माँ काली को गुरु बनाने की संपूर्ण विधि और विशेष सावधानियाँ | Maa Kali | Maa Ka Ashirwad - Kabrau Mogal Dham

माँ काली को गुरु बनाने की संपूर्ण विधि और विशेष सावधानियाँ | Maa Kali | Maa Ka Ashirwad

नमस्कार दोस्तों आप सभी पर माता आशीर्वाद

और बजरंगबली की कृपा सदैव बनी रहे बहुत से

वीडियो इससे पहले भी मां के संकेत के ऊपर

हमने बनाए हैं और आज जो यह वीडियो आप

लोगों के लिए लाई गई है यह भी मां का

स्पष्ट संकेत है अपने भक्तों के लिए उनका

निर्देश है अपने भक्तों के लिए पुरी

वीडियो को आपको ध्यान से देखना है समझना

है क्योंकि मां की आजा से उनकी प्रेरणा से

वीडियो बनाई गई है

बहुत से लोग जो गुरु की खोज में भटक रहे

हैं और जो मां के समर्पित भक्ति हैं बहुत

समय सीमा की सेवा में है उन्हें यह वीडियो

अवश्य देखनी है और मां के संकेत को समझना

है उनके निर्देशों का पालनपुर करना है

वीडियो का एक शब्द ध्यान से सुन और जो भी

प्रश्न डेट्स आपके मां में उठाते हैं तो

उन्हें कमेंट बॉक्स में लिखे या हमें

व्हाट्सएप मैसेज करें ताकि आपको निरंतर इस

दिशा में आगे मार्गदर्शन मिलता रहे

और जी विषय पर मैं बात कर रही हूं उसे

संबंध में आप लोगों के बहुत सारे प्रश्न

हमें मिलते रहे हैं तो पहले प्रश्न लेते

हैं की क्या मां को गुरु रूप में धरण कर

सकते हैं तो यदि आप अध्यात्म के मार्ग में

भक्ति के मार्ग में आगे बढ़ाना चाहते हैं

इसके लिए उचित मार्गदर्शन चाहते हैं यदि

आपकी आत्मा में ईश्वरीय सत्ता से एकाकार

होने की तड़प है और कोई लौकी गुरु आपको

नहीं मिल रहा है और मां काली के प्रति

आपका ढूंढ समर्पण है भक्ति है तो निश्चित

रूप से मां काली को आप गुरु रूप में धरण

कर सकते हैं उनसे मार्गदर्शन के लिए

प्रार्थना कर सकते हैं इसके अलावा यदि मैप

की ईस्ट है आपकी कुलदेवी है तो भी उन्हें

गुरु रूप में धरण किया जा सकता है भगवती

पूर्ण परम ब्रह्म स्वरूप है कालिका

परमेश्वरी गुरु और ज्ञान का स्वरूप है

स्वयं इसीलिए वह अपने भक्तों को गुरु रूप

में और ज्ञान के रूप में अवश्य प्राप्त

होती है यदि सच्चे हृदय से प्रार्थना की

जाए

अब जो दूसरा बहुत ही महत्वपूर्ण प्रश्न है

की मां को गुरु बनाने की विधि क्या है किस

प्रकार मां को गुरु रूप में धरण करें तो

उसे विधि के ऊपर हम बात करते हैं जो सहज

है सरल है लेकिन जो भी चीज आपको बताई जा

रही हैं उनका आपको पालनपुर करना है उसे

विधानसभा से ही आपको मां को गुरुरुपने धरण

करना चाहिए और इसके बाद हम बात करेंगे उन

विशेष सावधानियां की जो आपको रखती है अगर

आप मां को गुरु रूप में धरण करते हैं तो

मां को गुरु रूप में धरण करने के लिए जो

सर्वश्रेष्ठ समय या मुहूर्त है वह है

गुप्त नवरात्रि का प्रथम दिन इसके अलावा

किसी भी अष्टमी को या शनिवार को भी आपके

भीम कर सकते हैं गुरु धरण करने का समय मां

को प्रातः कल का होना चाहिए और विशेष कर

ब्रह्म मुहूर्त में अगर आप ये भीम करें तो

सर्वोत्तम है संध्या कल में रात्रि कल में

आपको ये भीम नहीं करनी है प्रातः कल का

समय बहुत दिव्या मुहूर्त है और मां की जो

ऊर्जा है वो सौम्या स्वरूप के ब्रह्मांड

में इस समय विद्यमान होती है तो कम से मैं

आपको बता रही हूं ध्यान से सुन सर्वप्रथम

तो जो मैंने दिन आपको बताए हैं उनमें किसी

भी दिन सुबह सवेरे जल्दी उठकर स्नानादि

करके आपको स्वच्छ वस्त्र धरण करने हैं

वेस्टन का रंग लाल रंग का हल्के गुलाबी

रंग का हो और यदि लाल या गुलाबी रंग के

वस्त्र नहीं है तो लाल दुपट्टा या लाल शॉल

आप ऊपर से धरण कर लेने दूसरी चीज एक तांबे

के पत्र में आपको जल ले लेना है और जो

आपका पूजा का स्थल है वहां पर इसको रख दें

अब आपको आचमन करना है क्रीम बी मंत्र

बोलकर मकर तीन बार आपको आचमन करना है और

फिर अपने हाथ को आपको दो लेना है तीसरा

आपको ज्योत प्रज्वलित करनी है तो कौन सी

ज्योत जलेगी इस बड़े में मैं आपको बता डन

की जो भी जोत आप पहले से ही मां की सेवा

में उनकी पूजा में जल रहे हैं वही जोत

रहने दें तिल के तेल के जल रहे हैं तो तिल

के तेल की रहने दे देसी गी का जल रहे हैं

तो वो आप जल सकते हैं

इसके अलावा एक सरसों के तेल का दीपक आप

मां के समक्ष अलग से प्रज्वलित कर दें अब

मां का पांच उपचार पूजन करेंगे धूप दी

अक्षत पुष्प कुमकुम मां को अर्पित करेंगे

भोग मां को लगे भोग में दो लौंग दो बताशे

और कोई मीठा भोग मां को अर्पित करें सूजी

का हवा मां को आपत्तित कर सकते हैं या

मखाने की या चावल की खीर मां को चढ़ाई

पुष्प अगर चड्ढा रहे हैं तो गुड़हल का या

गुलाब का पुष्प अगर हो तो अति उत्तम है

अन्यथा जो भी उपलब्धता है उसे हिसाब से

आत्मा को पुष्पा अर्पित करें चौथ जो चरण

है चौथ जो पॉइंट है की मां के स्वामी

स्वरूप आपको ध्यान करना है साथ में भगवान

शिवा का आपको ध्यान करना है मां के

में स्वरूप का ध्यान करें और उनसे इस गुरु

बनाने की भीम की आजा मांगे सफलता का

आशीर्वाद मांगे साथी भगवान

से सफलता का आशीर्वाद मांगे

मां के किसी भी अनुष्ठान में भगवान शिवा

का आह्वान अवश्य करना चाहिए उनका आशीर्वाद

अवश्य लेना चाहिए तो मां को गुरु धरण करने

की इस भीम में मां के साथ-साथ भगवान शिवा

का भी आशीर्वाद और उनकी आजा अवश्य लेने और

शिवा और शक्ति का जब आशीर्वाद एक साथ

प्राप्त होता है तभी कार्यों की पूर्णता

मनी जाति है अथवा अपूर्ण रहते हैं कार्य

और शिविर शक्ति के आशीर्वाद से सभी कार्य

सफल भी होते हैं अब मां का और भगवान शिवा

का आपने ध्यान कर लिया उनसे आजा मांग ली

अब आपको संकल्प लेना है तो संकल्प के लिए

दाएं हाथ में थोड़ा जल ले लेने रक्षक ले

लेने मां काली करते हुए उन्हें अपना नाम

बताएं और जो भी आप यह गुरु धरण करने का जो

संकल्प लेना है वह संकल्प लेकर हेमा मेरा

नाम यह है और मैं आपको गुरु रूप में धरण

करना चाहता हूं याद करना चाहती हूं मां

मुझे इस कार्य की आजा दे और आशीर्वाद दे

मुझे शिष्य के रूप में स्वीकार करें और

सदैव गुरु रूप में मुझे प्राप्त भौतिक और

आध्यात्मिक जगत में मां मेरा निरंतर

मार्गदर्शन करें मुझे रास्ता दिखाएं जान

अनजाने मुझे कोई भी भूल चक हो उसके लिए

मुझे क्षमा करें तो इस प्रकार से संकल्प

लेकर भूल चक एक क्षमा याचना कर कर जल को

जमीन पर छोड़ दें अब ये संकल्प पूर्ण होता

है अब आगे की जो भीम है उसको आपको ध्यान

से सुना है पांचवा पॉइंट

मां के सौम्या स्वरूप का ध्यान करते हुए

आपको गहरी लंबी सांसें लेनी है और छोड़ने

है अपने आजा चक्र पर ध्यान लगाते हुए

आगे चक्र जो दोनों भो के बीच का जो ललाट

का हिस्सा होता है वही आगे चक्र होता है

उसे पर ध्यान लगाते हुए आपको गहरी लंबी

सांस लेनी है और छोड़ते समय बी मंत्र का

मानसिक जाप करना है और यह भीम आपको बार

करनी है यानी गहरी लंबी सांस लेकर छोड़ते

हुए स को क्लीन बी मंत्र का उच्चारण करना

है तो बार आपको लंबी सांसों से लेनी है

थोड़ी डर के लिए रुकना है कुछ सेकंड के

लिए और फिर स को छोड़ते भी तीन बीच मंत्र

का उच्चारण करते हुए आपको विश्वास को छोड़

देना है मानसिक रूप से आपको करना है यह

मुख से बाहर उच्चारण नहीं करना है और इस

प्रकार करने से अपना को अपने आजा चक्र पर

धरण करते हैं

आजा चक्र जो संकल्प और इच्छा शक्ति का

केंद्र होता है स्ट्रांग बिल पावर और

डिटरमिनेशन का सेंटर होता है और जितनी

गहराई से आप इस क्रिया को करेंगे जितना

फॉक्स होकर आप इस क्रिया को करेंगे उतनी

ही गहराई से मां की ऊर्जा को अपने आजा

चक्र पर स्थापित करेंगे और अपने अंतरमन

में अपने रोम रोम में उतार पाएंगे

अब छतवान जो कार्य करना है अपने ससुराल

चक्र पर आपको ध्यान केंद्रित करना है

चक्रवर्ती जो हमारे सर में तालु वाली जगह

होती है वहां पर जैसे क्राउन चक्र कहते

हैं तो यहां पर भी आपको ध्यान केंद्रित

करते हुए मां के में स्वरूप को यहां

स्थापित करते हुए अपने इस स्थान पर हम

चक्र पर आप कल्पना करें इस तरह से भी

जुलाई करें की मां का स्वामी स्वरूप वहां

स्थित है पुणे लंबी विश्वास लेनी है थोड़ा

सा हॉल करना है उसे रोकना है रिटन करना है

फिर विश्वास को छोड़ते समय

बार आपको यह करना है और इस प्रकार मां

की ऊर्जा को उनकी मां काली का जो तत्व है

उसको अपने ससुराल चक्र पर आपको धरण करना

है उसे गुरु तत्व को अपने सहस्रार चक्र पर

स्थापित करना है

और यह जो ससुराल चक्र है यह दिव्या

ऊर्जाओं का द्वारा है जहां से देवीय

ऊर्जाओं से आप कनेक्ट करते हो

तत्पश्चात अपने अनाहट चक्र यानी हृदय चक्र

पर आपको ध्यान करना है और यही भीम आपको

पुनः बार करनी है मां को अपने हृदय में

जो शिवा तत्व है आनंद का स्थान है वहां पर

मां की ऊर्जा को स्थापित करना है बार

गहरी लंबी सांस ऊपर लेकर एक दो सेकंड के

लिए हॉल करके उन्हें श्वास को छोड़ते हुए

क्लीन बी मंत्र का उच्चारण करते हुए मां

की ऊर्जा को उसे काली तत्व को उसे गुरु

तत्व को अपने हृदय में आपको धरण करना है

और इस प्रकार करने के बाद जो गुरु मंत्र

है उसका आपको जाप करना है और जो मां काली

का गुरु मंत्र आपको जाप करना है ओम क्रीम

कलिकाई नमः ओम

कालिकाएं नमः

[संगीत]

[संगीत]

आपको जाप करनी है और जबकि किस दिन पूरे हो

जाएंगे तो उसके बाद नित्य रोज की पूजा में

एक या तीन या पांच अपनी समर्थ के अनुसार

आपको जाप करना है लेकिन पहले दिन तक

रोज माल आपको जब करनी है

तो यह भीम

[संगीत]

से मां को गुरु रूप में धरण करते हैं तो

आपको अमूल्य मार्गदर्शन है हर तरफ से

मिलेगा स्वयं मां को मार्गदर्शन देगी

अब इसमें प्रश्न ये है की जो नित्य पूजा

का कम है वह किस प्रकार करना है तो गुरु

मंत्र को सर्वप्रथम पढ़ना है जब आपने पूजा

में बैठेंगे तो सर्वप्रथम आपको मां काली

का जो गुरु मंत्र है उनकी कल के नमः इसका

जाप करना है जब आप दीपक और पांच उपचार

पूजन आदि कर लेते हैं तो गुरु मंत्र का

जाप करना है उसके बाद गणेश पूजन करना है

ओम गण गणपति नमः की एक माला उसके बाद ओम

नमः शिवाय इसका जाप करना है तत्पश्चात मां

दुर्गा और महाकाली कवन करते हुए

हनुमान चालीसा चाहे तो हनुमान चालीसा

पढ़ने

आपको जाप करनी है अब बात आई है गुरु

दक्षिण मां को कड़नी है क्योंकि निश्चित

रूप से जब मां से हम इतना मार्गदर्शन मांग

रहे हैं उनकी सुरक्षा मांग रहे हैं तो एक

तो गुरु दक्षिण के रूप में सर्वप्रथम हमें

यह संकल्प लेना है की अपनी गुरु की

संपूर्ण समर्पण के सॉन्ग अटूट होकर करेंगे

लेकिन इसके अलावा आपको कुछ चीज मां के

मंदिर में चढ़ती है तो आपको एक तो चुनरी

और श्रृंगार का समाज और एक पानी वाला

नारियल मां को मंदिर में अर्पित करना है

कोई भी आप मंदिर मां का है वहांपित करें

और साथ में वस्त्र मां को अर्पित कर दे

अगर समर्थ है वस्त्र की

रुपए मां को गुरु दक्षिण जरूर रखती है

और अगर आसपास मंदिर नहीं है तो घर में जो

मां की मूर्ति या तस्वीर है वही ये सब चीज

अर्पित कर दें और जैसे ही आपको समय और

अफसर मिले तो यह साड़ी चीज मां के मंदिर

में जाकर आप अर्पित कर दें

और कुछ सावधानियां बहुत जरूरी है साथी का

हर बिहार होना चाहिए

आपके घर में होता है तो उसमें कोई माना ही

नहीं है लेकिन अगर लहसुन प्याज आप छोड़

दें तो सर्वश्रेष्ठ है और समय समय पर

शनिवार को कन्या पूजन एक या दो कन्याओं का

पूजा नरोने दक्षिण आई आपको देते रहना

चाहिए महीने में एक बार या दो बार अपनी

समर्थ के अनुसार

उसके संबंधित मार्गदर्शन आपको अवश्य दिया

जाएगा

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