कैसे हुई माँ काली की उत्त्पत्ति |अद्भुत गाथा | - Kabrau Mogal Dham

कैसे हुई माँ काली की उत्त्पत्ति |अद्भुत गाथा |

कि मां काली जिनका घर शमशान है जीवन और

मृत्यु से परे जो समय से भी ऊपर है जिनके

बिना परम शक्तिशाली शिव त्रिलोकनाथ एक शव

के समान पूरी प्रकृति की शक्ति अपने अंदर

समेटे हुए और हृदय एक बच्चे जैसा कोमल

बुराई को खत्म करने वाली संघार की देवी और

प्रलय की अधिष्ठात्री देवी मां काली की

उत्पत्ति एक ऐसे समय में हुई कि अगर यह ना

होता तो असुरों ने तीनों लोकों में

संपूर्ण विनाश कर दिया होता और दोस्तों

इतनी कठिन परिस्थिति हो चुकी थी कि मां

काली के अलावा वहां देवताओं को कोई नहीं

बचा सकता था

हैं तो आज इस वीडियो में हम जानेंगे कि वह

क्या घटनाक्रम था और इसका समाधान कैसे हुआ

नमस्कार दोस्तों आप सभी पर मां का

आशीर्वाद और बजरंगबली की कृपा सदैव बनी

रहे तो आइए अब जानते हैं कि मां की

उत्पत्ति का क्या घटनाक्रम था जो बेहद

रोचक आप भावुक हो जाएंगे इसे डूबकर सुनिए

कि श्री मार्कंडेय पुराण में वर्णित

दुर्गा सप्तशती के अनुसार श्री काली देवी

की उत्पत्ति मां अंबे का के ललाट से हुई

है

है तो वह कथा इस प्रकार है कि बार देवताओं

और दानवों में भयंकर युद्ध हुआ जिसमें

शुंभ और निशुंभ इन दोनों अफसरों ने अपने

बाहुबल से देवराज इंद्र को युद्ध में

परास्त कर दिया और स्वर्ग पर अपना अधिकार

कर लिया दोस्तों असुर तो हमेशा से ही अपनी

दुष्टता से देवताओं को पीड़ित करने का

अवसर खुश थे तो जैसे ही रसूल ने स्वर्ग पर

अपना अधिकार कर लिया तो इन्होंने सभी

देवताओं को स्वर्ग से बाहर निष्काषित कर

दिया और उन्हें भयंकर कष्ट देने लगे सभी

देवतागण बहुत परेशान थी उन्हें कोई रास्ता

नजर नहीं आ रहा था कि कैसे बचा जाए तब सभी

देवताओं ने मां दुर्गा का आह्वान किया

क्योंकि मां दुर्गा का नाम ही उनकी आखिरी

क्षण थी इससे पूर्व भी जब महिषासुर नामक

राक्षस ने इंद्रपुरी पर अधिकार कर लिया था

तो देवताओं के आह्वान पर मां दुर्गा प्रकट

मीणा और अपनी प्रचंड पराक्रम से उन्हों ने

महिषासुर का वध कर देवताओं को उसके आतंक

से मुक्ति दिलाई थी और साथ ही यह वरदान भी

दिया था कि यदि भविष्य में जब कभी भी

देवताओं को मदद की

एकता होगी तो देवी अवश्य उनकी सहायता करें

तो मां दुर्गा के इस आश्वासन का ध्यान कर

सभी देवताओं ने मां का आह्वान किया और उसे

प्रार्थना करें कि वह उनको इस संकट से

बाहर निकालें और दोस्तों मां का हृदय तो

हमेशा ही अपने बच्चों के लिए करुणा और

ममता से भरा हुआ होता है जैसे ही वह अपने

बच्चों की करुण पुकार सुनती है तो वह

तुरंत प्रकट होती है मां से ज्यादा

पराक्रमी इस ब्रह्मांड में कोई नहीं वहीं

सर्वोच्च शक्ति हैं जिनके आगे कोई नहीं

टिक सकता तो देवताओं की करुण पुकार सुनकर

मानसून के आगे तुरंत प्रकट हो गई और

असुरों के द्वारा देवताओं को इस तरह

पीड़ित होता देखकर बहुत क्रोध में आ गई अब

मां दुर्गा और असुरों के बीच भयानक युद्ध

छिड़ गया और मां दुर्गा ने अपने पराक्रम

से शुंभ और निशुंभ के दूध चंड और मुंड का

संघार कर दिया था

कि जब सोमवार निशुंभ को क्षण भर मूड के

संघार की बात पता चली तो वे अत्यंत

क्रोधित हो गए दोस्तों आसुरी शक्तियां तो

हमेशा से ही विनाश का प्रतीक रही हैं

पुरुष मृगा ने क्रोध में आकर अपनी संपूर्ण

सूरी सेना को युद्ध स्थल में जाने का आदेश

दिया और उन्हें आदेश दिया कि युद्धस्थल

में त्राहि-त्राहि मचा दें तो

कि जब महादेव जी ने शुरू की विशाल सेना को

देखा तो उन्होंने सभी दुष्ट शक्तियों और

महामाया देवी से कहा कि तुम असुरों का

विनाश कर तब देवी भगवती के शरीर से अत्यंत

उग्र स्वरूप वाली मां चंडिका प्रकट हुई है

ओ मा चंडिका के स्वरूप में सभी दुष्ट

शक्तियां और महामाया की शक्तियां समाहित

मां चंडिका ने भगवान शंकर से कहा कि आप

मेरे दूध बनकर शुंभ और निशुंभ से जाकर

कहिए कि अगर तुम जीवित रहना चाहते हो तो

पाताल लोक में चले जाओ और स्वर्ग का राज्य

इंद्र को दे दो दोस्तों भगवती ने भगवान

शिव को दूत बनाकर भेजा था इसीलिए इनका नाम

शिवदूती भी प्रसिद्ध हुआ है

है तब भगवान शंकर ने शुरू को दीदी का यह

संदेश सुनाया और भगवान शंकर की इन बातों

को सुनकर असुर अत्यंत क्रोधित हो गई

असुरों का विशेष सेनापति रक्तबीज बड़ी रूप

से आ गया और तेरी से लड़ने लगा दो

है क्योंकि उसके अहंकार को चोट पहुंची थी

जिसे वह सहन नहीं कर पा रहा था तब देवी

चंडिका ने पूरे वेग से अपने वजूद से रक्त

बीच पर प्रहार किया लेकिन जितनी बार देवी

रक्तबीज पर वज्र से प्रहार करती तो जितनी

खून की बूंदें रक्तबीज के शरीर से गिरती

उतनी ही उसी के समान वाले नए रक्त बीच

पैदा हो जाते थे

और कितनों का ही श्रीदेवी ने अपने चक्र से

एक बार में ही काट डाला लेकिन जितनी बूंदे

जमीन पर गिरी पुल है उतने ही रक्त बीच

युद्ध स्थल में पैदा हो गए इस बार देवी

वैष्णव ने बड़े क्रोध से चक्र छोड़ा और कई

हजार अ के बीजों का सिर्फ एक ही बार में

काट कर गिरा दिया तो उससे गिरफ्त से

अनगिनत रक्त बीच और पैदा हो गई जिससे

संपूर्ण विश्व व्याप्त हो गया वहां रहने

खडसे कुमारी ने शक्ति से और माहेश्वरी ने

त्रिशूल से उन सबको मार डाला परंतु

महाशिवरात्रि से उत्पन्न रिक्तियों की

संख्या घटने के स्थान पर बढ़ती ही जा रही

थी युद्ध स्थल का दृश्य अत्यंत भयंकर हो

चुका था उन असंख्य रखी चीजों को देखकर

बलशाली से बलशाली देवता भी भयभीत हो गई

उन्हें लग रहा था कि उनका अंत अब निकट हैं

क्योंकि इतना भयंकर दृश्य से पहले

उन्होंने कभी नहीं देखा था चारों ओर रक्त

ही रक्त और रक्त से पैदा हो रहे रक्तबीज अ

कि देवतागण चारों ओर से घिर चुके थे और

असंख्य के बीच देवताओं को खत्म करने के

लिए उनकी ओर बढ़ते जा रहे थे

कि तीर्थों की घबराहट और रक्तबीज का खत्म

ना होना इन दोनों हाथों में मां चंडी को

बहुत हृदय कर दिया इतना क्रोधित की मां

चंडी की मौजूदगी एक क्रोध की ऊर्जा बनकर

रह गई थी और यह कुछ इस प्रकार का था कि उस

गिरोह ने खुद एक नया रूप ले लिया था उस

क्रोध के कारण देवी का मुख काला पड़ गया

और उनकी वहीं टेढ़ी हो गई उसी समय उनके

ललाट के मध्य भाग से काली देवी प्रकट हुई

रंग काला काल एक हवा में लहरा रहे थे और

में भयंकर हुंकार भर रही थी जिनकी वजह से

चारों दिशाएं थरथरा रही थी अ

में तापमान चंडिका ने मां काली से कहा कि

जब मैं रक्त बीच पर प्रहार करूंगी तो तुम

इसके रक्त को जमीन पर ना गिरने देना जैसे

ही मा चंडिका रख बीच पर प्रहार करती है

वैसे ही मां काली अपने रोद्र रूप में

प्रकट होकर हाथ में खबर लेकर रक्तबीज के

समस्त रक्त को उसमें समेटती रही और उस

रक्त का पालन करती रही तब मां काली ने रूप

में उन्मत्त होकर अपनी जिव्हा सारे

युद्धस्तर पर फैला दें और रक्तबीज के रक्त

की एक-एक बूंद का पान करने लगी थी

हैं और दोस्तों इस प्रकार रखे बीच-बीच तेज

हो गया जमीन पर गिर पड़ा और मृत्यु को

प्राप्त हुआ है

है तो दोस्तों इस प्रकार मां काली की

उत्पत्ति हुई और उनकी उत्पत्ति का

उद्देश्य बुराइयों और नकारात्मकता का

विनाश करना था मां काली की कुछ इस तरह से

उत्पत्ति हुई और वह समय इतना ज्यादा ऊर्जा

से भरा हुआ था कि मां काली आज भी हम सब के

बीच में मौजूद है और कलियुग में सबसे

ज्यादा जाग्रत दी और उनकी इस ऊर्जा का

अनुभव हर भक्त कर सकता है बस अपने सवालों

को खत्म करके बिना किसी संदेह है कि बिना

किसी गलती के कैलेंडर देखें कि दिन की

पूजा समाप्त हो गई है या दिन की साधना

समाप्त हो गई मां को याद करें और मां को

पुकारें अ

है तो दोस्तों आज की वीडियो यही समाप्त

होती है अगली वीडियो में मैं बहुत जल्द ही

मिलती हूं तब तक के लिए आप अपना ध्यान

रखें स्वस्थ रहिए खुश रहिए मस्त रहिए जय

माता दी जय बजरंगबली की

लुट

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