????️ अपने पंख खोलो और उड़ान भरो। - Kabrau Mogal Dham

????️ अपने पंख खोलो और उड़ान भरो।

मेरे

बच्चे आज तुम्हें मैं बहुत बड़े सत्य से

अवगत कराने आई

हूं तुम्हारा मन भ्रम में फंसा हुआ

है सत्य तुम्हारे समक्ष

है फिर भी तुम देख नहीं पा रहे

हो मेरे बच्चे जो जैसा दिख रहा

है वह हमेशा ही

दिखे यह संभव नहीं

है तुम्हारे जीवन में कुछ लोग ऐसे

हैं जिन्हें तुम बहुत आदर करते

हो बहुत प्रेम करते

हो और एक समय पर वह भी तुम्हारी कदर करते

थे तुम उनके लिए बहुत खास थे

किंतु वह लोग अब बदल गए

हैं तुम्हारा संबंध उनके ऊपर बोझ बन गया

है वह तुमसे दूर जाना चाहते

हैं तुम स्वयं भी यह महसूस कर रहे

हो कि अब तुम्हारे रिश्ते में वह प्रेम वह

सम्मान नहीं

रहा किंतु फिर भी तुम अपने आप को धो दे

रहे

हो तुम आज भी उन लोगों पर विश्वास कर रहे

हो वह तुम्हारा प्रेमी हो सकता

है तुम्हारा मित्र हो सकता

है तुम्हारे सगे संबंधी हो सकते

हैं मेरे बच्चे आंखें बंद

करके सब पर भरोसा करना बंद करो

मेरे कहने का अर्थ यह नहीं

है कि तुम सबसे संबंध तोड़

लो किसी से प्रेम मत

करो किसी की मदद मत

करो बस यह सोचना समझना शुरू कर

दो कि सत्य में किसे तुम्हारे प्रेम की

तुम्हारे मदद की जरूरत

है और कौन तुम्हारे सीधे पन का फायदा उठा

रहा

है मेरे बच्चे लोगों को परखना बहुत आवश्यक

है अन्यथा वही

लोग तुम्हारी मदद लेने के

बाद तुम्हारा एहसान तक नहीं

मानते उल्टा तुम ही नीचा दिखाते

हैं और इससे तुम्हें बहुत दुख पहुंचता

है तुमने स्वयं अनुभव किया

है कि किस प्रकार अपना स्वार्थ सिद्ध होने

पर लोग तुम्हें पराया कर देते

हैं मेरे बच्चे अपने आसपास के लोगों को

देखो पता करो कि तुम्हारे मित्र कौन

है तुम्हारा शत्रु कौन

है किसके साथ तुम्हारा समय बीत रहा

है तुम्हारे भीतर इतनी समझ

है कि तुम जान सकते

हो कि कौन तुम्हारा हित चाहता

है और कौन तुम्हारा शत्रु है

मेरे बच्चे भावनाओं में मत

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