भ्रामक बातें जो Maa Kali के बारे में फैलाई गई हैं | - Kabrau Mogal Dham

भ्रामक बातें जो Maa Kali के बारे में फैलाई गई हैं |

नमस्कार दोस्तों आप सभी पर मां का

आशीर्वाद और बजरंग बली की कृपा सदैव बनी

रहे आज की यह वीडियो मां काली को समर्पित

है आज इस वीडियो में हम अपने दुख दर्द की

बातें और उनके उपाय के बारे में बात नहीं

करेंगे बल्कि मां के हृदय की बातें

जानेंगे वह क्या सोचती हैं क्या उन्हें भी

कोई दुख है क्या उन्हें भी कोई पीड़ा

है आज का जो यह वीडियो है इसमें बताई गई

सारी बातें एक एक शब्द मां की प्रेरणा

उनकी अनुभूति और उनके अनु से जन्मा है

उनकी कृपा से संभव हो पाया है और आप मां

को यदि प्यार करते हैं तो अवश्य ही मां की

भावना को समझेंगे और इस वीडियो में बोले

गए एक एक शब्द को अपनी अंतरात्मा से महसूस

करेंगे मां की पीड़ा को अपनी अंतरात्मा से

महसूस करेंगे आज की यह वीडियो मां काली की

घर में स्थापना और उनकी पूजा से संबंधित

विभिन्न भ्रांतियों संशय और उनके निवारण

के ऊपर है तो इस वीडियो में दो ऐसी चीजें

हैं जो मां को प पड़ा देती हैं पहली चीज

मां काली की घर में स्थापना और उनकी पूजा

से संबंधित बहुत सी भ्रांतियां और संशय

समाज में फैले हुए हैं और मैं कहूंगी कि

फैलाए गए हैं सामान्य जन को मां की पूजा

साधना से दूर रखने के लिए मां का चित्रण

एक बहुत ही उग्र बहुत जल्दी क्रोध में आने

वाली पूजा में भूल होने पर दंड देने वाली

देवी के रूप में किया गया है जो बेहद दुखद

है शर्मनाक है कुछ लोग हैं जो नहीं चाहते

कि आमजन मां की शक्तियों को समझे अनुभव

करें और स्वयं की समस्याओं का हल मां की

कृपा से खोज सके यह वह लोग हैं जो चाहते

हैं कि मां पर बस सिर्फ उन्हीं का हक हो

और यही लोग बहुत सी भ्रांतियां बहुत से

गलत विचार मां की पूजा के संबंध में समाज

में फैलाते हैं अब आप कहेंगे कि मां तो

पराशक्ति हैं भला उन्हें क्या दुख क्या

दर्द उनके पास हर समस्या का समाधान है जी

हां बिल्कुल सही है मां पराशक्ति है उनके

पास हर समस्या का समाधान है लेकिन जब मां

के दुख का कारण उनके स्वयं की बच्चों की

अज्ञानता और मूर्खता हो तो मां क्या करें

मां का दर्द यह है कि जिस संतान की रक्षा

के लिए मां ने शस्त्र उठाए उग्र स्वरूप

धारण किया उनकी वही संतान उनसे भय खाती है

और उन्हें क्रोध वाली देवी के रूप में

सिर्फ तांत्रिकों की देवी के रूप में

पहचानती है कई घरों में मां की फोटो

मूर्तियां इसीलिए नहीं लगाई जाती क्योंकि

उन्हें लगता है कि ऐसा करने से उनके घर

में क्लेश होगा क्योंकि मां उग्र स्वभाव

की है मां ने अनेक भयानक राक्षसों का वध

किया महिषासुर शिंब निशुंभ धूम राक्षस

रक्तबीज और रक्तबीज का रक्त इसीलिए पान कर

लिया कि रक्तबीज के रक्त से दूसरे राक्षस

जन्म ना ले सके और सभी मनुष्य देवगण उस

राक्षस के आतंक से मुक्त हो सके इसीलिए

नहीं कि उनके बच्चे उनसे भयभीत हो और उनकी

पूजा करना छोड़ दे और यह चीज मां को बहुत

पीड़ा देती है आप लोग अपने घरों में मां

की आरती अवश्य गाते होंगे और अपने कष्टों

के निवारण के लिए यह शब्द तो रोज कहते

होंगे कि तेरे भक्त जनों पर माता भीड़

पड़ी है भारी दानव दल पर टूट पड़ो मां

करके सिंह सवारी स सिंघ से भी बलशाली

भुजाओं वाली दुखियों के दुखड़े निवार

की अंबे तू है जगदंबे काली जय दुर्गी

खप्पर वाली तेरे ही गुण गाए भारती तो मां

से आप गुहार लगाते हैं उनको पुकारते हैं

आसुरी शक्तियों से बचाव के लिए और जब मां

उग्र स्वरूप लेकर उन आसुरी शक्तियों का

विनाश करते हो तो फिर उसी उग्र स्वरूप से

आप भय खाते हो यही मां की सबसे बड़ी पीड़ा

है एक साधारण सी दिखने वाली स्त्री भी

चंडी का रूप धारण कर लेती है जब उसकी

संतान की रक्षा का प्रश्न होता है तो यह

तो पराशक्ति मां जगदंबा मां कालिका है

जिसके पता नहीं कितने उपकार कितने ऋण है

हम पर और जिसे हम सब को चुकाना ही चाहिए

जिस प्रकार जन्म देने वाली मां के दूध का

कर्ज चुकाना आवश्यक है उसी प्रकार

पराशक्ति मातृ शक्ति मां जगदंबा कालिका का

ऋण चुकाए बिना मुक्ति संभव नहीं तो हर

व्यक्ति हर छोटा बड़ा हर गृहस्थ मां काली

की पूजा बिना किसी भय या संशय के अपने घर

में करें बस मां को मां के रूप में घर में

स्थापित करें जैसे परिवार के अन्य सदस्य

हैं उस रूप में मां के संग व्यवहार करें

उन्हें प्रेम करें तो मां भी यह वचन देती

है कि उनके भक्त को किसी से भयभीत होने की

आवश्यकता नहीं दूसरा भ्रम या प्रश्न जो कई

लोगों के मन में है कि मां के सौम्य

स्वरूप की स्थापना करेंगे तो सौम्य स्वरूप

मां का कौन सा है देखिए कोई भी फल की

प्राप्ति बहुत कुछ हमारे दृष्टिकोण पर

निर्भर करती है दूसरों के प्रति हमारा

नजरिया हमारे संबंधों को एक स्वरूप देता

है तो मां को एक मां समझकर शिशु भाव से

उन्हें अपने घर में स्थापित करें फिर

मूर्ति का स्वरूप कैसा भी हो क्या फर्क

पड़ता है लेकिन आप लोगों के अंदर भई की

जड़े इतनी गहरी हो गई है कि मन सशंकित

होता ही रहेगा और यह जो मन का भय और संशय

है यही नेगेटिव एनर्जी है जो आपके जीवन पर

बुरा प्रभाव डालेगा ना कि मां की मूर्ति

तो यहां अपने जीवन का एक अनुभव आपके संग

शेयर करना चाहती हूं शायद मेरा यह अनुभव

आपके भ्रमों को दूर कर सके एक बार मैंने

हनुमान जी की साधना उठाई थी और तीन शनिवार

उन्हें चोला चढ़ाने का संकल्प लिया था

हनुमान जी मेरे इष्ट मेरे गुरु हैं मेरी

आध्यात्मिक यात्रा की नीव है आज मैं जहां

भी हूं मां को प्राप्त किया मां को अनुभव

किया लौकिक गुरु मिले यह भी हनुमान जी की

कृपा से मुझे मेरी गुरु मां से मिलाया

मेरी गुरु मां जो जगत की गुरु मां है मां

महाकाली तो मैं बता रही थी कि मैं ने एक

बार साधना उठाई और तीन शनिवार हनुमान जी

को चोला चढ़ाने का संकल्प लिया था अब

चूंकि स्त्री होने के कारण मुझे चोला नहीं

चढ़ाना था किसी घर के पुरुष सदस्य से चोला

चढ़ वाना था और घर में उस दिन पुरुष

सदस्यों की अनुपस्थिति थी तो मैं मंदिर

पहुंची यह सोचकर कि पंडित जी से चोला चढ़

दूंगी लेकिन वहां पंडित जी नहीं थे अब

चोला तो उसी दिन चढ़ना था क्योंकि संकल्प

लिया था तो हनुमान जी से अनुमति लेकर मनी

मन उन से प्रार्थना करके उन्हें मैंने

चोला चढ़ा दिया क्योंकि संकल्प उसी दिन का

था लेकिन मन में कोई भय नहीं था कोई डर

नहीं था क्योंकि हनुमान जी से आत्मा से

ऐसा जुड़ाव है कि शरीर नर हो या नारी का

कोई फर्क नहीं पड़ता था तो बस आत्म भाव से

हनुमान जी को चोला चढ़ा दिया और इतने

अविश्वसनीय आनंद देने वाले अनुभव हुए जो

शब्दों से परे हैं जो बताए नहीं जा सकते

फिर तो तीनों शनिवार मैंने स्वयं ही चोला

चढ़ाया तो जब आत्मा का जुड़ाव होता है जब

मन हर समय अपने इष्ट में डूबा रहता है तो

फिर शरीर की सीमाए टूट जाती हैं भाव रह

जाते हैं प्रेम रह जाता है भक्ति रह जाती

है यहां जो मैंने अपना अनुभव शेयर किया है

इसका तात्पर्य यह कदापि नहीं कि स्त्रियों

को हनुमान जी को चोला चढ़ाना ही चाहिए यह

एक अलग विषय है यहां तो मैं बस यह कहना

चाहती हूं कि कभी-कभी कुछ चीजें जीवन में

ऐसी घटित होती हैं कि जो लगता है आप कर

रहे हैं लेकिन वास्तव में आप नहीं कर रहे

होते हैं कुछ चीजों की आज्ञा ईश्वर स्वयं

ही दे देते हैं स्वयं हमारे हाथों से वह

कार्य संपन्न कर करा देते हैं यह बस हो

जाता है क्योंकि जब आप मैं नहीं होते जब

आप आप नहीं होते तो ईश्वर आपके संकल्प की

चिंता स्वयं करते हैं कि भक्त का संकल्प

कहीं खंडित तो नहीं हो रहा और फिर यह हो

जाता है तो मां काली की मूर्ति की स्थापना

करते समय बस प्रेम भाव फिर मूर्ति चार हाथ

की है या एक हाथ की मूर्ति का एक शीष है

या सिर है क्या फर्क पड़ता है और

अधिकतर मूर्तियों में मां का एक पैर भगवान

शिव के ऊपर है तो मा का ये उग्र स्वरूप

नहीं शांत स्वरूप है क्योंकि इसी समय

युद्ध के मैदान में जब मां का पांव भगवान

शिव की छाती से स्पर्श हुआ था तो उनका

क्रोध शांत हो गया था और उनकी जीभ बाहर

निकल आई थी तो ये इनके क्रोध का स्वरूप

नहीं बल्कि उनके शांत स्वरूप का प्रतीक है

और एक बात कहना चाहूंगी कि जब भी इस

प्रकार की कोई स्थिति हो जब निर्णय लेना

मुश्किल हो तो हमेशा अपनी आत्मा की आवाज

सुने आपकी आत्मा जो परमात्मा का ही एक अंश

है आपको हमेशा सही गाइड करती है सही राह

दिखाती है

तो मां काली के प्रति कोई भी भ्रम कोई भी

भ्रांतियां कोई भी डर है उन सब से मुक्त

हो जाएं उन्हें बहुत प्रेम करें बहुत

प्रेम करें जिस तरह से एक संतान अपनी मां

से प्रेम चाहती है उसी तरह से एक मां भी

अपनी संतान से प्रेम चाहती है उनको आपके

महंगे आभूषण गिफ्ट नहीं चाहिए बहुत सारा

धन नहीं चाहिए आपके भाव चाहिए और एक बार

जब मां घर में प्रवेश कर जाती हैं फिर तो

उनकी सारी शक्तियां उनकी सारी योगिनी यां

उनके गण हर समय घर पर विराजमान होते हैं

और आपका ध्यान रखते हैं मां की मूर्ति की

घर में स्थापना करके नित्य मां की ज्योत

दोनों समय जलाएं जो भी पाठ जो भी मंत्र

आदि आप सामर्थ्य अनुसार कर सकते हैं उनके

निमित्त करें और मां की मूर्ति की स्थापना

घर में कैसे करनी है इसके लिए अलग से एक

वीडियो बना देंगे आप उसे जरूर देख लें और

मां की मूर्ति की घर में स्थापना से

संबंधित क्या नियम है किस प्रकार मां की

मूर्ति घर में स्थापित करनी है इसके ऊपर

एक अलग से हम वीडियो बना देंगे तो मां को

घर के सदस्य के रूप में आप स्थापित करें

और फिर जो भी भोजन आपके घर में बनता है

पहले मां को चढ़ाएं फिर उसको वह प्रसाद हो

जाता है तो अन्य भोजन में मिलाकर पूरा

भोजन प्रसाद बन जाता है फिर आप सब लोग

खाएं परिवार में और सामर्थ्य अनुसार मां

की सेवा करें उन्हें वस्त्राद अर्पित करें

जो भी आपकी सामर्थ्य है लेकिन जितनी

सामर्थ्य है उतना ही पॉकेट जितना अलाव

करता है अगर आपकी पॉकेट अलाव नहीं करती है

और आप एक बोझ समझकर मां को को चढ़ा रहे

हैं तो मां को आपका ऐसा धन नहीं चाहिए तो

आज की वीडियो में इतना ही पूरा विश्वास

करती हूं कि मां की भावना उनके दर्द को

आपने समझा होगा स्वयं भी मां की भक्ति

करें और दूसरों के भयो को दूर कर उनके

भ्रम को दूर कर उन्हें भी मां की भक्ति

करने के लिए प्रेरित करें आप सभी अपना

ध्यान रखें स्वस्थ रहे खुश रहे मस्त रहे

जय माता दी जय बजरण

बली y

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