मेरे हृदय से रक्त की धारा बही है❣️ - Kabrau Mogal Dham

मेरे हृदय से रक्त की धारा बही है❣️

मेरे बच्चे इस ग्रुप निराशा में दुबे कौन से विचार तुम्हें घिरे हुए हैं कौन सी बात

तुम्हारा हृदय को दुख दे रही है तुम्हें क्या लगता है क्या इसी अधूरे पान के साथ

तुम्हें यह जीवन जीना होगा नहीं मेरे बच्चे तुम्हारी काली मां तुम्हारे साथ है जो तुम्हें प्रिया है वह तुम्हें अवश्य मिलेगा मैं जानती हूं कोई तो है जिससे तुम्हारे जीवन की

खुशियां जुड़ी है जिसके बिना कल्पना तक नहीं उससे दूर होने के विचार से ही तुम घबरा जाते हो मेरे बच्चे एक असंभव लक्ष्य यदि संभव को संभव न कर दे माता

कैसी तुम तो मेरे हृदय में बसे हो तुम्हारी नेत्रों से मशरूम की धारा भी है तब तक रक्त ग्रह है मेरे बच्चे तुम्हारी मां तड़पते नहीं देख सकती इसलिए मैं लड़कर भी

तुम्हें वह दूंगी तुम चाहते हो मेरे बच्चे चिंता मत करो धैर्य धरो अपनी माता पर भरोसा रखो मेरे बच्चे तुम्हारी एक नहीं जयपुरी होगी क्योंकि तुम्हारी मां होने के नाते मेरा यहां करम है कि मैं तुम्हारे सारे सपने

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