देश में शुरू हुआ बड़ा आंदोलन : मोदी विरोध की हवा से डरने लगी सरकार | - Kabrau Mogal Dham

देश में शुरू हुआ बड़ा आंदोलन : मोदी विरोध की हवा से डरने लगी सरकार |

नमस्कार   आपका स्वागत
है देखिए आज देश की वर्तमान स्थिति पर और
राजनीतिक परिवेश में जो हो रहा है आज मेरा
मन हो रहा है कि उस पर आप लोगों से बात की

जाए मुझे ऐसा लग रहा है कि आज हिंदुस्तान
में बिल्कुल उसी प्रकार की स्थिति हो गई
है जैसे देश आजाद होने के पहले थी दोष
शयों के बीच में संघर्ष हो रहा है एक

शक्ति है जिसके पास पैसा है जिसके पास
ताकत है जिसके पास बंदूक है जिसके साथ
बड़ी शक्तियां हैं और दूसरी तरफ वह निरी
जनता है वह जनता है जो अपना अधिकार मांगना
चाहती है और यह चाहती है कि अच्छा जीवन

यापन वह कर सके उसके बच्चे अच्छे स्कूल
में जा सके और उसे चिकित्सा का रोजगार का
अधिकार मिले यह संघर्ष उसी प्रकार का आज
की तारीख में मुझे लगता

है जिस प्रकार से हम लोग देख रहे हैं पहले
नीतीश कुमार ने पलटी
मारी उसके बाद हमने देखा कि जयंत चौधरी ने
पलटी मारी और जयंत चौधरी को चौधरी चरण
सिंह की छवि दिखने लगी माननीय मोदी जी में

आज अशोक चौहाण ने पलटी मारी सिंधिया जी
पहले पलटी मार चुके हैं जितेंद्र प्रसाद
और आरपीएन सिंह बहुत सारे लोग पलटी मार
चुके हैं तो राजनीतिक से तो वास्तविकता

में मुझे अब कोई आशा रह नहीं गई मुझे ऐसा
लगता है ऐसे लोगों से आशा रखना व्यर्थ है
क्योंकि यह जो कमोडिटी है यह बिकाऊ
कम्युनिटी है इनके कोई सिद्धांत नहीं

है इनकी कोई पॉलिसी नहीं है इनका देश के
प्रति कोई समर्पण नहीं है और इनके कोई ऐसी
आइडल कल कमिटमेंट नहीं है जिसके आधार पर
मैं इन पर विश्वास कर

सकू तो ऐसे समय पर ये देश के लोकतंत्र को
बचाने के लिए देश में अपने अधिकारों को
पाने के लिए देश में अपने लिए न्याय
मांगने के लिए आवश्यक क्या

है यह आवश्यक है कि जो भी वर्ग क्योंकि
देखिए आपने बचपन में कहानी सुनी होगी कि
एक लकड़ी है उसे तोड़ा जा सकता है जब बहुत
सारी लकड़ियां इकट्ठी हो जाए तो उसको

गट्ठर बन जाए तो उसको तोड़ना बहुत मुश्किल
होता
है यह शिक्षा हमको बचपन में मिली है
अलग-अलग वर्गों के साथ अलग-अलग प्रकार के

अत्याचार
हुए किसान अन्नदाता
बैठे 13 महीने
बैठे किस प्रकार से उनको प्रताना दी गई

प्रकार से उनको खालिस्तानी पाकिस्तानी कहा
गया किस प्रकार से उनको देश विरोधी कहा
गया और उसके बाद लखीमपुर खीरी के अंदर जो
निरी किसान आगे सड़क पर बढ़ रहे थे पुलिस

ने रोका नहीं और एक जीप आई और उस जीप में
एक मंत्री पुत्र ने किसानों को कुचल कर
मार
दिया पहले कहा गया कि वह जीप नहीं चला रहा

था मौके पर मौजूद नहीं था लेकिन एसआईटी के
रिपोर्ट में आया कि ना केवल व जीप चला रहा
था बल्कि वही व्यक्ति था जो कि हत्या का

अभियुक्त था तो कोर्ट ने कहा माननीय
न्यायालय ने कहा कभी-कभी चलाने में गाड़ी
गलती हो जाती है लेकिन जहां पे सड़क प
भीड़ हो और आज जिस प्रकार से दिल्ली के

आसपास व्यू रचना की गई है बड़े-बड़े गड्ढे
खोद दिए गए हैं कीले गाड़ दी गई हैं
बड़े-बड़े
चट्टाने लगा दी गई हैं जैसे यह कोई भारत
पाकिस्तान का बॉर्डर हो या भारत और चीन का
बॉर्डर हो और जिस प्रकार से चेतावनी दी जा

रही है जिस प्रकार से पुलिस यह प्रशिक्षण
ले रही है कि किस प्रकार से टियर गैस चलाई
जाएगी किस प्रकार घोली चलाई जाएगी किस
प्रकार से दिल्ली को सील कर दिया जाएगा उस

दिल्ली को सील कर दिया जाएगा जो भारत का
भारत की
राजधानी और देश के अन्नदाता जिनके लिए लाल
बहादुर शास्त्री जी ने कहा था जय जवान जय

किसान और जितना सम्मान उन्होंने देश के
अन्नदाता हों को दिया था क्योंकि भारत
जैसे देश में जो हमारी आर्थिक समीकरण है
उसके अनुसार किसान बहुत महत्त्वपूर्ण रोल

अदा करते हैं यह वो अन्नदाता किसान हैं
जिन्होंने कोविड के अंदर जब सारे देश की
जीडीपी गिर रही थी विश्व की जीडीपी गिर
रही थी एग्रीकल्चर सेक्टर ने 35 प्र की
ग्रोथ दिखाकर देश की अर्थव्यवस्था को

संभाला
उनका इस प्रकार से दुश्मन की तरह उनके
प्रति व्यवहार और जिस प्रकार से उनको
गिरफ्तार कक्का जी को मध्य प्रदेश के अंदर
किया गया और जिस प्रकार की चेतावनी

किसानों को दी जा रही है गांव वालों को दी
जा रही है कि अगर आप आंदोलन में
पार्टिसिपेट करेंगे तो आप दंड के भागीदार
होंगे जबकि लोकतंत्र में अगर देश के अंदर

लोकतंत्र है तो लोकतंत्र के अंदर किसी भी
अहिंसात्मक आंदोलन में पार्टिसिपेट करने
में किसी प्रकार की कोई कठिनाई नहीं होनी
चाहिए इसी चीज की लड़ाई महात्मा गांधी ने

की थी इसी चीज की लड़ाई कांग्रेस ने की थी
जब अंग्रेज सत्ता में थी क्योंकि उस समय
कम से कम इस प्रकार के अहिंसात्मक आंदोलन
के लिए स्पेस

थी अब इन अन्नदाता की क्या गलती है जिन
अन्नदाता हों ने 13 महीने दिल्ली के चारों
तरफ
बैठकर गर्मी में बरसात में जाड़े में हर
प्रकार की स्थिति में विपरीत प्रतिकूल

परिस्थितियों का सामना करते
हुए अपने धैर्य का और अहिंसात्मक
गांधीवादी मूल्यों का प्रदर्शन किया और
उसके बाद सरकार ने जो बिना सोचे समझे तीन

कृषि कानून लाए थे उसको वापस ले
लिया वापस नहीं लिया सस्पेंड किया गलती हो
गई माफ कीजिएगा सस्पेंड किया सस्पेंड किया
जाने का मतलब यह है कि अगर 2024 में सरकार

दोबारा बन जाती है तो उसको लागू किया जा
सकता है और अगर लागू किया जाएगा तो 13
महीने की आपकी जो तपस्या है वह भी असफल हो
जाएगी जो आपने बलिदान दिया 700 सा स

किसानों का वह भी व्यर्थ
जाएगा उसके बाद बिना सोचे समझे मोटर वेकल
एक्ट में परिवर्तन किया
गया और यह कहा गया कि अगर किसी गाड़ी से

कुचलकर किसी कोई घायल हो जाए तो आपका काम
है सबसे पहले उसको पुलिस थाने ले जाइए या
हॉस्पिटल ले जाइए और जब ये ट्रक ड्राइवर्स
ने बताया बस ड्राइवर्स ने बताया जीप

ड्राइवर्स ने बताया कि अगर इस प्रकार की
दुर्घटना होती है तो जो बड़ी गाड़ी वाला
होता है भीड़ उसको दंड देती है और अधिकांश
मौके पर उसको ही मार दिया जाता

है तो इसलिए उनकी मजबूरी होती है वहां से
भागना पड़े लेकिन अगर वह जाएंगे थाने में
या अस्पताल में लेकर भी जाएंगे तो 10 साल
की सजा और 10 लाख रुपए का दंड भुगतने में

ये गरीब वर्ग के लोग जो कि 1515 20 20
हजार के लिए नौकरी करते हैं और महीने भर
अपने घर से बाहर रहते हैं और अपने जो जीवन
है अपने जो परिवार के साथ रहने का सुख है

उसे त्याग
हैं वह स्ट्राइक पर गए और दो दिन के अंदर
जो कानून बनाया था उस कानून को वापस नहीं
लिया गया उसको सस्पेंड किया गया कृषि

कानूनों को भी सस्पेंड किया गया मोटर वेकल
एक्ट के कानून को भी सस्पेंड किया गया
वापस नहीं लिया गया इसका मतलब यह है कि
2024 के चुनाव जीतने के बाद वह दोबारा

लागू हो सकते हैं
और उसके बाद ना किसानों की
इतनी स्थिति अच्छी होगी ना ट्रक ड्राइवर्स
की या मोटर वेकल एक्ट से पीड़ित लोगों की

इतनी शक्ति होगी कि आंदोलन करें क्योंकि
वह पा साल के लिए चुनी हुई सरकार होगी अगर
वह वापस आ गई तो फिर यह कानून लागू होंगे
और जो भुगतना है भुगत देश की

संपदा जिस प्रकार से पूंजीपतियों के हाथ
में जा रही है गरीबों के हाथ से निकलकर
छिटक जा रही है और गरीब जो है केवल देश की
70 प्र जनसंख्या

5 किलो अनाज पर निर्भर हो गई है तो आप
परिस्थिति सोचिए किस प्रकार की
होगी अब सवाल यह है कि अन्नदाता की गलती
क्या है जब यहां वह 13 महीने बैठे थे और

उन्हें यह कहा गया था इस आश्वासन पे उनका
आंदोलन वापस कराया गया
था कि एमएसपी भी एक कमेटी बनेगी और एमसी
देने प प्रक्रिया आगे बढ़ेगी कोई कमेटी

नहीं बनी कोई कारवाही नहीं हुई कुछ नहीं
हुआ यह कहा गया था लखीमपुर खीरी में जो उन
किसानों की हत्या हुई थी उनको उचित मुआवजा
दिया जाएगा उनको न्याय मिलेगा उन्हें

न्याय नहीं मिला जिन्होंने जीप से कुचला
था उनको कोई दंड नहीं मिला किसानों के
खिलाफ जो पुलिस केस लगाए गए थे वह वापस

नहीं हुए इसका मतलब यह है कि जो अन्नदाता
जिसके आधार पर उन्होंने अपना आंदोलन वापस
किया गया था लिया
था उस पर सरकार द्वारा कोई कारवाई नहीं की

गई आखिर लोकतंत्र में इस देश के
अंदर जो आपके स्टेक होल्डर्स हैं वो स्टेक
होल्डर्स कौन
है वो युवा

हैं क्योंकि कहा जाता है कि देश युवा देश
है अधिकांश जनसंख्या जो है नौजवानों की है
जो पढ़ लिखकर मां-बाप जिनको पेट काट के
पढ़ाते हैं और उसके बाद अग्निवीर जैसी

योजना लाकर उनके सपनों को चकनाचूर कर दिया
जाता है जो बड़ी-बड़ी मल्टीनेशनल है अपने
आप से लोग लोगों को नौकरियां निकाल से
निकाल देती
हैं

तो बच्चों और बच्चों के माता-पिता की जो
एस्पिरेशंस होती हैं उनको किस प्रकार से
धूल धूसर करके जो देश की सबसे बड़ी शक्ति

है उसको किस प्रकार से कमजोर किया जाता है
तो अगर आज किसान यह मांगने दिल्ली के अंदर
आ रहा है केंद्र सरकार से और शासन से
लोकतंत्र के

अंदर कि जो वादे आपने ढाई साल पहले हमसे
किए थे 13 महीने के आंदोलन के बाद कि आप
एमएसपी की कमेटी बनाएंगे एमएसपी देंगे
और जब आप छत्तीसगढ़ में यह आश्वासन दे

सकते हैं कि 00 में धान
खरीदेंगे तो पूरे हिंदुस्तान में 00 में
धान क्यों नहीं खरीद सकते फिर एमएसपी आप
जो है 3100 पूरे हिंदुस्तान में क्यों

नहीं लागू कर देते अगर आप कहते हैं कि 600
रप में गेहूं खरीदेंगे तो एमएसपी सा 000
क्यों स्थिर करते
हैं आप पूरे देश के अंदर 00 में गेहूं
क्यों नहीं

खरीदते जो किसानों के शुगर केन के
प्राइसेस हैं जो गन्ने के दाम है उनको
तुरंत भुगतान क्यों नहीं होते जिस प्रकार
से वेस्टर्न यूपी के अंदर जाकर आपने भाषण

में कहा था कि 15 दिन के अंदर भुगतान होगा
नहीं होगा तो ब्याज
मिलेगा ब्याज का मूल्य पा साल के अंदर
केवल जो गन्ने का मूल्य है वह पा साल के
अंदर केवल 20 रप क्यों बढ़ाया जाता है

जबकि इन्फ्लेशन के हिसाब से कम से कम 50
रप वो बढ़ाया जाना
चाहिए देश के जो अस्पताल है उनको क्यों
प्राइवेटाइज किया जा रहा है जो सर सरी

स्कूल्स है उनको किस प्रकार से कमजोर किया
जा रहा है तो यह गरीब वर्ग जिसकी आमदनी घट
रही
है और शिक्षा के द्वार इसके लिए बंद हो

रहे हैं क्योंकि यूनिवर्सिटी के अंदर फीस
बढ़ाई जा रही
है हॉस्टल की फीस बढ़ाई जा रही है शिक्षा
की फीस बढ़ाई जा रही है तो ऐसी स्थिति में
देश का जो

बहुता जो गरीब वर्ग है जो मध्यम वर्ग है
जो बिलो पॉवर्टी लाइन है क्या आप उनसे यह
अपेक्षा करते हैं कि अपने बच्चों को ना
पढ़ाए शिक्षा के दरवाजे बंद कर दिए जाए

उसके लिए चिकित्सा सुविधा उसको ना मिले और
देश की सारी संपदा कुछ पूंजीपतियों के हाथ
में चली जाए इंफ्रास्ट्रक्चर के नाम पर

देश के अंदर आप बड़ी-बड़ी संपत्तियां खड़ी
करें और उसके बाद उसको पूंजीपतियों को
सौंप दें आप सुंदर चमकीली सड़कें जरूर
बनाए लेकिन टोल टैक्स के माध्यम से 16 हज

1700 हज करोड़ पर ईयर का ल टैक्स इकट्ठा
कर
ले अब गरीब आदमी को तो सड़कों से कोई लेना
देना नहीं सड़कों का फायदा तो अमीर आदमी

उठाता है जिसके बास कारें होती हैं जो
चलता
है लेकिन यह जो अमीर पूंजीपति है इनके तो
14 लाख करोड़ के ऋण माफ हो

जाए लेकिन किसानों को एमएसपी ना मिले
किसानों के ऋण माफ ना हो जाए बड़े
पूंजीपतियों के ऋण माफ करते हुए तो आपको
अर्थशास्त्र के नियम याद नाए लेकिन जब
मध्यम वर्ग

के और छोटे काश्तकारों के ऋण माफ करने की
बात हो या उन्हें एमएसपी देने की बात हो
तो अर्थशास्त्र के सारे सिद्धांत आपको याद

जाए देश में कुछ राज्यों में जहां विपक्ष
की सरकार है उन्होंने ओल्ड पेंशन स्कीम
लागू कर
दी लेकिन जहां जहां सत्ता पक्ष की सरकार
है वहां पर न्यू पेंशन

स्कीम लाई गई और ओल्ड पेंशन स्कीम नहीं
बल्कि जहां पर अब सत्ता परिवर्तन हुआ है
वहां भी ओल्ड पेंशन स्कीम जो पुरानी सरकार
ने दे दी थी उसको वापस करने की कारवाही
आपने शुरू कर दी तो क्या सरकारी

अधिकारियों का देश के कमाई हुई संपत्ति
में कोई अधिकार नहीं
है देश के अन्नदाता हों के देश की जो कमाई
है उस पर कोई अधिकार नहीं है देश के जो

नौजवान हैं जो पहले मेहनत करके सेना में
जाते थे 152 साल की नौकरी करते थे उनको
पेंशन मिलती थी चिकित्सा सुविधाएं मिलती
थी अगर किसी प्रकार अगर उनका कोई बलिदान

देश के लिए होता था तो उनको शहीद का दर्जा
दिया जाता था वो सारी सुविधाएं वापस करके
उनको चार साल की नौकरी दी जाए और चार साल
के बाद तीन चौथाई लोगों को नौकरी से हटवा

दिया जाए और 21 साल में बच्चे रिटायर हो
जाए तो ऐसी हास्यास्पद स्थिति परिवारों के
अंदर पैदा हो जाए कि पिता तो नौकरी कर रहा
है मां तो नौकरी कर रही है लेकिन बच्चा जो

है वो रिटायर हो
गया तो क्या इस देश में जो स्टेक होल्डर्स
हैं क्या केवल वो बड़े-बड़े पूंजीपति
हैं जिन्होंने देश की संपदा पर एकाधिकार

कर लिया है जीएसटी के माध्यम से नोटबंदी
के माध्यम से जो छोटे मध्यम उद्योग के लोग
थे जो रोजगार का सजन करते थे जहां कैपिटल
कम लगता था लेकिन रोजगार ज्यादा मिलता था

उनको जिस प्रकार से नेस्तनाबूद किया गया
है और यह वो इकोनॉमिक मॉडल को स्वीकार
किया गया है जो अमेरिका और यूरोप जैसे देश
में

सफल हो सकता है क्योंकि वहां जनसंख्या कम
है हमारे देश में यह बेरोजगार लोग यह पढ़े
लिखे जिनकी एस्पिरेशन जाग गई हैं ऐसे लोग
अगर इस प्रकार से बेरोजगार रहेंगे तो उनकी

अपेक्षाओं आकांक्षाओं का क्या होगा तो
मुझे जैसे मैंने पहले निवेदन किया मुझे अब
देश के राजनीतिज्ञों से कोई अपेक्षा नहीं
है मैं जानता हूं वह बिक

जाएंगे वह जेल जाने से बचने के लिए बिक
जाएंगे
वह पैसे के लिए बिक जाएंगे वह राज्यसभा
लोकसभा के टिकट के लिए बिक जाएंगे लेकिन
यह हम देश के लोगों का यह नैतिक कर्तव्य

है कि हमारा जो पेट भरता है जो 12 महीने
लगातार खेत की सुरक्षा करते हुए जो छुट्टे
सान और गाय गांवों के अंदर घूम रहे हैं
उनसे अपनी खेतों की रक्षा करने के लिए

अपनी जान न्योछावर करता है और संघर्ष करता
है अगर वह केवल उन मांगों को मांगने के
लिए दिल्ली की ओर पूछ कर रहा है जिसके लिए
ढाई साल पहले उसने आंदोलन किया गया था और

उसको आश्वासन दिया गया था और वह आश्वासन
केवल जुमला निकला और उन आश्वासनों पर कोई
एक्शन नहीं हुआ तो क्या उस अन्नदाता का य
अधिकार नहीं है कि दिल्ली पहुंचकर जो अपने

देश की राजधानी
है वहां पर जाकर अपने आंदोलन को चला सके
अहिंसात्मक रूप से चला सके गांधीवादी रूप
में चला
सके और इसी इसी प्रकार से जो अलग-अलग वर्ग

आंदोलित है लखनऊ के अंदर अलग टीचर्स बैठे
हुए हैं और बिहार के अंदर उस सरकार को
गिरा दिया जाए जिसने 17 महीने के शासन में
इतने लोगों को नौकरियां दी जो पिछले 20 2
साल से नहीं मिली बाकी किसी प्रदेश में

नौकरियां नहीं मिली केवल बिहार के अंदर
लाखों की संख्या में नौकरी मिली और ना
केवल बिहार के लोगों को बल्कि उत्तर
प्रदेश राजस्थान मध्य प्रदेश के लोगों ने

भी जाकर बिहार के अंदर नौकरियां पाई तो
क्या मेरे देश के बच्चों को नौकरियों का
अधिकार नहीं
है क्या हमारे देश के किसानों को एमएसपी

का अधिकार नहीं है क्या हमारे देश की गरीब
जनसंख्या को मेडिकल फैसिलिटी का अधिकार
नहीं है बाबा साहब भीमराव अंबेडकर ने कहा
था कि शिक्षा वह शेरने का दूध है जो पीता

है वह शेर बनता है तो अगर यह देश की
बहुसंख्यक जनसंख्या शिक्षा के अधिकार से
वंचित हो जाएगी तो कैसे देश का हम निर्माण
कर रहे हैं क्या इसी प्रकार के देश की

कल्पना बाबा साहब भीमराव अे आबेडकर ने
महात्मा गांधी ने पंडित जवाहरलाल नेहरू ने
चंद्रशेखर आजाद ने राम प्रसाद बिस्मिल ने
सरदार भगत सिंह ने अशवाक लखा ने देखा था

क्या इसीलिए उन्होंने अपने जान निछावर इस
देश के लिए किए थे क्या ऐसे लोकतंत्र की
कल्पना उन्होंने की थी जब दिल्ली में अपने
ही देशवासियों को घुसने से रोकने के लिए
इस प्रकार की बाड़ा बंदी की जाए जो कि

पाकिस्तान में नहीं की जाती पाकिस्तान की
सीमाओं पर नहीं की जाती जो चीन की सीमाओं
पर नहीं की जाती जो म्यानमार की सीमाओं पर
नहीं की जाती लेकिन अपने देश के अंदर वह

व्यवस्था की जाती
है तो मुझे ऐसा लगता है कि देश के जनमानस
को राजनीतिक लोगों से अपेक्षाएं न रखकर जो
देश के प्रति श्रद्धा भाव रखते हैं जो
भारत माता को अपनी मां मांगते हैं जो देश

में चाहते हैं कि एक समन्वय की और कोई
एक्जिस्टेंस की शासन प्रक्रिया हो और
लोकतंत्र हमेशा स्थापित रहे या हम लोगों
का कर्तव्य नहीं है कि जो आज सताए जा जा

रहे हैं जो परेशान हैं उनके साथ खड़े हो
नहीं तो एक-एक कर कर सबका नंबर आएगा और
ऐसा देश कि मैं कल्पना नहीं कर सकता
क्योंकि यह देश जो है मेरी भ जो भारत माता

है वह मां है यह मेरी जननी है इसने सब कुछ
मुझे दिया है मैं अपने कर्तव्यों का
निर्वाहन करूंगा आप लोगों से भी मैं
निवेदन करता हूं कि लोकतंत्र को बचाने के

लिए धर्म निरपेक्षता को बचाने के लिए
भारतवर्ष के जो गौरवशाली इतिहास है उसको
बचाने के लिए जो आप कर सकते हैं वो करें
यह देश तानाशाही झेल नहीं पाएगा साउथ और

नॉर्थ के बीच में जैसा डिवाइड क्रिएट हो
गया है धर्म के धर्मों के बीच में जैसा
द्वेष पैदा हो गया है वह देश के लिए
हितकारी नहीं है तो देश का शुभचिंतक होने

के नाते मैं अपना निवेदन करता हूं कि जो
अन्नदाता हैं अगर एमएसपी उनको दे दी जाए
और जो उनसे आश्वासन दिए गए थे ढाई साल
पहले पूरे कर दिए जाए तो शायद वो दिल्ली

की तरफ कुछ ना करें यह जो संघर्ष है इसको
टाला जाए बनिस पत वहां उन पर गोली चला ला
जाए या उनको रोका जाए या उनको दंडात्मक
कारवाई की जाए जेल के अंदर ठू सा जाए इससे

अच्छा यह है कि उनकी मांगों को मान लिया
जाए जो न्याय उचित मांग है जो उचित मांग
है क्योंकि 4 प्र एमएसपी बढ़ना और 6 प्र
का इंफ्लेशन होना इसका माने किसानों की

आमदनी हर साल घट रही है और कुछ लोगों की
आमदनी 10 गुनी बढ़ रही है और उनकी आमदनी
घट रही है देश के लिए उचित नहीं है इसलिए
जितने लोग भी देश के प्रति समर्पण भाव

रखते हैं कृपा करके सोचे और देश का साथ
दें देश लोकतंत्र का साथ दें और देश की जो
हमारा गौर शली इतिहास है उसको आगे बढ़ाने
में अपना सहयोग दें नमस्कार
प्रणाम

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