क्यों हुआ था माँ काली का अवतार! - Kabrau Mogal Dham

क्यों हुआ था माँ काली का अवतार!

है मित्रों हिंदू धर्म में मां काली का एक

सर्वोच्च वह अलग ही स्थान है कालों के भी

काल महाकाली समस्त देवियों में एक विशेष

महत्व रखती है काली का अर्थ समय वर्क काल

है ऐसा माना जाता है कि इनकी उत्पत्ति समय

और काल के संयोग से पापियों के विनाश के

लिए हुआ था पृथ्वी पर ऐसा कोई पैरा हो सका

जो समय और काल से बच सके परंतु इस धरा पर

ऐसी कौन से व्यक्ति और पड़ी थी जो कालरूपी

मां कालिका को अवतार लेना पड़ा बैंक

Avatar कैसे हुआ यह सब जाएंगे आज के

वीडियो में लेकिन वीडियो शुरू करने से

पहले आपसे निवेदन है कि वीडियो अच्छी लगे

तो लाइक करना मत भूलिएगा और कमेंट में

अपनी राय भी जरूर DJ का यह दो

मां कालिका पुराण के अनुसार मां काली का

अवतार अमावस्या के दिन शुक्रवार को हुआ था

हाथों में खप्पर त्रिशूल तलवार और गले में

मुंडमाला धारण किए मां काली के चार स्वरूप

है दक्षिणाकाली शमशान कार्य मात्र काली और

महाकालिका यह चारों दिशाओं में काली के

अलग-अलग स्वरूप है वैसे तो इनकी पूजा

संपूर्ण भारत में होती है परंतु बंगाल व

असम राज्य में मां काली को विशेष महत्व

दिया जाता है इन के अवतार को लेकर एक बड़ी

ही रोचक कथा कालिका पुराण में मिलती है

कहा जाता है कि एक बार दारू नाम का पापी

असुर अपनी कठोर तपस्या करके श्री

ब्रह्माजी को प्रसन्न कर लिया तब

ब्रह्माजी दारू के सम्मुख प्रकट होकर

वरदान मांगने को कहा तब दारू ने वरदान में

अजेय होने का वरदान मांगा तो ब्रह्मा जी

ने कहा मैं तुम्हें अमर होने का वरदान तो

नहीं रह सकता परंतु मैं तुम्हें एक वरदान

देता हूं कि इस तरह पर मौजूद कोई भी

तुम्हें परास्त नहीं कर पाएगा तुम अनंत

बलवान हो जाओगे और ऐसा का

और ब्रह्माजी अंतर्धान हो गए वरदान पाकर

दारू अति प्रसन्न हुआ और धीरे-धीरे अपने

बल के मद में अत्यंत क्रूर हो गया और

देवता ब्रह्मा आदि को परेशान करना शुरू कर

दिया ग्रामीणों व देवताओं आदि के द्वारा

दिए गए समस्त धार्मिक अनुष्ठान हवन यज्ञ

आदि को विध्वंस करने लगा और धीरे-धीरे

स्वर्ग लोक पर आधिपत्य हासिल कर लिया

जिससे सभी देवता भयभीत होने लगे और परेशान

होकर भगवान विष्णु के शरण में गए जब

ब्रह्माजी दारू को वरदान दिए थे तब यह कहा

था कि कोई भी न तुम्हारा वध नहीं कर सकता

परंतु यह नहीं कहा था कि कोई नारी

तुम्हारा वध नहीं कर सकती जिसके कारण सभी

देवता उसे हार चुके थे अंत में भगवान

विष्णु व अन्य देवताओं सहित भगवान शिव के

पास गए सीओ गुहार लगाने के बाद यह निर्णय

लिया गया कि शिवजी की पत्नी पार्वती दारू

का वध करेंगे इसी के इशारे से माता

पार्वती ने अपने शक्ति का एक अंश निकाला

वह सकती एक चमकता हुआ तेज रोशनी का पुत्र

था

देखते ही देखते भगवान शिव के नीलकंठ से

होते हुए उनके शरीर में प्रवेश कर गया

जिसके बाद भगवान शिव ने अपनी तीसरी आंख

खोली जिससे तीनों थर-थर कांपने लगे मानो

कोई भूचाल सा आ गया हो शिव के तीसरी आंख

खुलने के बाद वह शक्ति रूपी पूरे विश्व के

तीसरे आंखों द्वारा बाहर आए जिसे देखकर

सारे देवता भयभीत हो गए और शक्ति ने एक

विशाल और रौद्र रूप इस्त्री का रूप ले

लिया जिनका रंग काले रात्रि के समय काला

लाल आंखें और खून सी जुबान थी चेहरे पर

लगा सकते था और माथे पर तीसरी आंखें थी

समस्त अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित वह

सकती कालरूपी कॉल इकाई और वह शक्ति मां

काली ने दारू नामक असुर का वध किया मां

काली के भयानक रूप से चारों तरफ आग की

लपटें उत्पन्न हो रही थी वह शक्ति अत्यंत

क्रोधित थी जिनका क्रोध केवल से ही शांत

कर सकते थे समस्त देवताओं के आग्रह करने

पर शिव ने बालक का रूप धारण किया और सबमिट

कर रोने लगे उसी रास्ते मां काली की जा

रही थी तो उस बच्चे पर उनकी नजर

थे और उन्होंने शिव को गोद में उठाया

जिससे मां काली के हृदय में वात्सल्य की

भावना जागृत हुई मां काली ने शिव रूपी

छोटे बालक को अपने स्तनों से दूध पिलाया

जिससे शिवजी ने उनके क्रोध को पीलिया और

इस प्रकार मां काली के प्रचंड वह भयानक

क्रोध को शांत कीजिए मां काली को योगिनी

के नाम से भी पुकारा जाता है इसके पीछे की

कहानी जानने के लिए आप हमारे वीडियो को

जितना हो सके शेयर कीजिएगा मां काली ने

महिषासुर चंड मुंड धूम्राक्ष रक्तबीज शुंग

निशुंग जैसे राक्षसों का वध किया मां काली

को दस महाविद्यायों में से एक माना जाता

है भारत में मां काली के तीन विश्व

प्रसिद्ध मंदिर है जिसमें पहला स्थान

कोलकाता का काली मंदिर दूसरा मां

गढ़कालिका मंदिर और तीसरा पावागढ़

शक्तिपीठ मंदिर है यहां पर मां काली की

पूजा महाकाली के रूप में होती है यहां

देवी सती का वक्षस्थल गिरा था या मंदिर

वड़ोदरा शहर से किलोमीटर दूर स्थित है

तो मित्रों यह थे मां काली के अवतार की

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तमिल

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