दिल्ली की सीमाओं पर किसान रोको आंदोलन | Farmers at Delhi's borders - Kabrau Mogal Dham

दिल्ली की सीमाओं पर किसान रोको आंदोलन | Farmers at Delhi’s borders

नमस्कार

किसानों का आंदोलन
कम किसानों को रोकने का आंदोलन ज्यादा लग
रहा है जिस तरह से कीले कांटे रास्तों में
बिछाए जा रहे हैं सड़कों और उसके किनारों
पर गड्ढे और खाई यां खोदी जा रही हैं जिस
तरह से सीमेंट की दीवारें खड़ी कर दी गई

हैं उसे देखकर यही लग रहा है कि भारत में
सरकार का किसान रोको आंदोलन चल रहा है अब
किसानों के पास यही रास्ता बचा है कि वे
कहीं से पंख मंगा ले पंख लगा ले और उड़कर
दिल्ली आ जाएं भारत के किसानों को अब

उड़ना सीख लेना चाहिए वरना अपनी मांगों को
लेकर चुप रह जाना चाहिए किसान आंदोलन को
देखते हुए पूरी दिल्ली में 12 मार्च तक के
लिए धारा 144 लगा दी गई है दिल्ली पुलिस
के कमिश्नर ने अपने आदेश में यह सब लिखा

है कि जिस तरह से किसान दिल्ली आने पर
अड़े हुए हैं दिल्ली में सामाजिक उपद्रव
हिंसा तनाव पैदा होने की आशंका का है बड़ी
संख्या में प्रदर्शनकारियों की मौजूदगी से
लोगों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है तो

किसानों को रोकने के लिए प्रशासन ने जिस
तरह से अवरोधों को लेकर प्रयोग किए हैं
धारा 144 का इस्तेमाल किया है अगर इतनी
मेहनत इतना दिमाग किसानों की समस्याओं में

लगाया गया होता तो कोई ना कोई समाधान निकल
आता दो दिन पहले तक यही भारत सरकार चौधरी
चरण सिंह और एमएस स्वामीनाथन को भारत रत्न
देकर गांव और किसानों के सम्मान की बात कर
रही थी क्या चौधरी चरण सिंह और एमएस

स्वामीनाथन के हिसाब से किसानों का इस तरह
से सम्मान किया जा रहा है किसानों के नेता
को भारतर रत्न और किसानों के रास्ते में
ऐसी कीलें किसानों के रास्ते में कांटे

बोकर भारत सरकार किसान नेता को भारत रत्न
दे रही है दरअसल किसानों का सम्मान भारत
रत्न से नहीं इन कीलों से किया जा रहा है
नवंबर 2020 में जब किसान आंदोलन शुरू हुआ

तब भी दिल्ली की सीमाओं पर ऐसी कीलें और
कटीली तारे बिछाई गई अखबार इन कीलों को
टायर किलर लिख रहे हैं किसानों के
ट्रैक्टर के चक्के को फाड़ देने के लिए यह

किले लगाई जा रही हैं ट्रैक्टर के एक टायर
की कीमत 13 से ₹2500000
में एमएसपी की गारंटी नहीं दे सकी वह
सरकार टायर किलर लगाकर उनके ट्रैक की टायर

फाड़ देना चाहती है पिछली बार भी यह किले
लगाई गई थी कटली तारे लगाई गई थी इस बार
इनकी वापसी बता रही है कि किसान आंदोलन को
लेकर सरकार का रवैया और नजरिया बिल्कुल

नहीं बदला टिकरी बॉर्डर पर जिस तरह से
कटीली तारें लगाई जा रही हैं ऐसा लग रहा
है कि युद्ध का कोई मोर्चा हो रास्तों को
इस तरह से बंद कर दिया गया है कि किसानों

के पास पैदल चलकर आने का रास्ता ही बच गया
है इन तारों को देखकर लोग लोकतंत्र में
जनता महान नजर आती है या प्रशासन
सर्वशक्तिमान

किसान इस बार भी अपना मीडिया साथ लेकर चल
रहे हैं उन्हें पता है कि गोदी मीडिया
आएगा नहीं अगर सोशल मीडिया पर वीडियो

वायरल नहीं होते तो बहुत कुछ आपको पता भी
नहीं चलता और कब इंटरनेट बंद हो जाए और
किसानों की तरफ से इस तरह के वीडियो आने
बंद हो जाए पता

नहीं आपसे विम बनती है कि यह सब चीज आपको
कोडिया नहीं दिखा
आपको मीडिया खुद बढ़ना होगा आने वाले समय
के अंदर किसान यिन के पेज बंद हो सकते हैल

बंद हो सकते हैं तो किसान और मजदूर की आप
आवाज बने और देश बचाने की जो लड़ाई हम लड़
रहे हैं उसम हमारा साथ किसान बचाने की हमा
लड़ाई ल उस साथ और देखें लगातार लि है वह

लाइन में चल रही है
और आपको हर पल पल की खबर हम देने की कोशिश
करेंगे अगर इंटरनेट बात नहीं
हुआ
जय जवान जय

किसान कहा गया कि चौधरी साहब को भारत रत्न
देकर किसानों का सम्मान किया गया पिछली
बार जयंत चौधरी इन्हीं सब बातों का तो
विरोध कर रहे थे इस बार भी वही सारी चीजें

हो रही हैं तो तय उन्हें करना है कि एक
भारत रत्न की खातिर क्या वे उन किसानों का
साथ इस तरह से छोड़ देंगे जिन्होंने कई
दशकों तक चौधरी चरण सिंह की स्मृतियों को

जिंदा रखा जब किसान ही नहीं बचेंगे तब
चौधरी साहब का सम्मान भी किस तरह से बचेगा
जयंत चौधरी ने कहा था कि दिल जीत लिया और
इधर क्या उन्हें नहीं दिख रहा कि किसानों

के रास्ते में खाई खोदी जा रही है कीले
गाड़ी जा रही हू राजनीति और इतिहास का यह
अजीब मोड़ है प्रशासन की जुबान पर इस तरह
आंदोलन को लेकर जैसी ताव नियां हैं और

मीडिया में जिस तरह के शब्दों के साथ
रिपोर्टिंग हो रही है उन सभी को तटस्थ भाव
से पढ़ा और देखा जाना चाहिए यह हेडलाइन
दैनिक जागरण की है 15 जिलों में धारा 144

हाईवे खोदने की तैयारी मतलब आप किसानों को
रोकने के लिए हाईवे तक खोद डालना चाहते
हैं जागरण लिखता है कि दिल्ली कूच को
रोकने के लिए सीमावर्ती इलाकों में
किलेबंदी है बैरिकेट्स किले मिट्टी

कंक्रीट की लेयर पत्थर की दीवार कटीले तार
रखने के साथ हाईवे खोदने की भी तैयारी की
जा रही है वहीं प्रदर्शनकारियों से निपटने
के लिए शंभू बॉर्डर पर पुलिस ने आंसू गैस

के गोले छोड़कर अभ्यास किया दैनिक भास्कर
की हेडलाइन है कि पुलिस ने दिल्ली कूच
रोकने को सिरसा रतिया में सड़क हासी व
कैथल में किनारों पर खोदी खाई सिरसा और

पंजाब को जोड़ने वाली बरनाला रोड को
मुसाहिब वाला गांव के पास खोद डाली है
पुलिस ने रतिया बुढलाडा रोड को उखाड़कर 10
फुट गहरी और 15 फुट चौड़ी ई बना दी है रोड

रोलर सड़क के बीच में खड़ा कर दिया गया है
घग्गर नदी पुल पर किसानों को रोकने का
प्रयास युद्ध स्तर पर जारी है जहां पर
लोहे की कीलें बैरिकेड सीमेंट के पिलर

पुराने वाहनों की चेसिया और कटीली तारबंदी
की जा रही है यह दोनों अखबारों के शब्द है
जो मैंने पढ़े हमारी तरफ से किसानों से और
बाकी सभी लोगों से रिक्वेस्ट की जा रही है

एडवाइजरी हमारी तरफ से जारी की जा रही है
कि जो भी इस तरीके की जो प्रोटेस्ट है
उसमें लोग ना पार्टिसिपेट करें और जो
हमारी तरफ से इसके लिए पुख्ता तैयारी की

गई है तो कोई भी किसी को भी कानून है अपने
हाथ में नहीं लेने दिया जाएगा हमारे पास
10 कंपनियां हमने 10 कंपनियां इस टाइम पे
हमारे पास कैथल में अवेलेबल है और उनकी

प्रॉपर हमारी तरफ से प्रैक्टिस कराई जा
रही है उसके अलावा हमारी तरफ से जो
बॉर्डर्स हैं उनको प्रॉपर सील किया जाएगा
अ तो सभी से हमारी रिक्वेस्ट भी रहेगी कि

कानून को अपने हाथ में ना ले वरना हमारी
तरफ से प्रॉपर वीडियोग्राफी कराई जाएगी
जहां पे भी उपद्रव होता है तो उनको पहचाना
जाएगा उसके बाद उनके अगेंस्ट जो भी कारवाई
बनती है वो की जाएगी जो फार्मर्स

प्रोटेस्ट में हिस्सा लेके हिंसा करते हैं
उनके अगेंस्ट कोई एफ आई रजिस्टर होती है
तो उसके अगेंस्ट एक्शन होगा उसी में उनका
पासपोर्ट या जो भी उनका लाइसेंस है वो

कैंसिल कराया जाएगा इनकेस कोई हिंसा होती
है कुछ उपद्रव होता है तो देखिए कानून
व्यवस्था बनाए रखने के लिए हमने पूरे
व्यापक चाक चौबंद बंदोबस्त यहां पे किए

हुए हैं और किसी भी हाल में प्रोटेस्टर्स
को जो है हरियाणा की या कहिए कैथल जिले की
सीमा में घुसने नहीं दिया जाएगा जो है ठीक
है उन्हों रोकने के लिए सभी व्यापक

बंदोबस्त है वो हमारे यहां पे अवेलेबल है
और अत्यंत शक्ति यहां के ऊपर की जाएगी
किसानों को दिल्ली पहुंचने से रोकने के
लिए कानून ने अपने हाथ में जो लिया है उस
पर भी बहस हो सकती है ऐसे वीडियो आए हैं

कि पुलिस की गाड़ी रात अंधेरे गांव में
घूम रही है किसान परिवारों को चेतावनी दे
रही है कि गांव का कोई भी किसान आंदोलन
में ना जाए अगर शामिल पाया गया तो उस पर

सख्त कार्रवाई होगी पासपोर्ट रद्द कर दिए
जाएंगे अगर किसी की गाड़ी जेसीबी या
ट्रैक्टर आंदोलन में देखे गए तो वाहन को
सीज कर लिया जाएगा तो बेहतर होगा कि वे
आंदोलन में ना जाएं पुलिस इस तरह के

अनाउंसमेंट करा रही है वायरल वीडियो में
सुना जा सकता है किसान तो यह भी आरोप लगा
रहे हैं कि उनके पीछे उनके घरों में
महिलाओं को डराया धमकाया जा रहा है

किसानों को रोकने के लिए रास्तों पर
सीमेंट की पूरी की पूरी दीवार बना दी जा
रही है किनारों पर इस तरह की कीले लगी हैं
ताकि ट्रैक्टर मुख्य सड़क छोड़कर किसी भी

तरह से किनारे से ना निकल पाए पंजाब और
हरियाणा को जोड़ने वाले तमाम रास्तों को
ब्लॉक कर दिया गया है दिल्ली पुलिस टियर
गैस से किसानों को रोकने का ड्रिल कर चुकी

है कंक्रीट के ब्लॉक कीले कटली तारे और
हजारों की तादाद में पुलिस बल ड्यूटी पर
तैनात किए गए हैं हरियाणा के मुख्यमंत्री
का कहना है कि दिल्ली में अपनी बात कहनी
है तो बस ट्रेन से जाएं ट्रैक्टर लेकर
घुसने की कोशिश ना करें रास्ते में उपद्रव

करेंगे तो हम इसकी इजाजत किसी को कैसे दे
सकते हैं यदि लोग लोकतंत्र में तय मानक के
अनुसार प्रदर्शन करें तो हम इसका समर्थन
करेंगे और सहयोग भी प्रदान करेंगे विपक्ष
के कई नेताओं ने सड़कों पर बिछाई गई कीलों

के वीडियो ट्वीट किए हैं और सवाल किया है
कि किसानों के साथ ऐसा बर्ताव क्यों किया
जा रहा है राहुल गांधी ने ट्वीट किया है
कि दिन रात झूठ की खेती करने वाले मोदी ने
10 वर्षों में किसानों को सिर्फ ठगा है
दोगुनी आमदनी का वादा कर मोदी ने अन्य

दाताओं को एमएसपी के लिए भी तरसा डाला
महंगाई तले दबे किसानों को फसलों का सही
दाम ना मिलने के कारण उनके कर्जे 60 प्र
बढ़ गए नतीजा लगभग 30 किसानों ने रोज अपनी

जान गवाई धोखा जिसकी यूएसपी हो वह एमएसपी
के नाम पर किसानों के साथ सिर्फ राजनीति
कर सकता है न्याय नहीं किसानों की राह में
कीले बिछाने वाले भरोसे के लायक नहीं हैं

इनको दिल्ली से उखाड़ फेंको किसानों को
न्याय और मुनाफा कांग्रेस देगी पंजाब के
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा है कि
जितनी तारें भारत पाकिस्तान बॉर्डर पर हैं

उतनी ही पंजाब हरियाणा बॉर्डर पर लगा दी
गई हैं मैं केंद्र सरकार से मांग करता हूं
कि किसानों से बात करें और उनकी सही मांग
को मान ले प्रियंका गांधी ने ट्वीट कर
सवाल किया है कि यह अमृत काल है या अन्याय

काल किसानों ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए
हैं कि उन्हें प्रदर्शन में भाग लेने से
रोकने के लिए डराया धमकाया जा रहा है मोदी
सरकार पिछले 10 सालों
में इस दोनों सं

को किसान को जवानों को बर्बाद कर
दिया मैं यह बोल रहा हूं आपको मालूम है
किसान दिल्ली के बॉर्डर पर
बैठे उनसे बात नहीं
किए

किसान तीन काले कानून के खिलाफ
लड़े लेकिन उन्होंने कानून को सस्पेंड
किया लेकिन कानून अभी नोटिफ केशन में वापस
लेने का आया

नहीं तो जब तक ये उस वक्त आंदोलन को
समाप्त करने के लिए
उन्होंने कानून को तीन काले कानून को
सस्पेंड किया लेकिन उसका नोटिफिकेशन कहां
है कि हमने यह रद्द कर दिया यह तीन कानून

हमने कैंसल कर दिया यह अभी तक बाहर नहीं
आए
यह मोदी की चाल है यह
हमेशा दिखाते हैं जैसे हाथी के दात दिखाने
के एक होते हैं और खाने के एक होते हैं
वैसा ही इनका

है किसी भी आंदोलन के समय प्रशासन की अपनी
जिम्मेदारियां और चुनौतियां होती हैं मगर
गांव-गांव में रातों को घूमकर अनाउंस करना
कि कोई भी आंदोलन में ना जाए यह बता रहा

है कि लोकतंत्र में सबसे बुनियादी काम अब
संगीन अपराध के रूप में देखा जा रहा है
कायदे से किसानों को आंदोलन करने और धरना
देने की जगह प्रशासन की तरफ से दी जा सकती
थी मगर सीमेंट की ऊंची दीवारें खड़ी कर दी

गई किले बिछा दी गई इतनी मुस्तैदी से
सरकार अगर न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर
पहल करती तो 2 साल में समाधान निकला जाता
और इसकी जरूरत नहीं पड़ती कई जिलों में

धारा 144 है इंटरनेट बंद है जिसके कारण
यूपीआई से मेंट करने में लोगों को
दिक्कतें आ रही हैं ऑनलाइन क्लास नहीं हो
रहे जो आंदोलन से अलग हैं वे भी आंदोलन

में शामिल किसानों की तरह प्रशासन की
प्रताड़ना झेल रहे हैं रास्तों को बंद
करने और सड़क के किनारों को खोर डालने से
लंबे-लंबे जाम लग रहे हैं इस आंदोलन में
संयुक्त किसान मोर्चा गैर राजनीतिक और

किसान मजदूर मोर्चा केएमएम के अलावा उत्तर
प्रदेश हरियाणा पंजाब केरला कर्नाटका के
कई किसान संगठन भाग ले रहे हैं बताया जाता
है कि 200 संगठन इसमें हिस्सा लेंगे
संयुक्त किसान मोर्चा का गैर राजनीतिक
कहना बता रहा है कि वह पिछले आंदोलन में

शामिल कई संगठनों से अलग दिखना चाहता है
उस समय भी किसान आंदोलन को गैर राजनीतिक
कहा जा रहा था मगर कुछ संगठन पंजाब
विधानसभा के चुनाव में उतर गए उन्हें कोई

फायदा तो नहीं हुआ लेकिन संयुक्त किसान
मोर्चा में दरार पड़ गई शायद इसलिए इस बार
संयुक्त किसान मोर्चा खुद को गैर राजनीतिक
कह रहा है और नए तरीके से आंदोलन में उतरा

है पिछले आंदोलन के समय के कई संगठन इसमें
नहीं हैं फिर भी किसानों के ट्रैक्टर से
सरकार और प्रशासन ने उन्हें रोकने के लिए
जी जान लगा दी है 13 फरवरी के दिल्ली कूच
को देखते हुए दिल्ली और हरियाणा पंजाब की

सीमाओं को सील कर दिया गया है किसान कह
रहे हैं कि हम तो प्रधानमंत्री का किया
हुआ वादा ही याद दिलाने आ रहे हैं वादे
पूरे नहीं हुए तभी तो दिल्ली आना हो रहा

है सरकार हमारे साथ ऐसा क्यों कर रही है
उनका कहना है कि स्वामीनाथन को भारत रत्न
दिया गया मगर न्यूनतम समर्थन मूल्य को
लेकर जो उनका सुझाव था उस पर सरकार अमल
नहीं कर रही है मान योग प्रधानमंत्री जी

साया मंगा नहीं है य तोहा साना कीया हुया
कमिटमेंट ने वादे
ने तुसी की आंदोलन दौरान वादा नहीं कीता
सार नाल कि एमएसपी द गारंटी का कानून
देवांगे वादा नहीं कीता तुसी सार नाल के

बिजली शोध बल नहीं लेके आंगे की वादा नहीं
कीता सरकार ने कि सारे केस वापस लवांगे की
वादा नहीं कीता सरकार ने
शहीदा परिवारा न कंपन सेट करगे नौकरिया
देवांगे वादा नहीं कीता लखीमपुर दे ज जखमी

ने उ लाख रप मावजा देवांगे और ज शहीद हो
बच् नौकरिया देवांगे और भी की
201 सरकार ने लिख ददा नहीं किता सा नाल के
न असी न महीन डॉक्टर स्वामीनाथन रिपोर्ट

देवा ज कमेटी गल कर एमएसपी गारंटी कानून द
ही सा मान प्रधानमंत्री जी जिस वेले जिस
समय गुजरात मुखमंत्री सी तो दूसरे पासे
कंजूमर अफेयर कमेटी दे चेयरमैन सी उस

रिपोर्ट प
ही के किसाना एमएसपी गारंटी कानून दे
सरकार थ रिपोर्ट सरकार माल क्यों नहीं
लागू हो रही देखो पूरे देश दुनिया पूरे
पंजाब लोकान इस गल बेहद खुशी होग असी क

सारे किसाना मजूरा संगठन सा मनजीत सिंह जी
राय बड़ा वडा चेरा ने दवाब उ मन बना
आंदोलन दोने शुरू कीता शामल हो किसान
मजदूर मोर्चे शामिल हो रहेने बराबर लड़ाई
ल रा

सा दोने
संघ ं दो कलो सा
मलो असी पू तौर भारती किसान यूनियन दबा व
त शामिल हो रही है और सा और ज शामिल हो
थड़ी देर और कतार है और लंबी हो जाएगी और
भारत सरकार न प प संघ हो हो किसानों की

प्रमुख मांग है की न्यूनतम समर्थन मूल्य
को कानूनी तौर पर गारंटी की शक्ल दी जाए
इसके अलावा किसान स्वामीनाथन कशन के
सुझावों को लागू करने की मांग कर रहे हैं
किसानों और खेतिहर मजदूरों के लिए पेंशन

कर्ज माफी पुलिस केसों की वापसी और
लखीमपुर खीरी के पीड़ितों के लिए इंसाफ की
मांग भी की जा रही है किसान नेता ठीक ही
तो कह रहे हैं यह सारे वादे प्रधानमंत्री
और उनकी सरकार के थे अभी तक पूरे क्यों

नहीं हुए क्या इसके लिए सरकार जिम्मेदार
नहीं नवंबर 2021 में प्रधानमंत्री मोदी ने
कृषि कानूनों को रद्द करते हुए कहा कि
न्यूनतम समर्थन मूल्य पर एक समिति का गठन

होगा इस बात के 2 साल हो गए इस कमेटी की
कोई रिपोर्ट पब्लिक के बीच क्यों नहीं आ
सकी 2 साल का वक्त गुजरा है कम नहीं होता
इतने लंबे समय तक सरकार क्यों नहीं ठोस

फैसले ले पाई डाउन टू अर्थ में सूचक पटेल
ने इस कमेटी के सदस्यों और इसकी बैठकों के
बारे में विस्तार से लिखा है 19 नवंबर
2021 को प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणा की कि
खेती से जुड़े मसलों और एमएसपी को और
प्रभावी बनाने के लिए कमेटी का गठन होगा

जीरो बजट
खेती यानी प्राकृतिक खेत को बढ़ावा देने
के
लिए देश की बदलती आवश्यकताओं को ध्यान में
रखकर
क्रॉप पैटर्न को वैज्ञानिक तरीके से बदलने
के

लिए एमएसपी को एमएसपी को और अधिक प्रभावी
और पारदर्शी बनाने के
लिए ऐसे सभी विषयों
पर भविष्य को ध्यान में रखते हुए निर्णय
लेने के लिए एक कमिटी का गठन किया
जाएगा इस कमिटी में केंद्र सरकार राज्य

सरकारों के प्रतिनिधि होंगे किसान होंगे
कृषि वैज्ञानिक होंगे कृषि अर्थशास्त्री
होंगे केंद्र ने पीएम की घोषणा के लगभग आठ
महीने बाद 12 जुला 2022 को इस समिति की
स्थापना की ठ महीने के बाद समिति के गठन

में हुई देरी के बारे में दो कारणों का
हवाला दिया गया एक राज्यों के विधानसभा
चुनावों के कारण चुनाव आयोग से अनुमति का
इंतजार और दूसरा किसान मोर्चे द्वारा किसी

प्रतिनिधि का नाम ना भेजा जाना डाउन टू
अर्थ में सूचक पटेल ने आरटीआई के हवाले से
लिखा है कि मंत्रालय से जब इन सवालों पर
जानकारी मांगी गई तो सरकार के पास किसी भी
मामले पर कोई जानकारी उपलब्ध नहीं थी सूचक

पटेल की आ आरटीआई के जवाब में कृषि
मंत्रालय ने कहा कि उनके पास मंत्रालय और
चुनाव आयोग के बीच हुए पत्राचार का कोई
रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है प्रतिनिधित्व ना
भेजे जाने के बारे में आरटीआई से सामने

आया कि मंत्रालय और किसान गठबंधन के बीच
संचार या पत्राचार के संबंध में भी कोई
रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है सूचक पटेल ने लिखा
है कि समिति में शामिल 29 में से 18
सरकारी अधिकारी हैं या सरकारी एजेंसियों

और कॉलेजों से जुड़े विशेषज्ञ हैं इनके
अलावा 11 गैर आधिकारिक सदस्यों में से
सरकार ने संयुक्त किसान मोर्चा से तीन
सदस्यों को नामित करने का प्रस्ताव पेश

किया इनमें भी कुछ मुख्य नाम ऐसे थे
जिन्होंने कृषि कानून पर सरकार का पक्ष
लिया था किसान मोर्चे ने किसी को भी समिति
में नहीं भेजने का फैसला किया आज 2 साल से

अधिक समय हो गया अब तक इस समिति की कोई
अंतरिम रिपोर्ट नहीं आई जिस समिति का गठन
हुए 18 महीने गुजर गए 35 बार बैठक हो चुकी
है उसकी रिपोर्ट कब प्रस्तुत होगी इस इसके
संबंध में कहीं कोई जानकारी उपलब्ध नहीं

कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने यह
सवाल राज्यसभा में भी उठाया था लेकिन
सरकार ने इस सवाल का जवाब नहीं दिया क्या

सरकार अपनी जवाबदेही स्वीकार करेगी पिछली
बार जब किसान दिल्ली आए तब गोदी मीडिया
उन्हें आतंकवादी कहने लगा टूल कीट की बात
तब भी उठी दिशा रवि को टूल कीट के आरोप

में गिरफ्तार कर लिया गया मगर कोर्ट में
कोई ठोस सबूत नहीं मिला गोदी मीडिया और
आईटी सेल ने टूल किट का इतना हंगामा रचा
कि दिशा रवि उस इस वक्त गिरफ्तार कर ली गई

बाद में दिल्ली की अदालत ने दिशा रवी को
जमानत दी और कहा कि जो सबूत हैं वे बेहद
लचर हैं कमजोर हैं कोई खास सबूत नहीं है
कहां तो पुलिस ने खालिस्तान समर्थकों के
साथ मिलकर काम करने के आरोप लगाए मगर बाद

में पुलिस ने कह दिया कि हम इस केस को बंद
कर रहे हैं पर्याप्त सबूत नहीं है दिशा
रवि को जमानत देते हुए एडिशनल सेशन जज
धर्मेंद्र राणा ने कहा कि नागरिक सरकार के
जमीर के पहरेदार होते हैं राज्य की

नीतियों से अलग मत रखने के कारण उन्हें
गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है इसके बाद
भी शर्मिष्ठा मुखर्जी विदेशी हाथ और टूल
किट का मामला उठा रही हैं क्या शर्मिष्ठा

मुखर्जी केंद्र सरकार की क्षमता और विवेक
पर सवाल उठा रही हैं कि सरकार को पता नहीं
कि किस किसान से बात करनी चाहिए दिल्ली
आने से पहले केंद्र के मंत्री किसान

संगठनों से बात करने फिर क्यों गए इस बार
कहना मुश्किल है क्योंकि केंद्र सरकार के
मंत्री चंडीगढ़ जाकर किसान नेताओं से मिल
रहे हैं यह अच्छी बात है यह काम इस बार भी
शुरू हो गया है लेकिन प्रणव मुखर्जी की

बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने बकायदा ट्वीट
किया है अंग्रेजी में लिखा है जिसका हिंदी
में मतलब हुआ कि पिछले किसान आंदोलन के
समय के विदेशी मूल के टूल किट को मत भूलिए
देखते हैं अगले दो महीने में राहुल गांधी

कितनी बार विदेश जाते हैं इस बंदे की दादी
को भारत को अस्थिर करने में विदेशी हाथ
होने का शक होता था शायद सही भी था लेकिन
पोता डैश डैश डैश आंदोलन किसान का मांग

किसान की और निशाना राहुल गांधी पर और
आरोप विदेशी हाथ पर कांग्रेस में लंबे समय
तक रही शर्मिष्ठा मुखर्जी का यह ट्वीट
बताता है कि राजनीति तो नहीं बदलती मगर
लोग बदल जाते हैं वरना इस तरह के काम के

लिए बीजेपी में बहुत सारे लोग पहले से
मौजूद हैं किसान आंदोलन को विदेशी टूल किट
कहने से पहले शर्मिष्ठा मुखर्जी को
प्रधानमंत्री मोदी से सवाल करना चाहिए

उनसे पूछना चाहिए कि आपका होमवर्क ऐसा है
कि आपके कई मंत्री चंडीगढ़ जाकर किसानों
से मुलाकात कर रहे हैं हम पत्रकारों को
भले पता ना हो मगर यह मंत्री किसी टूल किट

वाले किसान या खालिस्तान समर्थक किसान से
बात करने तो बिल्कुल ही नहीं जाएंगे
केंद्र सरकार इस बार दिल्ली आने के पहले
ही किसानों से बातचीत कर रही है आज भी

बातचीत की खबर है चंडीगढ़ में अर्जुन
मुंडा पियूष गोयल नित्यानंद राय किसानों
के संगठन से मिलेंगे कृषि मंत्री अर्जुन
मुंडा ने कहा है कि किसानों और सरकार के
मत में अंतर हो सकता है मगर हम खुले मन से

बात करेंगे क्या भारत सरकार के मंत्री को
पता नहीं कि वह किससे बात कर रहे हैं फिर
इसमें विदेशी टूल किट की बात कहां से आ
जाती है किसानों ने कह दिया है कि वे शंभू

खनौरी डबवाली बॉर्डर से दिल्ली में प्रवेश
करेंगे इन किसानों को धनी और बड़ा जमींदार
दिखाने का प्रयास किया जाता है पिछली बार
भी यही किया गया मगर सभी को पता है कि आज
खेती की ज्योत की हालत क्या है खेती एक

सिस्टम का नाम है इसमें जो भूमिहीन है जो
मजदूर हैं वह भी किसानों के मुद्दों से
प्रभावित हैं और किसान आंदोलन भूमिहीन
मजदूरों खेती हर मजदूरों के हक की भी मांग

उठा रहा है पिछली बार किसान आंदोलन के
तुरंत बाद विधानसभा चुनाव हुए कांग्रेस
पंजाब में बुरी तरह हार गई और पश्चिम यूपी
में बीजेपी को 49 प्र वोट मिले प्रचंड जीत

मिली इतना वोट बिना किसानों के संभव नहीं
था राजनीति में हार-जीत से अलग किसानों की
मांग को देखा जाना चाहिए किसानों से
ज्यादा इस आंदोलन के संदर्भ में प्रशासन
को भी देखिए और समझिए किसानों के साथ जो

हो रहा है वह केवल किसानों तक सीमित नहीं
रहेगा हाउसिंग सोसाइट के अंकं तक भी
पहुंचेगा और आंटियों तक भी नमस्कार मैं
रविश कुमार

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