मां काली ?️ तुम्हारे भक्ति से किस की सजा निश्चित हो चुकी है और मैं तुम्हें किस की स - Kabrau Mogal Dham

मां काली ?️ तुम्हारे भक्ति से किस की सजा निश्चित हो चुकी है और मैं तुम्हें किस की स

मेरे बच्चे इस व्यक्ति की वजह से तुम खून के आंसू रो हो तुम इतना रोई हो कि तुम्हारी आंखों के आंसू भी सूखने

लगे तुमने बहुत धैर्य दिखाया है मेरे बच्चे तुमने बहुत प्रयत्न किया हर संभव कोशिश की कि तुम यह रिश्ता बचा

लो क्योंकि तुम इस व्यक्ति से सच में बहुत प्रेम करते थे कभी तुम्हारे कदर नहीं की तुमसे सच नहीं बोला फिर भी तुमने सोचा की माता ने अपनी प्रेम से इसे बदल दूंगा सब कुछ बदल दूंगा मेरी अच्छाई एक न एक दिन तो

दिखेगी से और इस समाज को तब लोग मुझे प्रकट हिट करना छोड़ देंगे पर जितना तुम्हें समाज को अपनी अच्छाई से बदलने की कोशिश की मेरे बच्चे उतने ही ज्यादा वार किए गए तुम्हारे पीठ के पीछे तुम्हें लगता है की

माता अगर यह समाज कुछ कहता है तो एक बार को मैं भूल जाता वह लोग मेरे अपने ही है जो मेरे पे मुझे नीचे खींचने की कोशिश कर रहे हैं ऐसी क्या गलती हो गई थी जो मुझे इतना रोना पड़ा दिन रात तड़पता हूं दिन रात

भीख मांगी है मैंने अपनी इज्जत की मान सम्मान को वापस पाने की पर मुझे क्या मिला माता इस कलयुग में बस धर्म ही जीत रहा है सच्चाई के रास्ते पर चलता है धर्म के रास्ते पर चलता है की कभी जीत नहीं होती माता और

यही सच्चाई है आज की समय की मुझे पता है मेरे बच्चे की संभव कोशिश की है अपने रिश्तों को संभाल कर चलने की हार त्याग किया कि सब खुश रह सके तुम्हारे रिश्ते ना टूटे तुम रोटी भी थे तो बाकी सब को चुप

कराया है तुमने किसी ने तुम्हारा दुख नहीं समझा अब मैं तुम्हारा हाथ छोड़ दिया वह तो बस राजनीति

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