महाशक्तिशाली माँ दुर्गा की उत्पत्ति कैसे हुई ? | Har Har Mahadev Serial | New Episode Navratri 2023 - Kabrau Mogal Dham

महाशक्तिशाली माँ दुर्गा की उत्पत्ति कैसे हुई ? | Har Har Mahadev Serial | New Episode Navratri 2023

[प्रशंसा]

हो दुर्गाय दुर्ग

पराय सारा सर्व [संगीत]

कारण्य ख्यात तथैव कृष्णाय

[संगीत] धुरा सततम

नमः पाम पिम पम पार्वती [संगीत]

पूर्णा वामम वागीश्वरी

रिम शिम शिम महालक्ष्मी मम रिम श्रम दुम दुर्गा

सुदा ओम हैम रिम लिम दुर्गा देव्य नमः ओम

आम रिम क्रम दुर्गा देव्य नमः ओम ऐम रिम च

दुर्गा देव नमः परम शक्ति महा शक्ति

चगा माता की जय दुर्गा दे नमः

ओ दुर्गा देव नमः मां विश्वकर्मा का प्रणाम स्वीकार करो

[संगीत] मां हे जगदंबे मां यमराज का प्रणाम

स्वीकार [संगीत]

करो [संगीत] [प्रशंसा]

[संगीत] ओमम रीम क्रम दुर्गा देव्य नमः ओम आम रिम

गम दुर्गा देव्य [प्रशंसा]

नमः नम ओ

[प्रशंसा] दुर्गा दुर्गा

[प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा]

[संगीत] [प्रशंसा]

नम [संगीत]

[प्रशंसा] देव दुर्गा देव

नमः ओम हरिम ी दुर्गा धव नमः ओम हरिम ी

गुरुदेव नमः ओम ह्रीम श्री गुरुदेव

[संगीत] [प्रशंसा]

नमः [संगीत]

[प्रशंसा] [संगीत]

[प्रशंसा] [संगीत]

[प्रशंसा] [संगीत] ओम

[संगीत] ओमम

ओम जम

[संगीत]

[संगीत] नम

[संगीत]

शक्ति महा शक्ति परम शक्ति की

जय दुर्गा देव नवा ओमय दुर्गा देव नवा ओ

जग हे जगदंबा हे जगत माता

हे करुणाम दयामई स्ने माता हे आद शक्ति

परम शक्ति महाशक्ति हम पर दया करो माता हम पर दया करो हम सबको भयभीत करने वाले दुष्ट

दानव महिषासुर का सार करके इस जगत को दानवी सार से इस जगत को दानवी शक्ति के

आतंक से मुक्त करो माता मुक्त [हंसी]

[संगीत] करो [हंसी]

[संगीत]

[संगीत] रे

[हंसी] [संगीत]

कन है ये किसका ास है ये कौन है ये जो हमारी शक्ति को चुनौती दे

रहा है कौन है

[संगीत] ये किसी के पास उतर नहीं

कोई नहीं जानता किंतु हम जान कर ही रहेंगे हम स्वयं

देखेंगे कि कौन है वो जो मसुर को ललकार का

दु साहस कर रहा

[संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] है

[प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा]

गु

[संगीत]

[संगीत] ओई [संगीत]

ओम आईम ी दुर्गाद [संगीत]

सुंदरी तुम्हारे जैसा अनुपम अदभुत और अपूर्व रूप मैं जीवन में

पहली बार देख रहा मेरा नाम बसर

है और स्वर्गादपि [संगीत]

प्राप्त कर चुका सृष्टि का सजन

और संहार करने वाले ब्रह्मा विष्णु और महेश भी चाहकर मेरा कुछ भी अहित नहीं कर

सके हैं इससे तुम्हें मेरे पराक्रमी होने का अनुमान हो

गया होगा और यदि तुम्हारा मन मुझे अज और

पराक्रमी मानता है तो मैं तुम्ह आमंत्रित करता हूं

आओ मेरी महारानी बन स्वर्ग में ही

नहीं तीनों लोको में जो श्रेष्ठ सुख हैका मेरे

[संगीत] [हंसी]

साथ तुम्हारा अठस भी तुम्हारे रूप की भाति

मन को मोहने वाला है दुर्बल मन के प्राणी भले ही

त दानव जिनकी उपस्थिति मात्र से ही प्राणी

भत हो जाते हैं रे से प्रसन्न हुए है मैं तो तुम्हारे रूप से इतना प्रसन्न

हुआ हूं कि इंद्र को दास बनाने की इच्छा रखने वाला यह

महसर तुम्हारी दास्ता स्वीकार करने के लिए आतुर है मेरा मस्तक तुम्हारे चरणों में नत

है मेरा प्रेम निवेदन स्वीकार करो

सुंदरी ओ दुर्गा दे नम

ओ दुर्गा दे मुझे तो ऐसा प्रतीत होता है तुम मेरे लिए ही प्रकट हुई हो

सुंद दुर्गा देव नम ओ दुर्गा देव नम

मेरी प्रेम याचना अस्वीकार ना करना सुंदरी

[संगीत] नहीं परम पुरुष परमात्मा के अतिरिक्त अन्य

कोई पुरुष मुझे अभि नहीं है क्योंकि

मैं उन्ही परमात्मा पुरुष की प्रकृति हूं हे

[संगीत] महिषासुर वासना से तेरा हदय दूषित हो रहा

है जो मुझे कभी छू भी नहीं सकता

इसीलिए दानवों का जहा स्थाई निवास है उस पाताल लोक में लौट

जा य तेरा कोई स्वार्थ सिद्ध नहीं होगा अब

तो तुम्ह पाए बिना मेरा जीवन व्यर्थ है सुंदरी मेरी बात मान जाओ

और मेरा प्रेम निमंत्रण स्वीकार कर लो मैं जीवन भर तुम्हारे चरणों का दास बना रहूंगा

मसर यदि तू मेरे बिना जीवित नहीं रह सकता

तो मुझसे युद्ध कर यदि तूने युद्ध में मुझे जीत लिया तो

मैं सदा सदा के लिए तेरी हो

जाऊंगी सुंदरी तुम जैसी कोमला पर प्रहार करना

मेरे मन को स्वीकार नहीं यह कायरो का काम है मुझ जैसे वीरों

का नहीं वार्तालाप और प्रेम निवेदन बहुत हुआ अब इस पर विराम लगना चाहिए मैं तुम पर

बल प्रयोग करना नहीं चाहता इसलिए मेरी बात मान लो और चलो मेरे साथ स्वर्ग लोक इसी

में तुम्हारा हित है वसर वासना की अग्नि ने तेरी बुद्धि को लील

लिया है दुष्टता की कालिमा तेरी आत्मा को थक चुकी

है अज्ञान का अंधकार तेरे मन पर छा चुका

है और अब मृत्यु तेरा स्पर्श करने को लालायित

है इसलिए अंतिम बार तुझे चेतावनी देती हू तुरंत पाताल लोक चला

जा अन्यथा मुझसे युद्ध कर इस युद्ध में तुझे समाप्त कर मैं सदा

सदा के लिए मानव देवताओं को भय मुक्त कर दूंगी भय मुक्त कर दूंगी भय मुक्त कर

दूंगी भय मुक्त कर दूंगी भय मुक्त कर दूंगी ना तूने मेरा प्रेम निवेदन अस्वीकार

करके मुझे युद्ध के लिए ललकारा है अब मैं तुझे समाप्त करके ही

[हंसी]

रहूंगा अब तो तुम्हें पाए बिना मेरा जीवन व्यर्थ है

सुंदरी मेरी बात मान जाओ और मेरा प्रेम निमंत्रण स्वीकार कर लो मैं जीवन भर

तुम्हारे चरणों का दास बना रहूंगा दृष्ट महिषासुर वासना की अग्नि ने तेरी बुद्धि

को लील लिया है दुष्टता की कालिमा तेरी आत्मा को थक चुकी

है अज्ञान का अंधकार तेरे मन पर छा चुका

है और अब मृत्यु तेरा स्पर्श करने को लालायित है

इसलिए अंतिम बार तुझे चेतावनी देती हूं कि

तुरंत पाताल लोक चला जा अन्यथा मुझसे युद्ध

कर इस युद्ध में तुझे समाप्त कर मैं सदा सदा के लिए मानवों व देवताओं को भय मुक्त

कर दूंगी अली नारी तूने मेरा प्रेम निवेदन अस्वीकार करके मुझे युद्ध के लिए ललकारा

है अब मैं तुझे समाप्त करके ही [संगीत]

रहूंगा [संगीत]

ई [संगीत]

आह जय [प्रशंसा]

[प्रशंसा] [संगीत]

[संगीत]

ब्रह्मदेव [संगीत]

नम

[संगीत]

[हंसी] नम

[संगीत] [हंसी]

[संगीत] [हंसी] [संगीत]

सुंदरे तू जितनी सुंदर है उतनी

ने महा मसर के साथ शत्रुता करके भूल की

है उन्होने नारी समझकर तुझ पर अब तक प्रणा तक प्रहार नहीं

किया किंतु मैं महाबली का दूत तुझ पर दया नहीं

करूंगा भगत अपनी दुष्टता का [संगीत]

परिणाम [संगीत]

[प्रशंसा] [संगीत]

[संगीत] [प्रशंसा] [संगीत]

तूने चूर का अंत कर दिया किंतु अब अलोम तेरा अंत कर

[संगीत] देगा

[संगीत]

[संगीत] की

विडल अब तुझे नहीं छूंगा

[संगीत]

चले संभाल मेरा [संगीत]

[संगीत] [प्रशंसा]

[संगीत] सुंदरी अब मैं तुझे समाप्त करके ही

[संगीत] रहगा मेरा अंतिम प्रहार झे जीवित ही नहीं

छोड़ेगा का साथ पाताल लोक चला

जा क [संगीत]

[संगीत]

[प्रशंसा]

नहीं

[संगीत]

[हंसी] [संगीत]

ओमन [संगीत]

ओम [संगीत]

हमरा [संगीत] सोर अब मैं एक से अनेक रूप लेकर तेरे

टुकड़े टुकड़े कर [हंसी]

दूंगा

[संगीत]

हो [संगीत]

[संगीत]

a [संगीत]

[हंसी] [संगीत]

हा [संगीत] [हंसी]

[संगीत] [हंसी] [संगीत]

हा [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत]

[प्रशंसा] [संगीत]

[संगीत]

[प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत]

[प्रशंसा] [संगीत]

[संगीत]

[प्रशंसा] [संगीत]

[प्रशंसा] [संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत]

[प्रशंसा] [संगीत]

[संगीत]

काल जय बलशाली असुर भी तुमसे हुए हैं

पराजित अहंकारी का सदर

तुमने गर्व किया है

खंडित कल्याणी बनके करती हो सबका तुम

कल्याण प्रेम भाव से मिलके

तुम्हारा करते हैं गुणगान

जय जय हे मसर म जय मा अ चिंता हरण जय जय

हे म सुर जय अ चिंता [संगीत] [प्रशंसा]

[संगीत] [प्रशंसा] [संगीत]

[प्रशंसा]

हरण [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा]

[संगीत]

सती साधवी तुम भव प्रीता

ब्रह्मचारी माता शक्ति स्वरूपा

त्राण हो शूल धारण

माता मृत्यु ने पाया है

तुमसे जीवन का

वरदान प्रेम भव से मिलके

तुम्हारा करते हैं गुणगान

जय जय हे मशास अर जय मामे चिंतावर जय जय

हे महिष सु मर जय चिंता

[संगीत]

[संगीत] [प्रशंसा]

हर

[संगीत] नैन खुले तो कुल सृष्टि को घोर

जगाने आए मूंद लो नैना तो इस जग को रन

सुलाने आए को अपने समय चक्र का तुमसे होता

[संगीत] ज्ञान प्रेम भाव से मिलके

तुम्हारा करते हैं गुनगार जय जय हे मशास मन जय मा अमे चिंता

हर जय जय हे महिषा सुर मर जय मा

चिंतावर धरती अंबर ताल

समंदर वृक्ष लता

पाशा प्रेम भाव से मिलके

तुम्हारा करते हैं गुण का जय जय हे महि सासर मर जय मा अमे चिंता

हरण जय जय हे सु म जय मा अे चिंता हर जय

जय हे मस म जय मा अे चिंता ह जय जय मसर म

जय चिंता हर त्रिकुटी शक्तियों की प्रतीक मां

दुर्गा ने महिषासुर का वध करके विश्व कल्याण का सूत्र पात किया ये संपूर्ण

विश्व भगवान शिव की रचना है दूसरे अर्थों में कहे तो यह विश्व शिवशंकर एवं माता

पार्वती के लिए चौसर की एक विसात के समान है नई कथाओं एवं उप कथाओं को जन्म देने के

लिए वह सदा ही इस खेल को खेलते रहते हैं इसी चौसर की विषद पर नित्य ही अद्भुत एवं

विचित्र घटनाओं की सृष्टि होती है ऐसे ही एक दिन शिव पार्वती कैलाश के किसी एकांत

आनंद प्राप्ति के उद्देश्य से चौसर खेल रहे

हैं एक दो तीन चार पाच सात आन

यह मारा यह गई तुम्हारी

[संगीत]

गोडी क रही हो देवी तुम भी कौड़ी फेंक आप समझते हैं कि भाग्य केवल आप ही का

साथ देगा अवश्य जब तक सौभाग्य शालिनी देवी पार्वती हमारे साथ रहेंगी तब तक भाग्य तो

हमारा ही साथ देगा आज मैं आपके साथ नहीं मेरा भाग्य मेरे साथ और आपका भाग्य हम समझ

गए देवी आज खेल खेल में ही तुम हमारी विरोधी बन बैठे किंतु हमने भी निश्चय कर

लिया है कि आज तो तुमको हरा कर ही रहे कौड़ी

ओ [संगीत]

एक दो तीन चार पाच सात आ न

आपकी पहली गोटी गई देखा स्वामी अब मैं जीत

गई अब मैं जीतती ही चली जाऊंगी

पा मारा एक दो तीन चार पाच सा आन

दूसरी भी गई अरे स्वामी हार का संकेत पाते ही आप

रूठ गए यह तो कोई खेल ना हुआ तुम ही कौड़ी फेंक कर जीतती जा रही एक बार कौड़ी फेंक

कर मुझे देना चाहि जो जीतता है कौड़ी वही फेंकता है जब आप जीते थे तो कौड़ी मुझे

क्यों दी थी स्वयं क्यों नहीं फेंकी यह हमारी उदारता थी जो हमने तुम्हे अवसर दिया

किंतु तुमने हमारी उदारता का अनुजित लाभ उठाया खेल में उदारता महंगी पड़ती है

बा प

बा लो स्वामी आपकी तीसरी गोटी भी गई मैं

जीती और आप हारे तीन बार मैं आपको हरा चुकी हूं

स्वामी यदि अब आगे भी आपको खेलना हो तो मैं तैयार हूं देवी तुमने हमारे साथ छल

किया छल करके ही तुम हमसे जीती अब हम तुम्हारे साथ कभी नहीं खेलेंगे मैं तो खेल

भावना से ही खेलती रही ह किंतु खेल में इस प्रकार रोश करना आपको शोभा नहीं देता

स्वामी ी जीत से तुम गर्व से भूल गई हो गर्व में उन्मत होकर तुम यह भी भूल गई हो

के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए ऐसा मैंने क्या कह दिया है स्वामी तो अब तुम्हें यह

भी ज्ञात नहीं रहा कि तुमने क्या कहा है भूल करने वाले को इस सत्य का ज्ञान यदि

हो कि वह जो कर रहा है वो भूल है तो व कदापि ऐसा करे ही नहीं किंतु अज्ञान और

अहंकार के भाव प्रबल होने पर किसी भी प्राणी को यह भान नहीं होता ये वो भूल कर

रहा है कहे तो स्वामी इस समय मुझसे क्या क्या भूल हुई है क्या खेल में आपसे जीत

जाना मेरी भूल है अपनी जीत की चर्चा करना क्या मेरी भूल है इस समय हम तुमसे इस विषय

में चर्चा करना उचित नहीं समझते आप वर्थ ही वग हो रहे हैं स्वामी अच्छा तो अब हम

व्यर्थ भी कुछ कार्य करते हैं मेरा अभिप्राय य नहीं है स्वामी हम तुम्हारा

अभिप्राय बहुत समय से समझ रहे हैं तुम हमें बहलाने का प्रयत्न ना करो प का मन लाने का अधिकार तो पत्नी का

ही होता है ना स्वामी और जगत जानता है कि मैं आपकी पत्नी हूं बस बस इस समय ना तो

हमें तुम्हारी मीठी मधुर बातें सुननी है और ना ही तुम्हारे साथ की आवश्यकता

है आपको मेरे साथ की आवश्यकता नहीं है तो फिर मैं इसी समय कैलाश छोड़कर अन्यत्र

कहीं चली जाती हूं फिर आप मुझे ढूंढने की चेष्टा ना करना तुम जा सकती हम पहले भी

तुम्हारे बिना अकेले रह चुके तुम भली भात जानती हो कि चुनौती पूर्ण शब्द सुनना

हमारे स्वभाव में नहीं वैसे भी तुम्हारे साथ इतने समय तक रहकर हम अपनी स्वतंत्रता

खो चुके अच्छा ही तुम्हारे जाने के पश्चात हम फिर से स्वतंत्र हो

जाएंगे [संगीत]

स्वामी [संगीत]

पार्वती क्या इस तरह कैलाश से नाता तोड़कर चले जाना उचित

होगा अपने पुत्र समान नंदी और शिव गणों का भी विचार नहीं आया तुम्हें तुम्हारे ना

होने पर उनकी क्या स्थिति होगी अब कैलाश से चलकर आई हूं तो लौट कर

कैसे जा सकती हूं नंदी और शिव गण की चिंता करने की मुझे

क्या आवश्यकता है उनकी चिंता करने वाले शिवशंकर तो कैलाश

पर बैठे ही है ना किंतु प्रश्न यह है कि तुम जाओगी

कहां और कहां हिमालय राज की शरण में नहीं

नहीं नहीं वहा नहीं जाऊंगी वहा जाने से उनकी चिंता बढ़ जाएगी और वे स्वामी के पास

लौट जाने के लिए कहेंगे नहीं मैं वहा नहीं जाऊंगी तो कहां

जाओगी किसी अज्ञात स्थान पर जहां कोई मेरे

विषय में जान भी ना सके किंतु शिव तो अंतर्यामी है तुम उनसे कैसे छिपी रह सकती हो वे जान

ही जाएंगे कि तुम कहां हो जानते हैं तो जान ले मेरा भी दृढ़ निश्चय है कि मैं इस बार

सरलता से कैलाश नहीं लौटू वे मना मना कर थक जाएंगे फिर भी नहीं लौटू मैं कैलाश

नहीं लौटू नहीं लौटू नहीं [संगीत]

लौटू धीरे धीरे धीरे

हम धीरे धीरे धीरे धीरे हमको डर लग

[संगीत]

है [संगीत]

[संगीत]

तू कौन बा तू कहां से आवत हो हमारा नाम परवतिया है यहां से तनिक दूर हिवा गांव

में हम रहत है पर अदवा से तनिक कहा सुनी हुई गई तो हम रूट कर यहा चले आए का हमका

आपन संग रखो हां हां काहे नाही तुम जैसे सुंदर नार को कौन ना बोलेगा री तोहार

भरतार आवे तो भी लौट करना जाई का हम तो का छुपा

ले पर्वती झूला झूल बो नहीं नहीं नहीं अरे चल आ बैठ

चल अरे तू भी हमार संग बैठना ना ना हमका डर लागत है अरे डर तो हमका भी लागत है आ

[संगीत] [हंसी]

[संगीत]

[संगीत] बैठ झूला झूले में तो पर्वती बहुत चतुर है

झूलन मा चतुर है तो व्यवहार में अधिक ही चतुर रही होगी क्यों रे पर्व दिया काहे कि

हम अपने गांव हिवा में सदा खेलत रहे ना कौन के संग खेलत रहे अपनी मनमत वा के

[संगीत]

संग आपको मेरे साथ की आवश्यकता नहीं है तो फिर मैं इसी समय कैलाश छोड़कर अन्यत्र

कहीं चली जाती हूं फिर आप मुझे ढूंढने की चेष्टा ना करना

आपको मेरे साथ की आवश्यकता नहीं है तो फिर मैं इसी समय कैलाश छोड़कर अन्यत्र कहीं

चली जाती हू फिर आप मुझे ढूंढने की चेष्टा ना [संगीत]

करना नंदी भैया भगवान भोलेनाथ व्यग्र है व्यग्र तो हम भी है माता पार्वती कुछ बताए

बिना ना जाने कहां चली गई भोलेनाथ को तो पता होगा अवश्य ही होगा किंतु वो स्वयं

कितने व्यग्र है इसका कारण तो केवल तुम ही पूछ सकते हो जाओ ना जाओ ना नंदी

[संगीत]

भैया जय शिव शंकर जय माता

[संगीत]

पार्वती

आंखें खोले भोलेनाथ और यह बताएं कि आप इतने व्यग्र

क्यों है माता पार्वती कहां [संगीत]

है

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