है तो माता

महाकाली अपने भक्त का मार्गदर्शन करती हैं

गुरु के रूप में चाहे आपने उन्हें गुरु

माना हो चाहे आपने ना माना हो चाहे आपके

गुरु सांसारिक रूप से कोई हो या ना हो कोई

फर्क नहीं पड़ता माता महाकाली अपने भक्त

का अपने साधक का

मार्गदर्शन इस तरीके से करती हैं कि कहीं

कोई शक की गुंजाइश नहीं

रहती सपने के माध्यम से वह आपको सारे

सत्यों से अवगत कराती चली

जाएंगी क्योंकि हम उनके तेज को बर्दाश्त

कर पाने असमर्थ है इसलिए वह स्वप्न के

माध्यम से हमें सारी बात बताती हैं ठीक है

अगला

पॉइंट दूसरा सत्य क्या है दूसरा सत्य है

अज्ञानता का

निवारण इस संसार में दुख के तीन कारण

है इ तीन कारणों से दुख व्यक्ति के ऊपर

आता है

पहला अज्ञान

दूसरा

अभाव तीसरा

अशक्त अज्ञान माने ज्ञान का ना होना अभाव

माने किसी चीज की कमी

होना धन की कमी

होना या अन्य पद की कमी होना नौकरी की कमी

होना तमाम समस्याएं हैं जो व्यक्ति के

सामने मोबाइल खड़ी रहती हैं उन सभी अभावों

की

पूर्ति माता महाकाली अज्ञान का निवारण

करके कर

देती अज्ञान हमारा सबसे पहला शत्रु है इस

पहले शत्रु पर बार करती है माता और आपको

ज्ञान का उजाला देती हैं आपको ज्ञान के

प्रकाश में यह अवगत कराती हैं कि यह भौतिक

संसार मतलब का है सिर्फ मतलब का यहां इस

संसार में अपना कोई नहीं है अगर कोई है तो

सिर्फ वो परमात्मा

है

जो यह कहता

है जो यह कहता है गोस्वामी जी ने रामायण

में लिखा है सब मम प्रियतम सब मम उपजा

सबसे अधिक मनुज मोय भाई भगवान कहते हैं

सभी मेरे प्यारे हैं सभी को मैंने पैदा

किया

है लेकिन उनमें भी मनुष्य मुझे सबसे

ज्यादा प्रिय

है तो हमारा कोई अपना है

जो पहले था अभी है बाद में भी रहेगा वो

सिर्फ

परमात्मा इस संसार में हम जो कुछ करने आए

हैं एक पार्ट प्ले करने आए एक नाटक का

पार्ट प्ले यहां कोई राजा का पार्ट कर रहा

है तो कोई रानी का कर रहा है कोई अमीर का

कर रहा है तो कोई गरीब का कर रहा है सब

अपना अपना पाट अदा कर रहे हैं य कोई किसी

का नहीं है इस अज्ञानता के पर्दे से माता

काली हमें बाहर निकाल देती है और हमारा

ध्यान हमारी भक्ति अपने माध्यम से

परमात्मा तक ले जाती

हैं ऐसी माता महाकाली के भक्त

का कोई कुछ बिगाड़ नहीं

सकता

क्योंकि कहा गया

है दुनिया से वो डरे जो काम करे चंडाल

का काल उसका क्या करे जो भक्त हो महाकाल

का और महाकाल की शक्ति

महाकाली ठीक है तो अज्ञानता का निवारण

दूसरा हुआ

तीसरा इस भौतिक संसार की असलियत हमारे

सामने रखते हैं

हमें बताते हैं वह कि तुम्हारे चारों तरफ

ऊर्जा का एक सगन आच्छादन है चारों तरफ

ऊर्जा स्याप है

आप जब भक्ति करते हैं माता की तो हमारी

ऊर्जा माता की ऊर्जा

से प्रभावित होती है और माता की ऊर्जा उस

परम सत्य की ऊर्जा से प्रभावित है लिजा

हमारी सीधी पहुंच परमात्मा तक हो जाती है

माध्यम मा जरूर बनती है बीच में क्योंकि

किसी

भी भक्त की किसी भी साधक की सामर्थ्य नहीं

है कि परमात्मा से सीधे मिल

सके उसके लिए प्रकृति का जो आक्षा दन है

उसे पार करना ही होगा प्रकृति मींस एनर्जी

यूनिवर्स इस यूनिवर्स को पार करके ही हम

परमात्मा तक पहुंच सकते हैं ठीक है तो

क्या होता है जब हमारी शक् हमारी ऊर्जा जो

हमने पूजा साधना मंत्र जाप ध्यान धारणा

आदि से अर्जित की है उससे हमारा जो प्रभा

मंडल है आपने देखा होगा कि लोगों के लोगों

के न देवताओं के चारों तरफ एक प्रकाश का

घेरा दिखाई देता है वह क्या है व घेरा

सबके पास है हर व्यक्ति का एक ओरा होता है

एक प्रभ मंडल होता है तो जो भक्त होते हैं

उनका प्रभा मंडल इतना सशक्त हो जाता है

इतना सशक्त हो जाता है कि कोई भी नेगेटिव

पावर के ऊपर वार नहीं कर सकती उसको भेद

नहीं सकती ऐसा सुरक्षा का कवच मां हमें

प्रदान करती हैं हमारे जो भी हम नहीं

जानते हैं लोग हमारे बारे में क्या सोच

रहे

हैं मां जानती है कि कौन क्या सोच रहा है

मेरे भक्त के

प्रति और वह बता देती हैं कि तेरे प्रति

यह लोग ऐसा सोच रहे हैं तू चिंता मत कर

मैं तेरे साथ हूं

और वह उन बुरे लोगों को हमसे दूर कर देती

हैं दूर करती चली जाती

हैं माता काली का

भक्त उसका

शत्रु उसका कुछ नहीं बिगाड़ पाता

है यदि वह उसे कष्ट देता है तो माता उसको

छोड़ती नहीं

है क्योंकि तब उनका रो रूप सामने आता

है जिसका सामना कोई नहीं कर सकता ठीक है

यह कांसेप्ट क्लियर

हुआ दूसरी बात जो अच्छे लोग हैं जो हमारे

प्रति अच्छा सोचते हैं भक्त के प्रति

अच्छा सोचते हैं माता उन्हें पास मिलाती

है उनसे हमारा संबंध स्थापित कराती है

हमसे जोड़ती

हैं यह अदृश्य

सहायता जिसे हम नहीं जान पाते माता

करती ठीक है

आगे जीवन लक्ष्य की

प्राप्ति मानव का जीवन का उद्देश्य क्या

है जन्म लेने का कि संसार में हम क्यों आए

कहां से आए कहां जाना है कब जाना है क्या

हमें पता है कुछ नहीं पता

है हम परमात्मा के अंश है इस संसार में

अपने कर्मों का भोग देने के लिए आए हैं

इसीलिए इस संसार में कोई सुखी है कोई दुखी

है कोई गरीब है कोई अमीर है कोई बीमार है

कोई तंदुरुस्त

है यह विभिन्न रूप जो हमें एक दूसरे के

देखने को मिलते हैं यह सब हमारे कर्मों के

ही फल है हम अपने कर्मों का ही फल भोगने

के लिए इस संसार में आए बाकी हमारा यहां

कोई भी उद्देश्य नहीं है आने का क्यों हम

परमात्मा के राजकुमार हैं प्रिंस ऑ

गड वो यहां क्या करने

आएगा लेकिन भूल बस हमने कुछ गलतियां कर दी

जिन गलतियों का का प्रायश्चित करने के लिए

हमें यहां भेजा गया

है भगवान श्री राम अपने अनुज लक्ष्मण जी

को समझाते हुए कहते

हैं कि को काह ना सुख दुख कर

दाता निज कृत कर्म भोग सब भ्रा

हे भाई लक्ष्मण इस संसार में कोई किसी को

कष्ट नहीं देता कोई किसी को दुख दे भी

नहीं

सकता यह जो कुछ हमें दिखाई देता

है दुख देते हुए सुख देते हुए यह सब हमारे

अपने किए हुए अगले या पिछले कर्मों का

हिसाब

है

तो इस संसार में जो हमारे संबंध है जो

हमारे रिश्तेदार

हैं जो हमारी पत्नी है बच्चे हैं यह सब

अपना अपना हिसाब लेने के लिए या अपना अपना

हिसाब देने के

लिए हमारे साथ संबंध में जुड़े हुए हैं

यही संसार की असलियत है माता कहती है कि

मार इनको

ला कर्तव्य का पालन कर ऐसा नहीं है कि जो

जो जिनका जिनकी परवरिश तुझे करना है तो

कर्तव्य का पालन करते हुए कर इनमें अशक्त

मत हो इनकी मोह माया में मत पड़ और चल

मेरे साथ मैं झे तेरे परमात्मा से

मिलाऊंगा तेरे पिता से

मिलाऊंगी तो व शक्ति हमें हमारे जीवन

लक्ष्य को प्राप्त करा देती

है आशा करता हूं कि अगर मैं ज्यादा

बोलूंगा तो वीडि लंबा हो जाएगा

तो मैं बात अपनी यही समाप्त करता

हूं उम्मीद है कि दी गई जानकारी आपके लिए

उपयोगी होगी अगर आपको अच्छी लगी हो तो इस

वीडियो को अधिक से अधिक लाइक करें और अपने

मित्रों में अधिक से अधिक शेयर करें बाकी

सब आप सभी का बाबा

भोलेनाथ और माता

महाकाली आपकी सुरक्षा करें

आपको आध्यात्मिक और भौतिक दृष्टि से

संपन्न

बनाए वीडियो देखने के लिए मैं आपका

धन्यवाद करता हूं और आपसे विदा लेता हूं

ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नम

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