???? तुम्हारी दुर्दशा देखकर मेरी आत्मा रो रही है। - Kabrau Mogal Dham

???? तुम्हारी दुर्दशा देखकर मेरी आत्मा रो रही है।

मेरे

बच्चे तुमने सदैव अपनों की खुशी

चाही उनके भले के लिए तुमसे जो बल पड़ा

तुमने

किया परंतु बदले में तुम्हें क्या

मिला लोग तुम्हारी मासूमियत का फायदा

उठाते

गए तुम्हें मूर्ख बनाते

गए और तुम बनते

गए यह जानते हुए

भी कि लोग तुम्हारे साथ छल कर रहे

हैं तुम अनजान बने

रहे परंतु अब हद हो रही

है अब और बर्दाश्त मत

करो किसी से प्रेम और दया की उम्मीद मत

रखो किसी का साथ मत मांगो

मेरे बच्चे सत्य तुम्हारे सामने

है फिर तुम्हें किस बात की प्रतीक्षा

है मैं जानती

हूं कुछ लोगों ने तुम्हारा दिल दुखाया

है किंतु फिर भी तुम उन्हें अथाह प्रेम

करते

हो उनकी हर उद्दंडता को सहन करते

हो इस आस में कि शायद

उन्हें अपनी भूल का एहसास हो

जाए और वह तुम्हारे प्रेम

का तुम्हारे त्याग का मूल्य समझ

पाए मेरे बच्चे वह दिन भी अवश्य

आएगा जब उन्हें तुम्हारे प्रेम

की तुम्हारे साथ की कीमत समझ आएगी

किंतु इसके लिए तुम्हें बदलना

होगा अपना हृदय कठोर करना

होगा मेरे बच्चे तुम जरूरत से ज्यादा

अच्छे

हो तुम्हारी यही भूल तुम्हारे आंसुओं का

कारण

है तुम जिससे भी प्रेम करते

हो जिसे भी अप मानते

हो उसे अपना सर्वस्व समझ लेते

हो उसकी हर आज्ञा का पालन करते

हो वह अच्छा करे या

बुरा तुम्हें उसकी प्रसन्नता के लिए सब

स्वीकार होता

है किंतु यह उचित नहीं

है किसी को प्रेम करना भली बात

है किंतु अपने आत्म सम्मान को कुचल

देना बहुत बड़ी मूर्खता

है मैं जानती

हूं तुम्हारा हृदय पुष्प के समान कोमल

है तुम मन के बहुत सच्चे

हो किंतु कुछ लोग सच्चे लोगों की कीमत

नहीं समझते

हैं मैं यह नहीं कहती कि झूठ

बोलो किसी के साथ विश्वास घात

करो किंतु जो छल तुम खुद के साथ कर रहे

हो उसे रोक

दो पुष्प के समान कोमल मत

बनो क्योंकि कोमल पुष्प ही पैरों तले

कुचले जाते हैं

मैं जानती

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *