सवारी वाले व्यक्ति स्वयं के घर के संकट क्यु नहीं काट पाते - Kabrau Mogal Dham

सवारी वाले व्यक्ति स्वयं के घर के संकट क्यु नहीं काट पाते

में जय माता दी मित्रों आपका मेरे चैनल

मां काली मां दुर्गा शक्ति संवाद में

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मिल जाए मित्रों आज का जो कि है वह विषय

यह है कि जिन व्यक्तियों पर सवारी आती हैं

तो वह अपने घर के संकट क्यों नहीं कर पाते

अपनी परेशानियों को दूर क्यों नहीं कर

पाते देखे सवारियां जब शरीर पर आती हैं तो

किसी कारण से आती है ऐसी सवारी नहीं आती

थी जब आप अपने इष्ट देवता की सेवा लगाते

हैं चाहे उसमें भोलेनाथ हैं मरकाली है मां

दुर्गा है भैरव जी है हनुमान जी के दूध है

या कोई भी देवी देवता जिनकी भी आप शनिवार

लगाते हैं तो जब आप लगातार उनकी सेवा

लगाते रहते हैं काफी समय आपको जाता है तो

उनकी ओर जाए आपके आसपास घूमने लगती हैं और

जवाब लगातार सेवा करते रहते हैं तो वहीं

गिर जाए आपके शरीर में प्रवेश कर जाती हैं

और प्रवेश करने के बाद में हो सवारी के

रूप में प्रगट कि है

यानी आप से बातचीत करती हैं तो उसके बाद

में जब आपके सिर पर सवार होने लगती है

मेरे से बहुत सारे मेरे सब्सक्राइबर है

प्रश्न मुझे आती रहती हैं जो यह कहते हैं

कि हमें सवारी आती हुए आठ साल हो गए कोई

कहता है साल हो गए लेकिन उसके बाद भी

हमारे घर की परेशानी ज्यों कि त्यों है या

फिर हमारे घर में कोई भी नकारात्मक ऊर्जा

है यह किसी व्यक्ति पर कोई संकट है तो हम

उसका निवारण नहीं कर पा रहे हैं जबकि हम

हमारे शरीर पर सवारियां आती है तो ऐसा

क्यों होता है तो इसी का उत्तर मैं आपको

देती हूं देखिए जब सवारी सवारी ऐसे नहीं

आप सवारी आने के लिए आपका तब होना जरूरी

है साथ ही अगर आपने इस जन्म में कोई

पूजा-पाठ नहीं किया तो जो आपका पूर्व जन्म

दयानी पहले का जन्म था उस जन्म में आपने

कोई ना कोई पूजा पाठ की वहीं शक्तियां

आपके इस जन्म में आपके साथ प्रकट होती है

और जब बड़े हो जाते हैं यानी आप संभल जाते

हैं तब वह शक्ति प्रकट होती है आपके साथ

में लुट सवारी के रूप में आती है तो अब यह

बात आती है जब इतना कुछ होने के बाद आपके

पास सवारी आती है तो सवारी आपकी इन संकटों

का निवारण क्यों नहीं कर पाती आपका संकट

क्यों नहीं काटती आपके घर की परेशानियों

को दूर क्यों नहीं कर पाती देखिए

अगर आपके ऊपर सवारी आती है सवारी आने के

बाद में संकट काटने के लिए बहुत सारी

चीजों की जरूरत पड़ती है संकट ऐसे नहीं

काटे जाते हैं जब सवारी आती है तो जब आपके

ऊपर सवारी है तो अब क्या आपको उस पूजा पाठ

का ज्ञान है जो एक सवारी को बलशाली बनाने

का कार्य करता है आपके पास वह ज्ञान नहीं

होता दूसरी चीज आपके पास वह ज्ञान नहीं

होता जो अन्य शक्तियों को साथ लेकर के

कार्यों को सिद्ध किया जाता है केवल आप

यही जानते हैं सवारियां थीं जो सवारी करती

है वही कार्य करते हैं इसके अलावा आपके

पास कोई ज्ञान नहीं होता और इसका कारण यह

होता है कि आपका कोई गुरु नहीं होता और

बिना गुरु के कोई ज्ञान नहीं होता है इसी

कारण से एक ज्ञान न होने के कारण आप अपने

किसी भी संकट का निवारण नहीं कर पाते ना

ही कोई परेशानी अपनी दूर कर पाते हैं साथ

ही सवारी आने के बाद जो शक्तियों को मोड

प्रसाद लगाया जाता है क्योंकि शक्तियों को

ऐसे नहीं चलाया जाता शक्तियों को चलाने के

लिए बहुत कुछ करना पड़ता है जो साथ में

शक्तियां चलती हैं उनको भी चलाया जाता है

उनको भोग प्रसाद लगाए जाते हैं एक निश्चित

समय होता है कि निश्चित तरीका होता है

जिसको अ करने के बाद ही शक्तियां चलती है

और आपके संकटों का निवारण कर दिया हैं और

आपके संकटों का ही क्या अपितु पूरे जो भी

व्यक्ति आता है उन सभी का निवारण कर दिया

समुदा लेकिन आपके पास यह ज्ञान नहीं होता

है इसी कारण से आपकी जो सवारी है वह कल

कोई भी कार्य नहीं कर पाती आपका साथ ही जब

आपके ऊपर सवारी आती है तो कुछ ऐसे नियम

होते हैं जिनका आपको पालन करना पड़ता है

लेकिन आपको उसका भी ज्ञान नहीं होता तो आप

उन नियमों का भी कोई पालन नहीं कर पाते और

कई बार ऐसा भी होता है कि जब आप का पालन

नहीं करते हैं

और जो पूजा-सेवा एक सवारी को चाहिए होती

है अगर आप उन नहीं कर पाते तो समय शरीर

छोड़कर चली भी जाती हैं ऐसे बहुत सारे

सब्सक्राइबर्स मेरे से प्रश्न करते हैं कि

मां पहले सवारी आती थी लेकिन अब नहीं आती

है सवारी अश्लील छोड़कर जा चुकी है हम

बहुत प्रयास कर चुके हैं लेकिन सवारी वापस

नहीं आती तो देखिए अगर एक बार सवारी चली

जाती है सवारी वापस नहीं आती है सवारी को

वापस लाना एक बहुत बड़ा कार्य होता है हम

तो इसको नामुमकिन मानते हैं अगर आप किसी

अच्छे व्यक्ति से बात करेंगे जो इसके

अच्छे विषय के जानकार होंगे वह भी आपको यह

उत्तर देंगे कि अगर सवारी एक देव तक जिस

देवता की सवारी आती है अगर वह शरीर छोड़कर

जा चुकी है तो उस देवता की सवारी का नाम

बहुत ही कठिन कार्य होता है लेकिन अन्य

देवता के अगर आप सेवन कर सकते करते हैं तो

अन्य देवताओं की सवारी तो आ सकती हैं

लेकिन उस देवता की सवारी करना बहुत ही

असंभव कार्य होता है

कि गुर्जर शक्तियां का जब समावेश होता है

आपके शरीर में तो उस समय पर आपको यह नहीं

पता होता कि सवारी को नियंत्रित कैसे किया

जाता है कैसे सवारी से वचन लिए जाते हैं

तो सब की जो मूल जड़ होती है आपके

अज्ञानता होती है और इसी अज्ञानता के कारण

आप अपने संकटों का निवारण नहीं कर पाते ना

ही आप शक्ति से वचन कर पाते हैं साथ ही जब

आपको सवारी आती है तो आप अपने क्या होते

हैं कुछ व्यक्तियों से होते हैं सवारी घर

में आती है शक्तियों का अपमान करते हैं

शक्तियों का सम्मान नहीं कर पाते उन्हें

लगता ही नहीं है उन्हें रखता है यह तो

हमारा सामान्य परिवार का सदस्य है इसका

क्या समाधान करना को इसको नाटक बताता है

को उसको ढूंढता है तो इस कारण से भी आप

अपने घर की परेशानी को दूर नहीं कर पाते

क्योंकि जहां देवता आती हैं जहां कोई भी

देवता है सवारी के रूप में वह सबसे पहले

यही होता है क्यों उसको सम्मान की

आवश्यकता होती है अगर आप उसका सम्मान नहीं

करेंगे तो आपका कोई भी कार्य वह नहीं बना

सकता कि

मैं तो आपको बहुत कुछ ज्ञान होना चाहिए

अपने कार्यों को सिद्ध करने के लिए और जब

आप किसी चौकी पर जाते हैं क्योंकि पर जाने

के बाद आपका काम तुरंत बन जाता है क्योंकि

वहां पर पहले से ही वह सभी शक्तियां

विराजमान होती हैं जो आपके कार्य को बनाने

के लिए सक्षम होती हैं तो वहां पर जो भक्त

होता है उसमें सभी शक्तियों को मना रखा

होता है वह सभी शक्तियां साथ मिलकर कार्य

करती हैं कोई कुछ कार्य करती है सभी

शक्तियों का अलग-अलग कार्यों तक कोई संकट

काटती है कोई प्रेत बाधा हटाती है वह सब

कुछ भी करते हैं कोई घर की समस्याओं को

दूर करती है जो भी परेशान होते सर्वर

शक्तियां मिलकर उस कार्य को करती हैं तो

यही अंतर होता है कि चौकी में और एक आपके

एक अकेले शरीर पर सवारियां में तो इसी

कारण से आप अपना कोई भी कार्य सिद्ध नहीं

कर पाते हैं और इसी कारण से इधर-उधर भटकते

भटकते आपको काफी समय हो जाता है और ना ही

आप अपनी सवारी को भी प्रबल कर पाती है तो

यह सभी कारण होते हैं मित्रों के आप अपने

संकट नहीं काटता कि अगर आप अपने संकट

काटना जाते हैं समस्याओं का निवारण चाहते

हैं तो किसी अच्छे गुरु से मिली किसी

अच्छे भक्तों से मिले जो आपका मार्गदर्शन

कर सके और आपकी जितनी भी परेशानी है उनका

निवारण आप स्वयं कर सके तो मित्र यह तो थी

जानकारी अब अपने सब्सक्राइब का प्रश्न

लेते हैं प्रश्न है

यह प्रश्न है गीता रावत जी का उन्होंने

मुझसे पूछा मां प्रणाम मां में शनिवार की

मां काली के व्रत रखती हूं मैं यह पूछना

था क्या मां कालका मां के व्रत करने से ही

होगा कि नहीं गाइड दोनों साथ में प्लीज

रिप्लाई मां कंफ्यूज वह बहुत में दोनों

माता की को बहुत मानती हूं जय मां कालका

जय मां भद्रकाली यह की पहली बात तो यह आप

शनिवार का व्रत रखती है शनिवार का दिन मां

काली कड़ी होता है और आप महाकाल का बोल

रही है मां शनिवार जैसे कि शनिवार का व्रत

रखती हैं मरकाली कभी रखती और मैं का यह

साथ दोनों में दिख सब कैसे रख सकती है

पहली चीज दूसरी चीज मां कालका और मां काली

एक है मालधन मां कालिका सौम्य स्वरूप है

तो इसलिए अगर आप एक व्रत करती है तो मक्खन

कस विमान जाती है बच्चे इसमें आपको कोई

परेशानी नहीं है आप व्रत करते जाइए मां का

ध्यान करते जाइए दोनों एक ही हैं लेकिन

मां कालिका मां कालिका शांत स्वरूप है बस

केवल इतना ही अंदर है बाकी शक्तियां यह

हैं

है अगला प्रश्न लेते हैं अगला प्रश्न है

बिलासपुर जी का इनाम है माताजी मां को

लौंग इलायची और गोल मिर्च से चढ़ा दी थी

दीवाली पर उसके बाद से मुझे डर लग रहा है

क्योंकि मां को बिना सोचे-समझे पहली बार

दिया यह चीज और अभी बुरे सपने आ रहे हैं

हम क्या करूं

पहली बात तो यह आपने यह भोग लगाया है लौंग

इलायची आपने सही लगा है लेकिन गोल मिर्च

का जो आपने भोग लगाया है वह मां को नहीं

लगाया जाता गोल मिर्च मार्ग को नहीं दी

जाती मां का यह भोग नहीं होता है तो इसी

कारण से आपने गलत भोग दिया है इसलिए आपको

यह बुरे सपने आ रही हैं तो इसके लिए आप

मां से क्षमा प्रार्थना करें मां से माफी

मांगे कि मुझे इसका ज्ञान नहीं था इसी

कारण से मैं नहीं है गलत वह आपको लगा दिया

है तो आप मेरी गलतियों को क्षमा कीजिए तो

माता रानी आपको शमा कर देंगे और जो आप कोई

बुरे सपने आ रहे हैं आपको यह सब ने भी आने

बंद हो जाएंगे तो मित्र यह तो थी जानकारी

और आपके प्रश्नों के उत्तर मां भगवती से

यही प्रार्थना करती हूं कि वह भंडारी

बढ़ती रहें आपकी सभी मनोकामनाओं को पूर्ण

करती रहेगी आपसे फिर मिलूंगी अपनी अनिल

वीडियो में तब तक के लिए जय महाकाली जय

महाकाल की

हुआ था

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