22:22 माँ काली? maa kali urgent message ? #shivshakti - Kabrau Mogal Dham

22:22 माँ काली? maa kali urgent message ? #shivshakti

मेरे बच्चे मुझे पता है तुम जितना प्रेम

मुझे करते हो शायद ही किसी से कर पाऊं

जितना यकीन तुम्हें मुझमें पर है शायद ही

किसी पर हो

तुम्हें यह भी पता है मेरे बच्चे की मेरे

अलावा इस पूरे संसार में कोई तुम्हारा

अपना नहीं है कोई ऐसा नहीं है जो तुम्हारे

दुख दर्द को दिल से सुन लोग सुनने का

दिखावा तो करते हैं पर कोई तुम्हारा दर्द

समझ नहीं सकता जैसे तुम्हारी माता समझती

हैं कोई तुम्हारे आंसू पर वैसे रो नहीं

सकता मेरे बच्चे जैसे मैहर होती हूं

मुझे पता है तुम अकेले में आज भी बहुत

रोटी हो बहुत साड़ी चिंताएं ऐसी हैं जो

तुम्हारे मां को भारी कर देती हैं बहुत

साड़ी बातें ऐसी हैं जो तुम किसी को बता

ही नहीं सकते हो

तुम अपने अंदर ही उन बटन को रख कर घुटते

चले जा रहे हो मेरे बच्चे

हो तो उन बटन के अंधेरेपन में को जाते हो

फिर तुम्हें संसार में कुछ भी सही नहीं

दिखता है

राज भी ऐसे लोग हैं मेरे बच्चे तुम्हें

बहुत अच्छे से पता है वह लोग कौन है जो

तुम्हारे अपने नहीं है पर अपने होने का

दिखावा कर रहे

तुम आज भी उन लोगों की बटन पर रोटी हो

तुम्हें पता है की वह लोग तुम्हारे पीठ

पीछे वार कर रहे हैं फिर भी तुम उनकी सेवा

करते चले जा रहे हो फिर तुम फिर भी तुम

उनकी साड़ी बातें मानते चले जा रहे हो फिर

भी तुम उनकी साड़ी बातें सुनते चले जा रहे

हो फिर अकेले बैठकर तुम रोटी हो माता मैं

तो उनके लिए इतना कुछ कर रहा हूं क्या मैं

इतना बड़ा हूं की कोई मुझे झूठ प्रेम भी

नहीं कर का रहा है क्या मैं इतना बड़ा हूं

जो पूरा जगतपुरा संसार मिलकर मुझे नीचे

खींचना की कोशिश कर रहा है

तुम्हारा दिल जानता है जो तुम्हारे अंदर

आत्मा जानती है की मेरे अलावा तुम्हारा

कोई अपना नहीं है तो तुम उन लोगों से इतनी

उम्मीदें ही क्यों लगा बैठे हो

अगर तुम्हारे साथ इतना बड़ा बर्ट करते हैं

जब तुम्हें यह पता चल रहा है की वह

पीछे-पीछे तुम्हारे लिए क्या-क्या बोल रहे

हैं तो तुम उनके साथ अपने संबंधों को खत्म

क्यों नहीं कर देते हो

तुम खुद को उन लोगों के लिए इतना नीचे

क्यों दिखा रहे हो इतना नीचे क्यों गिर जा

रहे हो मेरे बच्चे

क्योंकि हर कहानी बात सुन रहे हो किसी से

कुछ का देते हैं किसी से कुछ बोल देते हैं

तुम्हारा बना बनाया कम बिगाड़ दे रहे हैं

बोलो फिर भी तुम्हारे अंदर इतनी हिम्मत

नहीं हो रही तुम उनसे जाकर उनके मुंह पर

बोल सको क्या आपने ऐसा किया है मेरे साथ

फिर भी तुम उनके साड़ी बातें हंस कर सुन

रहे हो

तुम आज भी उनका भला छह रहे हो यही कोमलता

है तुम्हारे हृदय में जो लोग नहीं समझ का

रहे मेरे बच्चे वह कभी नहीं समझेंगे तो

उनके लिए मा भी जो तब भी वह यह नहीं

समझेंगे की तुमने उन लोगों से कितना प्रेम

किया

तो मुझे आज भी मांगते हो की माता मुझे

किसी का प्रेम दे दो माता मुझे यह दे दो

माता मेरा विवाह कर दो माता क्या तुम्हें

ऐसे लोगों के साथ अपना भविष्य देखना है

इस जगत में और भी बहुत साड़ी चीज हैं मेरे

बच्चे तुम्हें करनी है उन बटन पर ध्यान दो

उसमें भी खुशियां हैं

जिन झूठी खुशियों पर तुम आज हंस रहे हो

जिन झूठी खुशियों पर तुम आज खुश हो रहे हो

अपने दिल से पूछो क्या तुम सच में खुश हो

इनमें

खुश हो मेरे बच्चे

[संगीत]

तुम्हारे अच्छे दोनों में क्या यह रिश्ते

तुम्हारे सच्चे हैं

अगर रिश्ते सच्चे होते तो तुम कभी अकेले

बैठकर ना रोटी मेरे बच्चे

तुम्हारे मां को भारी कर रहे हैं

अकेलापन महसूस करवा रहे हैं

[संगीत]

तुम कभी अकेले नहीं होगी तो अकेले बैठे भी

हो गए तब भी तुम्हें वहां मेरा एहसास जरूर

होगा इस दुनिया से उम्मीद छोड़ दो अपने

सपनों के पीछे भागो उनके लिए रो अपने

सपनों को पूरा करने के लिए रो मेरे बच्चे

फिर देखना कोई व्यक्ति तुम्हारा इस्तेमाल

नहीं कर पाएगा जब तुम इतना व्यस्त रहोगे

अपने सपनों को अपने में तुम्हें इस दुनिया

की शोर सुने नहीं अच्छी मेरे बच्चे लोग

क्या का रहे हैं तुम्हें सुने नहीं देगा

ऐसे लोगों के पीछे ऐसे लोगों से रिश्ता कब

तक निभाई लोग तुम और क्यों निभाना है

तुम्हें ऐसे लोगों से रिश्ता जब मैं स्वयं

तुम्हारे साथ खड़ी तुम्हारा रिश्ता मुझे

जो तुम्हारा हृदय तुम्हारा दिमाग तुम्हारा

शरीर तुम्हारे अंदर आत्मा जानती है की मैं

तुम्हारी माता हूं

तुम्हें दुनिया की झूठ रिश्तों में फैंस

कर क्यों रो रहे हो और अपनी माता को क्यों

रुला रहे हो मेरे बच्चे तुम्हारे लिए

मैंने ब्रह्मांड की साड़ी खुशियां लिख

राखी हैं

पर तुम्हें तो सिर्फ दुनिया की खुशियां

चाहिए वह झूठी खुशियां चाहिए

आज निर्णय ले ही लो मेरे बच्चे की तुम्हें

दुनिया के झूठ रिश्ते चाहिए या तुम्हें

तुम्हारी माता के साथ अपना रिश्ता चाहिए

क्योंकि मैं तुम्हें कभी नहीं रुलाऊंगी

जैसे समाज तुम्हें रुलाता है तुम जी दिन

मेरा हाथ पकड़ कर चलने लगोगे मैं तुम्हें

कभी गिरने नहीं दूंगी मेरे बच्चे कभी

तुम्हें अकेला नहीं छोडूंगी जैसे ये सब

छोड़ कर चले जाते हैं अपनी माता पर यकीन

रखो और जहां तुम्हारे साथ गलत बर्ट हो रहा

है वहां से उठकर चले जो वैसे लोगों को

पीछे छोड़ दो ओम नमः शिवाय

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *