22:22 ?️ मां कालरात्रि ?️ में विवश हो गई तुम्हारे इस स्वभाव के कारण ?️ #shivshakti |#aadishakti - Kabrau Mogal Dham

22:22 ?️ मां कालरात्रि ?️ में विवश हो गई तुम्हारे इस स्वभाव के कारण ?️ #shivshakti |#aadishakti

[संगीत]

हूं मैं उनका हर कहना मानती हूं देर से ही

सही उनके हर कार्य को पूर्ण करती हूं

लेकिन मैं उनके द्वारा कहीं बाध्य नहीं

होती क्योंकि मुझे बाध्य करना केवल कुछ ही

भक्तों के बस में है मेरे बच्चे अब मेरी

बात को बहुत ध्यान से सुनकर

[संगीत]

समझना तुम्हें समझ में आएगा कि मैं क्या

बोल रही हूं और किसलिए बोल रही हूं

क्योंकि तुम्हें भले ही बात सुनने में

साधारण लगे लेकिन बहुत बड़ी बात है यदि

तुमने इस बात को समझ लिया तो निश्चित ही

मैं तुम्हारे बस में

[संगीत]

रहूंगी उनके बस में कभी नहीं रहती जो केवल

मेरी पूजा करते हैं और मैं उनकी इच्छा

पूर्ण कर देती हूं क्योंकि आपके पूजा के

बदले मुझसे जो चाहे हासिल कर लेते हैं और

जब इच्छा पूर्ण हो जाती है तो उनके बंधन

से मुक्त हो जाती

[संगीत]

हूं क्योंकि मेरे लिए यह का सरल होता है

यदि कुछ कठिन होता है वह व्यक्ति जो मेरी

पूजा करता है वह परेशानियों को झेलने के

बाद भी मुझसे कुछ मांगता नहीं ना किसी के

सामने हाथ फैलाता है वह ऐसा व्यक्ति जो

निस्वार्थ भावना से मेरी पूजा करता

[संगीत]

है उसकी कोई इच्छा ही ना हो मांगने की

उनके पास इतना ज्ञान हो वह सभी ज्ञान से

परिपूर्ण होगा मैं उसे देख रही होती हूं

उसे समझ रही होती हूं उनकी इच्छाओं को

जानती हूं उनके जीवन में क्या अधूरा है वह

सब मुझे ज्ञात होता

है और मैं उसे वह सब प्राप्त करा देती हूं

इस बात को जानते हुए वह केवल मेरी आस्था

में लीन रहता है और तुमने मुझे ऐसा करके

मुझे विवश कर दिया है कि मैं तुम्हारी हर

इच्छा को पूरी करू क्योंकि तुम मुझे यह

कार्य से बाध्य कर चुके

[संगीत]

हो और वह

तुम मुझे अपनी मां में देखते हो कहने का

अर्थ यह है कि जब भी तुम अपनी मां के करीब

होते हो तुम्हें ऐसा आभास होता है कि मैं

ही तुम्हारे नजदीक हूं मेरी सभी शक्तियां

तुम्हारी जन्म देने वाली मां में विराजमान

[संगीत]

है तुम ऐसा आभास करते हुए उनसे प्रेम से

बात करते हुए उनकी हर आज्ञा का पालन करते

हुए हर पल मुझे महसूस करते हो यह बात सच

है मेरे बच्चे की मैं और तुम्हारी मां भी

दोनों तुम्हारी मां

[संगीत]

है लेकिन मुझे इस बात से तुम पर विश्वास

है मेरे बच्चे यह बात सच है कि मैंने

तुम्हें इस धरती पर भेजा है लेकिन जिस मां

के द्वारा तुम धरती पर आए हो वह मां मुझसे

भी ज्यादा महान और मुझसे भी ज्यादा

तुम्हारे लिए पूजनीय योग

[संगीत]

है क्योंकि मैंने तुम्हें केवल तुम्हें

भेजा है लेकिन तुम्हारे लिए सभी कष्टों को

उन्हीं ने झेला है और जो किसी के लिए कष्ट

झेल है बहुत महान व्यक्ति होता है इसलिए

तुम्हारे जीवन में उनका महत्व बहुत बड़ा

[संगीत]

है और तुम्हारा इस प्रकार से उन पर

विश्वास करना उनको पूजने के समान उनके

प्रति हर कार्य के लिए तुम हमारे ह्रदय

में कभी ना नहीं होती है मेरे बच्चे जो

इंसान संसार के नियमों को लेकर चलता है और

अपने धर्म को निभाते हुए मेरी पूजा आराधना

करता है वह मुझे अपनी ओर आकर्षित कर लेता

[संगीत]

है मेरे बच्चे तुम्हें उस मार्ग को अपनाना

भी है और उस रास्ते पर चलना भी है क्योंकि

ज्यादा सोच विचार करोगे तो तुम कभी भी वह

प्राप्त नहीं कर पाओगे जिसकी तुम आश रखते

हो मेरे बच्चे तुम्हारी ऐसी बातों से बहुत

प्रसन्न

[संगीत]

हो तुमने मुझे बाध्य कर दिया है मैं

तुम्हारी हर इच्छा को पूर्ण करूंगी इसलिए

मैं भी वह करूंगी जो तुम जो चाहते हो मैं

जल्द से जल्द तुम्हारी इच्छा को पूरा

करूंगी मेरे बच्चे मैं तुमसे एक और बात

करना चाहती हूं क्या तुम्हारे पास मेरे

लिए वक्त है मुझसे बात करने के

[संगीत]

लिए क्योंकि जो जरूरी बात मैं तुमसे करना

चाहती हूं उसके लिए तुम्हारा मेरी बात को

ध्यान रूपक पूर्वक सुनना बहुत जरूरी है

इसके लिए तुम्हारे पास वक्त होना उतना ही

जरूरी है जिससे मेरी बताई हुई बातों पर

तुम ध्यान दे

[संगीत]

पाओ मेरे बच्चे जीवन में सुख भोगना सभी के

लिए लिए सौभाग्य की बात है मेरे बच्चे तुम

मुझसे बता सकते हो कि तुम्हें क्या तकलीफ

है क्या परेशानी है किस कारण से तुम

परेशान हो मुझसे जब चाहे एक निश्चित समय

पर बात कर सकते हो मैं तुम्हारे हर सवाल

का जवाब दूंगी और देता भी

[संगीत]

हूं परंतु तुम्हें उसको सुनना और समझना

होगा क्योंकि यह सत्य है मैं जवाब देती

हूं परंतु तुम समझ नहीं पाते हो तुम जब भी

मुझसे कोई सवाल करते हो उसका जवाब तुम्हें

तुम्हारे हृदय में विराजमान में स्वयं

देती हूं परंतु तुम हृदय की बात को सुनते

ही नहीं हो तुम बस सवाल पर सवाल करते रहते

हो

[संगीत]

दूसरा किसी भी कार्य में तुम कितने समक्ष

होंगे कहां तक जा पाओगे इसका जवाब भी मैं

तुम्हें देती हूं जब भी तुम किसी बड़े

कार्य या बड़े मुकाम पर पहुंचने की कोशिश

करते हो तुम बार-बार अपने मन में इस विचार

को लाओ कि मैं उस मुकाम पर पहुंच कर

रहूंगा उसके पश्चात तुम्हारे हृदय में यह

बात आती है कि यह कार्य पूरा नहीं हो

पाएगा तो निश्चित ही समझ लेना वह जवाब मैं

तुम्हें दे रही हूं तुम्हारा यह सोचना कि

मेरा कार्य कब पूरा होगा परंतु तुम्हें

अपनी प्रार्थना में यह शामिल करना

[संगीत]

चाहिए कि जो करो वह बहुत अच्छा करना भले

ही देर से हो परंतु परिणाम अच्छा और शुभ

होना चाहिए मेरे बच्चे मेरे एक सवाल का

जवाब दो क्या तुम मेरी पूजा स्वार्थ की

भावना से करते हो परंतु मैं तुमसे प्रेम

स्वार्थ से नहीं करती मेरा प्रेम

निस्वार्थ

[संगीत]

है तुम भी निस्वार्थ भावना से मुझसे प्रेम

करो तुम्हारा प्रेम मुझसे जुड़ा हुआ है

मेरे बच्चे तो कई ऐसे हैं जो किसी काम को

पूर्ण होने में विलम होने पर क्रोध में

मेरी पूजा करना ही छोड़ देते हैं मुझ पर

विश्वास करना छोड़ देते

[संगीत]

हैं उसके पीछे का कारण ही नहीं समझ पाते

मेरे बच्चे तुम यह मत भूलो कि मैं सब

तुम्हारे साथ हूं मेरे बच्चे तुम मेरे लिए

बहुत खास हो क्योंकि तुमने वह किया है जो

कि मुझे बहुत पसंद प्रसन्न कर रहा है मेरे

प्रेम की कसौटी पर तुम खरे उत

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