माँ काली 🕉 वो अकेला तड़प रहा है 🕉 क्या उसने अपने किये का अफ़सोस है 🕉 - Kabrau Mogal Dham

माँ काली 🕉 वो अकेला तड़प रहा है 🕉 क्या उसने अपने किये का अफ़सोस है 🕉

मेरे बच्चे तुम दोनों के रिश्ते में बहुत खटास आ गई है उसकी जुबान तुम्हारे लिए हमेशा तलवार की तरह काम

करती है वह हमेशा तुम्हें अपने शब्दों से चोट पहुंचती है तुम्हारे ऊपर हमेशा किसी तीसरे व्यक्ति को हमेशा तुम्हें

नीचा दिखाता है कभी भी तुम्हारे साथ वफादार नहीं रहा वो लेकिन उसके इतने बुरे बर्ताव तुमने हमेशा उसे पर यकीन रख उसे हमेशा प्रेम मान सम्मान नहीं दिया है अपनी तरफ से तुमने कभी भी उसके प्रेम पर उसके चरित्र

पर प्रश्न नहीं उठाया उसने तुमसे जो कुछ भी बताया जितना भी बताया तुमने सब कुछ सुना रख बंद करके यकीन कर लिया तुम रिश्तो में दिमाग नहीं लगते हो मेरे बच्चे किसी के खिलाफ मन में दुश्मनी नहीं रखते हो

अगर तुम्हें किसी की भी बात बुरी लगती है तो तुम इस वक्त उसे व्यक्ति को वह बात बोल देते हो चाहे वह बात लाख कड़वी हो तुम्हें झुकना में भी कोई शर्म नहीं आती तुम गलत हो या तुमने किसी के बारे में गलत सोच और

वह व्यक्ति वैसा नहीं था तो तुम मुझसे माफी मांगने में भी नहीं करते अरिस्टो किए पारदर्शिता तुम सामने वाले से भी उम्मीद रखते हो लेकिन यह व्यक्ति हमेशा हर बात में तुमसे झूठ बोलता है तुमसे बोलता है तो बहुत कुछ है

बहुत बड़ी बड़ी बातें करता है लेकिन उसका बर्ताव वैसा नहीं है तुम्हारे साथ हमेशा ऐसे बर्ताव करता है उसके जीवन में तुम्हारी कोई कदर नहीं है कोई अहमियत नहीं है तुम्हारी अब तुम्हें समझ में आ गया है तुम्हें कभी भी

इस व्यक्ति पर यकीन नहीं करना चाहिए था 1 एकड़ के उसके सारे झूठ तुम्हारे सामने आ रहे हैं इतना बेशर्म है कि वह अभी भी सीना चौड़ा करके झूठ बोल रहा है तुम्हारे ही प्रेम पर तुम्हारी ही सच्चाई पर उंगली उठा रहा है

वह कभी भी सच का सामना नहीं करता है तुमने उसे किसी और के साथ

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