🕉️ मां आदिशक्ति 🕉️ तुम्हारा शत्रु अब तुम से थड़ थड़ कापेगा 🕉️ - Kabrau Mogal Dham

🕉️ मां आदिशक्ति 🕉️ तुम्हारा शत्रु अब तुम से थड़ थड़ कापेगा 🕉️

मेरे बच्चे मेरा संदेश प्राप्त होने का
अर्थ है की मैं बताना चाहती हूं की बहुत
हुआ उन लोगों ने तुम्हें जितना परेशान
करना था वो कर चुका लेकिन अब नहीं अब मैं
उन सबको सजा दूंगी और सबक सिखाऊंगी उन
सबको अब रोना पड़ेगा

इसके साथ ही मैं तुम्हें बताऊंगी की मेरे
बच्चे की वह कौन है जो तुम्हें परेशान कर
रही है यह तुमको बताऊंगी जिस प्रकार जन्म
देने वाली मां के सामने उसकी बच्चे को यदि
कोई परेशान करता है

तो उसकी मां परेशान करने वालों को अवश्य
ही दंड देती है और अपने बच्चों के रक्षा
करती है कोई कुछ कहे तो मां से बर्दाश्त
नहीं होता क्योंकि मां की ममता बहुत ही
ज्यादा गहरी होती है अपने बच्चे के प्रति
उसी प्रकार मेरी ममता

और तुम्हारी गलती के बिना तो तुम्हें कोई
परेशान करे यह मैं बर्दाश्त नहीं कर सकती
मेरे क्रोध का उसे व्यक्ति को सामना करना
ही होगा जिसने तुम्हारे साथ गलत किया होगा
उसको तुम्हारी मां अवश्य ही दंड देगी

मैं जानती हूं की तुम बहुत ही सीधा साधा
और भोला भला हो जो सब पर विश्वास करता है
क्योंकि वह खुद के हृदय की तरह सबको समझता
है मेरे प्यारे बच्चे तुम किसी के साथ चल
कपट नहीं करते तुम किसी के साथ गलत नहीं
करते

तो कोई मेरे बच्चे के साथ भी गलत नहीं कर
सकता वह भले ही इस बात को ना जाने लेकिन
मैं स्वयं पूरी बात को जानती हूं की कौन
उसको परेशान कर रहा है

मुझसे कोई भी बात छुपी हुई नहीं है
लेकिन गलती करने वाला यह बात भूल चुका है
की वह जो कर रहा है वह मेरी नजरों से बचा
नहीं है शायद वह भूल गया है की यदि उसके

अच्छे कर्मों का फल में बहुत अच्छा देती
हूं तो यदि बात तुम्हारी यानी मेरे बच्चे
के साथ गलत कर रहा है

तो मैं उसे अवश्य ही दंड भी दूंगी उसका
कहना है की तुम अपनी मनमानी करो जो भी कुछ
करना चाहते हो तुम किसी की बातों पर ध्यान
मत दो तुम्हें अपने जीवन को अपनी मर्जी के
हिसाब से जीना चाहिए

उसकी कहीं हुई यह बात की तुम पैसे अपनी
मर्जी के हिसाब से खर्च करो और खूब खर्च
करोगे तो बात तुम्हें बर्बादी का एक
रास्ता पर ले जाने का उसका प्रयास है
जिससे की तुम बर्बाद हो जाओ उसका यह कहना

की तुम्हें कम करने की क्या जरूरत है
आराम की जिंदगी जियो और जिससे की तुम्हारे
सभी रास्ते बंद कर सको वह तुम्हें कर्म ही
बना दे इसका अर्थ यह हुआ की तुम्हारे पास

राखी हुई पूंजी व्यर्थ के कर्मों में खर्च
हो जाएगी और कम तुम कुछ करोगे नहीं
तो तुम अपने आप ही अपने स्टार से बहुत
नीचे चले जाओगे और तुम्हारी हालत खराब हो

जाएगी जिससे की तुम अपने जीवन में दर-दर
की ठोकरे खाने लगोगे लेकिन तुम्हारे शरीर
को मिले हुए आराम की आदत तुम छुड़ा नहीं
पाओगे

सुनने में बात बहुत साधारण सी है मेरे
बच्चे लेकिन तुम्हारे जीवन में तुम्हें ना
की व्यर्थ की चिताओं की उलझन में फैंस कर
तुम अपने कर्मों को करना छोड़ दो उसको

दर्द देने से पहले मैं तुम्हें यह समझाना
चाहती हूं की मेरे बच्चे उसकी बातों में
ना तो तुम्हें
और ना ही जैसा वह कह रहा है वैसा तुम्हें
करना है क्योंकि तुम्हारा पूरा जीवन ही

व्यर्थ हो जाएगा तुमने जो पीछे अच्छे कर्म
किए हैं
वह सब व्यर्थ होने लगेगा और लेकिन जो
तुम्हें गलत रास्ता दिखा रहा है मैं उसे

अवश्य ही गांड दूंगी
उसे मेरे क्रोध का सामना करना पड़ेगा मैं
तुम्हारे साथ हूं मेरे बच्चे में जानती
हूं की तुम बहुत अच्छे हो और तुम्हारे मां
में सदैव आशंका लगी रहती है की तुम्हारे

साथ गलत क्यों हो रहा है यह प्रश्न
तुम्हारे मां के अंदर घूमता रहता ह
आज मैं यहां प्रश्न का उत्तर दूंगी तो
म्हारे मां की हर क्षमता को निश्चित ही

दूर करूंगी तुम मेरी बोली हुई बातों पर
विशेष ध्यान देना क्योंकि बातों पर ध्यान
नहीं दिया तो समझोगे नहीं मेरे बच्चे यह
प्रश्न जरूर उठाता होगा की बुरे लोगों के
साथ अच्छा क्यों होता ह

अगर कोई बेईमानी करता है और लोगों के साथ
गलत करता है और गलत सोचता है तभी भी उसकी
बरकत होती है वही सबके साथ अच्छा करने
वाले और भला सोचने वाले के साथ हमेशा बुरा
होता है यह एक ऐसा प्रश्न है मेरे हर

बच्चे के दिल में आता है
तो आज मैं तुम्हें सत्य घटना और उदाहरण के
माध्यम से इन सभी प्रश्नों के जवाब दूंगी
मेरे बच्चे तुम्हारे मां में उठ रहे हर
प्रश्न का उत्तर आज मिल जाएगा मैं विश्वास

दिलाती हूं की तुम्हारे मां के शंका नहीं
होगी बात पुराने समय की है
जब एक नगर में दो पुरुष रहते द पहला पुरुष
व्यापारी था जो बहुत ही अच्छा और नेक
इंसान था वह धर्म और नीति का पालन करता था

भगवान की भक्ति करता था और मंदिर जाता था
इसके अलावा हर तरह के गलत कम हो
और गलत संगति से दूर रहता था लेकिन दूसरा
व्यक्ति इसके बिल्कुल विपरीत और दुष्ट

प्रवृत्ति का था वो हमेशा गलत कार्य करता
था मंदिर जाने की बाजार वहां से पैसे और
चप्पल चुराता था झूठ बोलता था और नशा करता
था एक दिन की बात है
जब उसे दिन बहुत तेज बारिश हो रही थी उसे

समय हर कोई अपने घर पे था और मंदिर में
सिर्फ पुजारी द उसे लालची व्यक्ति ने
पुजारी को मंदिर में अकेला देखकर मंदिर का
सारा धन चुरा लिया और पंडित की नजरों से
बचकर वहां से भाग निकाला

कुछ समय पक्ष वही पर वह वाला व्यापारी
मंदिर में दर्शन के लिए गया तो उसे पर
चोरी करने का इल्जाम लग गया वहां पर लोग
जमा हो गए और व्यापारी को भला बुरा कहने
लगे जैसे ही वह व्यक्ति मंदिर के बाहर

निकाला उसको एक गाड़ी ने टक्कर मार दी
जिससे वह बुरी तरह से घायल हो गया
वापसी में जब व्यापारी अपने घर जा रहा था
तो उसे वहीं दुष्ट व्यक्ति मिला वह खुशी

में झुमका हुआ जा रहा था और बोल रहा था की
आज तो किस्मत ही चमक गई एक साथ इतना सारा
धन हाथ लगा है
जब व्यापारी ने यह बात सुनी तो वह हैरान
हो गया उसने घर जाते ही अपने घर में मौजूद

भगवान की सारी तस्वीरें निकल दी और भगवान
से नाराज होकर जीवन बिताने लगा कुछ समय
बाद दोनों ही व्यक्तियों की मृत्यु हो गई
और दोनों यमराज के सामने गए तो उसे
व्यापारी ने नारा स्वर में यमराज से

प्रश्न किया की मैं तो सदैव अच्छे कर्म
करता था जिसके बदले मुझे अपमान और दर्द
मिला और इस धर्म करने वाले दुष्ट को नोटों
से भारी पोटली आखिर क्यों

व्यापारी के सवाल पर यमराज बोले जिस दिन
तुम्हारे साथ दुर्घटना घाटी थी वह
तुम्हारी जिंदगी का आखिरी दिन था लेकिन
तुम्हारे अच्छे कर्मों की वजह से तुम्हारी

मृत्यु एक छोटी सी चोट में बदल गई वहीं इस
दुष्ट को जीवन में राजू मिलने की संभावना
थी

लेकिन इसके बुरे कर्मों के चलते राजू के
एक छोटे से धन की पोटली में बदल गया इस
कहानी
में दे रही हूं यह तुम्हें समझ में नहीं
आएगा लेकिन अगर तुम अच्छे कर्म करते हो तो
मेरी कृपा सदैव तुम पर बनी रहती है मेरे
बच्चे तुम्हें कभी भी अपने कर्मों को
बदलना नहीं चाहिए

क्योंकि तुम्हारे कर्मों का फल तुम्हें
किसी जीवन में मिलता है बस तुम्हें उसका
पता नहीं चलता मेरा आशीर्वाद सदा तुम्हारे
साथ अब मैं चलती हूं मैं फिर आऊंगी तुमसे
मिलने

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