पितृ पक्ष के महीने में भूलसे भी नहीं करने चाहिए ये 7 काम पितृ दोष लगता है | पितृ दोष मुक्ति - Kabrau Mogal Dham

पितृ पक्ष के महीने में भूलसे भी नहीं करने चाहिए ये 7 काम पितृ दोष लगता है | पितृ दोष मुक्ति

त्रिपक्ष के दौरान भूल से भी ना करें यह सा काम पित्र देव नाराज हो जाते हैं नमस्कार आपका स्वागत है दोस्तों भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि से पितृपक्ष का आरंभ होता है और आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की

अमावस्या तिथि को इसकी समाप्ति होती है इस साल पितृपक्ष 29 सितंबर शुक्रवार के दिन प्रारंभ हो रहा है और 14 अक्टूबर के दिन पितृपक्ष का समापन होगा पितृ पक्ष के दौरान पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण श्रद्धा

तथा पिंडदान किया जाता है गरुड़ पुराण के अनुसार पितृपक्ष में पित्र देव स्वर्ग लोक से धरती लोक पर अपने परिजनों से मिलने के लिए आते हैं कहते हैं जो व्यक्ति अपने पितरों का तर्पण या श्रद्धा नहीं करता है उसे पितृ

दोष का सामना करना पड़ता है यह दोष जीवन में कई तरह की मुश्किलों को खड़ा करता है पितृ के रुष्ट होने पर व्यक्ति समाज में मान सम्मान को देता है धीरे-धीरे उसका पतन होने लगता है पूर्वजों से प्राप्त संपत्ति भी नष्ट

होने लगती है पितृ दोष केकारण ही व्यक्ति को आर्थिक परेशानियों से जूझना पड़ता है इसीलिए मनुष्य को पितृपक्ष में अपने पितरों को संतुष्ट करके उनका आशीर्वाद ग्रहण करना चाहिए गरुड़ पुराण में कहा गया है कि

मनुष्यों की हर संकट से रक्षा उसके पितृ ही करते हैं आने वाली कठिन परिस्थितियों से हमारे पितृ ही हमें आगे करते हैं इसीलिए अपने पितृ द्वारा प्राप्त संकेत पर हमें ध्यान अवश्य ही देना चाहिए श्री कृष्ण कहते हैं जो मनुष्य

अपने पूर्वजों का सम्मान नहीं करता है वह आदम है उसकी उन्नति भी रुक जाती है और वह पाप करने लग जाता है इसीलिए अपने पूर्वजों का यथा योग्य सम्मान करना चाहिए अपने पितरों का मान सम्मान बढ़ाने हेतु

उत्तम कार्य करने चाहिए पितरों के नाम से दान पुण्य करने से व्यक्ति को पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है शास्त्रों में पितृपक्ष के दौरान कुछ कार्य करने से मना ही की गई है यह कार्य करने से हमारे पितृ हमसे रुष्ट हो

जाते हैं और हमें उनका आशीर्वाद प्राप्त नहीं होता तो चलिए जान लेते हैं वहकौन से कार्य है जो पितृपक्ष में नहीं करने चाहिए दोस्तों अगर आप इस चैनल पर नए हैं तो इसे सब्सक्राइब जरूर करें साथ ही वीडियो को लाइक

करना ना भूले सबसे पहली बार शास्त्रों के अनुसार पितृपक्ष में पितृ देवता घर पर किसी भी रूप में पधार सकते हैं इसलिए घर के द्वार पर आए किसी भी पशु या व्यक्ति का अपमान नहीं करना चाहिए दिल्ली पर आने पर

किसी भी शख्स को भोजन कारण और आदर करें खासकर यदि घर के द्वार पर कोई गौ माता अथवा कोई कुत्ता आता है तो उसे कभी धुटकर ना नहीं चाहिए बल्कि उनका सम्मान करके उन्हें रोटी अवश्य खिलानी चाहिए

दूसरी बात है पितृपक्ष के दौरान चना दाल सरसों का साग मांस और लहसुन प्याज आदि चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए अन्यथा आपके पित्र देव आपसे रुष्ट हो जाते हैं पितृ पक्ष में केवल सात्विक आहार ही ग्रहण करें

और अपने पितरों को भी सात्विक आहार का भोग चढ़ाई तीसरी बात है गरुड़ पुराण के अनुसार किसी तीर्थ स्थान पर पितरों के तार पान और श्रद्धा का विशेष महत्व होता है ऐसी मान्यता है कि गया और बद्रीनाथ या प्रयाग में श्राद्ध करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है

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