माँ काली का सन्देश यह वही व्यक्ति है जो तुम्हारी सफलता से जल रहा है - Kabrau Mogal Dham

माँ काली का सन्देश यह वही व्यक्ति है जो तुम्हारी सफलता से जल रहा है

मेरे बच्चे मैं आ रही हूं तुम्हें जीत की

दहलीज पार कराने और तुम्हारा हक दिलाने के

लिए इस संसार रूपी जंगल में बहुत से ऐसे

मनुष्य हैं जो वह साधारण रूप धरकर

तुम्हारे सामने आते हैं लेकिन अब वह तुम

पर अत्याचार नहीं कर पाएंगे क्योंकि मैं

न्या की तलवार लेकर रही हूं मे बच्चे जो

ने खोया है वह तुम्हें अब वापस मिलेगा और

जो तुम हासिल करने का स्वप्न देखते आए हो

वह भी पूर्ण करने का अब समय आ चुका है अब

समय आ गया है कि तुम्हें उस पद तक ले जाने

की व्यवस्था की जाए जिसके लिए तुम्हें

भीड़ से चुना गया है

या कोई संदेश नहीं यह ब्रह्मांड की पुकार

है मेरे बच्चे जो सुन रहा है वह देख नहीं

रहा और जो देख रहा है वह उसे सुन नहीं रहा

किंतु तुम्हें इस संदेश को अंत तक सुनना

है केवल तभी तुम इसका लाभ उठा पाओगे इसलिए

किसी भी परिस्थिति में इस संदेश को बीच

में ना छोड़ना इसे अंत तक पूरा सुनना मेरे

बच्चे तुम कब तक वैसे ही बनते रहोगे जैसा

लोग तुम्हें देख ना चाहते हैं आखिर कब तक

तुम उनके लिए बलिदान करते रहोगे जो

तुम्हारे बलिदान को भी स्वार्थ समझते आए

हैं जो तुम्हारे त्याग को भी तुम्हारे

फायदे से जोड़ते आए हैं जब

अन्याय इतना अधिक बढ़ जाए कि धर्म ही संकट

में पड़ जाए उस समय सही चीज के लिए आवाज

उठाना ही वास्तविक धर्म होता है इस संदेश

को सुनने वाली पुण्य आत्माएं तुम कब तक

सोते रहोगे अब जागने का समय आ चुका है अब

समय आ गया है जब अपने हक के लिए तुम लड़ाई

लड़ो अब अपने हक के लिए तुम मांग करो तुम

जिसके हकदार हो उसके लिए वास्तविक रूप से

आवाज उठाने का समय तो अब आया है मेरे

बच्चे मैं जानती हूं कि इस कलयुग में तुम

विभिन्न दुविधा में फंसे हुए हो कई सारी

चीजों पर तुम्हारे लिए फैसला ले पाना

अत्यंत कठिन होता जा रहा है किंतु

साहस का पर्याय ही यही है कि जब कठिन से

कठिन परिथि में भी मुश्किल फैसले लिए जाए

फिर चाहे वह फैसले सही साबित हो या गलत

उसे सही साबित कर करने का दम रखने वाला

मनुष्य ही वास्तविक अर्थों में विजेता

कहलाता है और जो अपने निश्चय से दृढ़ होकर

अपने फैसले को सही साबित करने का प्रयत्न

करने में जुट जाता है मैं ब्रह्मांड में

उपस्थित विभिन्न तत्वों की सहायता से उसका

सहयोग करने पहुंच जाती हूं फिर मैं ऐसे

ऐसे रूपों में उसका सहयोग प्रदान करती हूं

जिसे समझ पाना एक सामान्य मनुष्य के लिए

सामान्य बात कभी हो ही नहीं सक्ति

पर वतं के शिखर पर जहां मनुष्य कई बार

नहीं पहुंच सकता वहां वनस्पतियां है ना

नदियां अपने आप कैसे कटकर बहकर समुद्र में

मिल जाती है यह सारा संतुलन कैसे बना हुआ

है प्रकृति कुछ नियमों के आधार पर चलती है

और उन नियमों का नियोक्ता उन नियमों को

बुनने वाला उन नियमों का सही संचालन करने

वाली मैं ही हूं और मैं तुम्हारे उतने ही

पास हूं जितना अग्नि के समीप जाने पर शरीर

को तपन होती है जितने करीब वायु में घुली

हुई सुगंध होती है मैं तुम्हारे रोम-रोम

में बसी हुई हूं मैं तुम्हारी आत्मा से

अलग नहीं हूं मैं

तुम्हारी सोच बुद्धि चित्त और तुम्हारे

विचारों से बिल्कुल भी भिन्न नहीं हूं मैं

तुम में ही समाहित हूं मेरे बच्चे मैं

जानती हूं कि मौन हो जाने का अर्थ कभी भी

कमजोर हो जाना नहीं होता मौन हो जाने का

अर्थ कभी भी किसी को हारा हुआ मान लेना

नहीं होता लेकिन यदि सही जगह पर सही आवाज

ना उठाई जाए तो वह मौन व्यर्थ हो जाता है

क्योंकि तब मनुष्य का का सामर्थ्य किसी

काम का नहीं रह जाता मेरे बच्चे सबसे पहले

तुम्हें अपने भीतर आत में विश्वास जगाना

होगा कि तुम इस संसार में अकेले नहीं हो

क्योंकि तुम्हारे मन में यह विचार

आता है कि यदि चीजें तुम्हार रे विचारों

के अनुरूप नहीं हुई तो तुम आगे जीवन कैसे

जियोगे किंतु तुम यह भूल जाते हो कि आज तक

तुम जैसा जीवन जीते आए हो उसमें तुम्हारा

कितना योगदान रहा है यदि तुम गौर से अपने

जीवन का मूल्यांकन करोगे तो तुम यह पाओगे

कि हर बार मैंने तुम्हें अपने हाथों से

उठाकर तुम्हें मुश्किलों से निकाला है

मेरे बच्चे तुम्हें संसार में हार मानने

हार जाने या धक्के खाने नहीं आए हो इस

संसार में मनुष्य रूपी जन्म लेकर वास्तव

में तुम यहां के संचालन को बेहतर कर राज

करने ही आए हो यदि तुम मेरी बातों

को गौर पूर्वक समझोगे तो तुम जान पाओगे कि

जो मैं कह रही हूं वह अहंकार से परे मानता

की भलाई का कार्य है जो मैं कह रही हूं

उसमें अहम की तनिक मात्र भी भावना नहीं है

है वास्तव में यदि उसमें कुछ है तो करुणा

दया प्रेम और सहानुभूति है वह सभी लोग

जिनके पास कोई सहारा नहीं नहीं है है वह

सभी लोग जिनमें अपने सामर्थ्य को पहचानने

की क्षमता नहीं है है वह सभी लोग जो

सामर्थ्य विहीन है वह सभी लोग जो अंधकार

के मार्ग पर जबरदस्ती चले गए हैं जबकि वह

वास्तव में प्रकाश के मार्ग को ही अपनाना

चाहते थे मेरे बच्चे तुम उनके लिए उस

दीपक के समान हो जो पद भट के पथिक को सही

मार्ग दिखा सकता है तुम उसके समान हो जो

अंधेरे में भय से जा रहे मनुष्य को सही

मार प्रदान कर सकता है तुम चिड़िया की उस

चहचहाहट की तरह हो जो एकांत में जीवन जी

रहे मनुष्य को किसी के होने का बोध कराता

है तुम प्रकृति हो तुम ही ब्रह्मांड हो

तुम इस ब्रह्मांड से इस नियति के नियमों

से बिल्कुल भी अलग नहीं हो इसका अर्थ यह

नहीं कि तुम इससे बधे हुए परत रूप में

जीवन जी रहे हो वास्तविकता में

स्वतंत्रता तुम्हारे रगों रगों में बह रही

है

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