फरवरी को नक्षत्र तुम्हारे पक्ष में आयेंगे और जीत दिलाएंगे ? - Kabrau Mogal Dham

फरवरी को नक्षत्र तुम्हारे पक्ष में आयेंगे और जीत दिलाएंगे ?

मेरे प्रिय पुण्य आत्मा इस संसार में जो
कुछ प्रकट होता है वह मिथ्या है और जो
दिखाई नहीं पड़ता अपक होता है वह सत्य है

समय काल देश परिस्थिति से आगे भी कुछ है
जो तुम्हारे भीतर बसा है और जिसके भीतर
तुम विराजमान हो एक अलौकिक अनंत सारद

ब्रह्मांड जिसका ना तो कोई प्रारंभ है और
ना ही कोई अंत है जो स्वयं ही खुद का
विस्तार भी करता है और अप ना ही विनाश भी

करता है हर एक पल में कुछ नया निर्मित
होता है और उसी तत्कालिक क्षण में कुछ
समाप्त भी होता है तुम्हारे भीतर बसा यह

ब्रह्मांड तुम्हें बहुत कुछ कहना चाहता है
और वही बताने में तुम्हारे सामने प्रकट
हुआ हूं इसलिए संदेश को हर हाल में पूरा
सुनना इसे बीच में छोड़ने की भूल ना करना

यह ना केवल तुम्हारी जीत के लिए है बल्कि
तुम्हारे संपूर्ण भविष्य और वर्त मान को
परिभाषित करने के लिए भी भेजा हुआ संदेश
है हां अभी इसी वक्त इसी काल में वह सब

कुछ हो रहा है जिसे तुम भविष्य कहते हो
अपना भविष्य इस विश्व का भविष्य समग्र
संसार का
भविष्य लेकिन इसे देखने के लिए अपनी

दृष्टि को सूक्ष्म अर्थात आध्यात्मिक करना
अत्यंत आवश्यक है क्योंकि बिना सूक्ष्म
दृष्टि के तुम उस दिव्यता को जान नहीं पा
पाओगे जिस दिव्यता के द्वारा तुम्हारा

उद्धार किया जाना है इस संदेश का तुम्हें
मिलना भी सामान्य नहीं है बल्कि ब्रह्मांड
की एक गुप्त योजना का ही हिस्सा है ताकि
तुम उस आलौकिक जगत को देख सको जो सामने

होते हुए भी अदृश्य है क्योंकि तुम उसे
देखने का प्रयास नहीं कर पा रहे क्योंकि
तुम उसके भीतर गहराई से उतर नहीं पा रहे
और लाखों में कोई एक ऐसा हो जाता है लेकिन

वास्तव में यह मुक्ति का मार्ग है बंधन से
इस आलौकिक जगत को जानने की इच्छा प्रकट
करता है तुम अभी ऐसे ही मनुष्य हो जिसने
इस जगत को जानने की इच्छा व्यक्त की है कई

बार अकेलेपन में तुम्हारे मन से वह पुकार
निकली है कि तुम इस दिव्यता इस भव्यता इस
सुंदरता को समझ पाओ और जो प्रयत्न करता है
उसे लक्ष्य तक पहुंचाने का कार्य मैं कर

देता हूं जो थककर हारता नहीं जो चूर चूर
होकर बैठ नहीं जाता उसे लक्ष्य तक
पहुंचाने का कार्य मैं करता हूं तुम तक इस
संदेश का पहुंचना एक विराट योजना का

हिस्सा है यह संदेश तुम्हें स्मरण कराने
का जरिया मात्र है कि उसे देखने की इच्छा
जागृत करो जो वास्तव में तुम्हारे सामने
ही है किंतु तुम्हें दिखाई नहीं दे रहा

क्योंकि वह सब कुछ यही घटित हो रहा है
तुम्हारे भीतर घटित हो रहा है तुम्हारे
सामने घटित हो रहा है हर समय वह घटित हो
रहा है हर समय निर्माण और विनाश की

प्रक्रिया चलती चली जा रही है और क्योंकि
तुम अब इस योजना का हिस्सा हो तो तुम्हारे
ऊपर कुछ जिम्मेदारियां भी है जिसका
तुम्हारे लिए समझना अत्यंत आवश्यक है

मनुष्य जीवन में घटने वाली हर एक छोटी
बड़ी घटना के पीछे कोई विशिष्ट कारण अवश्य
ही छुपा हुआ होता है और जो इस बात को समझ

जाता है जो इस बात को जान लेता है जो इसकी
गहराई तक पहुंच जाता है वास्तव में वह
महान बन जाता है यह महानता किसी के सामने
जाहिर करने की चीज नहीं है यह महानता

सिद्धि या प्रसिद्धि को प्राप्त करने की
चीज नहीं है वास्तव में यह महानता मनुष्य
के भीतर असीम शांति का अनुभव कराती है एक
सुख का अनुभव कराती है वह सुख जिसे पाना

उस मनुष्य का अधिकार हो जाता है जिसने इसे
पाने के लिए अपना सब कुछ त्याग दिया हो
तुम उस राह पर आगे बढ़ चले हो जहां पर
तुम्हारे लिए त्याग बहुत बड़ी बात नहीं है

बस तुम्हारे लिए उसे समझना अभी बहुत बड़ी
बात है उसे समझना आवश्यक है विचार करो
बीते कुछ वर्षों में तुम्हारे जीवन में इस
तरह की स्थिति उत्पन्न होती रही है जहां

पर तुम्हारे मन में भूचाल सा उत्पन्न होता
रहा है तुमने जिस भौतिक जगत पर विश्वास
किया वहां पर तुम्हारे विश्वास को ही चूर

चूर किया गया कई बार तुम रातों को रोए कई
बार इतना तुमने विलाप किया कि तुम खुद ही
नहीं समझ पाए कि आखिर यह सब क्या चल रहा

है तुम तड़पे बिलखे अपनी किस्मत के लिए
बार-बार तुमने शिकायत भी की तुमने यह भी
शिकायत की कि बार-बार मेरे ही साथ ऐसी

घटना क्यों घटित होती है बार-बार मेरे ही
जीवन को इतना त्रस्त क्यों किया जा रहा है
लेकिन इसके बाद तुमने स्वयं ही अपने आप को

ला इसके बाद तुम स्वयं ही यह जान पाए कि
यह सब कुछ केवल तुम्हारी परिकल्पना मात्र
है क्योंकि जो हो रहा है तुम उसके
सुदृष्टि

यह सब ब्रह्मांड की ही योजना का एक हिस्सा
था ऐसी योजना जो तुम्हारे जीवन को एक
कारगर उद्देश्य प्रदान करने तुम्हें
तोड़कर रख दिया तो क्या तुम आज अपने आप को

इस अवस्था में अध्यात्म के इस मार्ग पर
खड़ा पाते पिछले कुछ वर्षों को ध्यान
करोगे तो तुम जान पाओगे कि तुम इससे कोश
दूर थे तुम्हारे भीतर अहंकार कैसे पनप रहा

था अहम की प्रवृत्ति तुम्हारे भीतर कैसे
अपना घर बना रही थी कैसे तुम दूसरों से
तुलना करके अपना जीवन बर्बाद कर रहे थे

मोक्ष की भावना रखते हुए भी तुम मुक्ति को
अनुभव नहीं कर पा रहे थे बंधनों से ग्रसित
तुम अनेक कल्पनाएं करते थे ऐसी कल्पनाएं

जो आड से भरी हुई थी थी ऐसी कल्पनाएं
जिसमें पराजय निश्चित थी लेकिन अब पिछले
कुछ समय से जब तुम्हारे भीतर जागृति

उत्पन्न हो रही है तो तुम यह देख पा रहे
हो कि तुमने एक मार्ग का चुनाव किया है एक
ऐसा मार्ग जिसे आम जगत में अध्यात्म का

स्वतंत्रता का मार्ग है यह मार्ग है विलाप
और दुख से छुटकारा पाने का तुमने इस मार्ग
पर अपने कदम बढ़ा लिए हैं और अब तुम्हें

जीतने से कोई ताकत नहीं रोक सकती क्योंकि
मेरे अदृश्य फरिश्ते तुम्हारी सहायता के
लिए निकल चले हैं वह आ र हैं तुम्हें वह

सब प्रदान करने जो प्राप्त करना तुम्हारा
अधिकार रहा है तुमने अभाव में बहुत जीवन
बिताया है एक लंबा अरसा बीत गया लेकिन

तुम्हारे जीवन का सुधार क्रमशः
प्रतीकात्मक रूप में ही हुआ यह वैसे नहीं
हो पाया जैसे तुमने विचार किया करते थे
लेकिन अब वह समय चला गया अब समय संपन्नता
का

अब समय खुशियों का है समृद्धि का है अब
समय आ गया है उस सृष्टि के निर्माण का जो
सृष्टि तुमने अपने कल्पना में सजाई
है अब समय आ गया है ब्रह्मांड के दूसरे

हिस्से को देखने का वह हिस्सा जिसमें
तुम्हारे लिए प्रेम तुम्हारे लिए लगाव
तुम्हारे लिए संपन्नता समृद्धि एकजुटता और
मुक्ति विद्यमान है अब समय आ गया है

खुशियों को भीतर से महसूस करने का अब समय
आ गया है अहंकार को त्याग कर अहम के भाव
को त्याग कर यह जान लेने का कि वास्तव में

सत्य क्या है अब समय आ गया है अपने साथी
के अपने परिवार जनों के अपने मित्र जनों
के के चेहरे पर उस मुस्कान को बिखेरने का
जो तुम्हारे द्वारा उन्हें खुशियां देकर

आती है उनके चेहरे की मुस्कान अनमोल है उस
अनमोल मुस्कान के तुम साक्षी बनने वाले हो
यह तुम्हारे द्वारा ही होगा वास्तव में

तुम ही सृजन कर्ता के रूप में वह सब कुछ
निर्मित करते हो जो तुम्हें प्राप्त हुआ
है तुम अपने मन में उनका निर्माण करते हो
अपनी बातों से उसके लिए आदेश देते हो अपने

क्रियाओं से अपनी हरकतों से अपने हाव भाव
से उस आदेश की पुष्टि करते तत्पश्चात
नियति के नियम द्वारा ब्रह्मांड तुम्हें

वह सब कुछ प्रदान कर देता है जो तुम चाहते
हो और इसी के तहत तुम अपने जीवन में सुख
दुख का निर्माण करते हो तुमने अपने जीव

में बहुत सारे दुखों का निर्माण किया है
जबकि तुम्हारे कर्म कभी खराब नहीं रहे
तुम्हारे कर्म इरादतन ठीक थे किंतु उनके

करने की प्रक्रिया बिल्कुल गलत थी जिस वजह
से वह कर्म कुकर्म बन गए अकर्म ना हो पाए
मेरे प्रिय मेरी बातों को तुम्हें ध्यान

पूर्वक समझना होगा इनमें जटिलता है लेकिन
इसका समझना तुम्हारे लिए आवश्यक है एक बात
सदा याद रखना परिस्थिति चाहे कैसी भी हो
तुम्हारा साथ दे या ना दे मैं सदैव

तुम्हारे साथ खड़ा हूं तुम्हारी सहायता के
लिए तुम्हें जीत की ओर ले जाने के लिए
तुम्हारी जीत सुनिश्चित करने के लिए मेरा

आशीर्वाद हर हाल में सदा तुम्हारे साथ
रहेगा सदा सुखी रहो मेरे आने वाले संदेशों
की प्रतीक्षा करो और एक सृजन कर्ता के रूप

में अपने लिए खुशियों का निर्माण करो सुख
समृद्धि का निर्माण करो यही तुम्हारा
लक्ष्य है अपने लक्ष्य को पहचानो केवल

किसी के कहने से कुछ मान मत लो उसे जानने
की चेष्टा करो अपने भीतर के वैज्ञानिकता
को आधार दो और आगे बढ़ो मैं तुम्हारे साथ

हूं सदा सुखी रहो तुम्हारा कल्याण होगा
तुम्हारी प्रगति होगी

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