मोदी ऐसा खतरनाक खेल क्यों खेलना चाहते हैं ॥ Politics ॥ Modi - Kabrau Mogal Dham

मोदी ऐसा खतरनाक खेल क्यों खेलना चाहते हैं ॥ Politics ॥ Modi

अब जी अगर कमलनाथ चले गए बीजेपी में तो
मध्य प्रदेश में क्या होगा कांग्रेस का
चुनावी हार के बाद में कमलनाथ के परर बहुत
सारे आरोप है कांग्रेस ने अभी उन्ह लिखित

रूप से जवाब नहीं मांगा उने ले धीरे धीरे
जो प्रमोद कृष्णम के साथ किया है उससे
मिलता जुलती कारवाही कमलनाथ के साथ भी
करनी होगी कांग्रेस को देना दूर नहीं है

जो कुछ घटनाक्रम हुआ है बिहार में तेजस्वी
का भाषण रणनीति रात में तेजस्वी घर पुलिस
का जाना इसके संकेत क्या है क्या बिहार की
राजनीति में भारतीय जन पार्टी यानी एनडीए

के गठबंधन को फायदा हुआ सेना भारतीय जनता
पार्टी के और नीतीश कुमार जनता दल
यूनाइटेड के है इनकी जो हास्यास्पद स्थिति
है उन्होने जिस तरीके से लोकतंत्र को एक

मजाक की वस्तु बनाक रख दिया है इस बात को
रेखांकित कर रहे और सबसे ज्यादा मुझे उनके
भाषण में जो बात लगी उन्होंने यह साबित कर
दिया अपने भाषण में नीतीश कुमार के पास

महागठबंधन छोड़ने का कोई कारण नहीं मध्य
प्रदेश से खबर तो आ रही है कि कमलनाथ पर
भी बीजेपी डोर डाल रही है कमलनाथ बीजेपी
में आ जाए

नमस्कार  आप देख रहे हैं 4
पीएम न्यूज
नेटवर्क बिहार में जो कुछ हुआ उसने काफी
सारे नए समीकरण पैदा कर दिए तेजस्वी के
भाषण की हर तरफ चर्चा हुई बिहार निपटा और

गुजरात लॉबी नए शिकार की तलाश में लग
गई महाराष्ट्र के में कांग्रेस के पूर्व
मुख्यमंत्री ने इस्तीफा दिया अब गुजरात
लॉबी मध्य प्रदेश में पहुंची है

ऑपरेशन लोटस की तैयारी है निशाने पर
कमलनाथ है क्या होगा क्या नया गुल मध्य
प्रदेश में खिलेगा मध्य प्रदेश संघ का और
भाजपा का प्रयोगशाला रही है एक लंबे समय

से किसान बड़ी तैयारियों के साथ दिल्ली आ
रहे हैं किसान आंदोलन अगर भड़क गया तो यह
मोदी सरकार के लिए बहुत बड़ा नासूर बन
जाएगा इस बार किसानों के साथ मजदूर हैं
स्टूडेंट्स हैं और तरह-तरह के

ऑर्गेनाइजेशन है कांग्रेस ने इसको खुला
समर्थन देने की घोषणा कर दी है मोदी सरकार
के तीन-तीन मंत्री लगाए गए हैं कि किसी
तरह से किसानों से बात कर लो यह आंदोलन

भड़के नहीं यह आंदोलन शांत हो जाए लेकिन
बड़ा सवाल यह है कि जब चुनाव की दरी पर
खड़ी है भारतीय जनता पार्टी जब कांग्रेस
के नेताओं को चुनचुन के तोड़ने में लगी है

भारतीय जनता पार्टी तो क्या वह एक ऐसे
बड़े आंदोलन का सामना करना पसंद करेगी और
किसानों की अगर मांगे नहीं मांगी गई तो यह
पहले वाला दौर नहीं है जब 700 800 किसानों

ने अपनी जान दे दी उन पर लाठी चार्ज हुआ
आंसू गैस के गोले छोड़े गए इस बार किसान
आरपार की लड़ाई लड़ना चाहते हैं किसानों

ने अपने उन चेहरों को पीछे कर दिया है जो
किसान नेता सरकारों के एजेंट बताए जाते
हैं सरकारों के साथ डीलिंग करना चाहते हैं
नाम आप सब जानते हैं कई किसान नेताओं ने

मेरे मंच पर आकर भी यह कहा है कि हमारे
बीच के कुछ किसान किन नेता ऐसे हैं
जिन्हें गोदी मीडिया बहुत दिखाता है किसान
नेता के रूप में दिखाता है और वह सरकार के

साथ पर्दे के पीछे खेल करते हैं क्या होगा
इन सारी बातों का यह मैं विस्तार से
बातचीत करूंगा प्रोफेसर अभय दुबे जी के
साथ देश के वो जानेमाने पत्रकार जो तमाम

बड़े-बड़े टीवी चैनल पर आपको दिखाई देते
हैं रहते हैं बहुत बढ़िया बात करते हैं
बहुत बढ़िया विस्तार के साथ अपनी बात करते

हैं कई किताबें लिखी हैं राजनीति और
सामाजिक सरोकारों से बहुत जुड़े रहते हैं
प्रोफेसर अय दुबे चलते हैं और इन सारी
बातों के संग आज आपको कई बड़े खुलासे करते

हैं पूरा इंटरव्यू सुनिए आपको मजा आएगा
चैनल को जवाइन कीजिएगा सब्सक्राइब करिएगा
स्वागत है 4 पीएम न्यूज नेटवर्क पर अभय
दवे जी आपका और बिहार पर जब अविश्वास

प्रस्ताव की बात चल रही थी तो हम पूरा देश
आपको एवीपी चैनल पर सुन रहा था आप बहुत
अच्छे बोल भी रहे थे बिहार में जो तेजस्वी
ने भाषण दिया भाषण की बड़ी चर्चा है जो

कुछ घटनाक्रम हुआ है बिहार में तेजस्वी का
भाषण रणनीति रात में तेजस्वी घर पुलिस का
जाना इसके संकेत क्या है क्या बिहार की
राजनीति में भारतीय जनता पार्टी यानी

एनडीए के गठबंधन को फायदा हुआ तेजस्वी ने
जो खेल खेला कि ओल्ड पेंशन स्कीम लागू कर
दीजिए मुख्यमंत्री जी तो
ओपीएसईसी थी हमें नौकरी दे दी इस पूरे

घटनाक्रम पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है कि
यह पूरा जो घटनाक्रम हुआ ये किसको फायदा
पहुंचाया और किसको
नुकसान देखिए तेजस्वी यादव का भाषण सुनते

वक्त मैं यह सोच रहा था कि इस समय
राष्ट्रीय जनता दल अपने सहयोगी दलों के
साथ में वामपंथी दलों के साथ में और
कांग्रेस के साथ में बिहार में काफी

आत्मविश्वास की स्थिति में है जो पहले य
समझा जा रहा था कि नीतीश कुमार के पाला
बदलने से इनका आत्मविश्वास डगमगा गया होगा
और 2000

14 मेंब नीतीश कुमार और लालू यादव अलग अलग
लड़े थे उस भारतीय जनता पार्टी ने बहुत
बुरी तरीके से
हराया तो उसी तरह की बात समझी जा रही थी

कि इस बार फिर इन दोनों के अलग अलग होने
से काफी बुरी पराजय होगी और भारतीय जनता
पार्टी बहुत जबरदस्त रूप से चुनाव जीतेगी
लेकिन जिस तरह से तेजस्वी यादव ने अपने

भाषण मेरे ख्याल से अविश्वास प्रस्ताव
रखने के बाद में पहला भाषण तेजस्वी यादव
का ही विश्वास रखा गया कि हम इस नीतीश
कुमार की सरकार में सदन विश्वास व्यक्त

करता है तो उस पहला भाषण नीतीश कुमार सॉरी
तेजस्वी यादव का ही था और उन्होंने जिस
तरीके से वक्तव्य अपना दिया उसी से समझ
में आ गया कि वोह किस तरीके उनकी सोचने की

प्रक्रिया क्या है उनकी देह भाषा उनकी
बॉडी लैंग्वेज क्या है सब कुछ विश्वास से
लबालब भरा हुआ था वो आक्रामक भी नहीं थे
और लेकिन वो अपनी बात को इस तरीके से पेश

कर रहे जैसे एक अतिशय आक्रामकता होती है
विरोध करते में वो वैसी बात नहीं थी अपने
बात को बहुत ही अच्छे तरीके से पेश कर रहे
थे मसलन उन्होंने यह बताया दिखाया पहले कि
नीतीश कुमार और विजय

सिन्हा यह
लोग एक पाच साल के एक एक कार्यकाल
में नीतीश कुमार तीन बार मु तीसरी बार
मुख्यमंत्री की शपथ ले रहे और विजय सेना

कौन-कौन से पदों पर उप मुख्यमंत्री बनने
से पहले किनन
पों इन लोगों की जो एक हास्यास्पद स्थिति
है विसेना भारतीय जनता पार्टी के और नीतीश
कुमार जनता दल यूनाइटेड के हैं इनकी जो

हास्यास्पद स्थिति है उन्होने जिस तरीके
से लोकतंत्र को एक मजाक की वस्तु बनाक रख
दिया है व इस बात को रेखांकित कर रहे थे
और सबसे ज्यादा मुझे उनके भाषण में जो बात

लगी उन्होंने यह साबित कर दिया अपने भाषण
में नीतीश कुमार के पास महागठबंधन छोड़ने
का कोई कारण
नहीं उन्होने कहा कि भाई आपने कहा हमारा

मन नहीं लग रहा था आपका मन नहीं लग रहा था
तो आप हमसे कहे होते हमें तो आप अपने बेटे
की तरह सब जगह पेश कर रहे थे और हम भी
आपके चरण छूते थे हम

भी आपके नेतृत्व में हम काम कर रहे
थे एक बार तो आपने कहा होता नीतीश कुमार
के पास उन्होने बताया कि पिछली पिछली बार
जब आपने पाले बदले थे तब आपके पास कौन-कौन

से कारण थे वो कारण तो इस बार नहीं थे
आपके जिन कारण से आपने पाला बदला देखिए
तेजस्वी यादव की ये बात मैंने खास तौर से
इसलिए मार्क की क् उससे मेरा वो तर्क सही

साबित होता है कि अगर नीतीश कुमार
को
कांग्रेस पटना की बैठक में ही या उसके
तुरंत बाद किसी दूसरी बैठक में संयोजक बना
देती देर सवेर ये तब भी छोड़ते

इंडिया और उस वक्त सर्वनाश हो जाता हां
इंडिया गठबंधन ही खम हो जाता तो बिल्कुल
ही साफ हो जाता मैदान पहले मैं इस राय का
था कि उन्हे अगर संयोजक बना दिया जाता तो

शायद वो ना छोड़ते लेकिन अब मुझे लग लग
रहा है अगर संयोजक बना भी दिया जाता तब भी
वो छोड़ते क्योंकि वो दर असल भारतीय जनता
पार्टी नरेंद्र मोदी के अंडर कवर एजेंट

थे जैसा कि मैंने कल आपसे कहा भी दूसरे
अंडर कवर एजेंट केसी त्यागी थे वो नीतीश
कुमार के अंडरकवर एजेंट थे जो मीडिया में
मीडिया में पेश होते तो ये जो तेजस्वी

यादव के लेक्चर से ये बात साफ निकलकर
सामने आ गई दूसरी महत्त्वपूर्ण बात
उन्होंने जो कही वो तो मेरे ख्याल से
बिहार की राजनीतिक इतिहास में इस्तेमाल

किया जाने वाला सबसे बेहतरीन और दमदार
जुमला साबित होगा जब उन्होंने कहा कि मोदी
जी बड़ी पक्की गारंटी दे रहे हैं लेकिन
क्या ये गारंटी मोदी देंगे कि ये फिर से
पलट नहीं दोरा

पलट फिर से नहीं पलट तो यह सब जो उन्होंने
किया फिर उन्होंने जसे आपने खुद भी कहा
अपनी भूमिका में कि उन्होंने एक तो रोजगार
के सवाल के ऊपर बहुत

जोर यही रोजगार का सवाल उन्हे लालू यादव
के बेटे से बेटे की सीमाओं से बाहर
निकालकर स्वतंत्र रूप से नेतृत्व की
दावेदारी करने वाला बिहार का नौजवान उभरता

हुआ नौजवान नेता इसी रोजगारी रोजगार के
मुद्दे ने बनाया है यही रोजगार का मुद्दा
केवल अपनी दम पर बिना किसी दूसरे दल की
मदद से राष्ट्रीय जनता दल को बिहार का

सबसे बड़ा दल बनाया उसने पिछले विधानसभा
चुनाव तो रोजगार के मुद्दे को उन्होंने
रेखांकित किया उस पर उन्होंने जोर दिया
फिर ओल्ड पेंशन स्कीम के सवाल को रेखांकित

किया उसके ऊपर जोर दिया और जिस तरीके से
भारत रत्न को सौदेबाजी का औजार बना दिया
है भारतीय जनता पार्टी ने वह बात भी
उन्होने कही देखिए तमाम बातों के ऊपर हम

लोग सब चर्चा करते रहे हैं मुझे अब है जी
अब ये इस घटनाक्रम के आगे चलते हैं आज के
भाषण का ओल्ड पेंशन स्कीम की बातों का इन
सबका आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति

पर किस तरह कैसे असर पड़ेगा यह थोड़ा
विस्तार से समझा भाई देखिए मुझे लगता है
कि आत्मविश्वास काफी है और और उनके पास
कार्यकर्ताओं कार्यकर्ता जमके हैं और

नीतीश जी को छोड़कर जिनका ग्राफ लगातार
गिर रहा था जिनको उन्होंने एक थका हुआ
मुख्यमंत्री कहा गिर रहा था मुझे लगता है

कि महागठबंधन बहुत जमकर भारतीय जनता
पार्टी का लोकसभा चुनाव में मुकाबला करेगा
अभी दो सर्वे आए हैं देश का मूड आया आज तक
के ऊपर उससे पहले सी वोटर का एबीपी सर्वे

आया था दोनों जगह जब सी वडर का सर्वे आया
था तब नीतीश कुमार ने पालन नहीं बदला
अब जब यहां पर आया तो नीतीश कुमार पाला

बदल की पाला बदल चुके थे उस हालत में भी
यह आज तक का सर्वे वही दिखाता है जो कि
एवीपी प आया था कि महागठबंधन अभी भी
भारतीय जनता पार्टी से आगे

है यह सब करने के बावजूद भी महागठबंधन आगे
है या जो मुझे लगता है कि भारतीय जनता
पार्टी का बिहार में समस्या हल नहीं
हुई यानी जो 39 सीटें मिली थी इस बार वो

सीटों में कमी आई सीट तो नहीं मिलेंगी
उसका मैंने कल भी इस बात को बताने की
कोशिश की थी कि 39 सीटें जिस परिस्थिति
में मिली थी वह परिस्थिति अब है
नहीं 39 सीट तब मिली थी जबक एनडीए में

मुख्य त एनडीए में केवल तीन दल थे एक राम
विलास पासवान की लोक जनशक्ति
पार्टी नीतीश कुमार का जनता दल एकही एक
एकीकृत और भारतीय जनता पार्टी तीन दल थे

तो उन लोगों ने तीन हिस्सों में बांट लिया
था तो आप आज स्थि नहीं है आज तीन दल तो यह
है लोक जनशक्ति पार्टी दो हिस में बट गई
है उपेंद्र कुशवाहा का दल है जितेंद्र राम

माझी का दल है मुकेश सहनी का दल है तो चार
दल तो वो है और छह दल है और सीटों का
बटवारा होगा और छ दलो में आपस में कोई
विश्वास नहीं है किसी तरह

का वही पर
तो तेजस्वी ने ित माझी के ऊपर भी कटाक्ष
किया था दवा खिला बगल में कमरा लेक रहि और
अच्छी दवा खिलाई है आपने कहा था गलत दवा
दी जा रही है तो वो आपस में लोगों में कोई

विश्वास नहीं है नीतीश कुमार
के एनडीए में आने से कोई खुश
नहीं और यह भी तक यह तक खा जा रहा है
तबीयत भी बहुत खराब है और जिस तरीके से यह

बोलते बोलते अपना पेट खुजलाने लगते हैं
जिस तरीके से इनका मुंह चलता है एक बहुत
ही कमजोर और स्नायु रोगों के शिकार
व्यक्ति की तरह उससे भी लगता है कि इनकी

स्थिति निजी स्थिति इनकी राजनीतिक स्थिति
इनके दल की स्थिति इनके एनडीए में इनकी
स्टैंडिंग है हैसियत है इस वो सारी की
सारी काफी खराब हालत में है तो नी कुमार

आपको ल नीज जी जो बचा हुआ सवा साल एक साल
है अभी यह कार्यकाल पूरा कर पाएंगे या फिर
चिराग पासवान मांझी और बाकी जेडी के
विधायक कुछ गुल खिलाएंगे मतलब ये अभी एक

साल सरकार चल पाएगी हम लगता है कि अभी
लोकसभा चुनाव तक तो कोई गुल नहीं खिलाया
जाएगा दो महीने और लोकसभा चुनाव तक यह
मामला चलेगा और लोकसभा चुनाव के नतीजों के

बाद में फिर तुरंत विधानसभा की सीटों की
विधानसभा की सीटों के बारे में नेगोशिएशन
शुरू हो जाएंगे बैक चैनल नेगो शुरू हो
जाएंगे सामने तो नहीं अभी वैसे विधानसभा

में काफी देर है तो वो शुरू हो जाएंगे
क्योंकि वो विधानसभा का चुनाव शायद बिहार
विधानसभा का अगले साल 2025 में अक्टूबर
में जाकर

होगा मोदी जी को चिंता है बिहार की कपूरी
ठाकुर जी के परिजनों से मिलना मुलाकात
करना व सब उनको लग रहा है कि बिहार कहीं
फस सकता

है नहीं बिहार में तो लोकसभा चुनाव फसा
हुआ है ही लोकसभा चुनाव उस तरीके से एक
तरफा नहीं है जिस तरीके से लालू नीति अलग
अलग हो जाते थे चुनाव एक तरफा हो जाता था

इस 2019 में भी एक तरफा हो गया था और 2014
में भी एक तरफा था बिहार में चुनाव उस
तरीके से एक तरफा नहीं है देखिए तेजस्वी
ने जो भाषण दिया है वो भारत बरी नहीं देश

की राजनीति में राजनीति में दिए गए हाल के
प्रमुख अच्छे भाषणों में से एक गिना
जाएगा इतना अच्छा अपना गठजोड़ टूट जाने के
बाद में इस आत्मविश्वास के साथ और बिल्कुल
उन्होंने अपने विरोधियों को लाजवाब कर

दिया आप देखिए विजय सेन्ना ने जो भाषण
दिया आप उसको देखिए ना उसम उससे तो
बिल्कुल साफ था कि वो पुरानी जो बीजेपी
कहती रही है उसी बात को दोहरा रहे हैं भाई

आपके ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप
है यही तो वो कह रहे हैं बकुल कह रहे
भ्रष्टाचार के आरोप है इसके अलावा उन्होने
और क्या कहा कुछ कोई नया आरोप नहीं था

चलते हैं बिहार के बाद चलते हैं
महाराष्ट्र कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है
उनके पूर्व सीएम ने पार्टी छोड़ी है
बीजेपी में चले ही जाएंगे बीजेपी इतनी

व्याकुल क्यों है कांग्रेस के नेताओं को
लाला के भर क्यों रही है महाराष्ट्र में
दोन य ये बात य ये हालात जो है वो दोनों
तरफ से है एक तो भारतीय जनता पार्टी हर

बार चुनाव से पहले बड़े पैमाने पर विपक्षी
दलों से दल बदल करवाती है भाजपा का मानना
है इससे उसकी हवा बनती है क् जो पार्टी
ताकतवर होती है जिसको लोग जीतता हुआ मानते
हैं दल बदल उसी में होता

है दूसरी तरफ जिस पार्टी का आला कमान
कमजोर होता है अपने पार्टी के संगठन पर
कब्जा नहीं होता है वह भी नेताओं को जाने
से रोक नहीं

पाते तो मल्लिकार्जुन खरगे के अध्यक्ष
बनने के बाद मुझे लगा था व्यक्तिगत रूप से
कि कांग्रेस की सांगठनिक हालत ठीक होगी ले
जैसे उन्होने तीन विधानसभाओं के चुनाव

उसके बाद से कांग्रेस में कुछ भी ठीक नहीं
चल रहा
है कांग्रेस को पहले से पता था कि अशोक
चौहाण पार्टी छोड़ सकते अशोक चौहाण के

अकेले व्यक्ति नहीं है पार्टी छोड़ेंगे तो
अकेला व्यक्ति के र पार्टी नहीं
छोड़ेंगे उनका एक बहुत बड़ा प्रभाव
क्षेत्र है अशोक

चौहाण और उस प्रभाव क्षेत्र में वह बहुत
सारे लोगों को बहुत सारे मतदाताओं को अपने
साथ लेकर जाएंगे भारतीय जनता पार्टी अभी
उन्होने इसकी औपचारिक घोषणा नहीं की है
आप देखिए उनकी पत्नी कांग्रेस से विधायक

हैं उनका बेटा कांग्रेस की तरफ कांग्रेस
के युवा कांग्रेस का अध्यक्ष
है खुद उनकी बहुत बड़ी हैसियत है उनके
पिताजी शंकर राव चौहाण के जमाने से उनकी
हैसियत है वह खुद भी मंत्री रह चुके हैं

एक बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं उनके
पिताजी भी मुख्यमंत्री रह चुके थे तो वो
अशोक चौहाण का जाना महाराष्ट्र कांग्रेस

के लिए एक बहुत बड़ा झटका है मैं य मानता
हूं और महाराष्ट्र कांग्रेस को चाहिए था
कांग्रेस को चाहिए था अशोक चौहाण को किसी
तरीके से रोकते अशोक चौहाण दरअसल जो

कांग्रेस के वहां के अध्यक्ष है इस वक्त
नाना पटोले उसके काम उनके कामकाज की शैली
से भी काफी नाराज थे और उन्होंने कई बार
आला कमान को उसकी शिकायत भी की थी लेन

जैसा कि आला कमान कांग्रेस का आला कमान है
आजकल कि वह कोई भी उससे कुछ कहता रहे वो
अपने अपनी धुन में चलता रहता है वो लोगों
की शिकायतों पर ध्यान नहीं देता उन यतो का

निपटारा नहीं होता कोई अर्जी लेकर जाता है
तो मलिकार्जुन खरगे को देता है तो
मल्लिकार्जुन खरगे उसे केसी वेण गोपाल के
नाम मार्क कर देते हैं उस

अजी और फिर वो अर्जी वहां चली जाती है फिर
उसका आता पता नहीं चलता कि वो अर्जी उस
अर्जी पर क्या एक्शन लिया गया क्या कारवाई
की गई कुछ पता नहीं चलता जिन संगठनों में

इस तरह की स्थिति हो जाती है वहां से
सत्ताधारी दल को दलबदल कराना सबसे ज्यादा
आसान लगता है आप देखते हैं आम आदमी पार्टी
से कांग्रेस में कोई दलबदल नहीं होता

हालाकि आम आदमी पार्टी केवल दो राज्यों
में सरकार लेकिन वहां से कोई दलबदल नहीं
होता दलबदल ज्यादातर ऐसी जगहो पर होता है
जहां पर आला कमांड ढीला ढाला हो और आंख

बंद करके सो रहा हो आप य देखिए शिवसेना
कैसे
टूटी शिवसेना उद्धव ठाकरे अच्छे
मुख्यमंत्री थे नेक आदमी है इसमें कोई शक
नहीं मुख्यमंत्री के तौर पर उनकी रेटिंग

भी आई थी लेकिन पॉलिटिक्स में जिस तरीके
से आपको सतर्क रहना चाहिए हमेशा और जिस
जिस जिसस जिनके आप नेता है उन पर आपकी
कड़ी निगाह रहनी चाहिए त बड़े पैमाने पर

लोग हवाई जहाज में बैठकर चले
गए चार्ट प्लेन में बैठ के चले गए लेन
उद्धव ठाकरे को उसका पता नहीं चला तो
शिवसेना टूट गई एनसीपी के बारे में तो

मेरा मानना यह है कि उसके उसम जो स्प्लिट
हुआ है उस स्प्लिट में शरद पवार की भी
भूमिका है शरद पवार दरअसल दोनों दो घोड़ों
की सवारी कर रहे हैं एक

साथ कभी मौका पड़ा तो अजत पवार उनके साथ
वापस चले जाएंगे और दूसरा मौका पड़ा शरद
पवार उधर चले जाएंगे तो व वो उस स्प्लिट
का तो उस स्लिट की स्थिति तो

अच्छा ये अच्छी बात कही आपने की शरद पवार
इधर भी है शरद पवार उधर भी है व शरद पवार
की मर्जी की स्ट नहीं हो सकता था
उस आप देखिए ना स्ट के बाद भी तो कितने

बार उनके पास गए चुपचाप कमरे में ईई घंटे
तक बातचीत
की हा ये बात तो ठीक है
कि के साथ में तीन घंटे तक बातचीत कर चुके
हैं िया बातचीत जिसका आज तक पता नहीं चला

उन्होंने क्या बातचीत की हां अडानी के
संबंध तो बहुत अच्छे हैं अनी को अनी को
अदानी को जब अदानी संकट में थे उस वक्त
उनको बचाने में शरद पवार के बयान ने बहुत

बड़ी भूमिका का निर्वाह किया था सारा
माहौल बदल दिया था एक बार एक बार बल दिया
था तो वो तो शरद पवार की राजनीति बहुत
रहस्यमय
है और अब देखिए अब हमें और आप जैसे लोगों

को इस बात के लिए सतर्क हो जाना चाहिए कि
हम जिस व्यक्ति का फेस वैल्यू पर बयान
सुनकर अपनी समीक्षा कर रहे हैं यह मान के
कि भाई वो इस तरफ है या उस तरफ कुछ पता

नहीं कि वो आज हम कुछ कह रहे हैं कल उस
तरफ चला चला जाए इस बीच में कई बार ऐसा हो
चुका
है यानी नेताओं की विश्वसनीयता बहुत कम हो

गई है समाज
में देखिए आप आप सोच रहे हैं कि ये आदमी
डॉक्टर लोहिया का नाम ले रहा है ये चरण
सिंह जी का नाम ले रहा है नरेंद्र देव का
नाम ले रहा है मदले

का नाम ले रहा है जय प्रकाश ण का नाम ले
रहा है और कल फिर पता चला वो कह रहा है कि
नीतीश कुमार को विश्वास मिल गया तो ये
लोकतंत्र की सबसे बड़ी जीत है

सही बात है परिवर्तन कब किसका दिल कहां
चला जाए कुछ क अभी देखिए पूरे फरवरी की
फरवरी के महीने में जितने दिन बचे हैं और
15 मार्च तक या मार्च के उस थोड़े दिन बाद

तक भी 15 मार्च के बाद भी इस तरह की
तब्दीलियां होती रहेंगी हर नए दिन नए नेता
का नाम आता है कि वह पाला बदलने के लिए
तैयार बैठा हुआ

है और फिर अभी तक मीडिया में जिन लोगों का
नाम आया है वो दरअसल पाला उन्होंने बदल ही
लिया
है हां जयंत ने कह ही दिया कि हम एनडीए

में जा रहे कमलनाथ का बेटा निश्चित रूप से
बीजेपी में
जाएगा कमलनाथ रना कमलनाथ कमलनाथ नहीं
कमलनाथ का बेटा जाएगा और म प्रदेश से खबर

तो आ रही
है मध्य प्रदेश से खबर तो आ रही है कि
कमलनाथ प भी बीजेपी डोरो डाल रही है कि
कमलनाथ बीजेपी में आ जाए बिल्कुल बिल्कुल
अच्छा कांग्रेस भी गजब कर रही है उनके

प्रवक्ता आलो शर्मा एक दिन मेरे संग
इंटरव्यू में उन्होंने कमलनाथ के बारे में
वो बात कही जो समाज में है जो मध्य प्रदेश
के गली मले में है कांग्रेस ने उल्टा आलोक

शर्मा को नोटिस पकड़ा दिया कि आप कमलनाथ
के लिए क्यों कह रहे हैं कमलनाथ ने मदे
लगाइए जब आलोक जी ने यह बात कही होगी तो
कुछ सोच के ही कहा होगा मैं उनके साथ मेरे

ख्याल से पस कार्यक्रम कर चुका हूं टीवी
के ऊपर और वह बहुत जिम्मेदार प्रवक्ता है
और बहुत अच्छे तरीके
से कांग्रेस का पक्ष रखते रहे हैं अब आजकल

उस नोटिस के बाद में उनको कांग्रेस फील्ड
नहीं कर रही है प्रवक्ता के रूप में उ
दिखाई नहीं पड़ रहे हैं मंचों पर कांग्रेस
का नुकसान है हा बहुत अच्छे बहुत सीजें
टाइप के प्रवक्ता बहुत अच्छ कमलनाथ तो

जाने के लिए तैयार बैठे देर सवेर की बात
है देखिए वो बिजनेसमैन
है उनके बहुत सी फाइल होंगी जो इधर उधर
कांग्रेस के पास होंगी व भाजपा के पास
होंगी उनके बहुत सारे बिजनेस इंटरेस्ट है

जो कि चक्कर में फस सकते हैं कोई कुछ नहीं
कह सकता क्या होगा इस वक्त और देखिए जब
कोई पार्टी अपना विस्तार करती है
सत्ताधारी पार्टी विस्तार करती है तब वो

बड़े पैमाने पर दलबदल की तकनीक अपनाती है
कांग्रेस भी अपने जमाने में अपनाती थी वो
रिपब्लिकन पार्टी को तोड़ दिया था
कांग्रेस ने कम्युनिस्ट पार्टी की
बड़े-बड़े नेताओं को अपनी ओर खींच लिया था

कांग्रेस नेमाम दलित नेताओं को अपनी ओर
खींच लिया था तो कांग्रेस में ये सब काम
करती थी कांग्रेस का तरीका दूसरा था उस
वक्त भारत की राजनीति अलग तरह की थी

मीडिया का साइज भी इतना नहीं था किसी बात
पर इतना हंगामा नहीं था भजनलाल तो पूरी
पूरी सरकार के साथ कांग्रेस में शामिल हो
गए थे दलबदल का नाम ही भजनलाल रख दिया कहा
गया

था आप लोग ये नहीं कहा कहेंगे दल बदल हुआ
लोग क कर भजन लाल हो गया भजनलाल हो गया हा
तो ये इस तरह की पूरी स्थिति थी तो मैं
कहना यह चाहता हूं

कि भारतीय जनता पार्टी 10 साल से अपना
विस्तार लगातार कर रही है और वह प्रक्रिया
रुकी नहीं है क्यों देश के अभी कई इलाके
ऐसे हैं जहा उसके पास कारक करता नहीं है

जहां उसके पास जमीनी राजनीतिक शक्तियां
नहीं है तो वहां वह दूसरी क्षेत्रीय
पार्टियों को तोड़ेगी अपने साथ मिलाए गी
और कांग्रेस के लोगों को अपनी ओर खींचे गी

तो दल बदल दल बदल की इंजीनियरिंग करना
भारतीय जनता पार्टी मुझे लगता है कि स्थाई
डिपार्टमेंट है उसके अंदर कहीं जो निरंतर
यह कार्यवाही करता रहता है अभी तो चुनाव

की वजह से हो रहा हैब चुनाव नहीं होता है
तब भी दल बदल करवाती है भारतीय जनता
पार्टी लगा हा विपक्ष को कमजोर कर अपने आप
को अपना विस्तार करने की प्रक्रिया में है

वो अभी पूरे देश की पार्टी नहीं बनी है
दक्षिण भारत की पार्टी है नहीं वो दक्षिण
भारत में कई जगहो पर ये भारतीय जनता
पार्टी दलबदल कभी और करवाएगी
अबे जी अगर कमलनाथ चले गए बीजेपी में तो

मध्य प्रदेश में क्या होगा कांग्रेस
का कमलनाथ बीजेपी में चले गए तो मध्य
प्रदेश में अभी भी कमलनाथ को तो एक तरह से
हाशिए में कर ही दिया है जीतू पटवारी के

हाथ में नेतृत्व दे दिया गया है वहां पर
तो अभी तो चुनावी हार के बाद में कमलनाथ
के ऊपर बहुत सारे आरोप हैं कांग्रेस ने
अभी उन्हें लिखित रूप से जवाब नहीं मांगा

उन्हें लेकिन धीरे धीरे जो प्रमोद कृष्णम
के साथ किया है उससे मिलता जुलती कारवाही
कमलनाथ के साथ भी करनी होगी कांग्रेस को
एक बद दूर नहीं है उससे पहले कमलनाथ निकल

लेंगे बीजेपी में जब तक य कारवाई करें
उससे पहले टाटा बाय बाय मेरे ख्याल से अभी
अभी तक सेटिंग पूरी हो गई होगी अब जिस तरह
भारतीय जनता पार्टी ने नीतीश कुमार को एक

तर्क प्रदान किया कि आप क्यों छोड़ के आ
जाए या चयन चौधरी को एक तर्क प्रदान किया
भारत भारत रत्न की वजह से आप क्यों छोड़
के आ जाए उसी तरीके से एक दिन कमलनाथ को
भाजपा कोई तर्क प्रदान

करेगी दूसरे भाजपा को अभी नहीं लग रहा
होगा कमलनाथ के आ जाने से उसको क्या लाभ
है बत सत्ताधारी पार्टी है और मध्य प्रदेश
भाजपा का सबसे पुराना गढ है अभी
प्रधानमंत्री गए भी गढ़ नहीं बना था तब

मध्य प्रदेश गढ़ था दो दिन पहले
प्रधानमंत्री ने जाक भी अभी दो दिन पहले
फिर घोषणा ष बहुत करी है वहां पे नहीं वो
तो प्रधानमंत्री की है जब नरेंद्र मोदी

दूर दूर तक कहीं नहीं थे तब भी मध्य
प्रदेश भाजपा का गढ़
था
दिल्ली जनसंघ पूर्व जनसंघ और भारतीय जनता
पार्टी की राजनीति केवल दो ही जगहो पर

थोड़ी बहुत पनपती थी दिल्ली में पनपती थी
तब दिल्ली नगरपालिका नहीं थी तब दिल्ली
महानगर पालिका थी और उसके महापौर हुआ करते
थे मुख्य कार्यकारी अधिकारी हुआ करते थे

विजय कुमार मल्होत्रा वो जीतते थे चुनाव
या केदारनाथ सहानी यह सब लोग दिल्ली में
भाजपा के के नेता हुआ करते थे और मध्य
प्रदेश मध्य प्रदेश और कुछ कुछ राजस्थान
में उसके उसकी पकड़ थी बैरो सिंह शेखावत

के जरिए बाकी तो जनसंघ और कहीं कुछ था
नहीं ऐसा कुछ उत्तर प्रदेश में काफी कमजोर
स्थिति थी कल्याण सिंह थे लोधी राजपूतों
में कुछ पकड़ थी कुछ जो जो शहर शहर में
दुकानदार भाई होते हैं वो लोग जनसंघ के

समर्थक थे लेकिन इन जगहों पर भाजपा की
जनसंघ की अच्छी पकड़ थी तो आज भारतीय जनता
पार्टी बहुत बड़ी पार्टी बन चुकी है और कई
राज्यों में उसका प्रभुत्व है वर्चस्व बन
गया है तकरीबन कई राज्यों में तो कभी व

चुनाव हारती ही नहीं
है उत्तर प्रदेश और गुजरात ऐसे ही राज्य
बनते जा रहे हैं तो मध्य प्रदेश में
कमलनाथ को लेने से उसको क्या फायदा है यह
उसको अभी भाजपा को शायद सोचना कमलनाथ नहीं
गए तो अभी भाजपा ने हरिजी नहीं दी होगी

उन्ह अपने आने के लिए ना अभी तक चले गए हो
या गुजरात लबी एक्टिव होगी कोई ना कोई
तरकीब ढूंढ रही होगी गुजरात लबी बट के की
फम निला जाए इर जी दिल्ली में किसान आ रहे
हैं इस आंदोलन को कैसे निपटे गी सरकार

क्या लगता है आपको अभी इस वक्त चंडीगढ़
में चल रही है वार्ता अभी भी इस वक्त अभी
10 मिनट पहले तक की खबर थी कि चंडीगढ़ में
तीन केंद्रीय मंत्री जि पीयूष गोयल भी
शामिल है व किसान नेताओं से और मजदूर
नेताओं से बातचीत कर रहे हैं अब देखिए उस

बातचीत का क्या परिणाम निकलता है सरकार ने
बड़ी जबरदस्त नाकेबंदी कर दी है कि किसान
किसी भी तरीके से दिल्ली में ना घुस पाए
और वो बड़ी ऐतिहासिक किस्म की नाके बांदी
है साथ-साथ में बातचीत भी चल रही है तो
सरकार काफी सासत में है इस

वक्त ये एक ऐसा क्षण है इसमें सरकार अपनी
तमाम राजनीतिक प्रबंधन की कामयाब हों के
बावजूद काफी सासत में महसूस कर रही है क्
किसान अगर आंदोलन पर टिके रहे और उनको स
ये लोग नहीं मना पाए या उनके अंदर फूट

नहीं पड़वा पाए तो आंदोलन होगा और जहां पर
उन्होंने नाका लगाया है अगर नाका पार नहीं
कर पाई तो नाके के पार वो लगा देंगे अपनी
अपनी धुनी रमा
लेंगे और उन्होंने तैयारी तो पूरी कर ही

ली है छ महीने का आंदोलन करने का पूरा
इंतजाम उनके पास है राशन जमा कर दिया गया
है ट्रकों में और यह कोई भूमिहीन किसान
मजदूरों का आंदोलन तोही ना है यह तो उन

किसानों का आंदोलन है जो कि छोटे मझोले और
अमीर किसान है छोटे किसान भी है मझोले
किसान भी भी हैं और बड़े खुशहाल किसान भी
हैं इनका सबका मिलाजुला आंदोलन है अब
मजदूर भी इसके साथ जुड़ गए हैं देर नहीं

है कि छात्र संगठन भी इसके साथ जुड़ना
शुरू हो जाएंगे कांग्रेस ने कह ही दिया है
कि हम इसके पीछे खड़े हुए हैं इस आंदोलन
के हम आगे नहीं आएंगे लेकिन हमारा पूरा

समर्थन इसके साथ है तो फिर और जनता में
किसानों के आंदोलन की प्र हमदर्दी होती है
यह पिछली बार जो एक साल की नाके बंदी
उन्होंने की थी उससे स्पष्ट हो गया
था तो सरकार अगर इस आंदोलन को आनन फानन
में एक दो दिन के अंदर नहीं खत्म कर पाई

अगर व 16 तारीख तक किसान पहुंच गए जो
उन्होंने भारत बंद का आवान किया है वहां
तक पहुंच गए तब फिर यह मामला लंबा खिच
जाएगा और वो फिर बहुत मुश्किल होगी सरकार
के

लिए कुछ किसान नेता तो इस बार टिकस साहब
से भी थोड़े सावधान है उनको लगता है कि
टिकस साब सरकार की तरफ थोड़ झुक जाते हैं
आंदोलन खतम नेता कोई है भी नहीं टिकट बंधु
भी नहीं है चढ़ी भी नहीं है उग्रह भी नहीं

है पुराने नेता कोई है भी नहीं सब नेताओ
जिन नेताओं के नाम आ रहे हैं वो नेता भी
बिल्कुल नए हैं सारे के स
तो ये आंदोलन लंबा चल सकता है इस वजह से

ऐसा ये भी अंदाज लगाइए कि किसानों के अंदर
नेतृत्व की कमी नहीं
है अगर हा कमी नहीं देखिए नए नेताओं ने
इतना बड़ा जमा इतना पूरा गोलबंदी कर ली और

ये गोलबंदी उसी अंदाज में हुई है जिस
अंदाज में पहले एक साल भर पहले हुई थी दो
साल पहले हुई थी गोलबंदी उसी अंदाज में
गोलबंदी हुई है मुझे मुझे पूर्वानुमान

नहीं था कि किसान लोग इतनी बड़ी गोलबंदी
करके यानी बहुत लंबे अरसे एक दिन की
गोलबंदी नहीं है इसमें इसका मतलब है कि वो
लोग सात आठ महीने से सब कोश चल रही

होंगी मैंने अपने रिपोर्टर क्षितीज को
भेजा है लखनऊ से व दिल्ली पहुंच के बता
रहा है कि किसान बहुत बड़ी संख्या में
पूरी तैयारी के साथ आए हैं बड़ा मूवमेंट
इस बार सकता है तो सरकार के लिए बड़ी

परेशानी हो जाएगी ना अभ जी क्योंकि चुनाव
बहुत परेशानी हो जाएगी देखिए इन सब बातों
को देखिए फिर सरकार इसत चुनाव लड़ने की
मूड में है भाजपा चुनाव लड़ने की मूड में

है सारी तैयारी सारी जो जो मानव संसाधन
पार्टी के सारा धन सर सारी मशीनरी है वह
चुनाव लड़ने में लगानी है उसे आप ऐसे वक्त
में इतना बड़ा आंदोलन हो रहा होगा तो बहुत

तरह की दुविधा होंगी य आप कहते ट सरकार
इसको लेकर बहुत खस जाएगी स क्या हो रहा है
ब सरकारी मशीनरी अपना संतुलन भी खो सकती
है हा बिल्कुल ठीक बात है और यह देश के

हालात है बहुत बहुत शुक्रिया अ जी विस्तार
से य सारी बातें करने के लिए थैंक य ये थे
प्रोफेसर वह दब जो आपको बता रहे थे
विस्तार के साथ बता रहे थे कि राजनीति
क्या है अगर ऑपरेशन कमलनाथ कामयाब हो गया

तो मध्य प्रदेश में राजनीति की एक नई गाथा
नई चीजें लिखी जाएंगी और कांग्रेस के लिए
एक बड़ा झटका होगा क्या होगा राजनीति में
यह कहना मुश्किल है लेकिन यह बात सही है

कि अगले दो महीने राजनीति में कई नई चीजें
देखने को मिलेंगी हम आपको बताते रहेंगे
देखते रहिए 4 पीएम न्यूज नेटवर्क शुक्रिया
थैंक यू

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