ये 3 परीक्षाएं जो Maa Kali के भक्तो की अवश्य होती हैं - Kabrau Mogal Dham

ये 3 परीक्षाएं जो Maa Kali के भक्तो की अवश्य होती हैं

नमस्कार दोस्तों आप सभी पर मां का

आशीर्वाद और बजरंग बली की कृपा सदैव बनी

रहे आज का हमारा विषय बहुत महत्वपूर्ण है

दो पॉइंट्स के ऊपर आज हम बात करेंगे पहला

मां काली अपने भक्तों की परीक्षाएं क्यों

लेती है और दूसरा वह तीन कौन सी कठिन

परीक्षाएं हैं जो अधिकतर भक्तों को देनी

होती है तो इन दोनों महत्त्वपूर्ण पॉइंट्स

को आज हम अपनी चर्चा में कवर करेंगे सबसे

पहला पॉइंट कि मां अपने भक्तों की

परीक्षाएं क्यों लेती है मां तो प्रीम

पावर है सर्वोच्च शक्ति है उनसे कुछ भी

छुपा नहीं है किस व्यक्ति में कितनी

सामर्थ्य है क्या भाव है और किस प्रकार के

भक्त प्रयास कर रहे हैं यह सब मा को पता

है तो फिर परीक्षा लेने के पीछे उद्देश्य

क्या है तो इन परीक्षाओं के द्वारा हमारे

अंदर के सारे विकार सारे ब्लॉकेजेस जो

हमारे आसपास है हमारे अंदर है वह समाप्त

होते हैं साथ ही हमारे संचित कर्म कटते

हैं और बिना कर्मों के कटे हुए उद्धार

व्यक्ति का संभव नहीं तो इस प्रकार से यह

जो परीक्षाएं हैं आप समझिए कि एक

शुद्धीकरण की प्रोसेस है

प्यूरिफाई करते हैं जितना हम ज्यादा

तैयारी करते हैं उतना ही ज्यादा हमारे

ब्रेन का विकास होता है हमारी बुद्धि का

डेवलपमेंट होता है उसी प्रकार ऊर्जा जगत

में भक्ति के क्षेत्र में अध्यात्म के

मार्ग में जितनी ज्यादा कड़ी परीक्षाओं से

हम गुजरते हैं उतना ही ज्यादा हमारी ऊर्जा

हमारा आभामंडल परिपक्व होता है और हमारी

भक्ति भी मां के प्रति उतनी ही गहरी होती

है और इन परीक्षाओं के द्वारा हमारी समझ

विकसित होती है खुद के प्रति भी और दूसरों

के प्रति भी और इन परीक्षाओं का एक एक

अनुभव एक एक बहुत बड़ा सबक होता है जो

हमें हमारे जीवन का और परम सत्य का असली

पाठ पढ़ाता है अब बात करते हैं कि यह तीन

प्रमुख परीक्षाएं कौन सी है जो अधिकतर

भक्तों को देनी होती है तो सबसे पहली जो

परीक्षा होती है कि जैसे जैसे हम साधना के

क्षेत्र में आगे बढ़ते हैं रास्ते कठिन

होते जाते हैं और प्रारंभिक चरण में तो यह

होता ही होता है साधना में भक्ति में शुरू

के जो कुछ साल होते हैं उस समय बहुत कड़ी

परीक्षाएं भक्तों की होती हैं और बहुत तरह

की बाधाएं पैदा होती है यानी शारीरिक कष्ट

बहुत बढ़ जाता है पूरे बदन में दर्द का

होना सर भारी होना शरीर में पीड़ा का होना

और कभी कभी तो यह जो शारीरिक कष्ट है बहुत

बढ़ जाता है कि पूजा स्थल पर बैठने में भी

असुविधा महसूस होती है ऐसा क्यों होता है

ऐसा इसीलिए होता है जैसे मैंने अभी बताया

कि हमारी

सर्जरी हो रही होती है हमारे ब्लॉकेजेस

हमारी पुरानी भावनात्मक गांठे जो हमारे

अंदर गहरे जड़े जमाए हुए हैं हमारे संचित

कर्मों के रूप में स्थित हैं वह कट रही

होती है तो यह तकलीफें शारीरिक कष्ट के

रूप में सामने आती हैं मानसिक कष्ट भी हो

सकता है भावनात्मक कष्ट हो सकता है इसके

अलावा घर में क्लेश की स्थिति बन सकती है

बेवजह तनाव घर में है इस प्रकार हो सकता

है और जिस वजह से भक्त गण साधक गण ध्यान

नहीं लगा पाते हैं और इन सब कष्टों से

चाहे वह मानसिक कष्ट है चाहे शारीरिक कष्ट

इनसे निपटने के लिए एक ही उपचार है कि

एनेस्थीसिया है वह निरंतर मां के मंत्रों

का जप अपने इष्ट के मंत्रों का जप उनके

प्रति पूर्ण समर्पण तो बहुत जल्द इस

स्थिति से हम लोग उभर कर बाहर आ जाते

हैं दूसरा पूजा और साधना का फल ना मिलना

या फल मिलने में देरी होना और यह परीक्षा

अधिकतर सभी भक्तों की होती है और साध धना

पूजा भक्ति मार्ग के जो प्रारंभिक साल

होते हैं उसमें ऐसा होता

है कि जीवन में कोई भी बदलाव नहीं आता

स्थिति और भी बुरी हो जाती है हर दिन एक

नई समस्या नई चुनौती सामने होती है और तब

ऐसे में भक्त लोग निराश हो जाते हैं

उन्हें लगता है मां सुन नहीं रही है लेकिन

ऐसा नहीं है मां सुन भी रही है देख भी रही

है और हर क्षण आपके मनोभावों को महसूस कर

रही हैं समझ रही हैं फल मिलने में देरी का

कारण होता है कि अ आपकी ऊर्जा का स्तर

जितना बढ़ना चाहिए उतना नहीं बढ़ा है अभी

आपकी स्पिरिचुअल अवेक निंग आध्यात्मिक

ग्रोथ जितनी होनी चाहिए उतनी नहीं है जिस

फल की जिस जीवन की आप आकांक्षा कर रहे हैं

अभी आपके कर्म उतने नहीं कटे हैं जितने

कटने चाहिए और जब ये सब चीजें हो जाती हैं

कट जाती हैं तो मां जब देंगी तो कुछ बड़ा

ही देंगी आपने एक छोटे बच्चे को देखा है

जो अपने पेरेंट से गाड़ी चलाने के लिए जिद

करता है वो चाबी मांगता है है तो क्या

माता-पिता इतने समर्थ नहीं है कि वह उसे

गाड़ी की चाबी दे दे वह समर्थ है लेकिन

चूंकि माता-पिता को पता है कि अभी उचित

समय नहीं है बच्चे का अभी वह इतना मैचोर

नहीं हुआ है कि गाड़ी चला सके अगर वह

गाड़ी चलाएगा तो एक्सीडेंट हो जाएगा बस

यही चीज समझ लीजिए कि भक्ति मार्ग में अगर

आप एक बार आ जाते हैं और मां से जुड़ जाते

हैं तो सही समय पर सही चीजें अवश्य होती

हैं बस थोड़ा धैर्य रखने की जरूरत होती है

थोड़ा कष्ट झेलना पड़ता है तीसरा जो पॉइंट

है जो तीसरी परीक्षा है यह भी कई भक्तों

के संग होती है कि सांसारिक आकर्षण भोग

विलास अपनी तरफ बहुत आकर्षित करते

हैं और यह तब होता है जब साधक लोग भक्त

लोग बहुत अच्छी तरह से अपने भक्ति मार्ग

में साधना मार्ग में आगे बढ़ चुके होते

हैं और बहुत अच्छी ऊर्जा वोह लोग अपनी

एकत्रित कर चुके होते हैं तब भी यह स्थिति

आती है आपने देखा है कि मछली जब भोजन की

तलाश में जाती है तो की तरफ आकर्षित हो

जाती है और जाल में फंस जाती है जहां से

वह नहीं निकल

पाती उसी प्रकार इस संसार में बहुत सारे

आकर्षण हैं जो साधकों के आगे भक्तों के

आगे लाए जाते हैं उनके विवेक की परीक्षा

के लिए और यह समय होता है जब आपके विवेक

की परीक्षा होती है बड़े-बड़े साधक अनुभवी

साधक भी कई बार इस माया जाल में उलझ जाते

हैं पर स्त्री के प्रति आकर्षण पर पुरुष

के प्रति आकर्षण सांसारिक भौतिक सुखों की

अत्यधिक चाह होना पैसे के प्रति मोह

उत्पन्न होना यह भी बाधा के रूप में अंदर

से प्रस्फुटित होने लगते हैं साथ ही

अहंकार का भाव भी पैदा होता है जो कई

साधकों के संग होते हैं क्योंकि मां की

भक्ति में बहुत सारे बहुमूल्य अनुभव

साधकों को होते हैं और उनकी ऊर्जा बढ़

जाती है बहुत तरह से मां मदद भी करती है

मां अपने आसपास होने का अनुभव भी कराती है

अब जो जागरूक साधक हैं वह तो अपने विवेक

का प्रयोग करते हैं और इस अहंकार से मुक्त

होने का प्रयास करते हैं और इस अहंकार से

लोभ लालच से परे चले जाते हैं मां के

आशीर्वाद से मां की कृपा से लेकिन वही कुछ

ऐसे भी होते हैं जो विवेक का प्रयोग नहीं

कर पाते हैं और साधना में जो उन्हें कुछ

अनुभव हो रहे हैं या उन्हें उपस्थिति मां

की महसूस हो रही है उनकी ऊर्जा आसपास

महसूस हो रही है इसको ही परम सत्य मान

लेते हैं अंतिम सत्य मान लेते हैं उन्हें

लगता है कि अब सब कुछ मिल गया ऐसा नहीं है

यह तो आपकी साधना का जो चल रहा है पथ चल

रहा है उसके बीच के पड़ाव हैं अभी तो

अंतिम लक्ष्य पहुंचने में आपका बहुत समय

है तो ये लोग भटक जाते हैं अहंकार की

स्थिति पैदा हो जाती है और जो ऊर्जा

उन्होंने नाम जप से एकत्रित करी है वो

ऊर्जा क्षीण हो जाती है तो यह तीन

परीक्षाएं कड़ी परीक्षाएं भक्तों की होती

हैं और इस समय सावधान रहने की जरूरत है आज

की वीडियो में इतना ही दोस्तों अगली

वीडियो में बहुत जल्द मिलती हूं तब तक के

लिए अपना ध्यान रखें स्वस्थ रहें खुश रहें

मस्त रहे जय माता दी जय बजरंग

बली

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