क्या आप नित्य पूजा साधना में इन चीज़ों का ध्यान रखते हैं? Maa Ka Ashirwad - Kabrau Mogal Dham

क्या आप नित्य पूजा साधना में इन चीज़ों का ध्यान रखते हैं? Maa Ka Ashirwad

नमस्कार दोस्तों आप सभी पर मां का

आशीर्वाद और बजरंग बली की कृपा सदैव बनी

रहे आज हम बात करेंगे कुछ ऐसी गलतियों की

जो जाने अनजाने हम अपनी रोज की पूजा में

साधना में कर देते हैं विशेषकर जब हम किसी

मनोकामना की पूर्ति के लिए कोई साधना या

पूजा उठाते हैं किसी संकल्प के साथ और फिर

विशेष नियमों की अनदेखी करते हैं तो

वास्तविक फल को प्राप्त नहीं कर पाते

देखिए नियमों के पालन की आवश्यकता भक्ति

में कब नहीं पड़ती जब सिर्फ भक्ति भाव से

निष्काम भक्ति हम लोग करते हैं तो ऐसी

भक्ति हर प्रकार के नियमों से परे होती है

भौतिक बंधनों से परे होती है निष्काम

भक्ति में हम और आप बस ईश्वर से उनका

प्रेम मांगते हैं किसी भौतिक सुख की

अभिलाषा नहीं करती ऐसी भक्ति जो मीराबाई

ने भगवान कृष्ण से की थी ऐसी भक्ति जो संत

शिरोमणि स्वामी रामकृष्ण परमहंस ने मां

काली से की थी यह जानते हुए भी कि प्याले

में जहर है मीराबाई उस प्याले को पी गई थी

और रामकृष्ण परमहंस उन्हें गले का कैंसर

था असैया पीड़ा देने वाला रोग था लेकिन

उन्होंने अब इस रोग से मुक्ति नहीं चाही

अगर वह चाहते तो मां से रोग मुक्ति की

प्रार्थना कर रोग मुक्त हो सकते थे लेकिन

उन्होंने ऐसा नहीं किया और यह निष्काम

भक्ति के दुर्लभ उदाहरण है लेकिन इस मानव

जीवन में कई बार ऐसे अवसर आते हैं ऐसे

उतार चढ़ाव आते हैं जो हम सब अपनी अपनी

झोली भगवान के आगे फैलाते हैं और कुछ ना

कुछ उनसे मांगते हैं और इसमें कुछ बुराई

भी नहीं जरूरत पड़ने पर संतान अपने

माता-पिता से ही अपेक्षा करती है और

उन्हीं से सही मायनों में मार्गदर्शन भी

प्राप्त करती है और सहायता भी प्राप्त

करती है यह है सकाम भक्ति जब हम अपनी किसी

मनोकामना की पूर्ति के लिए भगवान की पूजा

साधना करते हैं उनसे किसी भौतिक चीज की

अपेक्षा करते हैं और जब हम ऐसा करते हैं

तो भगवान को अपनी इच्छाओं के बंधन में

बांध देते हैं तो फिर हमें भी कुछ नियमों

से बंधना पड़ता है कुछ मर्यादाओं का पालन

करना पड़ता है नहीं तो उचित फल हमारी

मेहनत का हमें नहीं मिल पाता तो आज जानते

हैं ऐसी कुछ खास चीजों के बारे में जिसका

ध्यान आपको अपनी नित्य की पूजा

साधना में अवश्य रखना है जिसमें सबसे पहला

है कि जो भी जप ध्यान मंत्र साधना आप उठा

रहे हैं तो संकल्प लेकर उठाएं और संकल्प

की अवधि पूर्ण होने के बाद भी उसे करते

रहे छोड़े नहीं या एक साथ साधना खत्म होने

के बाद तुरंत दूसरी साधना आप शुरू कर देते

हैं उसी अभिलाषा की पूर्ति के लिए ऐसा ना

करें और जो भी मंत्र जाप आप कर रहे हैं

उसका अधिकतम पाठ करें कम से कम और

माला नित्य या दिन का संकल्प लेकर

करना ही चाहिए देखिए मंत्रों की ऊर्जा

उनकी शक्ति असीमित है और विशेषकर बीज

मंत्रों में इतनी शक्ति होती है कि वह

हमारे पूरे जीवन को बदल कर रख देती है

लेकिन सबसे पहला जो बदलाव आता है वह हमारे

खुद के भीतर से आता है जब तक हमारे खुद के

भीतर बदलाव नहीं आएगा हमारे आसपास की

परिस्थितियां नहीं बदल सकती बीज मंत्र

किसी भी देवी या देवता का हो वह उस

देवशक्ति का मुख्य स्रोत होता है मुख्य

वाहक होता है और मंत्र ही देवता का

सूक्ष्म शरीर होता है निरंतर मंत्र जप से

हमारे मन मस्तिष्क में बहुत सारे पॉजिटिव

चेंजेज आते हैं हमारे न्यूरॉन्स चेंज हो

जाते हैं हमारे हार्मोंस में बदलाव आता है

और हमारे अंदर की नकारात्मक सोच समाप्त

होती है सकारात्मक सोच पैदा होती

लेकिन यह बदलाव एक दिन में नहीं आता इसके

लिए निरंतर अभ्यास की आवश्यकता है इनफैक्ट

दिन या दिन की साधना जब आप प्रारंभ

कर रहे हैं तो यह तो बहुत ही प्रारंभिक

अवस्था है और आपको संकल्प अवधि पूर्ण होने

के बाद भी निरंतर उस अभ्यास को करते रहना

चाहिए तभी आपके मन मस्तिष्क में अपेक्षित

बदलाव आएगा और आपकी जो बाहर की

परिस्थितियां हैं वह तभी परिवर्तित हो

पाएंगी आपके अनुसार दिन दिन या

दिन का संकल्प तो व काल है यह काल वो वो

काल है जब आपने बीज बो दिया है एक सोच

ब्रह्मांड में आपने छोड़ दी है अब उसे खाद

पानी आपको निरंतर देना है तभी वह बीज

वृक्ष बन पाएगा नहीं तो वह सूख जाएगा ठीक

उसी प्रकार जिस प्रकार हम धरती पर कोई बीज

बोते हैं तो निरंतर उसे खाद पानी देना

होता है जब बीज अंकुरित हो जाता है पौधा

बाहर सिर निकाल देता है धरती के बाहर तभी

भी उसे खाद पानी देना होता है छोड़ना नहीं

होता अन्यथा पौधा सूख जाएगा इसी प्रकार जब

आप कोई भी साधना पूजा ध्यान आदि कर रहे

हैं उसके पॉजिटिव इफेक्ट यदि आपको अपने

जीवन में नजर आ रहे हैं तो फिर छोड़ना

नहीं है उसको और भी दृढ़ इच्छा शक्ति के

सं करना है क्योंकि आपको उसके सकारात्मक

परिणाम मिल रहे हैं और वास्तविक फल तभी

प्राप्त होगा जब वह एक संपूर्ण वृक्ष में

परिवर्तित हो जाएगा जिस प्रकार आप जिम

जाते हैं विभिन्न प्रकार की एक्सरसाइजस

करते हैं तो कुछ दिनों बाद शरीर पर इसका

प्रभाव दिखता है आपकी मसल्स बनने लगती हैं

आपका जो शरीर है वह मजबूत होने लगता है

लेकिन कुछ समय बाद यदि आप जिम जाना छोड़

छोड़ देते हैं वो एक्सरसाइजस छोड़ देते

हैं तो शरीर पुनः पुरानी अवस्था में आ

जाता है इसी प्रकार निरंतर अभ्यास ध्यान

साधना से हमारे अंदर न्यूरॉन्स चेंज होते

हैं हमारा पूरा नर्वस सिस्टम चेंज होने

लगता है और हमारी एनर्जी हायर स्टेट तक

पहुंचने लगती है तो इस अभ्यास को छोड़ना

नहीं है दूसरा महत्त्वपूर्ण पॉइंट कि जब

कभी भी आप ध्यान में साधना में है पूजा

भक्ति कर रहे हैं तो शरीर के साथ-साथ तन

मन और आत्मा की शुद्धता के साथ पूजा में

बैठे और ये जो कंडीशन है चाहे आप सकाम

भक्ति कर रहे हैं चाहे निष्काम भक्ति कर

रहे हैं दोनों में ही परमा आवश्यक है तो

इसके पीछे का कारण क्या है ऐसा क्यों

देखिए हर व्यक्ति के अंदर सकारात्मक और

नकारात्मक ऊर्जा विद्यमान होती है दोनों

ही प्रकार की ऊर्जा विद्यमान होती है जिस

प्रकार दिन है तो रात भी अवश्य है तो जब

हम मंत्र जाप करते हैं ध्यान करते हैं तो

कॉस्मिक एनर्जी हमारे अंदर प्रवेश करती है

जितना गहरा ध्यान जितनी गहरी समाधि उतनी

ज्यादा ब्रह्मांडी ऊर्जा हमारे अंदर दैवीय

ऊर्जा हमारे अंदर प्रविष्ट होती है और

हमारे अंदर के पूरे सिस्टम को हमारी पूरी

एनर्जी बॉडी को हमारे चक्रों को प्रभावित

करती है फल स्वरूप हमारे अंदर विद्यमान

दोनों तत्व प्लस और माइनस पॉजिटिव एंड

नेगेटिव दोनों ही सक्रिय हो जाते हैं जहां

हमें आध्यात्मिक अच्छे बहुत अच्छे अनुभव

भी होते हैं वहीं कई लोगों को शारीरिक

कष्ट होते हैं और कई प्रकार से मानसिक

बदलाव उनके अंदर आते हैं क्रोध बहुत आता

है गुस्सा बहुत आता है क्योंकि उस समय

हमारे अंदर की जो नकारात्मक ऊर्जा है वह

भी क्लिक हो जाती है सक्रिय हो जाती है और

यह समय हमारी एनर्जी बॉडी की सफाई का समय

होता है इसीलिए घबराकर साधना पूजा छोड़नी

नहीं है निरंतर अभ्यास करते रहना है कुछ

समय बाद यह स्थितियां स्वयं ही शांत हो

जाएंगे तो इसीलिए कहा जाता है कि पूजा में

जब आप बैठ रहे हैं भक्ति कर रहे हैं ध्यान

साधना कर रहे हैं तो शरीर की मैल के

साथ-साथ आत्मा की मैल अपने मन मस्तिष्क की

मैल की सफाई करने के बाद ही आपको ध्यान

करना है तभी उच्च स्तर के आध्यात्मिक

अनुभव होंगे अन्यथा वैसी ही स्थिति हो

जाएगी कि जब किसी जगह की सफाई के लिए हम

बहुत फोर्स से पानी डालते हैं तो कंकड़

पत्थर भी कई बार नाली में चले जाते हैं और

पानी रुक जाता है रास्ता नाली का बंद हो

जाता है सफाई तो बहुत दूर की बात है तो

अपने मन मस्तिष्क के आत्मा के जितने भी

कंकड़ पत्थर हैं उनकी सफाई करने के बाद

ध्यान साधना में बैठेंगे तो बहुत जल्द

आपको वास्तविक फल की प्राप्ति होगी तीसरी

चीज जो ध्यान रखनी है कि अपनी भक्ति का

साधना का एक निश्चित समय आप निर्धारित कर

ले यदि किसी इच्छा पूर्ति के लिए संकल्प

लेकर आप कोई भी अनुष्ठान कर रहे हैं यानी

कि नित्य उस पूजा में उस साधना में समय का

अंतराल बहुत ज्यादा नहीं होना चाहिए ऐसा

नहीं हो कि आज तो आपने बजे उठकर बहुत

जोश में कर ली अपनी साधना भक्ति और दूसरे

दिन आपने फिर एक दो घंटे का गैप देकर फिर

किया ऐसा नहीं एक निश्चित समय फिक्स होना

चाहिए मिनट के अंतराल से कोई फर्क

नहीं पड़ता लेकिन ज्यादा समय का अंतराल ना

हो और इसके पीछे का कारण यह नहीं कि भगवान

आपसे नाराज हो जाएंगे लेकिन जिस प्रकार हर

भौतिक क्रिया का एक समय निश्चित होता है

आप भौतिक जीवन में देखि हमारे खाने का एक

निश्चित समय है हमारे सोने जागने का

निश्चित समय है सूर्योदय सूर्यास्त का एक

निश्चित समय है ये सब क्रियाएं एक निश्चित

समय पर चलती हैं कभी हमारी डेली की जो

दिनचर्या है उसमें थोड़ा बदलाव आ जाए तो

शरीर कष्ट झलता है हमें बहुत अनकंफर्ट बल

फील होता है कई लोगों का डाइजेशन सिस्टम

बिगड़ जाता है बस कुछ ऐसा ही है जब भौतिक

आवश्यकताओं की पूर्ति आपको भगवान से

करवानी है तो इन भौतिक मर्यादाओं का और

नियमों का ध्यान रखें और अगला बहुत

महत्त्वपूर्ण पॉइंट कि मंदिर में स्थापित

अपनी मूर्तियां जो देव मूर्तियां आप लोगों

की हैं उसे बार-बार नहीं बदले कई लोग हर

कुछ समय बाद अपनी मूर्ति बदल लेते हैं

क्योंकि उन्हें मंदिर में ज्यादा सुंदर

मूर्ति अपने देवी देवता की दिखाई पड़ती है

तो वह उसे खरीदकर घर ले आते हैं और पुरानी

मूर्ति हटाकर उसकी जगह पर उस नई मूर्ति को

स्थापित कर देते हैं हैं लेकिन ऐसा ना

करें जब तक बहुत आवश्यकता ना हो या इन केस

की मूर्ति खंडित हो गई है उसी अवस्था में

घर की मूर्तियों को बदले अथवा हर समय हर

त्यौहार में नई मूर्ति खरीद कर ना लाएं

क्योंकि जो मूर्तियां ऑलरेडी आपके घर के

मंदिर में स्थापित हैं वो जागृत होती हैं

वह प्राण प्रतिष्ठित मूर्तियां होती हैं

भले ही आपने विधिपूर्वक उनकी प्राण

प्रतिष्ठा नहीं की हो लेकिन जो आपके भाव

होते हैं नित्य आपका जो मंत्र जप आपकी

पूजा होती है उससे उत्पन्न एनर्जी से वह

जो मूर्तियां हैं वह जागृत होती हैं उनमें

शक्तियां होती हैं और आपके अंदर की जो भी

पॉजिटिव एनर्जी है आपके घर में फैली हुई

जो भी सकारात्मक ऊर्जा है पूरा संबंध इनका

उन मूर्तियों से होता है और अगर आप इन

मूर्तियों को घर से हटा देते हैं तो घर की

हर चीज पर घर की ऊर्जा पर इसका नकारात्मक

प्रभाव पड़ता है तो आवश्यकता होने पर ही

घर की मूर्तियों को आपको बदलना है अन्यथा

नहीं बदले तो आज की वीडियो में इतना ही

दोस्तों अगली वीडियो में बहुत जल्द मिलती

हूं तब तक के लिए अपना ध्यान रखें स्वस्थ

रहे खुश रहे मस्त रहे जय माता दी जय

बजरंग

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *