25 अप्रैल से पहले तुम्हारा यह जानना बहुत जरूरी है! इग्नोर ना करे - Kabrau Mogal Dham

25 अप्रैल से पहले तुम्हारा यह जानना बहुत जरूरी है! इग्नोर ना करे

मेरे प्रिय बच्चे अब तुम्हारी जीत का

बिगुल बच चुका है यह सखना है एक नई लहला

हट का मेरे प्रिय कुछ ऐसा है जो अब तक

तुम्हारी आंखों से ओझल था जिसकी भनक भी

तुम्हें नहीं लग रही

थी लेकिन वह गुप्त रूप से घटित हो रहा था

यह रचाया गया था तुम्हारी सोच और बुद्धि

से भी बिल्कुल अलग किसी ऐसी जहां पर जो

तुम्हारी पहुंच से परे

था लेकिन जिसका प्रभाव तुम्हारे जीवन में

विशेष रूप से पड़ने वा है मेरे प्रिय

बच्चे एक अंधी चल पड़ी है और इस आंधी में

अब बहुत से लोगों का घर उजड़ने वाला

है बहुत से जीवन तबाह होने को है बहुत से

लोग विवश होने को है अपनी नाकामयाब का

अपनी पराजय का वह पश्चाताप करने वाले हैं

और अपने कर्मों के भुगतान के लिए अब

उन्हें स्वयं ही जिम्मेदारी उठानी

पड़ेगी अब एक नए युग की शुरुआत होगी एक

ऐसा युग जहां कर्म सबसे प्रधान होगा जहां

ना भक्ति श्रेष्ठ होगी ना योग्यता ना ही

किसी तरह की श्रद्धा

आस्था वास्तव में यहां कुछ श्रेष्ठ है तो

वह मनुष्य का विश्वास उसका सदा पन उसकी

मनुष्यता और उसके कर्म यह प्रधानता का युग

है और तुम इस युग में प्रवेश कर चुके

हो मेरे प्रिय विनाश की इस घड़ी में केवल

कुछ ही लोग मुस्कुरा पाएंगे और उनके साथ

मुस्कुराएंगे वह सारे लोग जो उनसे जुड़े

हुए हैं जो उससे प्रेम करते हैं तुम रा भी

नाम उसी सूची में शामिल है जो मुस्कुराने

की श्रेणी में

है मेरे प्रिय बच्चे विनाश की इस घड़ी में

जहां चारों तरफ लोग कोलाहल में डूबे होंगे

जहां चारों तरफ लोग अपनी बेचैनी का अपनी

पराजय का मातम मना रहे

होंगे तुम खुशियों में जूम उठोगे तुम जश्न

के माहौल में जूम उठोगे और यह तुम्हारे

साथ घटी होगा इसे कोई रोक नहीं सकता इसे

कोई टाल नहीं सकता यह विडंबना है

कि इस समय जो भी नहीं उतरा यज्ञ इसी संसार

में फंसकर रहेगा और जो वास्तव में भीतर

उतर गया वह तर

जाएगा तुम भी इस भाव सागर से ने को तैयार

हो चले हो तुम पर मेरी कृपा बरस चुकी है

और यही कारण

है कि आज तुम्हें यह विशेष संदेश हर हाल

में पूरा अंत तक सुनना है चाहे परिस्थिति

कोई भी हो चाहे यह विषमता का युग हो चाहे

समता का लेकिन तुम्हें इस समय को गवा नहीं

है इसे अपने हाथ से जाने नहीं देना है

किसी भी हाल में तुम्हें इसे बीच में

छोड़कर जाने की भूल नहीं करनी

है मेरे प्रिय तुम्हारे लिए कई संदेश भेजे

गए कुछ संकेत तुम समझ पाए और कुछ तुम नहीं

समझ पाए लेकिन एक चीज जो अभी तक तुम समझ

नहीं पा रहे हो वह मैं तुमसे निरंतर कह

रहा

हूं मेरे प्रिय बच्चे तुम्हें स्वयं को

महसूस करना है और अभी तक तुम इसे वाक्य की

श्रेणी में ही रख पाए हो अभी तक तुम

शाब्दिक अर्थों में ही इसे देख रहे हो

तुम इच्छा की कामना करकर जब कोई मनुष्य

कोई कार्य करता है जब मनुष्य चाहे कितने

ही सत्कर्म कर ले लेकिन इस उद्देश्य से

करता

है कि बदले में उसे कुछ प्राप्त होगा तो

उसके सभी सत्कर्म धूमिल हो जाते हैं उसकी

श्रेष्ठता धूमिल हो जाती

है फिर वह महान नहीं हो पाता और वास्तव

में वह रह जाता है ऐसा साधारण मनुष्य

जिसका जीवन किसी आम जन के जीवन से बिल्कुल

भी अलग नहीं

है मैं नहीं चाहता कि तुम कभी उन आधार

मनुष्यों की श्रेणी में आओ तुम विशेष हो

तुम्हारा स्थान विशेष है तुम्हें विशेष

होने के लिए ही बनाया गया है और अपनी

विशेषता को यूं जाया मत जाने

दो तुम्हारी विशेषता महत्त्वपूर्ण है

तुम्हारी विशेषता के पीछे कई रहस्य छुपे

हैं इसे यूं ही बर्बाद ना होने दो मेरे

प्रिय बच्चे जो तुम्हें बताया जा रहा है

जो तुम्हें समझाया जा रहा है वह तार्किक

है इसके तर्क में

उतरो प्रिय बच्चे तर्क और कुतर्क में जरा

सा ही अंतर होता है तर्क कब कुतर्क बन

जाता है यह पता नहीं चलता और तब मनुष्य के

श्रद्धा को चोट पहुंचती

है मैं नहीं चाहता कि तुम उस श्रेणी में

कभी आओ तुम जो की जीत को अपनी ओर

धीरे-धीरे आकर्षित कर रहे हो इसे पूर्णता

से स्वीकार कर

लो इसे पूर्णता से अपनी ओर आकर्षित कर लो

इसकी चाल को धीमा मत होने दो इसे समान वेग

समान गति से बहने दो इसी में महानता

है प्रिय बच्चे जब तुम्हें कुछ प्रदान

किया जा रहा है तो किसी कारण से ही किया

जा रहा है यहां कुछ भी निरुद्देश नहीं है

यहां कुछ भी यूं ही घटित नहीं हो रहा

है और जब तुम योजनाएं बनाते हो जब तुम

भविष्य की चिंता करते हो तब तुम मेरी

योजनाओं पर मेरे परवाह करने की शैली पर

प्रश्न चिन्ह लगा रहे होते

हो और यह प्रश्न चिन्ह बड़ा ही विषत होता

है विभिन्न प्रकार के नकारात्मक तत्त्वों

से दूषित होता है इसलिए तुम्हें अपने आप

को श्रद्धा की सर्वोच्च क्म श्रेणी में

लाना

होगा वहां जहां कोई और नहीं पहुंचता वहां

जहां तुम्हारी शैली ही सर्वश्रेष्ठ हो

जाती है वहां जहां तुम ही महान हो जाते

हो मेरे प्रिय बच्चे कभी-कभी मनुष्य को

विभिन्न प्रकार की समस्याओं का सा करना ही

पड़ता है फिर चाहे वह कितना ही बड़ा

आस्तिक

हो फिर चाहे वह कितनी ही अना शक्ति क्यों

ना रखता हो लेकिन ऐसी परिस्थिति में भी

उसे इसे विषमता के रूप में नहीं देखना

चाहिए उसे इसे चुनौतियों के रूप में नहीं

लेना

चाहिए बल्कि ईश्वर की मर्जी समझकर उसका

सामना करना चाहिए स्वीकार करने की स्थिति

में आना चाहिए तुम्हारे भीतर जो चक्र चल

रहे हैं तुम उसे

देखो और यह संचार तुम्हारे लिए उपयोगी है

यह संचार तुम्हारे मस्तिष्क को प्रभावित

करता है यह तुम्हें उस अंधेरे से बचाता

है जिस अंधेरे में जाने के बाद मनुष्य ना

तो लोभ ना ही लालच ना ही कामना और ना ही

वासना के जंजाल से मुक्ति पा सकता है यह

माया का एक भ्रम

है एक ऐसा जाल जिससे निकलना सबके बस की

बात नहीं कि तुम्हें इससे निकालने का

निरंतर प्रयत्न किए जा रहे हो तुम इन प्र

को बर्बाद ना होने

दो तुम इन प्रयत्नों को दो मिल ना होने दो

जब मैं तुमसे कह रहा हूं कि तुम्हारी जीत

विनाश के बावजूद लिखी है तो निश्चित तौर

पर तुम्हारी जीत लिखी है यहां पर विनाश की

जब मैं बात कर रहा हूं तो मैं तुम्हें यह

स्पष्टता सुनिश्चित कर देना चाहता हूं कि

विनाश उन मनुष्यों का होगा जो अपने कर्मों

को सही नहीं रख पाते

हैं मनुष्य जब विचार से बुरे कर्म करता है

वह भी बुरे ही कर्म होते हैं लेकिन जब

उन्हें वह कृत्यों में शामिल कर लेता है

जब वह उन्हें षड्यंत्र में शामिल कर लेता

है और इसमें किसी को अपना साथी बना लेता

है तब वह सबसे बड़े पापों में से एक पाप

कर रहा होता है और ऐसा करने से उसे रोकने

के

लिए विभिन्न प्रकार के फरिश्ते इस धरा पर

आते हैं चाहे फरिश्ते नकारात्मक हो या

सकारात्मक वह सर्वप्रथम उसे रोकने का ही

प्रयत्न करते

हैं और बाद में उसकी िया शैली के अनुरूप

उसकी सहायता करते हैं मैं नहीं चाहता कि

तुम्हारे जीवन में ऐसा कुछ भी हो मैं नहीं

चाहता कि तुम कभी भी

हारो तुम्हारी कभी भी पराजय हो और कोई ऐसा

मौका मिले जिसमें तुम्हारी गलती गिना ही

जा सके प्रिय बच्चे चाहे जगत की बात हो

चाहे अलाव की जगत की बात

हो मैं तुम्हें हर जगह जीतते हुए ही देखना

चाहता हूं मैं हर जगह तुम्हारी विजय फतह

को फहराते हुए ही देखना चाहता हूं मैं

चाहता हूं कि तुम्हारी जीत हर हाल में

हो मेरे प्रिय बचपन पन से ही तुम शक्ति की

कामना करते आए हो शक्ति किसी को दबाने के

लिए नहीं बल्कि स्वयं को श्रेष्ठ बनाने के

लिए

है शक्ति किसी का शोषण करने के लिए नहीं

बल्कि लोगों का उद्धार करने के लिए शक्ति

किसी को अहंकार के भली भूत होकर नीचा

दिखाने के लिए

नहीं अपितु शक्ति तुम्हें इसलिए चाहिए थी

सदा से ही ताकि तुम इस शक्ति के द्वारा

लोगों में अपनी एक पहचान बना सको ताकि तुम

लोगों का उद्धार भी कर

सको और तुम्हारे अस्तित्व को जरा भी खतरा

मालूम ना पड़े मैं जानता हूं कि इस कलयुगी

समाज में तुम चाहते हो कि तुम्हारा एक

वर्चस्व बना

रहे तुम चाहते हो कि तुम्हारा वर्चस्व ऐसा

हो कि ना तुम्हें कभी धन की कमी हो नहीं

कोई दुख तुम इसका दुरुपयोग करना नहीं

चाहते

किंतु कुछ परिस्थितियों में तुम इसके

दुरुपयोग की भी कामना कर लेते हो कई बार

तुम दूसरों की हानि का विचार उत्पन्न कर

लेते

हो जबकि तुम मूल रूप से ऐसे नहीं हो जबकि

तुम मूल रूप से कभी नहीं चाहते कि किसी को

कोई भी हानि हो कि जब तुम्हारे अहम को ठेस

पहुंचती

है जब तुम्हें तकलीफ में डाला जाता है जब

कोई तुम्हारा बुरा करने का विचार करता है

तब कई बार तुम्हारे मन में यह उत्पन्न हो

जाती है कि तुम उसका कुछ हानि कर

दो जिससे उसे यह सबक मिल जाए कि तुम कितने

श्रेष्ठ हो जिससे उसे यह सबक मिल जाए कि

तुम्हारे पास कितनी ताकत है कितनी शक्ति

है मैं जानता हूं कि तुम्हारा हृदय बहुत

कोमल है स्वच्छ है लेकिन यह समाज इतना

हिंसात्मक हो चला है कि तुम चाकर भी अपने

इस भावना को नियंत्रित नहीं कर

पाते मेरे प्रिय तुम एक योग्य मनुष्य हो

तुम श्रेष्ठ हो और अब बहुत तेजी से समय उस

ओर बढ़ रहा है जब तुम्हारे जीवन को जीत की

खुशी से भर दिया

जाए लेकिन कुछ ऐसी कमियां हैं जिनसे

तुम्हें पार पाना है और यह कमी ऐसा नहीं

है कि तुम्हारे जीत को रोक रही है वास्तव

में यह उस सूक्ष्म धागे के उस सूक्ष्म

झीली के समान

है जो एक पल में टूट सकता है जिसके पार

तुम्हारे जीत बाहे खोलकर तुम्हारा इंतजार

कर रही है जिसके पार भव्यता तुम्हारे

स्वागत में खड़ी

है जिसके पार बहुत से अनोखे देवदूत

तुम्हारी राह तक रही है लेकिन अभी इन

क्षणों में यह झिल्ली पार करना तुम्हारे

लिए सुगम प्रतीत नहीं हो

रहा और ऐसा इसलिए क्योंकि तुम्हारा अपने

ऊपर पूर्ण विश्वास बन नहीं पा रहा जिस

क्षण तुम्हारा अपने ऊपर पूर्ण विश्वास बन

जाएगा उसी क्षण से कोई तुम्हें हराने में

सक्षम ना हो सकेगा क्योंकि तु तुम्हारी

योग्यता पर कभी प्रश्न चिन्ह रहा ही नहीं

है प्रश्न चिन्ह तुम्हारी मानसिकता पर रहा

है तुम्हारे मनोभाव पर रहा है तुम्हारा

मनोभाव कभी विषाक्त ना हो निरंतर इसके लिए

प्रयत्न किए गए हैं इसलिए मेरे प्रिय मैं

चाहता हूं कि तुम पुनः मूल्यांकन

करो अपने कर्मों का अपने आप का यह देखो कि

आखिर क्या है जो तुम्हें आगे बढ़ने से रोक

रहा है जबकि तुम्हारे जीवन में जीत को

निरंतर भेजा जा रहा है फिर भी ऐसी कौन सी

बाधाएं

हैं जो तुम्हें आगे बढ़ने नहीं दे रही हैं

जबकि तुम योग्य हो मैं फिर से तुम्हें यह

बता रहा हूं कि तुम योग्य हो तुम्हें कमी

नहीं है लेकिन तुम्हारी शिकायत करने की

कुछ भावना

है एक झिल्ली जो तुम्हें रोक रही है

तुम्हें इसके पार जाना है यह समय निकल रहा

है अब इस समय को बर्बाद ना होने दो पुष्प

की तरह खिल

उठो मेरे प्रिय बच्चे अपने प्रेम को स्वय

स्वयं से दूर मत होने दो वह तुम्हारे लिए

आवश्यक है वह तुम्हारे लिए निरंतर तड़पा

है तुम भी सदा प्रेम के लिए तरसे

हो इसलिए जो मिल रहा है उसका मूल्यांकन

करो कि तुम उसे किस वजह से स्वयं से दूर

होने दे रहे हो तुम्हें उसे स्वयं से दूर

नहीं होने देना

चाहिए मेरे प्रिय तुम महान हो तुम महानता

के लिए आए हो लेकिन इन चीजों का मूल्य

क्या है और कितना है यह तुम्हें जानना

होगा कौन तुम्हारे अपने हैं और कौन

तुम्हारे पराए

हैं किसको तुम्हें प्रेम देना है और किसको

उतना प्रेम नहीं देना है तुम्हें इसका

विचार करना ही होगा जो अपने हैं उन्हें

अनुदान में मिली कोई वस्तु ना

समझो जो अपने हैं उन्हें भरपूर मात्रा में

प्रेम दो उनकी कुछ बातों को नजरअंदाज भी

करो तनिक गंभीर होने के बजाय जरा सा

मासूमियत से जीवन

जियो तुम मासूम हो फिर मासूमियत से जीवन

जीना क्यों त्याग रहे हो इस हिंसात्मक

समाज के वश में आकर तुम अपने स्वभाव में

परिवर्तन मत

लाओ तुम सरल हो सहज हो अपने जीवन को अपने

जीवन शैली को तुम सरल और सहज ही रहने दो

किसी के दबाव में आकर किसी के प्रभाव में

आकर स्वयं को बदलने का प्रयास ना

करो तुम्हारा चरित्र श्रेष्ठ है उसे ऐसे

ही रहने दो अपने जीवन शैली को बदलने का

प्रयत्न तो तुम कर सकते हो किंतु अपने

स्वभाव को बदलना तुम रे लिए बिल्कुल भी

अच्छा नहीं है मेरे प्रिय जो तुम्हारे लिए

श्रेष्ठ कर है केवल उसका विचार करो फिर

देखो तुम्हारा यह जीवन खिल उठेगा तुम्हारे

इस जीवन से ऐसी सुगंध निकलेगी ऐसा प्रकाश

बरसेगा और ऐसी वर्षा होगी कि तुम कल्पना

भी नहीं कर सकते और फिर जीत की लहर चारों

ओर फैल जाएगी एक आंधी चलेगी एक लू बहेगी

एक ऐसी

आंधी जिसके तले हर कोई दब जाएगा जिसकी

ज्वाला में आकर हर कोई तुम्हारा ही गुणगान

करेगा इसलिए मेरे प्रिय तुम्हें अपने

प्रेम को समझना

होगा अपने साथी के महत्व को समझना होगा

परिवार की वास्तविकता को समझना होगा

मित्रों की शालीनता को समझना

होगा और जीवन में कौन महत्त्वपूर्ण है कौन

नहीं यह याद रखना होगा मैं यह नहीं कह रहा

कि लोगों से केवल फायदे के लिए संबंध

रखो लेकिन कोई तुमसे फायदा ना उठा पाए इस

बात का विशेष ध्यान रखो अन्यथा इस संसार

में लोग तुमसे फायदा उठाने के लिए किसी भी

हद तक गुजर सकते हैं सचेत रहना

होगा और एक बात सदैव याद रखो कि कोई

तुम्हारा साथ दे या ना दे मैं हर हाल में

तुम्हारे साथ रहूंगा मेरा आशीर्वाद हर हाल

में तुम्हारे साथ

रहेगा मेरे प्रिय तक्षण संख्या

लिखकर जीत की पुष्टि करो मैं जीत

रहा हूं इस भावना को लिखकर जीव में आगे

बढ़ो और सदैव याद

रखना तुम इस संसार में जो बाटो के बदले

में वही प्राप्त करोगे धन के बदले ढेर

सारा धन प्रेम के बदले और भी ज्यादा प्रेम

ईर्षा के बदले और भी ज्यादा

ईर्ष्या सकारात्मकता के बदले और भी ज्यादा

सकारात्मकता तुम्हें हासिल होगी इसलिए तुम

अपने लिए अपने जीवन में जो चाहते हो वह

बांटना प्रारंभ

करो और सब कुछ मेरे ऊपर छोड़ दो परमात्मा

उसका साथ अवश्य देता है जो उस पर विश्वास

करके और अपना सब कुछ समर्पण करके आगे बढ़

जाता

है मेरे प्रिय अपने जीत की पुष्टि अवश्य

कर दो यह तुम्हारे लिए बेहद आवश्यक है अभी

तुम्हें इसकी महत्ता समझ नहीं आ रही लेकिन

धीरे-धीरे तुम इसकी महत्ता को समझ

जाओगे और तब तुम्हें अपने आप पर फक्र

महसूस होगा तुम स्वयं पर गर्व महसूस कर

पाओगे इसलिए मेरे प्रिय इसी क्षण अपने जीत

की पुष्टि करो और मेरे आशीर्वाद को

स्वीकार

करो मेरा आशीर्वाद हर पल तुम्हारे साथ है

मेरे आने वाले संदेशों की प्रतीक्षा अवश्य

करना यह तुम्हारे लिए आवश्यक है इससे दूर

ना होना मेरे

प्रिय मैं पुनः आऊंगा तुम्हारा मार्ग

दर्शन कर तुम्हें जीत की राह पर आगे

बढ़ाने के लिए सदा सुखी रहो तुम्हारा

कल्याण होगा

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