क्यों भड़का है लद्दाख | Ladakh up in protest - Kabrau Mogal Dham

क्यों भड़का है लद्दाख | Ladakh up in protest

नमस्कार

तो लद्दाख के
प्राकृतिक संसाधनों पर किन औद्योगिक
घरानों की नजर पड़ गई है और उसे लेकर वहां
की जनता सतर्क हो गई है यह लोग कौन हैं जो
बाकी पहाड़ों की तरह लद्दाख को भी अपनी

हवस का शिकार बना लेना चाहते हैं लद्दाख
की जनता यह खेल समझने लगी है उसे पता है
कि विकास के नाम पर असल में क्या होता है
क्या होगा वहां की जनता को यह भी पता है

कि इसके नाम पर अगर लद्दाख का दोहन हुआ तो
लद्दाख ही नहीं बचेगा यही वजह रही कि
भयंकर ठंड में भी लद्दाख के चारों तरफ से
लोग लेह में जमा हुए और 3 फरवरी को व्यापक

बंद का आयोजन किया गया आखिर क्यों लद्दाख
के लोग राज्य का दर्जा फिर से बहाल करने
की मांग कर रहे हैं जिस राज्य का दर्जा
खत्म करने की तारीफ केंद्र सरकार शेष भारत

में करती रहती है लद्दाख के लोग उसकी
वापसी की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे हैं
इसके पहले सोनम वांगचुक ने भूख हड़ताल की
मगर तब भी लद्दाख की मांग को अनसुना कर
दिया

गया कहा जा रहा है कि लद्दाख के इतिहास
में इतनी बड़ी रैली कभी नहीं हुई चीन की
सीमा से सटे गांव से भी लोग ले आए ताकि
प्रदर्शन में शामिल हो सके रेडियो स्टेशन

से लेकर लेह गेट तक का यह मार्च दूरी में
कम था मगर सारी सड़क भरी हुई थी बाद में
पोलो ग्राउंड पर लोग जमा हुए जहां पर
अलग-अलग राजनीतिक और धार्मिक संगठन के

लोगों ने भाषण दिए जब भी लोग सड़कों पर
उतरते हैं गोदी मीडिया उन्हें गायब कर
देता है और आपको पता ही नहीं चलता कि
लद्दाख में लोग किन बातों को लेकर परेशान

हैं केवल यही बताया जाता है कि 5 अगस्त
2019 को अनुच्छेद 370 समाप्त कर दिया गया
दो-दो केंद्र शासित प्रदेश बना दिए गए आज
लद्दाख को लग रहा है कि 370 के हटने के

बाद जो वादे किए गए थे वे दिखाने भर के
लिए थे लद्दाख के पर्वतीय संसाधनों पर
उद्योगपतियों की नजर लग गई है यह लद्दाख
के पहाड़ों का हाल वही करना चाहते हैं जो

हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के पहाड़ों का
हुआ है इसलिए लद्दाख के लोग लद्दाख के लिए
फिर से राज्य की मांग कर रहे हैं और छठी
अनुसूची लागू करने के लिए आंदोलन कर रहे

हैं हाल के महीनों में हमें यह पता चला कि
ऐसा भी नहीं है केंद्र सरकार में केंद्र
के नेता मंत्री गृहमंत्री सब लद्दाख के हि
तैशी हैं भला चाहते हैं देना चाहते हैं

हमें फिर यह पर्दा जो हमारे बीच में
केंद्र के साथ आ गया था वह पर्दाफाश होते
हुए नजर आया और पता यह चलने लगा कि कुछ
औद्योगिक गुट इंडस्ट्रियल लॉबी जैसे
माइनिंग खनन जिनको लदाख के यह वादियों में

पहाड़ों में पर्वतों में पैसा दिखता है जो
कल की नहीं सोचते आज की
लूट मचाने में लगे हैं हिमाचल में
उत्तरांचल में पूरे हिमालय में जिसका
खामियाजा यहां के लोग हिमालय में बुगत रहे

हैं आप देख रहे हैं हिमाचल प्रदेश में
क्या हो रहा है यह अं धुंद विकास के नाम
पर जो उद्योग
का तांता लगा हुआ है यही आप उत्तराखंड में

देख रहे हैं अब लद्दाख के दरवाजे पर दस्तक
देने जैसे ही यूटी घोषणा हुई तो ऐसे
घरानों ने ऐसे गुटों ने लॉबी ने यहां अपना
सर्वेक्षण करना शुरू किया और हमारे जो

नेता हमारी आवाज को ले जाने के लिए चुने
गए थे लदाख से वह हमसे ज्यादा उनके
असर में आए और उनके साथ मिलकर वह लदाख को
बेचने लगे खरीद फरोग करने

लगे और वह आप तक यह संदेश देने लगे कि यह
संरक्षण यहां किसी को नहीं चाहिए यह यह
संरक्षण यह सिख शेड्यूल यह दो चार लोगों
की कुछ पॉलिटिकल पार्टीज कुछ अपोजिशन की

मांग है इस पर आप ध्यान नहीं दीजिएगा यह
क्योंकि उन्हें पता था कि अगर लदाख पर सिख
शेड्यूल आ जाए तो फिर यह उद्योग मनमानी
नहीं कर पाएंगे खिलवाड़ नहीं कर पाएंगे
तोड़ मोरोड़ जो पर्वतों का हुआ है हर जगह

वह सब यहां नहीं हो पाएगा लद्दाख बचा
रहेगा और वह यह नहीं चाहते थे तो यह गलत
संकेत देने

लगे तो जब उन्होंने यह कहा कि की यह कुछ
ही लोगों की मांग है तब लद्दाख के लोगों
ने आपको जवाब संदेश देने के लिए अपने

पैरों से वोट देने के लिए आज यहां पर
हजारों दसियों हजारों में लोग जमा होकर इस
ठंड में यह जताने के लिए आए हैं कि हम सब
इस मांग के साथ हैं आप इस बहकावे में ना

आए जो कुछ मतलबी लोग वेस्टेड इंटरेस्ट आप
तक पहुंचा रहे हैं हमें उम्मीद है कि आप
इनकी आवाज सुनेंगे
शिख

शेड्यूल सि
शेड्यूल सि शेड्यूल भारत माता की जय भारत
माता की जय ठीक यही बात राहुल गांधी ने भी
कही जब चार महीने पहले वे लद्दाख के दौरे

पर गए थे वह राहुल की बात नहीं थी वहां के
लोगों की बात थी जो लोगों ने उन्हें बताए
मगर आज लद्दाख के लोग उसी बात को कहने के
लिए ठंड में बाहर निकले हैं 21वी सदी

में सोलर एनर्जी की बात की जाती
है और लद्दाख
में सोलर एनर्जी की कोई कमी नहीं
है बीजेपी के लोग यह जानते हैं समझते

हैं कि अगर
आपको
रिप्रेजेंटेशन दिया
जाए तो फिर वह आपसे आपकी जमीन नहीं छीन
पाएंगे मामला जमीन का
है और बीजेपी के
लोग जो आपकी जमीन

है आपसे लेना चाहते हैं अदानी जी के
बड़े-बड़े प्रोजेक्ट यहां लगाना चाहते हैं
और उन प्रोजेक्ट का
फायदा आपको नहीं दिलवाना चाहते हैं हम यह
कभी होने नहीं देंगे

कांग्रेस पार्टी
ने जो ले की एपेक्स बॉडी
है और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस जो है और
इनकी जो डिमांड्स है उनका हमने पूरा

समर्थन किया है राहुल गांधी पर अक्सर आरोप
लगता है कि वे जमीन पर जाकर भी समस्याओं
और मुद्दों को सही से नहीं पकड़ते ना
उठाते हैं मगर यहां आप देख सकते हैं कि

पेटीएम की तरह लद्दाख के मामले में भी
राहुल गांधी ऐसी धारणाओं को गलत साबित कर
रहे हैं यही कारण है कि गोदी मीडिया में
राहुल की यात्रा को कवर नहीं किया जाता है

क्योंकि तब जमीन से जुड़े मुद्दे दिखने लग
जाएंगे क्यों लद्दाख संविधान की छठी
अनुसूची के तहत संरक्षण मांग रहा है
क्योंकि अनुच्छेद 370 के हटने के बाद उसे

जो संरक्षण हासिल था वह भी हट गया शुरू
में लद्दाख से वादा किया गया कि संरक्षण
दिया जाएगा वहां के प्राकृतिक संसाधनों को
लूट का जरिया नहीं बनने दिया जाएगा मगर 4

साल यानी अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 के
हटने के बाद से वहां के लोगों का इंतजार
लंबा होता जा रहा है बीजेपी को भी पता था
कि यही लद्दाख की जनता की मांग है और सही

मांग है इसलिए 2019 के चुनावी घोषणा पत्र
में और 2020 के पर्वतीय परिषद के चुनाव
में इसे घोषणा पत्र में शीर्ष पर जगत दी
गई लोगों ने बीजेपी पर भरोसा किया मगर
लोकसभा और पर्वतीय परिषद के चुनाव के चार

से लेकर 3 साल बीत गए अभी तक लद्दाख को
छठी अनुसूची के तहत संरक्षण देने का वादा
पूरा नहीं हुआ है अब वहां की जनता बीजेपी
को ही उसके वादों की याद दिला रही है और

राज्य की बहाली की मांग कर रही है 2020
में लद्दाख में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष
चेयरिंग दोरजे लाकर ने पार्टी से इस्तीफा
दे दिया उन्होंने भी यूटी प्रशासन पर
मनमानी के आरोप लगाए और कहा कि भाजपा को

हमारे लोगों की परेशानी से कोई फर्क नहीं
पड़ता काउंसिल में केंद्र का ही
प्रतिनिधित्व है और इसके सदस्यों के पास
कोई अधिकार नहीं 2014 में लद्दाख से
बीजेपी के सांसद रहे छवा तुबस थे उन्होंने

अलग कारणों से पार्टी से 2018 में इस्तीफा
दे दिया लद्दाख से इस वक्त जमयांग सेरिंग
नामंगल बीजेपी के ही सांसद हैं बीजेपी आज
आधिकारिक तौर पर इस आंदोलन का समर्थन नहीं
कर रही है लद्दाख के लोगों को लगता है कि

धारा 370 के बाद उनके हाथ से काफी कुछ चला
गया पहले कम से कम ले से दो विधायक करगिल
से दो विधायक जम्मू-कश्मीर विधानसभा में
इलाके का प्रतिनिधित्व करते थे मगर अब तो

विधानसभा ही चली गई दो विधान पार्षद भी
होते थे लद्दाख से केंद्रीय मंत्री हुआ
करते थे अब नहीं है इस तरह से राजनीतिक
प्रतिनिधित्व समाप्त सा हो गया है विचित्र
बात यह है कि केंद्र शासित प्रदेश को

विधानसभा दी गई है जिसके लिए अभी तक चुनाव
नहीं हुए हैं कश्मीर की बात कर रहा हूं और
एक केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को
विधानसभा नहीं दी गई है इससे सरकार ने

अपने लिए क्या हासिल किया और लद्दाख के
लोगों ने अपने लिए कितना कुछ गवा दिया यह
बड़ा सवाल है सरकार की तरफ से यही बताया
जाता है कि अगस्त 2019 के बाद से इलाके

में सब कुछ ठीक ठाक चल रहा है विकास की
गंगा बह रही है लेकिन फिर लोग सड़कों पर
क्यों कर रहे
हैं से हम हमारा हक मांगते ना किसी से भी
मांगते हम हमारा हक मांगते किसी भी
मांगते

जी जय सुर जी जय सुर लेह पोलो ग्राउंड पर
लोगों का यह जुटान कई मामलों में ऐतिहासिक
है इसने करगिल और लेह के बीच की राजनीतिक
दूरी भी मिटा दी है दोनों क्षेत्रों के

लोगों ने इसमें हिस्सा लिया हर दल और हर
तरह के धार्मिक संगठन के नेता और लोग
शामिल हुए इसमें बीजेपी को छोड़कर लद्दाख
एपेक्स बॉडी और करगिल डेमोक्रेटिक अलायंस
के लोग भी साथ आए इन दोनों संगठनों का गठन
2019 और 2020 में हुआ था

अभी तक लोकसभा चुनावों के समय किसका सांसद
होना चाहिए इसे लेकर बौद्ध और मुसलमानों
के बीच खींचातानी हो जाया करती थी और
कभी-कभी सांप्रदायिक रूप भी मामला ले लेता

था मगर इस बार दोनों समुदाय के लोग लद्दाख
के भविष्य के लिए बड़ी संख्या में यहां
जुटे हैं बौद्ध संगठनों के अलावा शिया और
सुन्नी ईसाई संगठन भी इसमें शामिल हैं

शून्य डिग्री तापमान की हालत में इतने
लोगों का आ जाना लद्दाख के लोगों को भी
चौका रहा है खर दंगला में बर्फ पड़ रहा था
तब भी नुब्रा से लोग आए सबसे ऊंचा पास

माना जाता है वहां से भी बड़ी संख्या में
लोग आए रेमन मैक्स से पुरस्कार विजेता और
पर्यावरण को लेकर काम करने वाले सोनम
वांगचुक ने इस रैली का कॉल दिया था लद्दाख
के सभी व्यापारिक संस्थान सामाजिक

संस्थानों ने भी इसमें हिस्सा लिया लद्दाख
के साथ-साथ करगिल में भी बंद रहा सोनम
वांगचु को पता है कि नेशनल मीडिया आएगा
नहीं तो आंदोलन भी करना होगा और मीडिया का
भी काम खुद करना होगा वांगचुक ने अपने

भाषण में याद दिलाया कि किस तरह
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके कई
कैबिनेट मंत्री लद्दाख आकर संरक्षण देने
की बात करते रहे हैं मगर लगता है कि अब

उद्योगपतियों के हित उनकी बातों पर हावी
होने लगे हैं और सरकार भूलने लगी है तो इस
पर्वतीय प्रदेश इस संवेदनशील पर्वतीय
प्रदेश के सरक्षण के लिए जब 370 नहीं रहा

तो आपने लद्दाख के लोगों को भरोसा दिलाया
आपके सरकार के मंत्रियों
ने नेताओं ने यहां आकर दिल्ली से बार-बार
हमें आश्वासन दिया कि लदाख को भारतीय
संविधान के अनुच्छेद 244 के छठवें शेड्यूल

में संरक्षित किया जाएगा यह भारत
के नेशनल कमीशन फॉर एससी एसटी के मिनट्स
में छपे हुए हैं यह आश्वासन यहां पोलो
ग्राउंड से दिया गया यह
आश्वासन ट्राइबल जनजातीय मंत्री

से न्याय के लॉ मिनिस्ट्री से होम
मिनिस्ट्री से हर तरफ से हमें यह आश्वासन
मिला और फिर उसके बाद आपकी सरकार ने आपके
पार्टी ने एक बार नहीं दो बार हमें यह

आश्वासन इलेक्शन में चुनाव
में इस तरह के मेनिफेस्टो घोषणा पत्र के
जरिए भी दिया यह मैं आपको फिर याद दिलाना
चाहूंगा और धन्यवाद करना चाहूंगा लदाख के
इन तमाम लोगों की तरफ

से आपने संसदीय चुनाव में नंबर एक नंबर दो
नंबर तीन पर रखा है डिक्लेरेशन ऑफ लद्दाख
अंडर सिख शेड्यूल ऑ इंडियन कांस्टिट्यूशन
ट्राइबल एरिया डिक्लेरेशन

यह पार्लियामेंट्री इलेक्शन में आश्वासन
दिया गया था 2019
में और फिर 2020 में जब लद्दाख के ले जिले
में यहां का सबसे प्रतिष्ठित चुनाव हुआ
पर्वतीय काउंसिल का हिल काउंसिल का तो फिर
पहले नंबर पर इस में यही बंद यही मुद्दा

है कॉन्स्टिट्यूशन सेफगार्ड फॉर लद्दाख
अंडर सिक्स शेड्यूल ऑफ इंडियन
कांस्टिट्यूशन
तो यह आपने हमारे साथ वादे किए आश्वासन

दिए इन सबका हम फिर धन्यवाद कहना चाहते
हैं क्योंकि हम सोचते हैं कि देर हुई है
तीन चार सालों का मगर अंधेर नहीं है हमारा
यह यकीन है तो तो हमारा यकीन यह है कि जब

आपने यह आश्वासन दिए तो आप इसे देर सवेर
पूरा जरूर करेंगे मगर दुख के साथ यह कहना
पड़ रहा है कि इन घोषणाओं के बाद एक
सन्नाटा सा छा गया कुछ महीनों के लिए फिर
एक साल के लिए फिर

नकारात्मक संकेत मिलने लगे कि यह नहीं
मिलने वाला फिर यहां लेह में तो जो सिख
शेड्यूल शब्द को उच्चारण करें उन पर ज्याद
कियां होने लगे बच्चों को पकड़ा जाने

लगा और हमने सोचा कि
शायद जिन नेताओं पर हमारा इतना भरोसा
था वह नहीं रहा अगर वादा किया गया था तो 4
साल में पूरा क्यों नहीं किया गया क्या
वाकई में लद्दाख के पहाड़ों पर किसी खास

उद्योगपति की नजर है यहां के लोगों का
कहना है कि 97 फीदी आबादी अनुसूचित जनजाति
की है तो इस इलाके को संविधान की छठी
अनुसूची में शामिल किया जाना चाहिए वहां
के लोग भी यह भी कह रहे हैं कि छठी

अनुसूची की मांग करने पर तरह-तरह से
परेशान किया जाता है एफआईआर कर दी जाती है
भारत जोड़ो यात्रा के पहले चरण पूरे करने
के बाद राहुल गांधी लद्दाख गए 4 महीने

पहले के इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि
लोग राहुल गांधी से छठी अनुसूची के बारे
में बात कर रहे हैं तब भी सरकार ने ध्यान
नहीं दिया अब यहां एक बड़ा आंदोलन खड़ा हो

गया है वहां के लोगों ने छठी अनुसूची की
बात कही और बताया कि अनुच्छेद 370 के हटने
के बाद उनकी आवाज खत्म हो गई है उनके पास
अब विधायक नहीं है लद्दाख में आ रही
तरह-तरह की योजनाओं को लेकर उनके मन में

आशंकाएं हैं उनके सवाल हैं कि कहीं यह सब
लद्दाख की कीमत पर तो नहीं हो रहा मैंने
वहां प पार्लियामेंट में अदानी जी का भाषण
दे दिया तो वो डायरेक्टली मोदी जी को मतलब
अच्छा नहीं लगा तो प्रॉब्लम यह थी अब मैं

चुप होने वाला तो हूं नहीं मैं तो बोलता
जाऊंगा सबसे पहले मैं आपकी मदद
पार्लियामेंट में कर सकता हूं अगर आप
चाहते हो कि आपका कोई लोकल मुद्दा हो या

लद्दाख के लेवल का मुद्दा हो आप मुझे बताओ
कि भैया यह मुद्दा है आप हमारे लिए
पार्लिमेंट में
उठाइए यटी तो मिला सर यूटी प मिला उस यटी
में जो हमारे चाह जितना लीडरों ने हमें

ूटी मंगा था वो हमें नहीं मिला स आजकल
लद्दाख के 90 पर लोग चाहते हैं कि हमें
सिक्स शेड्यूल मिले जो आपके नेचुरल
रिसोर्सेस है और जो आपका सोलर पावर का

पोटेंशियल है वो ये लोग अपने लोगों को
देना चाहते हैं आपका जो यहां पे टेरेन है
वो बिल्कुल अफगानिस्तान जैसा टेरेन है
वहां पे बड़े मिनरल्स पाए गए हैं तो वो भी
ये सोच रहे हैं कि यहां पे मतलब जमीन के

नीचे बहुत सारे नेचुरल रिसोर्सेस होंगे और
वो अपने लोगों को यह पकड़ना चाहते हैं
हमारी पोजीशन वेरी क्लियर है जो भी पूंजी
है चाहे ये सोलर पावर हो चाहे जमीन के

नीचे जो भी हो वह आपका है और किसी का नहीं
है सबसे पहले हमें चाहिए जो सिख शेडल वाला
करवाई सबसे पहले हमारा जमीन बजना है नकरी
बजना अपना वो
बजना कंट्रोल होना

चाहिए इससे अच्छा तो जम्मू कश्मीर के नीचे
अच्छा था सर क्यों बोलो ना सर पहले हम ग
वाला मिलके एक आदमी को कोई जमीन नहीं होगा
तो निशाने निशाना लगा कि गगा वाला मना के

हां ठीक है भाई तेरे को हक है तुम इसमें
घर बनाओ अभी तो गलती से ऐसा कर दिया तो
पुलिस आ जाता है मतलब आपका कहना है कि
पहले आपका लोकल राज था अब
आपका

गवर्नर मैं इससे सहमत हूं लोकल आपका राज
होना चाहिए छठी अनुसूची को लेकर लद्दाख
में पहली बार प्रदर्शन नहीं हुआ है कई बार
हो चुका है लद्दाख के लोगों ने 2020 में

2021 में 2022 में बड़े पैमाने पर बंद का
आयोजन किया था यहां तक कि जम्मू में भी
जाकर प्रदर्शन किया ताकि किसी तरह दिल्ली
को सुनाई दे दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी

प्रदर्शन हुआ है लोगों का यह भी कहना है
कि केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद जो
ऑटोनोमस हिल डेवलपमेंट काउंसिल बनाई गई है
वह काफी कमजोर संस्था है काउंसिल का बजट

में कोई रोल नहीं लद्दाख के बजट का ज्यादा
बड़ा हिस्सा केंद्र शासित प्रशासन तय करता
है करगिल में भी अपने प्रतिनिधित्व को
लेकर असंतोष है वहां भी कई बार इस तरह के

बंद हुए हैं मगर दिल्ली तक उनकी आवाज गोदी
मीडिया ने पहुंचने नहीं दी और लोगों को
यही झांसा दिया गया कि अनुच्छेद 370 के
बाद सारी समस्याओं का समाधान हो गया है 3
फरवरी के लद्दाख बंद ने उस झूठ से पर्दा

हटा दिया हाल ही में जब अस्पतालों के साइन
बोर्ड बदले गए और उन पर आयुष्मान आरोग्य
मंदिर लिखा गया तब वहां के लोगों ने इसे
पसंद नहीं किया उन्होंने इस तरह से देखा
कि यह केंद्र शासित प्रशासन का एक तरफा

फैस ला है इसमें उनकी राय नहीं ली गई 5
अगस्त के बाद हमारे लद्दाख में जितनी भी
जो डेमोक्रेटिक राइट्स है हमारे लोगों के
वो कहीं ना कहीं गायब हो गई है हमारे

इंस्टीट्यूशंस गायब हो गए हैं क्योंकि
पहले आपको पता है कि जब हम जम्मू कश्मीर
का हिस्सा थे तब हमारे यहां से पिछले 70
सालों में हमारे यहां से लोगों ने अपनी

नुमाइंदगी की है हमारे लद्दाख से चार
एमएलएस चुन के जाते थे हमारे लेजिस्लेटिव
असेंबली में और दो मेंबर्स हमारे यहां
एमएलसी मेंबर ऑफ लेजिस्लेटिव काउंसिल हुआ
करते थे

वह सब खत्म हो गए हैं कहने को तो हमारे जो
ऑटोनोमस डेवलपमेंट काउंसिल ऑटोनोमस है
हमारे जो सीईसी होते हैं चीफ एग्जीक्यूटिव
काउंसलर्स उनको कैबिनेट मिनिस्टर का और जो
हमारे एग्जीक्यूटिव काउंसलर्स होते हैं

चार ले में चार करगिल में उनको कैबिनेट
मिनिस्टर का उनको रैंक दिया गया है लेकिन
वो उनको पंचायती जो हमारे इंस्टीट्यूशन है
उतना ही राइट्स है उनको पेपर में सिर्फ
राइट्स है लेकिन ग्राउंड पर उनको बहुत

ज्यादा कमजोर किया गया है जिससे हमारे
लोगों ने लदाख के लोगों ने इस पर
रिजर्वेशन दिखाई बहुत ज्यादा और हम 20 से
जब से हमारी अपेक्स बॉडी ले और करगिल
डेमोक्रेटिक अलायंस बनी है तब से हम

सड़कों पर है तब से हम आवाज उठा रहे हैं
कि हमारी जो बात है हमारे जो डिमांड्स है
जो हमारे चार पॉइंट जो एजेंडा है उस पर
सुनवाई होनी चाहिए जब से हम यूटी बने हैं
तब से हमारी जो इंस्टिट्यूशन थी पीपल

रिप्रेजेंटेटिव इंस्टिट्यूशन खत्म हो गई
है लेकिन जम्मू कश्मीर में आपने देखा है
कि पहले तो इसको यूटी
लेजिसलेच्योर ने भी कहा था कि हमारे जम्मू
कश्मीर को स्टेट में रिस्टोर किया जाएगा

और जिसके चलते हमारे नबल सुप्रीम कोर्ट ने
भी रिसेंटली जो 370 का जो जजमेंट ये
जजमेंट जो दिया था उन्होने भी कहा कि जो
जम्मू कश्मीर है उसको स्टेट में रिस्टोर
कर देना चाहिए लेकिन लद्दाख पे ना नबल

सुप्रीम कोर्ट ने कोई बात की ना हमारे नबल
जो हमारे होम मिनिस्ट्री उन्होने कोई बात
की जिससे लदाख को सिर्फ एक सिंपल एक यूटी
में रखा गया है यूटी में तब्दील कर दिया

गया है वेर एस इन द केस ऑफ जम्मू एंड
कश्मीर उनको फुल फले स्टेट बनाने वाले हैं
जो हम समझते हैं लदाख की आवाम की वो हमारे
साथ डिस्क्रिमिनेशन है ऐसा कोई अभी तक कोई
प्रेसिडेंट नहीं है जिसमें एक स्टेट को

आपने बायफर केट करके यूटी बना दिया हो
बाकी हमने जितने भी एग्जांपल्स हमारे
कंट्री में देखे हैं उनमें हमेशा यह देखा
है कि चाहे वो तेलंगाना का केस हो आंध्र

प्रदेश का जिसमें तेलंगाना और आंध्र
प्रदेश बना या हमारे झारखंड छत्तीसगढ़
बिहार की बात हो उत्तराखंड की बात हो
उसमें हमेशा से स्टेट्स बने हमारा एक
सिस्टम है प्रेसिडेंट है हमारे कंट्री में

कि जब भी यूटी से स्टेट बनते आ रहे हैं
लेकिन स्टेट से पहली बार हमने देखा है कि
यूटी में कोई डिमोट हो रहा है सेकंड
लद्दाख की तरह जो सिमिलरली प्लेस जो जगाए
हैं हमारे इंडिया में नॉर्थ ई में जैसे

आसाम हो गया है त्रिपुरा हो गया मेघालय
मिजोरम हो गया जहां पर सिक्स शेड्यूल की
प्रोटेक्शन इनको हमारी कांस्टिट्यूशन के
तहत दी गई है हमारे लद्दाख में वो सारे

कैरेक्टरिस्टिक है सारे उसमें वो फॉल होता
है कैटेगरी में कि इसको भी उनके लाइंस पर
हमरे लद्दाख को भी एंपावर करने की जरूरत
है सिक्स शेड्यूल देने की जरूरत है लोगों
का यह भी कहना है कि ब्राउन बेयर और स्नो

लेपर्ड जैसी लुप्त होती प्रजातियां हैं जो
इस विकास मॉडल के चलते बिल्कुल समाप्त हो
सकती हैं यहां की इकोलॉजी बेहद संवेदनशील
है यहां केंद्र के लाय ब्यूरोक्रेट

नौकरशाह बिना सोचे समझे बड़े-बड़े निर्णय
नहीं ले सकते स्थानीय लोगों की भागीदारी
जरूरी है राज्य में बड़ी संख्या में नई
सड़कें और हाईवे बनाए जा रहे हैं सोलर

प्लांट के लिए उद्योगपतियों को जमीन दी जा
रही है लोगों का कहना है के इलाके में
बेरोजगारी बेतहाशा बढ़ी है राज्य के
नौजवानों के लिए काम नहीं इसलिए यहां पर
पब्लिक सर्विस कमीशन भी बने अनुच्छेद 370

के हटने के बाद से राजपत्रित नौकरियां ना
के बराबर आई हैं तो यह सारे मुद्दे हैं जो
आपकी नजर में नहीं लाए जाते हैं नमस्कार

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