ब्रह्मांड का सबसे शक्तिशाली कवच | देवी कवच | - Kabrau Mogal Dham

ब्रह्मांड का सबसे शक्तिशाली कवच | देवी कवच |

कि नमस्कार दोस्तों आप सभी पर मां का

आशीर्वाद और बजरंगबली की कृपा सदैव बनी

रहे आज इस वीडियो में हम बात करेंगे मां

भगवती की प्रमुख शक्तियों से युक्त कवच

दुर्गा कवच के बारे में दुर्गा कवच

मार्कंडेय पुराण के विशेषज्ञों का एक

संग्रह है जो दुर्गा सप्तशती में वर्णित

थे मा दुर्गा कवच को ब्रह्माजी ने ऋषि

मार्कंडेय कुछ सुनाया था

कि जब ऋषि मार्कंडेय भगवान ब्रह्माजी से

एक ऐसा उपाय बताने की प्रार्थना करते हैं

जिससे मनुष्य मात्र की रक्षा हो तब

ब्रह्माजी ने ऋषि मार्कंडेय जी को कहा था

कि अस्ति गुह्यतमं विप्र सर्वभूतोपकारकम्

देव्यास्तु कवचं पुण्यं तच्छृणुष्व

महामुने

ब्रह्माजी ऋषि मार्कंडेय जी को कहते

हैं कि हे ऋषि तक संपूर्ण प्राणियों का

कल्याण करने वाला देवी का कवच अत्यंत

गोपनीय है हे महामुने उसे सुनिए

है मां दुर्गा का यह जो कवच है जिसे देवी

कवच और चड्डी कवच भी कहा जाता है इसकी

शक्तियों के बारे में अगर बात की जाए तो

शब्दों के वर्णन से परे हैं इसका रहस्य

इसकी शक्ति और प्रभाव इनका अनुभव वहीं

भक्त कर सकता है जो मामी अटूट श्रद्धा

रखता है मां दुर्गा के तो इस वर्ण मात्र

से भक्तों का बेड़ापार होता है और जो

व्यक्ति मां के कवच का नियमित पाठ करता है

वह मां की शक्तियों से संपूर्णता रक्षित

हो जाता है यह तू भक्त्या स्मृता नूनं

तेषां वृद्धि प्रजायते यह फार्म्स स्मरंति

देवेशि रक्षसे तान्न में संख्या जो लोग

भक्तिपूर्वक भगवती का स्मरण करते हैं उनका

ह्रदय होता रहता है यह भगवती जो लोग आपका

स्मरण करते हैं जिससे ही आप उनकी रक्षा

करती है

है तो दोस्तों जानते हैं देवी कवच के

रहस्यों के बारे में एक इसके आकार के

प्रभाव के बारे में और साथ जानते हैं पाठ

की विधि के बारे में

कि देवी कवच महिमा के विभिन्न नामों का

उच्चारण होता है जो हमारे आस पास हमारे

शरीर के चारों ओर एक ऐसा शक्तिशाली घेरा

बना देती है एक ऐसा अकाट्य कवच बना देती

हैं जिसको भी ना किसी भी शक्ति के बस में

नहीं

इसके बीच में महाशक्ति के विभिन्न

स्वरूपों का उनके नामों का उच्चारण है जो

शरीर के विभिन्न अंगों की रक्षा करती है

तो इस प्रकार संपूर्ण शरीर की सुरक्षा

होती है साथ ही रोगों से सुरक्षा होती हैं

हर संताप से सुरक्षा होती है दैहिक दैविक

और भौतिक इन सभी कष्टों से व्यक्ति को इस

पाठ के करने से मुक्ति मिलती है

कि इस पाठ को करने से देवी हर प्रकार से

सुरक्षा प्रदान करती है बड़े से बड़ा

तंत्र प्रयोग हो शत्रु बाधा हो रोग-शोक

पुपरी हवा है आर्थिक संकट अगर व्यक्ति को

गिरे हुए हैं जीवन के जितने भी कष्ट है उन

सभी से सुरक्षा यह कवच भक्तों को प्रदान

करता है इसके अलावा अकाल मृत्यु से

व्यक्ति की रक्षा होती है देवी कवच के तो

सुनने मात्र से ही रक्षा होती है तो अगर

इसका पाठ किया जाए तो उसका कहना ही क्या

ग्रह दोष समाप्त होते हैं मोहन वशीकरण

स्तंभन उच्चाटन टोने-टोटके यह सभी कार्य

निष्फल होते हैं मोहन वशीकरण स्तंभन

उच्चाटन टोने-टुटके यह सभी कार्य निष्फल

होते अंतरिक्ष में बिकने वाली जितनी भी

यूनिक है विभिन्न यूनियनों है डाकिनी

शाकिनी राक्षस बेताल और अनिष्ट करने वाली

जितनी भी सकती हैं उन सब से व्यक्ति की

रक्षा होती है इसके साथ-साथ भौतिक उन्नति

व्यक्ति की होती है रिद्धि सिद्धि कि

प्राप्ति होती है और आर्थिक कष्ट इसको

पढ़ने मात्र से दूर होते हैं कि नबी जल

में थल भी सुरक्षा होती है

कि अरविंद भैया – तू शत्रुमध्यगता रणे

विषमे दुर्गमे चैव भैया तरह रंग अतः न

तेषां जायते किंचिदशुभं रणसंकटे

नापदं तस्य पश्यामि सुलभ काम नहीं अर्थात

जो मनुष्य अग्नि में जल रहा हो युद्धभूमि

में शत्रुओं से गिर गया हो तथा अत्यंत

कठिन विपत्ति में फंस गया हो वह यदि भगवती

दुर्गा की शरण का आश्रय ले तो उसका कभी भी

युद्ध या संकट में कोई कुछ बिगाड़ नहीं

सकता उसे कोई विपत्ति दे रही सकती और न ही

उसे शोक दुख तथा भय की प्राप्ति हो सकती

है

कि देवी कवच के पाठ से न केवल हर प्रकार

की सुरक्षा एक व्यक्ति को प्राप्त होती है

बल्कि दैवीय शक्तियां भक्तो को प्राप्त

होती है उसकी ऊर्जा का स्तर बहुत ज्यादा

बढ़ जाता है आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग

प्रशस्त होता है और उसके व्यक्तित्व में

उसकी वाणी में एक सम्मोहन होता है जो हर

व्यक्ति को अपनी तरफ आकर्षित करता है

कि नित्य दुर्गा कवच का पाठ करने वाले

व्यक्ति को विविध प्रकार की अनुभूतियां

कराते हैं सपने में मां के दर्शन होते हैं

और स्वप्न के अलावा मां विभिन्न रूपों से

भिन्न संकेतों के द्वारा अपने भक्तों को

अपनी कृपा का अपनी प्रसन्नता का संकेत

देती है

है तो दोस्तों इस कवच के पाठ के अनगिनत

लाभ है जो कि नहीं जा सकते बस यह समझ लें

कि इस कवच का पाठ करने वाले व्यक्ति के

साथ मां हमेशा होती है

कि इस कवच का पाठ किस प्रकार करना है इसकी

विधि के बारे में अब हम जानते हैं जो बेहद

जरूरी है इसकी पाठ विधि बेहद सरल है तीनों

संध्याओं में सुबह-दोपहर-शाम इसका पाठ

करना चाहिए यदि तीनों समय पाठ नहीं कर

सकते हैं तो दो बार कर ले और दो बार भी

अगर नहीं कर पा रहे हैं तो एक बार नित्य

हनुमान में श्रद्धा रखने वाले भक्तों को

इस का पाठ अवश्य करना चाहिए किसी भी शुभ

दिन से शुरू कर सकते हैं नवरात्रि गुप्त

नवरात्रि में शुरू कर सकते हैं शुक्ल पक्ष

की अष्टमी को मंगलवार शुक्रवार से शुरू कर

सकते हैं

[संगीत]

कि इसके बाद में नहा धोकर साफ वस्त्र आपको

धारण करने हैं लाल रंग मां को बेहद प्रिय

है तो लाल रंग के वस्त्र धारण करें अगर

लाल रंग के वस्त्र नहीं है तो हल्के रंग

के वस्त्र जैसे हल्का गुलाबी है हल्का

पीला है इस प्रकार के वस्त्र धारण करने

चाहिए लाल ऊनी आसन का प्रयोग करें

सर्वप्रथम भगवान गणेश का अध्यन करना है और

ओम गन गणपते नमः इस मंत्र की एक माला जप

करना है तत्पश्चात गुरु मंत्र की एक माला

जप कर रही है अपने गुरु का ध्यान करें

भगवान शिव का ध्यान अवश्य करें ओम नमः

शिवाय इस मंत्र की एक माला का जप अवश्य

करें उसके बाद मां का पंचोपचार पूजन करें

धूप दीप अक्षत पुष्प नैवेद्य मां को

अर्पित करें तिल के तेल का या घी का दीपक

मां को समर्पित करें मां का कोई भी प्रयास

हो सामर्थ्य अनुसार मां को चढ़ाएं लॉन्ग

बता श्री फल मेवे आदि मिठाई खीर समर्थ

अनुसार मां को भोग अर्पित करना चाहिए और

दोस्तों भोग रोज मां तु अर्पित करना चाहिए

है और आप संकल्प लेकर इसका पाठ कर सकते

हैं अगर कोई विशेष मनोकामना के लिए कर रहे

हैं और नित्य की पूजा में मां की

प्रसन्नता उनकी कृपा के लिए भी इसका पाठ

कर सकते हैं बिना संकल्प दृढ़ संकल्प पर

यदि आप ले रहे हैं तो दाएं हाथ में जल

अक्षत और पुष्प लेकर अपना नाम आपको बताना

है अपनी मनोकामना मां को पता नहीं है जो

भी आप जिस भी इच्छा के संपूर्णता के लिए

पाठ कर रहे हैं वह अच्छा आप मां को बताएं

अपने सामर्थ्य अनुसार

कितने पाठकों करने हैं

या जितने भी पाठकों करने हैं वह मां

को आपको बताना है और मां से पांच की सफलता

की प्रार्थना करनी है संकल्प की सिद्धि की

संपूर्णता के लिए प्रार्थना करनी है और

मासिक कहना है कि मां मेरे इस जब को पूरी

धरती को स्वीकार करें इस प्रकार

प्रार्थनाकर के साथ निभा चुकी थी क्षमा

याचना करते हुए उस जल को जब ईमेज है और

इसका जो संपूर्ण फल देवी कवच का अगर

प्राप्त करना है तो इसके करने होते

हैं इसके बाद आप पाठ शुरू कर सकते हैं तो

बहुत सरल विधि है इस पाठ को कर रही थी इस

बूट को करने से पहले दुर्गा सप्तशती में

जो श्लोक मानते हैं अ सप्तश्लोकी दुर्गा

सप्तश्लोकी उसको आपको जरूर पढ़ना चाहिए

हिंदी और संस्कृत दोनों भाषाओं में आपको

दुर्गा सप्तशती प्राप्त हो जाएगी जिस भाषा

में भी आपको सुविधा हो उसी भाषा में आप

इसका पाठ करें और मां की असीम कृपा अपने

जीवन में महसूस कर दो

अब इस पॉइंट को करने के कुछ ही दिनों में

मां की पूजा को उनके अनुभव को आप महसूस

करने लगेंगे और जीवन के हर क्षेत्र में

आपको कामयाबी मिलती चली जाएगी ऐसा

चमत्कारी स्वरूप है इस दुर्गा कवच कर तो

दोस्तों आज की वीडियो में इतना ही अगली

वीडियो में बहुत चल मिलती हूं तब तक के

लिए अपना ध्यान रखिए स्वस्थ रहिए खुश रहिए

मस्त रहिए जय माता दी जय बजरंगबली

[संगीत]

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