ये 4 प्रकार की भक्ति Maa Kali को स्वीकार नहीं है | Maa Ka Ashirwad - Kabrau Mogal Dham

ये 4 प्रकार की भक्ति Maa Kali को स्वीकार नहीं है | Maa Ka Ashirwad

ऐसी भक्ति को स्वीकार नहीं करती मां की

भक्ति उन्हें रोज भोग लगाना धूप दीप

उन्हें अर्पित करना पुष्प उन्हें अर्पित

करना मंत्र जपना इन सब चीजों से बहुत आगे

है बहुत गहरी है यह तो मां की भक्ति का एक

भौतिक स्वरूप है प्रारंभिक चरण है अभी तो

भक्ति के गहरे सागर में उतरना बाकी है उस

सागर में तैरना बाकी है और सफलता पूर्वक

अपने लक्ष्य पर पहुंचना अभी बाकी है तो आज

हम बहुत ही महत्त्वपूर्ण विषय के ऊपर बात

कर रहे हैं हैं आज इस वीडियो में हम

जानेंगे उन विशेष कारणों को जो हमें मां

के वास्तविक स्वरूप से परिचित होने से

रोकते हैं और जिनकी वजह से मां हमारी

भक्ति हमारी पूजा को स्वीकार नहीं करती

सबसे पहला पॉइंट किसी के अहित के लिए की

गई पूजा भक्ति किसी को कष्ट पहुंचाने के

लिए की गई भक्ति मां कभी स्वीकार नहीं

करती और इस प्रकार की भक्ति का बहुत ही

कठिन भयंकर परिणाम व्यक्ति को भुगतना

पड़ता है जो भी आपका विरोधी है चाहे वह

आपके संग कितना भी गलत कर रहा है उसके

अहित के लिए मां से प्रार्थना नहीं करें

क्योंकि वह भी मां की ही संतान है उसके

लिए स्वयं कुछ बुरा ना मांगे किस प्रकार

न्याय करना है यह मां पर छोड़ दें अगर मां

से उनके लिए मांगना ही है तो शत्रुओं को

सद्बुद्धि दे मां इस प्रकार मां से

प्रार्थना करें उनके चित्त की शांति के

लिए प्रार्थना करें और अपनी रक्षा के लिए

प्रार्थना करें किसी के अहित के लिए की गई

प्रार्थना भक्ति मां कभी स्वीकार नहीं

करती दूसरा महत्त्वपूर्ण पॉइंट कि दिखावे

और अहंकार से दूर रहे दिखावा और अहंकार इन

दो विकारों से ग्रसित व्यक्ति की सेवा मां

स्वीकार नहीं करती मां स्वयं भूली है बेहद

सरल है और भक्त यदि चालाकी का व्यवहार

करता है तो मां को ऐसी पूजा बिल्कुल

स्वीकार्य नहीं अहंकार सदा त्याज्य

साक्षात नरक स्य कारण अर्थात अहंकार का

सदैव त्याग करना चाहिए क्योंकि अहंकार

साक्षात नरक का कारण होता है और यह जो

अहंकार है अधिकतर हमारे अंदर छुपा हुआ

होता है जिसका बाहर से पता नहीं चलता कई

रूपों में हमारे अंदर विद्यमान होता दिए

हुए दान को बड़ा चढ़ाकर बताना अपनी भक्ति

का अहंकार कई लोगों को होता है वही

बड़ी-बड़ी साधनाएं करने वाले साधकों को

अपनी साधना का अहंकार हो जाता है दूसरों

को हीन समझना स्वयं को श्रेष्ठ समझना इस

प्रकार के भाव मां की कृपा प्राप्ति में

रोक लगाते हैं भले ही भारी रूप से आप नम्र

हो सकते हैं हबल हो सकते हैं क्योंकि मां

से जो आपका कनेक्शन है व आपके अंतर मन की

पवित्रता पर निर्भर करता है बाहरी आचरण

बाहरी व्यवहार पर नहीं जिस प्रकार एक

विद्यार्थी किसी प्रश्न के फंडामेंटल्स को

समझे बिना उत्तर को रटक परीक्षा तो दे

देता है हो सकता है कि नंबर भी अच्छे ले

आए लेकिन उसका ज्ञान खोकला होता है व्यर्थ

होता है उसी प्रकार मां के मर्म को समझे

बिना उनकी पूजा और भक्ति व्यर्थ हो जाती

है और फिर भक्त लोग निराश हो जाते हैं

उन्हें लगता है कि मां सुन नहीं रही है

क्योंकि दुर्भाग्यवश कई लोग रटक भक्ति

करते हैं पूजा साधना के नियम क्या हैं

विधि मंत्र का उच्चारण आदि यह सब रटक

भक्ति करते हैं और वास्तविक फल से वंचित

रह जाते हैं कई लोग मंत्र के शुद्ध

उच्चारण के लिए परेशान होते हैं कई लोग

माला असली है कि नकली इसके लिए परेशान है

तो कुछ लोगों की यह परेशानी होती है कि

उनका संकल्प खंडित हो गया लेकिन ठीक एक

विद्यार्थी की तरह अगर मां के मर्म को जो

फंडामेंटल्स है उनको समझकर आप मां को

प्रेम करेंगे तो समझ में आएगा कि विशाल

हृदय मां की भक्ति के लिए स्वयं में विशाल

हृदय धारण करना होगा फिर पूजा और भक्ति

में इस तरह की अशुद्धियां या भूलें आपको

प्रभावित नहीं करेंगी और मां इन चीजों से

कभी भी नाराज नहीं होती मां को सिर्फ मां

मानकर पूजा करें सिर्फ तंत्र की देवी या

प्रचंड शक्तियों की स्वामिनी मानकर उनकी

पूजा ना करें ठीक उसी प्रकार मां हमें माफ

करती है जिस प्रकार भौतिक जगत में एक शिशु

गलती करता है तो उसकी मां उसे माफ कर देती

है और हमेशा की तरह प्रेम करती है जब

पराशक्ति को एक मां के रूप में और स्वयं

को एक शिशु के रूप में आप देखेंगे तो इस

प्रकार के भयो से मुक्त हो जाएंगे और सही

रूप में मां से कनेक्ट हो पाएंगे अगला

बेहद महत्त्वपूर्ण पॉइंट जिसका यदि पालन

नहीं किया गया तो मां हमारी पूजा को कभी

स्वीकार नहीं करती और वह है कि अपने जन्म

देने वाले माता-पिता का सम्मान करना उनके

प्रति अपने कर्तव्यों का अपने

उत्तरदायित्व का बोध होना और उन्हें

निभाना आप मां के मंदिर में जाकर मां को

कितने ही आप भेंट अर्पित कर दो महंगी से

महंगी भट वस्तुएं वस्त्र आदि आभूषण आदि

उन्हें अर्पित कर दो कितना ही आप दिखावा

कर दो लेकिन यदि अपनी जन्म देने वाली मां

के प्रति आप सम्मान नहीं महसूस करते अपने

जन्म देने वाले पिता के प्रति यदि आपके मन

में आदर नहीं है तो मां ऐसी भक्ति को कभी

स्वीकार नहीं करती और ऐसे लोगों को तो मां

की भक्ति करनी भी नहीं चाहिए क्योंकि ऐसे

में उन्हें मां के कोप का भाजन बनना पड़ता

है जब हम इस मानव शरीर को धारण करते हैं

तो जन्म लेते साथ ही कुछ ऋण हमारे ऊपर आ

जाते हैं जिसमें मातृ ऋण और पितृ ऋण यह

बहुत ही बड़े ऋण होते हैं और यदि इन ऋणों

को हम नहीं चुकाते तो मां की भक्ति का

उनकी पूजा करने का उनके मंदिर जाने का

हमें कोई अधिकार नहीं जो लोग अपने

माता-पिता का त्याग कर देते हैं ऐसे लोगों

को आगे चलकर इसका भुगतान भी करना पड़ता है

और उनकी स्वयं की संतानें गलत रास्ते पर

जाती है और फिर ऐसे ही लोग मां की पूजा

आदि करके उन्हें बड़े-बड़े महंगे महंगी

भेंट देकर यह शिकायत करते हैं कि मां

हमारी सुनती नहीं और जहां तक मां को

चढ़ावा चढ़ाने की बात है तो मां स्वयं कुछ

नहीं मांगती मां के लिए एक रुपया भी

हजारों और लाखों रुपए के बराबर है अगर

भक्त का भाव सच्चा है अच्छा है मां सोने

चांदी के आभूषण ना तो मांगती हैं और ना ही

पहनती हैं भक्तों का भावही उनका सोना

चांदी है उनके लिए आभूषण है और उन्हीं को

वह आभूषण बना के पहनती भी है घर में यदि

मां रो रही है बहन रो रही है पैसे की

दिक्कत है और उनकी जरूरतें पूरी ना करके

आप मां के मंदिर में सोने चांदी के गहने

चढ़ा रहे हैं तो ऐसे गहने मां स्वीकार

नहीं करती और ऐसे भक्तों की पूजा पाठ

भक्ति सब व्यर्थ हो जाती है मां स्वीकार

नहीं करती पूजा का फिर फल प्राप्त नहीं

होता तो ऐसे भक्त बोलते हैं कि मां बहुत

परीक्षा लेती है या मां की पूजा करने का

फल हमें नहीं मिलता तो मां के प्रेम को

यदि प्राप्त करना है यदि भक्ति को फलित

करना है तो सर्वप्रथम अपने घर में जो आपके

माता-पिता हैं उनसे प्रेम करना सीखें और

साथ ही यह भी कहना चाहूंगी कि घर की

परिस्थिति को देखकर ही दान पेटी में दान

डाले मंदिर में घर में यदि परिस्थिति सही

नहीं है आर्थिक संकट है तो दान पेटी में

जो दान आप डालते हो मंदिरों में वह भी सोच

समझ कर डालें यदि सामर्थ्य है तो आप लाखों

रुपए मां पर चढ़ाइब खुशी की बात है लेकिन

यदि घर में संकट है पैसे नहीं है तो मां

को आपका ऐसा धन नहीं चाहिए और यह मां

स्वयं कहती है साथ ही यदि कोई गरीब आपसे

मदद की मांग कर रहा है पैसे की मांग कर

रहा है या किसी भी प्रकार की सहायता की

मांग कर रहा है तो उसकी सहायता पहले करें

तब मंत्र जप पूजा पाठ मां का करें क्योंकि

यदि सामर्थ्य वान होते हुए भी आप किसी ऐसे

व्यक्ति की मदद नहीं करते जो आपका मुंह

देख रहा है जिसकी आप मदद कर सकते हो और

फिर मां की पूजा करते हैं आप मंत्रों का

जप करते हैं बड़ी-बड़ी साधनाएं करते हैं

तो ऐसी साधना भी फलित नहीं होती कुछ समय

के लिए तो फलित हो जाएगी ऐसी पूजा साधना

लेकिन आगे चलकर यह सब व्यर्थ हो जाता है

अगला बहुत जरूरी पॉइंट कि मांस और मदिरा

इन दोनों चीजों के सेवन से दूर रहना चाहिए

यह दोनों चीजें मां की कृपा प्राप्ति में

बहुत बड़ी बाधा पैदा करती क्योंकि ये

दोनों चीजें हमारी एनर्जी बॉडी को दूषित

करती हैं बहुत सारे विकार हमारे अंदर पैदा

करती हैं किसी भी जीव की हत्या करके उससे

अपनी शुदा को शांत करना अपनी तृष्णा को

शांत करना यह बहुत बड़ा अपराध है निंदनीय

है साथ ही मदिरा सेवन यह उत्तेजना का कारण

है विभिन्न प्रकार के विकारों के पैदा

होने का कारण है जो भक्त के मन और शरीर को

विकार ग्रस्त कर देते हैं साथ ही परिवार

में और समाज में अशांति का कारण है और इस

प्रकार के उत्तेजित मन और शरीर के साथ की

गई साधना पूजा मां की इस प्रकार के दूषित

मन मस्तिष्क के साथ की गई मां की पूजा

साधना उनकी भक्ति को मां कभी स्वीकार नहीं

करती तो जिन लोगों को भी मां की पूजा और

भक्ति से कोई लाभ नहीं हो रहा है कई-कई

साल उन्होंने मां की भक्ति में लगा दिए

हैं तो हम सभी को अपने अंदर झांकने की

आवश्यकता है यह देखने की आवश्यकता है कि

कहीं हमारे आचार व्यवहार में हमारे जीवन

में इनमें से कोई भी एक कारण हमारे अंदर

पल तो नहीं रहा है क्योंकि जितना सत्य यह

वचन है कि मां के दरबार से भक्त कभी काली

हाथ नहीं जाते मां हमेशा अपने भक्तों पर

कृपालु होती हैं उनके दुख दर्द को समझती

हैं उतना ही यह वचन भी सत्य है कि इस

प्रकार के विकारों से ग्रस्त जो व्यक्ति

होते हैं उनकी भक्ति भी मां कभी स्वीकार

नहीं करती जिस प्रकार मां विशाल हृदय हैं

इंसानों में भेदभाव नहीं करती उनके रंग

रूप प्रतिष्ठा धर्म आदि के आधार पर मां

कभी भेद नहीं करती वह जगत जननी है सारी

संतानें उन्हें समान रूप से प्रिय हैं तो

मां की यदि कृपा प्राप्त करनी है तो वैसा

ही व्यवहार आपको उनकी संतानों से करना

होगा सभी से समान प्रेम करना होगा बिना

किसी भेदभाव के फिर देखिए कि नित्य घंटों

साधना पूजा करने के बाद भी जो फल हासिल

नहीं हो रहा है मां की भक्ति में वो थोड़े

समय मां की भक्ति करने से आपको प्राप्त

होगा मां की कृपा आप पर बरसेगी तो आज की

वीडियो में इतना ही दोस्तों अगली वीडियो

में बहुत जल्द मिलती हूं तब तक के लिए

अपना ध्यान रखें स्वस्थ रहे खुश रहे मस्त

रहे जय माता दी जय बजरंग हे

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