मुझे तुमसे माफ़ी मांगना चाहिए मकाकली का संदेश - Kabrau Mogal Dham

मुझे तुमसे माफ़ी मांगना चाहिए मकाकली का संदेश

मेरे बच्चे तुम्हारा शत्रु आज मेरी चौखट

पर आया था बहुत रुलाया है उसने तुम्हें अब

जब दंड भोगने की बारी आई है तो मेरे

प्रहार को वह सह नहीं पा रहा है मेरे

कदमों में गिरकर नाक रगड़ रहा था वह मुझसे

अपने गुनाहों की माफी भी मांग रहा था

मुझसे दया की भीख भी मांगा उसने मेरे

बच्चे पूरी दुनिया को छल वाला वह व्यक्ति

वह मूर्ख आज मुझे छल का प्रयास कर रहा था

उसने इतना भी ज्ञात नहीं कि ब्रह्मांड के

हर कोने में हर कण में हर व्यक्ति पर मेरी

दृष्टि है मेरी नजर है कोई नहीं बच सकता

है मेरे इन आंखों से वहां बहुत भोला बनता

फिरता है वो ना खुद को बहुत धार्मिक और

सच्चा समझता है उसे लगता है कि अपनी

सर्वार्थ के लिए मेरे सामने वह जो दीप

जलाता है उसे वह निष्पाप हो गया धार्मिक

हो गया परंतु उसका भ्रम है मैं बहुत जल्दी

तोडूंगी उसने जो तुम्हारे साथ अन्याय किया

है

ना उसका बहुत भयंकर दंड उसे मिलेगा मैं

उसे अवश्य दूंगी वो दंड वह तुम्हें अपना

सबसे बड़ा शत्रु मानता है मुझे लगता है कि

तुम मुझसे जलते हो उससे जलते हो तुम उसे

फसाने की कोशिश करते हो इसलिए वह मुझसे

तुम तुम्हारी बर्बादी को हमेशा प्रार्थना

करता रहता है वह खुद को सच्चा और तुम्हें

झूठा समझता है और मेरे सामने गिड़गिड़ा

गिड़गिड़ा के कहता है कि माते उसे मत उसने

मेरे साथ छल किया है उसे सजा

दो मुझे कहता है कि माता उसने मेरी साथ

बहुत गलत किया है मेरा घर बर्बाद कर दिया

है मुझे दुखी किया है इसलिए अब आप उसको

विनाश करो मेरे लाडले सत्य तो मुझसे छुपा

ही नहीं है मैं जानती हूं कि तुम उसके

बारे में कभी सोचते ही नहीं हो वही

तुम्हारे जीवन में तांग झाग करता रहता है

तुम क्या कर रहे हो क्यों कर रहे हो क्यों

यह जानते हो उसकी बहुत रुचि होती है कि

तुम्हारे घर में क्या हो रहा है तुम्हारे

जीवन में क्या हो रहा है उसे जानने के

उसके अंदर बहुत रुचि है भले ही प्रत्यक्ष

रूप से वह तुम्हें परेशान नहीं करता किंतु

अपने षड्यंत्रकारी

बुद्धि से उसने तुम्हारा जीना हराम करके

रखा है वह जो हर समय तुम्हारे बारे में अब

शब्द बोलता रहता है लोगों को तुम्हारी

चुगलिया करता रहता है उसका बहुत दुष्ट

प्रभाव तुम्हारे जीवन पर पड़ा है कई बार

तुम्हें लोगों के सामने सर झुकाना पड़ा है

किंतु तुम सच्चे हो इसलिए उसके अर्थक

प्रयास के बाद भी तुम्हारे जीवन में सुख

है खुशी और तुम्हारी खुशी ही उसके पीड़ा

का का है वह तुमसे तुम्हारी हंसी छिनना

चाहता है वह अपनी ही आंखों में अपनी

बर्बादी देख रहा है इसलिए तुम्हें भी वह

रोता हुआ देखना चाहता

है क्योंकि वह मुझसे न्याय मांग रहा है

परंतु मुझे इतना ज्ञात है

कि यह न्याय ही तो जो उसके जीवन का कहर

बनकर टूट पड़ा है आज जिस दर्द से गुजर रहा

है वह उसके ही कर्म का फल है वह चाहे

कितना भी हाथ पैर

पटके अब जो उसने बोया है उसे तो काटना ही

होगा उसने हमें हमेशा तुम्हें अपना दुश्मन

माना है तुम्हें खुश होते हुए देखता है तो

उसे दिल में दर्द तड़प उठती

है किंतु अब उसका दर्द और भी बढ़ेगा

क्योंकि अब तुम्हारे साथ एक बहुत अच्छी

घटना होने वाली है अचानक से तुम्हारे इतनी

बड़ी सफलता खुशी मिलेगी कि वह स नहीं

पाएगा जिस प्रकार उसके कर्मों का फल उसके

कलेजे को छनी कर रहा है उसी प्रकार

तुम्हारे कर्मों का फल तुम्हारे जीवन को

सुखी और समृद्धि से भर देगा मेरे बच्चे तो

मेरे प्रिय भक्त हो

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