0:01 / 8:53 चली आ रही कालका लट खोले ! शहनाज़ अख़्तर - Kabrau Mogal Dham

0:01 / 8:53 चली आ रही कालका लट खोले ! शहनाज़ अख़्तर

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

छम छम बोले

[संगीत]

हेल

हेल

छम छम

[संगीत]

बोले

दुनिया छम छम बोले और पवन चली हॉल हॉल

बहुत चले

होले-होले

छम छम बोले और पवन चली होने होल छलिया रही

गाल कलात खोल

[संगीत]

चली ए रही काली काली

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

ए कल कल चोर लेख काली काली

[संगीत]

[प्रशंसा]

हैरान में मौसम काली

और गरज रही हूं बोले

गरज नहीं हूं बोले और पवन चली होल होल

[संगीत]

और पवन चली होने होल छलिया रही गाल का लट

खोल

निकाल ले

[संगीत]

[संगीत]

समर चली भैरू सॉन्ग माता

छोटी बहन हो संगमरमर

में कोई टिक नहीं पता

कोई

[संगीत]

टिक नहीं पता

और खून से रंग लाई है बोले

और पवन चली होल होल

होल

से रंग लाई है बोले और पवन चली होने होल

छलिया रही गाल का लट खोल

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

उंग

[संगीत]

[संगीत]

रे हंगरी तप रही है दुनिया साड़ी

[प्रशंसा]

[संगीत]

होल होल

हो गए

[प्रशंसा]

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

छम छम बोले

दुनिया छम छम बोले और पवन चली हॉल हॉल

चले

होल-होले

छम छम बोले और पवन चली होली

चली ए रही गाल गाल ढोले

चली ए रही

बोले

छम छम बोले

[संगीत]

और पवन चली हेल हेल

हेल

छम छम

[संगीत]

[संगीत]

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