🕉️ mahadev ji ka sandesh 🕉️ कुछ भी कर लो ये होकर रहेगा 📩universe message - Kabrau Mogal Dham

🕉️ mahadev ji ka sandesh 🕉️ कुछ भी कर लो ये होकर रहेगा 📩universe message

मेरे प्रिय बच्चे जब तुम्हारे सामने
असफलताएं हो निराशा हो सभी लोग तुम्हारे
विरुद्ध आ खड़े हो जब परिस्थिति नकारात्मक
हो जब लगे कि अब टूटकर पूरी तरह से हारने

वाले हो तब भी तुम निराश मत होना क्योंकि
यह एक बहुत बड़ा संकेत है कि तुम अपने
दुखों की समाप्ति के बहुत करीब हो जब
तुमने संघर्ष में लड़ना शुरू किया तब

तुम्हारे दुश्मन शांत थे लेकिन जब तुमने
प्रगति कर प्रारंभ किया तब तुमने उनका
ध्यान आकर्षित कर लिया तभी उन्होंने
तुम्हारे समक्ष कुछ बाधाएं और चुनौतियां

खड़ी कर दी ताकि तुम उन बाधाओं के आगे
अपने घुटने पूरी तरह से टेक दो जहां तुमने
उसे भ्रमित किया उसे लगा कि तुम कुछ
कठिनाइयों के बाद कुछ संघर्षों के बाद हार

मान लोगे तुम्हें हताश देखकर उसे लगा वह
जीत रहा है वह शैतान जो तुम्हारे भीतर भी
बैठा है तुम्हारे बाहर भी है लेकिन वास्तव
में तुम दृढ़ विश्वास के साथ खड़े रहे हो

और अपने आप को नियंत्रण में रखने की तुमने
पूरी प्रयास सदैव किया है मेरे प्रिय
तुम्हारा यही विश्वास तुम्हें परमात्मा का
अटूट साथ दिला रहा है यदि तुम्हें अपने

जीवन में ईश्वर का सानिध्य महसूस होता है
तो निश्चित तौर पर यह प्रमाणित करता है कि
एक शक्ति सदैव तुम्हारे साथ है और मैं
क्योंकि जब किसी को अत मात्रा में कुछ

प्रदान करना तुम्हें बताना चाहता हूं कि
तुम्हें घबराने की आवश्यकता नहीं है मैं
निश्चित तौर पर तुम्हारे साथ हूं और इस
माह में तुम्हें एक ऐसी खुशी दिलाने वाला

हूं जिसकी तुमने अभी कल्पना नहीं की है जो
तुम सोच रहे हो उससे अलग एक ऐसी खुशी
जिसका विचार तुमने बहुत पहले किया था
किंतु अभी तुम उसे नहीं सोच रहे हो वह अब

तुम्हें प्राप्त होने वाला है मैं
तुम्हारे जीवन में ऐसी खुशियां और जुनून
भेजने की योजना बना रहा हूं जैसे तुमने
कभी भी पहले अनुभव ना की हो ऊर्जा का एक

ऐसा भंडार तुम्हारे जीवन में भेज रहा हूं
जिससे तुम्हारा मन मस्ती शांत हो सके यदि
तुम इस आशीर्वाद की ऊर्जा को प्राप्त करना
चाहते हो तो भी संख्या 333 अवश्य लिखो यह

पुष्टि जाता है कि लोग उसके आभा मंडल के
तहत उसके जैसा बनने कर कि तुम्ह निश्चित
तौर पर या अभी ही चाहिए मेरे प्रिय मेरा
आशीर्वाद तुम्हारे साथ है जो सदैव

तुम्हारा पीछा करता रहेगा और जब तुम सही
समय सही जगह पर नहीं होगे तब भी यह कृपा
तुम पर बनी रहेगी तुम्हारे शत्रु मोह के
बल गिरे होंगे और एक एक कर स्वयं तुम्हारे
लिए मार्ग खुलते चले जाएंगे इसलिए तुम

किसी भी बात की चिंता ना करो बस यह
विश्वास करो कि तुम कृपा के घेरे के बीच
खड़े हुए हो तुम्हारी ओर से दिव्य
शक्तियां लड़ रही है चाहे कोई तुम्हारे दल

में हो ना हो चाहे कोई तुम्हारा साथ दे या
ना दे किंतु यह दिव्य शक्तियां निरंतर
तुम्हारा साथ दे रही है विश्वास करो मेरे
प्रिय तुम मुझसे प्रेम करो और लंबी छलांग

लगाओ ताकि तुम प्रगति की ओर बहुत जल्द
पहुंच सको क्योंकि मैं तुम्हारी इस दौड़
में तुम्हारा साथ दे रहा हूं और यह साथ
तुम पर हमेशा ही बरकरार रहेगा कभी-कभी

जीवन में शत्रुओं का लाभकारी भी हो जाता
है कई बार मनुष्य अपनी क्षमताओं को पहचान
नहीं पाता कई बार मनुष्य अपने वास्तविक
उद्देश्य को पहचान नहीं पाता तब यह शत्रु

ही है यह विपरीत परिस्थिति ही है जो उसे
प्रेरित करती है कि अपने आत्मा उद्देश्य
को समझ सके जो उसे प्रेरित करती है कि वह
अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सके एक ईश्वर

ही है जो सुख दुख लाभ हानि आशा निराशा में
संभाव से मनुष्य के साथ खड़ा होता है इसके
अलावा वह जितने भी मनुष्य हैं जो तुमसे
प्रेम करते हैं जिनसे तुम प्रेम करते हो

वह कभी भी तुम्हारा साथ वैसा नहीं दे सकते
जैसा ईश्वर तुम्हारे साथ है लेकिन एक बात
है कि तुम सदा ही भौतिक वस्तुओं के पीछे

भागते हो कभी अपने भीतर झांककर यह जानने
का प्रयास करो कि तुम आखिर कौन हो
तुम्हारा वास्तविक उद्देश्य क्या है धन
कमाने लोगों की सेवा करने इन सबसे अलग तुम

कुछ और हो प्रिय यह विपरीत परिस्थितियां
इनसे नफरत नहीं करो इनसे भी प्रेम करो
इनकी भी वास्तविकता को देखो तुम्हारे
अनुभव तुम्हारे जीवन के आधार पर तुम्हारे

जीवन में जो परिस्थितियां आई है तुम उनका
सामना किस नियत के साथ कैसे करते हो यह तय
कर देता है कि तुम्हारा भविष्य कैसा होगा
यदि तुम्हें जीवन में ऐसा कभी महसूस हुआ

कि तुम्हारे दुख की घड़ी में ईश्वर ने
तुम्हारा मार्गदर्शन किया है तो वास्तव
में तुम उन शक्तियों के घेरे में ही थे जो
शक्तियां तुम्हें आगे ले जाने को प्रेरित

कर रही है एक बार अपने मन से पूरी श्रद्धा
से आभार व्यक्त करके देखो तुम तुलना एं
करते हो उन वस्तुओं से उन परिस्थितियों से
उन व्यक्तियों से जिन्हें तुमसे बेहतर

प्राप्त है किंतु यह बाहरी दिखावा मात्र
है एक छलावा मात्र है तुमसे बेहतर
परिस्थिति नहीं है बस समझने की देरी है
यदि मनुष्य के दांत में पीड़ा उत्पन्न हो

जाए तो उसकी जीभ बार-बार वही पहुंचती है
उसे लगता है कि यह कष्ट एक बार समाप्त हो
जाए तो उसे जीवन का सुख मिल जाए लेकिन जब
वह दुख समाप्त होता है वह पीड़ा ठीक होती

है तो क्या मनुष्य के दुख समाप्त हो जाते
हैं नहीं मेरे प्रिय मनुष्य के दुख तो तब
समाप्त होते हैं जब वह स्वयं को पहचान
लेता है और वह घड़ी आ गई है जब तुम्हें

स्वयं को पहचानना है क्योंकि तुम विशेष हो
तुम्हें समझना है कि तुम अनमोल हो मेरे
प्रिय अभी जो कुछ भी हो उसे भूल जाओ और
लंबी छलांग लगाने की तैयारी करो क्योंकि

प्रगति तुम्हें निश्चित तौर पर मिलकर
रहेगी प्रकृति तुम्हें थोड़ा विश्राम दे
रही है ताकि तुम लंबी प्रगति के लिए लंबी
लाम सको तुम्हारा आध्यात्मिक जीवन

तुम्हारे संबंध और तुम्हारी आर्थिक स्थिति
इस माह में फलने फूलने वाले
हैं तुम्हारी समस्याओं का अंत बहुत करीब आ
चुका है मेरे प्रिय वह व्यक्ति जिसे तुमने

बधा प्रेम किया है उसे तुम्हारे प्रेम की
कद्र होगी वह तुम्हारे प्रेम के मूल्य को
समझेगा वह समझ पाएगा कि तुम्हारा प्रेम
उसके लिए अमूल्य है तुम विशेष हो तुम पर

विशेष कृपा है यह बात जल्द ही सब लोग समझ
जाएंगे मेरे प्रिय बच्चे जो मैं तुमसे कह
रहा हूं इसे ध्यानपूर्वक
सुनना मैंने तुमसे प्रश्न किया है कि क्या

मनुष्य को जो चाहिए जब वह हासिल हो जाता
है तो क्या वह सुखी हो जाता है क्या वह
संतुष्ट हो जाता है गहन विचार करो मनुष्य
यदि संतुष्ट हो जाए तो उसका जीवन स्वर्ग

से भी बेहतर हो जाता है इस धरती पर स्वर्ग
नरक सुख दुख ये मनुष्य के अपने चुनाव होते
हैं परिस्थितियां तो जो घटनी है वह घट कर
ही रहेंगी परिस्थिति के लिए प्रार्थना

करना अनावश्यक है तुम कई बार प्रार्थनाएं
करते हो कि तुम्हारे सामने विपरीत
परिस्थिति ही ना आए तुम्हारे सामने कोई
दुख ही ना आए किंतु जीवन एक चक्र है और

चक्र वापस पुनः उसी जगह पहुंच जाता है
जहां से उसने प्रारंभ किया था जब मनुष्य
का जन्म होता है तो उससे पहले का उसे कुछ
भी ज्ञात नहीं होता जब मनुष्य की मृत्यु

हो जाती है तो उसके बाद का उसे कुछ ज्ञात
नहीं होता लेकिन इस बीच के भ्रमण काल में
मनुष्य सदैव चिंतित रहता है वह तरह-तरह की
चीजें एकत्र करना चाहता है वह अपने जीवन

को बेहतर करने का प्रयत्न करने लगता है
किंतु इन सबके बीच वह अपने जीवन जीना भूल
जाता है वह यह भूल जाता है कि उसके जीवन
का समय काल निश्चित है और उसे ज्ञात नहीं

कि उसका जीवन का समय काल कब समाप्त हो
जाएगा फिर वह सदैव भविष्य की चिंता में ही
विलीन रहता है अतीत की ग्लानि हों में
पछताता रहता है अरे तो क्या हुआ तुमसे कुछ

भूल हो गया मैं तुम्हारे साथ हूं मैंने
तुम्हें मनुष्य का जन्म दिया है भूल हुई
तो जाने दो जो बीता उसे जाने दो मैं
निर्णय करके उस पर तुम्हें कोई कष्ट नहीं

देने वाला जब तुमने पछतावा कर लिया और आगे
ऐसी गलती ना करने का विचार कर लिया तो मैं
तुम्हें निर्णय करके विपत्ति क्यों दूंगा
ऐसा नहीं होगा मेरे प्रिय मैं सदैव

तुम्हारे साथ रहूंगा मैं तुमसे प्रेम करता
हूं तुम्हें मुझसे भयभीत होने की आवश्यकता
नहीं तुम बुरे कर्म करते हो उसके बाद
मुझसे भयभीत होते हो मेरे प्रिय तुम्हें

भयभीत होने की आवश्यकता नहीं यदि तुम मुझे
सम्मान आदर देकर मेरा विचार करोगे तो यह
जान पाओगे कि यदि तुमसे कोई भूल ई है तो
तुम उसे पुनः ना करो तुम जीत के करीब हो

इस बात को कभी भूलना मत किंतु यह जीत तभी
हासिल होती है जब मनुष्य अपनी योग्यता
प्रदर्शित कर देता है मेरे प्रिय धन
तुम्हारे जीवन में आ रहा है प्रेम

तुम्हारे जीवन में आ रहा है यह संपूर्ण
संसार करुणा से भरा हुआ तुम्हें प्रतीत
होने लगेगा किंतु जब तुम अपने प्रति वैसी
ही भावना रखोगे तभी यह तुम्हें हासिल हो

पाएगा यह संसार एक दर्पण है तुम जैसा
चाहते हो तुम्हें वैसा ही हासिल होता है
यदि तुम्हें किसी के अंदर कटता दिख रही है
किसी के अंदर शत्रुता दिख रही है तो

निश्चित तौर पर तुम्हारे भीतर वैसे ही
विद्यमान है तुम्हें उसे समाप्त करना होगा
यदि किसी के कुछ कह देने मात्र से
तुम्हारा जीवन परिवर्तित हो जा रहा है

किसी के कुछ कह देने मात्र से तुम्हें
क्रोध आ जा रहा है तो निच निश्चित तौर पर
तुम्हारे जीवन में कुछ कमियां है तो
निश्चित तौर पर तुम भी वैसे ही हो तुम्हें

अभी सुधार की आवश्यकता है मेरे प्रिय तुम
जैसा विचार करोगे यह ब्रह्मांड तुम्हें
वैसी ही परिस्थितियां उत्पन्न करके देगी
उससे विपरीत उससे अलग कोई अन्य परिस्थिति
नहीं आएगी अपनी परिस्थितियों का निर्माण

तुम स्वयं करते हो और बाद में यह इल्जाम
तुम मुझ पर लगाते हो हे भगवान तुमने मेरे
साथ ऐसा क्यों किया कि वास्तविकता तो यह
है कि मैं कभी भी परिस्थितियों का निर्माण

नहीं करता मनुष्य के जीवन में आ रही
परिस्थितियां पहले से ही रचित होती है
किंतु स्थितियों में वह कैसा व्यवहार
करेगा यह उसके कर्मों को निर्धारित करता

है और तुम्हें सदैव अपने कर्म सही रखने
हैं जब मैं कर्म सही रखने की बात कर रहा
हूं इसका अर्थ यह है कि तुम्हें कभी भी
ऐसा कार्य नहीं करना है जिस पर तुम्हें

बाद में गिलानी हो तुमने जो किया उसकी
पूरी जिम्मेदारी उठाओ जब तुम जिम्मेदारी
उठाते हो और अहंकार के भाव को त्याग कर
देते हो तो मैं तुम्हारे आसपास सर्वत्र

विद्यमान हो जाता हूं तब मैं तुम्हारे
कर्मों का आकलन नहीं कर रहा होता तब मैं
तुम्हारा सहयोगी बनकर तुम्हारा साथ दे रहा
होता हूं तब मैं तुम्हारे विचार बनकर

प्रकट हो रहा होता हूं तब मैं क्रिया बनकर
तुम में ही बस जाता हूं तुम्हें अपने भीतर
झांकना है तुम्हें अपने जीवन जीन के मूल्य
को समझना है क्योंकि जीत तुम्हें मिलने

वाली है क्योंकि धन की वर्षा तुम पर होने
वाली है क्योंकि तुम्हें वह सब हासिल होने
वाला है जिसे तुम पाना चाहते थे वह सब
तुम्हारे बहुत करीब है लेकिन तुम्हें अपनी

योग्यता प्रदर्शित करनी होगी तुम्हें
पुष्टि करनी होगी तुम्हें दर्शा होगा कि
तुम उसे पाने के लिए पूरी तरह से योग्य हो
अपने मन वचन वाणी कर्म इन सब से तुम्हें

यह प्रदर्शित करना होगा
कि तुम पूरी तरह से जीत को हासिल करने के
योग्य हो पूरी तरह से आगे बढ़ने को लंबी
छलांग लगाने को प्रगति को महसूस करने के
योग्य हो मेरे प्रिय यह सारा संसार

तुम्हें वैसा ही दिखाई देगा जैसा तुम्हारे
भीतर चल रहा हो यदि तुम भय से लिप्त हो तो
तुम्हें तरह-तरह के भय आते रहेंगे यदि तुम
क्रोध से लिप्त हो तो निश्चित तौर पर

क्रोध के मौके तुम्हें मिलते रहेंगे क्रोध
मनुष्य की वह गति है जो सबके समक्ष
प्रदर्शित नहीं होती और तुम भी इससे अछूते
नहीं हो क्या तुमने कभी विचार किया कि

तुम्हारा क्रोध हमेशा तुमसे कमजोर व्यक्ति
के समय ही क्यों उपस्थित होता है उस
व्यक्ति के समक्ष तुम क्रोध क्यों नहीं
करते जो तुमसे ज्यादा ताकतवर हो कभी तुमने

इसका विचार किया कि क्रोध एक ऐसी भावना है
जो तुम अपने से कमजोर व्यक्ति को दबाने के
लिए ही प्रदर्शित करते हो यह दो चेहरे
लेकर के तुम अध्यात्म के मार्ग पर आगे

कैसे बढ़ो तुम्हें इसका त्याग करना होगा
तुमने अध्यात्म के मार्ग का चुनाव तो कर
लिया है लेकिन क्या अध्यात्म तुम्हें वह
सब प्रदान करेगा जो तुम प्राप्त करना
चाहते हो यदि वास्तव में तुम उसे प्राप्त

करना चाहते हो तो तुम्हें दूसरों के समक्ष
मुखौटे नहीं पहनने होंगे तुम्हें अपने
वास्तविक स्वरूप को समझना होगा अपने संसार
में अपने जीवन में अपने समाज में तुमने
अपने चेहरे पर इतने मुख टे डाल लिए कि तुम

यह समझ ही नहीं पाए कि वास्तव में तुम कौन
हो मैं बेहतर तौर पर जानता हूं कि
तुम्हारे भीतर एक सच्चा मनुष्य विद्यमान
है तुम प्रेम के सागर हो तुम करुणा के

सागर हो तुम्हारे भीतर करुणा है प्रेम है
तुम्हारे भीतर महत्वाकांक्षा है मैं यह
बात जानता हूं किंतु उससे भी ज्यादा
तुम्हारे भीतर ममता है प्रेम है करुणा है

और तुम्हें समझना होगा तुम इस संसार में
नफरत बांटने या नफरत करने क्रोध करने
ईर्षा करने द्वेष करने जलन करने नहीं आए
हो तुमने तो सदा ही सबका भला चाहा है फिर

परिस्थितियां ऐसी क्यों उत्पन्न हुई कि
तुम्हारे भीतर इस प्रकार के दोष जन्म लेने
लगे तुम गुणों से युक्त रहे हो तुम गुणी
रहे हो फिर ऐसा क्यों हुआ मेरे प्रिय

विचार करो तुम अब जीतने वाले हो और जब
मनुष्य जीतने वाला होता है तो उससे पहले
उसकी पुष्टि करना आव आक होता है तो
ब्राह्माण का यह नियम है कि उससे पहले

मनुष्य की आखिरी जांच की जाती है कि क्या
वास्तव में वह इसे प्राप्त करने के योग्य
है भी या नहीं कि कहीं ऐसा ना हो कि वह
मनुष्य तानाशा हो जाए कि वह मनुष्य दूसरों

पर अपनी आकांक्षाएं थोपने लगे कि वह
मनुष्य दूसरों को दबाकर अहंकार से युक्त
हो जाए इस ब्रह्मांड में बहुत से ऐसे
मनुष्य हुए जिनको सब कुछ प्रदान करने के
बाद वह अहंकार से युक्त हो गए कोई उसमें

पूरी तरह से नकारात्मक हो गया तो किसी ने
अन्य समाज को भी नकारात्मक कर दिया
क्योंकि जब मनुष्य के पास धन प्रभाव और
शक्ति पहुंचती है तो वास्तव में उसका

प्रभाव इतना बढ़ाने का प्रयत्न करते हैं
और यदि तुम्हें यह सब प्रदान कर दिया जाए
तो तुम भी बहुत से लोगों को प्रभावित
करोगे इसलिए उससे पहले एक आखिरी पुष्टि
आवश्यक होती है है मेरे प्रिय यदि तुम

अपने जीवन में वास्तव में खुशियों को
आकर्षित करना चाहते हो अपने दुखों को
समाप्त करना चाहते हो तो तुम्हें अपने
भीतर के अहंकार को पूरी तरह से समाप्त

करना होगा अपने भीतर प्रेम की भावना को
सदा सदा के लिए बढ़ाना होगा मेरे प्रिय
तुम्हें पुष्टि करनी होगी अपने जीत की

तुम्हें पुष्टि करनी होगी अपने सौंदर्य की
तुम्हें पुष्टि करनी होगी अपने मन के
शुद्धता की तुम्हें पुष्टि करनी होगी इस
जीत को हासिल करने की इसके लिए तुम्हें

संख्या
1111 लिखना होगा साथ ही यह भी लिखना होगा
कि हां मैं पुष्टि करता हूं मैं जीत को
आकर्षित करने की पुष्टि करता हूं मेरे

प्रिय ऐसा करते ही जीत निश्चित तौर पर
तुम्हें मिलने वाली है इन सबके बीच एक बात
सदा याद रखना कि परिस्थिति चाहे जैसी भी
हो चाहे तुम्हारे विपरीत रही हो चाहे तुम
अनुकूल रही हो चाहे यह पूरा संसार

तुम्हारे खिलाफ ही क्यों ना हो जाए लेकिन
मैं सदैव तुम्हारे साथ हूं मेरा आशीर्वाद
सदैव तुम्हारे साथ है और आने वाली 14
तारीख को तुम्हारे जीवन में एक बहुत बड़ी

घटना घटने वाली है उसके लिए तैयार रहना
मैं उन संकेतों को तुम तक अवश्य पंचांगा
मेरे आने वाले संदेशों की प्रतीक्षा करना
क्योंकि उसमें तुम यह जान पाओगे कि

तुम्हारे भविष्य में क्या घटने वाला है जो
जानना तुम्हारे लिए अत्यंत आवश्यक है सदा
सुखी रहो खुशियां बांटो और खुश रहो प्रेम
करुणा को ही अपना आधार मानो क्योंकि तुम
इसी से निर्मित हुए हो तुम्हारा कल्याण
होगा

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