खड़गे का भाजपा के ख़िलाफ़ ब्लैक पेपर | Khadge presents Black Paper against BJP - Kabrau Mogal Dham

खड़गे का भाजपा के ख़िलाफ़ ब्लैक पेपर | Khadge presents Black Paper against BJP

नमस्कार मैं रवीश कुमार राजनीतिक सफलता के
पैमाने पर मोदी और मल्लिकार्जुन खड़गे में
कोई मुकाबला नहीं है लेकिन मल्लिकार्जुन
खड़गे में ऐसा क्या है कि वे मोदी और

बीजेपी के खिलाफ मोर्चा संभाले रहते हैं
अपने भाषणों में सीधा हमला करते हैं और
ठहर कर अपनी बात रखते हैं बीजेपी उन्हें
अब तक नजरअंदाज करती रही लेकिन राज्यसभा

में जिस तरह से प्रधानमंत्री मोदी ने
खड़गे को टारगेट किया तंज कसे साफ है कि
बीजेपी के लिए खड़गे को नजरअंदाज करना
मुश्किल होता जा रहा है कांग्रेस अध्यक्ष

बनने के बाद से खड़गे की बातों को लेकर
बीजेपी ने कमी मजाक उड़ाया उन्हें लेकर
आईटी सेल के मीम और पोस्टर कम नजर आते हैं
बल्कि कोई ऐसा लोकप्रिय मीम खड़गे को लेकर

नजर नहीं आया बीजेपी ने कभी उन्हें
प्रमुखता से कठपुतली अध्यक्ष के रूप में
स्थापित करने का भी प्रयास नहीं किया
बीजेपी खड़गे को अक्सर छोड़कर निकलती रही

और खड़गे बीजेपी के सामने आते रहे और
सामने से पकड़ते रहे हम इस वीडियो में
जानने का प्रयास करेंगे कि आखिर
मल्लिकार्जुन खड़गे का खूंटा इतना म कैसे

है अब बीजेपी को वे क्यों चुभने लगे हैं
और मुझे प्रसन्नता इस बात की
थी कि मान्य खड़गे
जी काफी लंबा बड़ी तहान जजे से शांति से

बोल रहे
थे समय भी काफी लिया
था तो मैं सोच रहा था कि आजादी मिली
कैसे इतना सारा बोलने की आज मिली

कैसे सोच तो रहा था लेकिन बाद में मेरे
ध्यान में
आया कि दो स्पेशल कमांडर जो रहते उस दिन
नहीं

थे और आजकल नहीं
रहते और
इसलिए बहुत भरपूर फायदा स्वतंत्रता का
आदरणीय खड़ जी ने

उठाया
और मुझे लगता है कि उस दिन खरगे जी ने
सिनेमा का एक गाना सुना
होगा ऐसा मौका फिर कहां

मिले और ख खड़गे जी
भी रग जी
भी एंपायर नहीं
है कमांडोज नहीं है तो चौके मारने

में मजा आ रहा था
उनको यह सही नहीं है कम से कम खड़गे के
बारे में ऐसा नहीं कहा जा सकता कि वे
कमांडर और अंपायर के इशारे पर बोलने वाले

नेता हैं उनके तमाम भाषणों को आप निकालकर
खुद सुन लीजिए कहीं से नहीं लगेगा कि वे
भाषण देने में सक्षम नेता नहीं है खड़गे
टेली प्रोमर से नहीं बोलते हैं जबकि हिंदी

उनकी मातृभाषा नहीं है फिर भी उनकी हिंदी
दमदार और खनक दार है खड़गे केवल हिंदी
नहीं अंग्रेजी मराठी कनाडा और दखनी भी
धारा प्रवाब बोलते हैं वे यह भी जानते हैं

कि प्रधानमंत्री की हिंदी उनसे अच्छी है
लेकिन वे अपने मुद्दों की रस्सी से
प्रधानमंत्री की धारा प्रवाह हिंदी को
बांध लेते हैं

अपनी भाषा अच्छी
है और हिंदी में सब कुछ बोल के हम निपटा
लेंगे तो उससे आर्थिक परिस्थिति भी बढ़ती
नहीं उसके इंफ्लेशन भी कम नहीं होता उससे

एंप्लॉयमेंट भी ज्यादा नहीं खड़गे साफ-साफ
राजनीति में भाषा और भावुकता के इस्तेमाल
की सीमा बता रहे हैं वे एक तरह से कह रहे

हैं कि भाषा अच्छी है भाषण भी अच्छा है
मगर काम अच्छा नहीं है धोती कुर्ता में
नजर आने वाले इस राजनेता ने मोदी सरकार को
घेरने में जितनी साफगोई और निरंतरता दिखाई

10 साल में विपक्ष के खेमे से शायद ही कोई
नेता उनकी बराबरी कर सकता है भले उनकी
सक्रियता से कांग्रेस के पक्ष में दलित
मतदाताओं के बीच कोई लहर नहीं बन सकी

कांग्रेस का जनाधार व्यापक नहीं हुआ बड़े
पैमाने पर जीत नहीं मिली मगर अपने भाषणों
और मौजूदगी से कांग्रेस के निराश
कार्यकर्ताओं का मनोबल जरूर बढ़ा देते हैं

खड़गे की पूरी राजनीति में एक अंतर और
दिखेगा वे कभी नहीं कहते कि सबसे बड़ा
दलित मैं ही हूं जिस तरह से प्रधानमंत्री
मोदी कहते हैं सबसे बड़ा ओबीसी मैं हूं

राज्यसभा में प्रधानमंत्री ने उन्हें
टारगेट किया लेकिन अगले दिन खड़गे बेहद
नियंत्रित शैली में अपनी बात रख रहे थे
अपने राजनीतिक करियर का लंबा रिकॉर्ड सबके

सामने चुनौती के रूप में पेश कर रहे थे
अरे आप बहस
करो आपकी बहस के ऊपर लोगों को कन्वींस करो
ऐसा लोगों को लगा के डरा के हमको कमजोर
करना चाहते हैं तो मैं तो हम कमजोर

कांग्रेस वाले भी होने वाले नहीं मैं भी
होने वाला नहीं मैं तो इतनी कठिनाई देख के
एक ही घर में मेरे मैं मेरे बाप एक बचे थे

मैं एक बचा दो ही मिलके अब 83 तक मैं आया
हूं ज और 53 साल से
मैं पॉलिटिक्स में हूं एक इलेक्शन भी मेरी
गई थी परसों एक छोड़ के
लेकिन मेरे को भी

इनडायरेक्टली गालिया देना डिफेम करना सोशल
मीडिया में डालना य कर रहे करने दो उनका
काम है
कि
एक
अगर सल कास्ट का व भी जिसके पीछे कोई भी

नहीं है ऐसे आदमी को अगर वो डिफेम करना
चाहते हैं और एक 53 साल में एक कलंक नहीं
है मैं 20 साल वहां मिनिस्टर
था 10 साल यहां मिनिस्टर और 8 साल अपोजिशन

लीडर वहां भी अपोजिशन लीडर 18 साल था तो
कोई मेरे तरफ उंगली उठा के भी नहीं बोल अब
यह लोग डराने की कोशिश कर रहे ठीक है
डराने दो व बाद में की बात है हम देखेंगे
कि हम सिंपति नहीं चाहते हम ऐसे हैं वैसे

इसीलिए हम तो यह चाहते हैं कि जनता की
भलाई के लिए इन्हो जो काम करना चाहिए वो
काम नहीं हुआ इसीलिए यह हमारा ब्लैक पेपर

हम आपको प्रेजेंट कर रहे हैं ऐसा नहीं है
कि खड़गे अपनी दलित पहचान को लेकर शंकालु
हैं हिच किचा हैं मगर राजनीति में वे अपना
मूल्यांकन काम और बेदाग रिकॉर्ड के आधार

पर भी चाहते हैं वे साफ कर देते हैं कि
उन्हें भावुकता नहीं चाहिए किसी की सहान
भूति नहीं चाहिए यह खड़गे का स्वाभिमान और

आत्मविश्वास है उनके भीतर असुरक्षा होती
तो इसी बात पर ड्रामा पैदा कर सकते थे कि
एक दलित का अपमान किया गया है
प्रधानमंत्री ने एक दलित को अपमानित किया
इस काम में कौन माहिर है आप उनका नाम

मुझसे बेहतर जानते हैं खड़गे की स्वायत्ता
जेपी नड्डा की स्वायत्ता से कहीं ज्यादा
व्यापक नजर आती है यह खड़गे की कामयाबी है
संसद सत्र के समय उनके कमरे में विपक्ष की

बैठकें होती हैं विपक्ष के नेताओं के साथ
वे प्रदर्शन में जाते हैं 83 साल की उम्र
में उनकी सक्रियता से कभी नहीं लगा कि वे

उम्र से लड़ रहे हैं अगर विपक्ष के बीच
उनकी स्वीकार्यता नहीं होती तो ममता
बैनर्जी और अरविंद केजरीवाल खड़गे का नाम
प्रधानमंत्री के उम्मीदवार के रूप में

नहीं लेते यह और बात है कि खड़गे ने इसे
नकार दिया मगर प्रधानमंत्री के उम्मीदवार
के रूप में उनकी चर्चा यूं ही नहीं चल
पड़ती है खड़गे ने राजनीति में जगह अपने

दम पर बनाई है एकएक को नोटिस
देना
डराना
धमकाना उसकी दोस्ती अगर नहीं
छोड़ेंगे फिर हम देख

लेंगे डर के कोई दोस्ती छोड़ रहा है कोई
पार्टी छोड़ रहा है कोई गठबंधन छोड़ रहा
है अरे इतने
डरपोक
बचेगा क्या ये संविधान

बचेगा क्या ये डेमोक्रेसी बचेगी
इसीलिए आखिरी चांस है आपको वोट देने का
इसके बाद कोई वोट नहीं देगा क्योंकि यह
पुटीन रसियन पुटीन का जो प्रेसिडेंट
इलेक्शन होता ना वैसा ही होते चले

जाएंगे ध्यान में आ रहा है आपको इसके बाद

चुनाव उने अपनी ताकत के ऊपर वो चलाएंगे
चुन के आएंगे दो लाएंगे 300 लाएंगे 400
लाएंगे 500 लाएंगे अगर हमारी सब
500 543 है तो उसको बढ़ा के फिर 600 भी

बना तो यह संविधान की रक्षा करना
डेमोक्रेसी की रक्षा करना इलेक्शन बारबार
होना चुनाव होना इसकी जिम्मेदारी आपके ऊपर
है मोदी सरकार के लंबे दौर में किसी दूसरे

नेता की तरफ नहीं देखना भी और ना उसके
बारे में बताना गोदी मीडिया और राजनीतिक
जानकारों का एक सजग अभ्यास है ताकि आपको
किसी भी तरह से विपक्ष और उसके भीतर का

कोई नेता दिखाई ना दे राज्यसभा में खड़गे
ने प्रधानमंत्री के भाषण का खूब काउंटर
किया यही कारण है कि प्रधानमंत्री मोदी को
खड़गे ही खड़गे दिखाई देने लग गए लोकसभा

में गौरव गोगोई ने भी काउंटर किया मगर
प्रधानमंत्री ने गौरव गोगोई को नोटिस नहीं
लिया क्या इस वजह से खड़गे अके बीजेपी से
लोहा लेने में सक्षम नेता के रूप में अपनी

जगह बनाते जा रहे हैं शायद इस वजह से
खड़गे का लगातार हमला करना बीजेपी और
प्रधानमंत्री को अब चुभने लगा है इस सदन
में अंग्रेजों को याद किया गया अब राजा

महाराजाओं का तो अंग्रेजों के साथ गहरा
नाता रहा था उस
समय तो आजादी के बाद भी देश में गुलामी की
मानसिकता को को किसने बढ़ावा

दिया जिस खड़गे को बीजेपी माइनस कर चलती
थी प्रधानमंत्री के लिए उन्हें अनदेखा
करना मुश्किल हो गया है खड़गे राजनीति में
प्रधानमंत्री से सीनियर हैं उम्र में भी

लेकिन प्रधानमंत्री ने जिस आदर के साथ
उनका जिक्र किया वह भी उल्लेखनीय है लगता
है प्रधानमंत्री खड़गे के लगाए आरोपों से
बचने का यही तरीका निकाल चुके हैं कि उनके

भाषण को मनोरंजन घोषित कर दिया जाए उन्हें
हल्का सा दिया जाए मैं खड़ जी का विशेष
आभार प्रकट
करता बहुत ध्यान से सुन रहा था

ड़ और ऐसा आनंद आया ऐसा आनंद आया ऐसा बहुत
कम मिलता
है लोकसभा में तो कभी कभी मिल जाता है
लेकिन आजकल वो दूसरी ड्यूटी पर तो मनोरंजन
कम मिलता

है लेकिन लोकसभा में मनोरंजन जो कमी हमें
खल रही है उस दिन आपने पूरी कर
दी खड़गे की प्रेस कॉन्फ्रेंस में आज किसी
को मनोरंजन नजर नहीं आया होगा बल्कि उनके
लगाए गए आरोपों की चर्चा शायद ही गोदी

मीडिया कर पाएगा एक नेता जिसे बार-बार
अनदेखा किया जा रहा है वह नेता बार-बार
अपने मुद्दों को लेकर सबके सामने आ जाता
है आज दिल्ली में उन्होंने कह दिया कि
बीजेपी ने 10 साल में 400 से अधिक

विधायकों को अपने पाले में मिलाया है
दूसरे दलों से यह कोई सामान्य संख्या नहीं
खड़गे ने इनके पाला बदलने के पीछे पैसे के
लेनदेन के आरोप नहीं लगाए मगर इस संख्या

से उस मुद्दे की तरफ इशारा कर दिया जिसकी
तरफ राहुल गांधी भी बोलते हैं मगर कम
बोलते हैं बल्कि राहुल गांधी जहां नहीं
बोलते खड़गे उनसे भी आगे निकल जाते हैं आज

कांग्रेस में खड़गे ने एक बड़े नेता के
रूप में अपनी पहचान बना ली है आज उन्होंने
इलेक्टोरल बंड के मुद्दे को साफसाफ अंदाज
में किसी भी दूसरे कांग्रेसी नेता से

बेहतर तरीके से मीडिया के सामने रखा और
पांचवा पॉइंट है लोकतंत्र पर खतरा यह जरूर
है
क्योंकि एक तो अब डरा डरा के धमका के
इलेक्टरल बंड भी पैसा भी आप उसूल कर रहे

हैं इंडस्ट्रीज के पास हमने नहीं पूछ अभी
तुमने चाबी फिरा दे हो पीछे वह आगे आकर
देते हैं वह सब छोड़ हमने किसी को पूछा
नहीं किसी को तंग नहीं तंग कैसा करते हैं

ईडी की नोटिस भेजना सीबीआई की नोटिस भेजना
सीबीसी की भेजना और किसी ऑफिसर भी अगर
उनके सुनता नहीं तो विजिलेंस को उसको
रिपोर्ट करा ऐसा तंग करके अपने
पास लेते हैं और इलेक्टरल

का भी इन्होंने इतना फिर इससे पहले 10 साल
पहले अगर उनके आडलज पर है फिर इतने पैसे
क्यों नहीं जमा होते थे अब क्यों जमा सो य
इनडायरेक्टली हरासमेंट

प्रेशराइज करके आप इलेक्शन में पैसा ले
रहे और यह पैसा डेमोक्रेसी को खत्म करने
के लिए यूज कर रहे हैं
411 एमएलए को 10 साल में उन्होंने अपने

तरफ लिया अब मैं यह नहीं कहता कितना पैसा
देकर खरीदे क्या करे वो नहीं लेकिन आपको
तो मालूम है कितने सरकार हमारे इलेक्टेड
थे जैसा कि मध्य प्रदेश कर्नाटक मणिपुर

गोवा उत्तराखंड यह सब आप जानते हैं कैसे
गिरे कि उनको
इसमें य डेमोक्रेसी को खत्म करना उनका काम
है ड़ की सक्रियता की गिनती नहीं की जाती
है इस मामले में केवल मोदी की की जाती है

कि उन्होंने किस राज्य में कितनी रैलियां
की हैं तेलंगाना के चुनाव में खड़गे ने 20
के करीब सभाओं को संबोधित किया जनवरी और
फरवरी महीने की सक्रियता देख रहा था 83

साल की उम्र में वे कई राज्यों का दौरा कर
रहे हैं भाषण दे रहे हैं दिल्ली की गीता
कॉलोनी की एक जनसभा में भाषण देते नजर आए
तो हैदराबाद देहरादून और भुवनेश्वर असम के

नौगांव नागपुर और इंफाल में सभाओं को
संबोधित करते
हैं वे दिल्ली में रहने वाले कांग्रेस
अध्यक्ष नहीं हैं बल्कि मैदान में उतरकर
भाषण देते हैं और कार्यकर्ताओं के साथ

बैठकें करते हैं आए दिन कांग्रेस के
अलग-अलग प्रदेश संगठनों के साथ उनकी
बैठकों और रैलियों की तस्वीरें आती रहती
हैं मगर फिर भी गोदी मीडिया अपने समय के

विपक्ष के इस सक्रिय नेता को नोटिस नहीं
लेता मगर अब लेना पड़ जाएगा बताया जाता है
है कि खड़गे आज तक मीटिंग में नोट्स लेते
हैं सबकी बातों को सुनते हैं वे खाटी

कांग्रेसी नेता हैं कई बार पार्टी की
सरकार गिराने से गिरने से बचाने में
भूमिका निभा चुके हैं हॉकी खेला करते थे

मगर घुटने में चोट के कारण खेलना छोड़
दिया अ खड़गे साहब एल ओपी बन के आए एल ओपी
बनने से पहले आए राज्यसभा में एक दिन देखा
मेरी सीट के पीछे वाली सीट पे एक सज्जन को

मैंने धोती कुर्ते में और ती कुर्ते में
लोग आजकल कम दिखते हैं वो पौध लगभग खत्म
हो गई है तो मैंने उन्हें देखा और
फिर मेरे मन में भी था कि जब यह एल ओपी

बने तो कैसे मामला होगा वन थिंग आई मस्ट
टेल यू मेनी ऑफ अस हु स्पीक अबाउट
डेमोक्रेसी इन आवर पर्सनल लाइव्स वी डोंट

प्रैक्टिस डेमोक्रेसी इन आवर एवरीडे लाइफ
सो न आई मेट वेंट फॉर द फर्स्ट टाइम वो 10
बजे एक मीटिंग होती है पने 10 बजे 10 बजे

लीडर ऑफ बाकी पॉलिटिकल पार्टीज की
स्ट्रेटेजी की मीटिंग हम लोग कहते हैं
उसको इस व्यक्ति में मैंने एक खास चीज
देखी जो मेरे अनुभव में नया था ही वड लिसन
टू

एवरीवन एक एक व्यक्ति को आमतौर पर मैंने
एक परिपाटी देखी थी कि लोग अपनी बात रख
देंगे अब पंचों की राय अपनी जगह खोटा यही
ड़ेगा दिस इ समथिंग आई फाउंड फंडामेंटली

डिफरेंट खरगे साहब जो कष्ट हमारी रिपब्लिक
में है कुछ कष्ट आपको व्यक्तिगत भी हुए आई
हैव हार्डली सीन कुछ उदाहरण मेरे समक्ष
यहीं मंच पे हैं जब आपकी जिंदगी का एक

बड़ा हिस्सा लुट
जाए मौत के घाट उतार दिया जाए उसमें बिटर
को अपने अंदर ना आने देना यह सबके बूते की
बात नहीं

है लोग छोटे नुकसान में नफरत की दुकान
नफरत का बाजार लेकर बैठ जाते हैं आपने तो
बहुत नुकसान सह कर के भी मोहब्बत की बातें
आप करते

रहे इनको देख के लगता होगा 8082 साल के एक
सज्जन हैं सदन में जब यह खड़े होते
हैं तो विपक्ष को बड़ी ताकत मिलती है और
आज के दिन में विपक्ष को ताकत की बहुत
जरूरत

है खड़गे जब कांग्रेस के अध्यक्ष बनाए गए
तब कहा गया कि यथा स्थिति वादी जैसा चल
रहा है ही चलने देंगे और कुर्सी पर नाम के
लिए बैठे रहेंगे लेकिन खड़गे के तमाम भाषण

उनकी रैलियां जनसभाएं इन सब से पता चल रहा
है कि वे अग्रिम पंक्ति पर जाकर मोदी
सरकार पर हमला कर रहे हैं अपने शब्दों का
खुलकर इस्तेमाल कर रहे हैं 83 साल के

खड़गे के किसी भी भाषण से लगता है कि वे
किसी का लिखा हुआ नहीं पढ़ रहे हैं किसी
की कठपुतली नहीं है इस तरह के आरोप तो
बीजेपी के अध्यक्ष जेपी नड्डा पर भी लग

जाते हैं जब भी बीजेपी हारती है गोदी
मीडिया के स्टूडियो की तस्वीरों में
प्रधानमंत्री का फोटो हटा दिया जाता है
जेपी नड्डा का लगा दिया जाता है यह सही भी

है और इसे लेकर खूब मजाक भी चलता है खड़गे
सरकार की उपलब्धियों को चुनौती देने में
कांग्रेस के किसी भी नेता से कहीं ज्यादा
सटीक और बेहतर संवाद करते हैं खुद यह बात

नहीं कहते अपनी जबान से कभी नहीं कहते मगर
उनके दलित होने की वजह से वे कभी इस गोदी
मीडिया में स्थान नहीं पा सकते यह भी
राजनीति की सच्चाई है क्योंकि दलित ही

नहीं उनकी राजनीति की शैली पुराने जमाने
के नेताओं की भी है भले आज कांग्रेस कमजोर
लगती है लेकिन खड़गे का खूंटा मजबूत नजर
आने लगा है उनके पास एक ऐसी राजनीतिक भाषा

है जो मोदी सरकार के दावों की चमक से टकरा
जाती है वह बहुत बोलते हैं मैं प्रेसिडेंट
ऑफ इंडिया सेडल कास्ट को
बनाया शेड्यूल ट्राइब को बनाया मैं फलान
को बनाया अरे यह इंपॉर्टेंट नहीं य तो

बनते रहते तुम्हारे पार्टी की एक पॉलिसी
रहती हमने भी बनाया हमने तो ऐसे ऐसे
नेताओं को शेडल कास्ट के प्रेसिडेंट बनाया

जो इंटरनेशनली फेमस थे मैं यह नहीं कर रहा
हूं को इनको क्रिटिसाइज नहीं कर रहा इनका
भी महत्व मैं जानता हूं लेकिन अच्छे पढ़े
लिखे लोगों को और अच्छे इंटरनेशनली

जर्नलिस्ट थे फिर एंबेसडर थे फिर वाइस
प्रेसिडेंट बने फिर उसके बाद में वह
प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया बने व श का तो यह
बातें उन्होंने वहां

बोलना बाबा साहब अंबेडकर के बारे में हम
फोटो लगाए व बो इससे देखो यह तो इमोशनल
चीज है लेकिन आदमी को रोजगार देना यह
इंपोर्टेंट है इसकी बात आप करना चाहिए

इसके लिए हम बोलते और सामाजिक
न्याय उस वक्त मिलता है
हर चीज
में आप लोग भागीदार देना चाहिए मलिकार्जुन

खड़गे 1969 से कांग्रेस में हैं वे
कर्नाटका के गुलबर्ग सिटी कांग्रेस कमेटी
के अध्यक्ष बने नौ बार विधायक बने लेकिन
कभी मुख्यमंत्री नहीं बन सके तीन-तीन बार

इस पद पर पहुंचने से रह गए 1976 में
कर्नाटका सरकार में प्राथमिक शिक्षा के
राज्य मंत्री बने और इनकी अध्यक्षता में
एससी एसटी के 16000 शिक्षकों के खाली पद

भर दिए गए 2005 में कर्नाटका प्रदेश
कांग्रेस समिति के अध्यक्ष बने बाद में
पार्टी ने उन्हें केंद्र में बुला लिया
मनमोहन सरकार में रेल मंत्री और श्रम

मंत्री बने वकील थे तब भी श्रम कानून के
एक्सपर्ट थे पहली बार 2019 में गुलबर्ग से
चुनाव हार गए यही एक हार थी वरना खड़के के
लिए एक नारा का इस्तेमाल किया जाता है

सॉलिडा सरदारा यानी जिसे कोई हरा नहीं सका
कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद
मल्लिकार्जुन खड़गे ने मोदी सरकार के लगाए
आरोपों को घूम-घूम कर जवाब देना शुरू कर

दिया उनके भाषण में नाटक नौटंकी के तत्व
कम होते हैं तार्किकता से अपनी बात रखते
हैं उन्होंने राहुल गांधी से कहीं बेहतर
अपने भाषणों में प्रधानमंत्री के भाषणों

और आरोपों पर सवाल खड़े किए हैं उनका
जिक्र कर सामने से जवाब दिया है यही नहीं
उन्हें पता है कि आईटी सेल में कांग्रेस
के खिलाफ क्या अफवा चल रही है वे इसका

जवाब मंच से दे आते हैं वो बारबार य कहते
य मोदी ने सब कुछ देश में लाइट नहीं थे
मैंने लगा
दिया क्या मोदी आने के बाद रायपुर में

लाइट ी या छत्तीसगढ़ में लाइट आई आप
बोलिए स्कूल मोदी आने के बाद खुल गए क्या
उसके पहले नहीं थे स्कूल अरे मोदी जो पढे
शाहजी जो पढ़े यह सब हमारे स्कूल में ही

पढे नहीं तो क्या कय लंदन जाकर
पढ़े क्या ऑक्सफर्ड स्कूल में जाकर पढ़ के
आए अरे हमारे सरकारी स्कूल में ही पढ़े या
नहीं है तो हमारे

लोग
जो स्कूल निकालते थे उसमें पढे और यह लोग
पूछते हैं हमको
अरेस में
दो तो यह लोग हमको पूछते हैं कांग्रेस
पार्टी 70 साल में क्या की 70 साल में

हमने यही किया तुम लोगों को पढ़ाया लिखाया
मंत्री बनाया मुख्यमंत्री बनाया अरे आप
देश के प्रधानमंत्री भी बन
गए और हमको पूछते क्या हमने ने तो सब कुछ

करके रखा है मल्लिकार्जुन खड़गे के भाषण
का हिस्सा आपने सुना क्या आपको लगता है कि
मल्लिकार्जुन खड़गे कमांडर और अंपायर के
इशारे पर बोलने वाले नेता हैं खड़गे ने आज

काला पेपर जारी करते हुए सीधा सपाट सवाल
पूछे हैं प्रधानमंत्री बताएं कि सार्वजनिक
क्षेत्र की कंपनियों में कितनी नौकरियां
दी गई हैं और कितने दलित पिछड़ों को

नौकरियां दी गई हैं उसके बाद खड़गे खुद यह
भी बताते हैं कि क्यों ठेके की नौकरियों
से बेहतर है सार्वजनिक क्षेत्र की पक्की
नौकरियां पब्लिक सेक्टर क्यों इंसिस्ट कर

रहे हैं पब्लिक सेक्टर अगर ज्यादा बने
बड़े बड़े
बने तो उसमें एंप्लॉयमेंट ज्यादा मिलता है
और एससी एसटी ओबीसी का वहां
पर एक परसेंटेज जो मिलता है व परमानेंट

मिलता है व इधर उधर भागने की जो
कांट्रैक्ट जॉब करना डेली वेज करना यह सब
उसको स्थिरता नहीं देती और खास करके उनको
एक स्टेबिलिटी भी नहीं मिलती तो इसीलिए हम

चाहते थे कि पक्की नौकरी दो गवर्नमेंट
सर्वेंट में पक्की नौकरी दो पब्लिक
सेक्टर्स में दे और अगर स्मल स्केल
इंडस्ट्रीज उसमें इवॉल्व करना है तो उनको

एस्टेब्लिश करके उनके हाथ में दो जैसा आप
करोड़ों रुपए बड़े बड़े कॉर्पोरेट को देते
हैं थाउज ऑफ क्रोस लोन देते हैं क्यों
नहीं इनको जितना उनके धंधे के लिए उनके

काम के लिए पा 10 करोड़ होना है तो देकर
आप उनको एस्टेब्लिश करो वह नहीं करते वह
नहीं बोलते खड़गे भले मोदी की तरह
लोकप्रिय नेता ना हो मगर कहीं से वे कमजोर

नेता नहीं है ऐसा नहीं है कि उन्हें जवाब
देना नहीं आता बीजेपी अगर खड़गे को निशाना
बनाती है बार-बार टारगेट करती है तो यह
खड़गे के लिए बहुत अच्छा होगा राजनीति में

कम से कम सवाल जवाब आरोप प्रत्यारोप के
स्तर बेहतर हो जाएंगे मगर बीजेपी कभी इस
हद तक नहीं जाएगी कि वह खड़गे को ललकारे
गी कि उनके नेता नरेंद्र मोदी से बहस करके

दिखाए कभी नहीं कहेगी कि मोदी बनाम
मल्लिकार्जुन हो जाए बीजेपी को पता है कि
खड़गे को वाकई चौके लगाने आते हैं
उन्हें पॉलिटिक्स का बैट पकड़ना आता है
मगर राजनीति का फैसला केवल मंच पर नहीं

होता मतदान से होता है खड़गे को मतदान
केंद्रों पर भी साबित करना होगा कि वे
मतदाताओं को अपनी पार्टी की तरफ मोड़ सकते
हैं नमस्कार मैं रवीश कुमार

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