काली माता की अमर कहानी | महाकाली गाथा - Kabrau Mogal Dham

काली माता की अमर कहानी | महाकाली गाथा

आज

दिनांक को

कि अ

अजय को

[प्रशंसा]

हां

बोलिए महाकाली मैया गीत

में भक्तों आज मैं आपको काली माता की कथा

का एक बहुत ही विलक्षण अंत सुनाने जा रहा

है जब रणभूमि में शुंभ-निशुंभ ने हरिप्रेम

मचा रखी थी तो माता काली ने कैसे दोनों

राक्षसों का वध किया था और रक्तबीज जैसे

महाबलशाली जैसे का अंत किया था तो आइए

सुनते हैं यह पावन संगीतमय कथा

[संगीत]

व्रत वजूहात तुम्हें संघार दिखाता हूं मैं

संघार दिखाता हूं मैं मां काली का प्ले

रूप प्रहार दिखाता हूं मैं कथा सुनाता हूं

दोस्त महा पापी व्यक्तियों के हार दिखाता

हूं भक्तों हार दिखाता हूं पर मां कालिका

कर लें रुक प्रहार दिखाता हूं मैं कथा

सुनाता हूं मैं

[संगीत]

स्पेसिफिक

[संगीत]

लाखों वर्ष पुरानी बात है तुम्हें सुनाता

हुं

रक्तबीज के बोध का में वृत्तांत बताता हूं

रक्तबीज का जब देवा पर बढ़ गया

चाहात चाहे मच गई स्वर्ग में मच गया हुआ

था

रक्तबीज भ्रम न जूते मिला था यह वरदान

रक्तदाता बन जाएगा रक्तबीज बलवान

रक्तबीज का रक्त किरण

मजुमदार रक्तबीज

श्रवण जाएंगे गण मे बाह बाह हां यह कहते

मार गया ब्रांचेस मैं बतलाता हूं भक्तों

मैं बतलाता हूं मैं मां कालिका प्ले रूपरा

और दिखाता हूं मैं कथा सुनाता हूं

[संगीत]

[संगीत]

प्राचीन काल की बात है जब रक्त बेचने

स्वर्ग पर धारियां आतंक मचा हुआ था देवता

पुष्प के बेसिक्स आफ थे स्वर्ग लोक में ही

हुई थी सारा से लोग रक्तबीज से भयभीत

सारी चिंता में डूबे हुए थे कि इस राक्षस

से हमें कौन बचा सकता है सारे देश मिलकर

के मां दुर्गा की आराधना करते हैं और

प्राणों की रक्षा के लिए या छापते हैं

[प्रशंसा]

अरे श्राद्ध दुर्गा मां की देव सभी मिल

धर्म संकट में एहसान हमारे रक्षक रहा गए

रक्तबीज के वक्त किरण हम सब भटक रहे

ना धरती मां स्वर्ग हमारा अधर में लटक रहे

दया करो हे करुणा

त्यौहार मां रक्त कि जिससे हम बचा लो

थिंग्स बाय चाणोद प्रदेश के अधर मे दानव

मिलकर हमें रहे ललकार आकर के मार्फत बीच

का करो तुम्हें संघाराम क्या कहती है मधुर

गांव मैं तुम्हें बताता हूं भक्तों

तुम्हें बताता हूं प्रमाण तालिका प्ले रुक

प्रहार दिखाता हूं मैं कथा सुनाता हूं

ले

मीडियम

[संगीत]

देवताओं की करुण पुकार सुनकर माता दुर्गा

का हृदय से अमित हो जाता है दोस्तों मां

देवताओं को वचन देती है आप सब है रखिए और

चिंतामुक्त हो जाएंगे उस रक्त बीच का अंत

मेरे हाथों से चीख रही होने वाला है श्री

दुर्गा जी के मुखारविंद से ऐसे वचन सुनकर

देवताओं को बहुत राहत मिलती है

इस तरह के मां वचन सभी कहां हो गई अंतर

धाम तुझे हुए निश्चित बातें करते हैं

प्रश्न उधर देखिए रक्तबीज का लगा हुआ था

क्रॉच आफ लगता है सारे ही लड़ने मरने को

तैयार हुआ था

रक्तबीज को ढूंढ रहे हैं दुर्गा महारानी

रक्तबीज का वध करने को मन में है अच्छी तो

प्रोस्टेट के कारण दुर्गा माता चेहरा हो

गया अलार्म ढूंढूं शेयर रक्तबीज मुद्दा

बनकर उसका पाम इसके आगे जो होता है तुम

समझाता हूं भक्तों तुम समझा लूं मैं मां

काली का प्रलय रूप प्रार्थी दिखाता हूं

मैं कथा सुनाता हूं कि

[संगीत]

[संगीत]

के

कुछ

स्पेसिफिक

[संगीत]

दुर्गा माता हिमालय की वादियों में

दैत्यराज रक्त बीच को ढूंढ रही है इसी

दौरान रक्त बीच के सिपाही दैत्यों की नजर

माता के ऊपर पड़ जाती है वह माता की

सुंदरता देखकर मंत्रमुग्ध हो जाते हैं

तुरंत ही रक्तबीज के पास आकर उस नारी की

सुंदरता का वर्णन करने लगते हैं जो स्वयं

माता दुर्गा है रक्त भी आदेश देता है उस

सुंदरी को हमारे सामने हाजिर किया जाए

[संगीत]

बीच-बीच में देख तुरंत ही वहां पर जाते

हैं

रक्तबीज के मन की भावना चाणक्य सुनाते हैं

बन जाओ उनकी पटरानी के महारानी तुम

प्राप्त करोगे सुनो सुंदर रिबन पटरानी तू

सुन के बाद विवादित इमारत के नेतृत्व हो

गए लाल गरज के बोलो मादक द्रव्यों से मैं

हूं उसकी काम

जन्मे युद्ध करें अब हम से जा करके बोलो

करे सामना में ड्रॉ में आ करके बोलो

लौट गए बूंद दत्त बताता हूं भक्तों सच

बताता हूं मैं मां कालिका प्ले रूप प्राण

और दिखाता हूं मैं कथा सुनाता हूं मैं

शुभेंदु परिणामों का यह सब मेज़ पर दूध

[संगीत]

स्पेसिफिक

रक्त पीछे ग्य रक्तबीज के पास आकर सुंदरी

द्वारा दी गई चुनौती जो कि त्यों रक्तबीज

को बताते हैं जिसे सुनकर व्रत भी आग बबूला

हो जाता है और अपने सभी महारथियों को आदेश

देता है कि युद्ध की तैयारी करो हम ने

प्रतिज्ञा की है कि उस सुंदरी को अपनी

पटरानी बना कर ही रहेंगे और अपनी विशाल

सेना के साथ रक्त भी मां से युद्ध करने

निकल पड़ता

[प्रशंसा]

तिलक ख्याल दलबल के संग मुड़कर चला आकाश

पवन वेग घर पहुंच गया वो मां दुर्गा के

पास

रक्तबीज मा जून झालकु रहा ललकार तेरी

चुनौती और सुंदर हम तो है स्वीकार

आज पराजित कर लूंगा तुझको करूंगा तुझसे

प्यार

यह मेरे मन की इच्छा है यह मेरी चांद

कुंठ और हृदयमोहिनी अपने शौंक उठान सिन्हा

तने रक्त विजय आगे तेरे घणा दो ही क्षण

में तेरा मन अभिमान उठता हूं मैं अभिमान

उठता हूं मैं मां कालिका प्ले रुक प्राण

और दिखाता हूं मैं कथा सुनाता हूं मैं

प्रॉब्लम

सब्जेक्ट तिल टो

[संगीत]

जग जननी महामाया

रक्तबीज के ऊपर टूट पड़ती है भक्तों को

महाप्रलयंकारी घमासान युद्ध छिड़ जाता है

रक्त बीच की सेना कट के धरती पर गिरती जा

रही थी किंतु महामाई है राजनीति के रक्त

बेचकर रक्त जहां गिरता था वही वही से एक

नया रक्तबीज उत्पन्न होता जाता था जो रक्त

बीच के समान घी बलवान हो तथा माता ने अपनी

शक्तियों को आदेश दिया और उनके शरीर से ही

मां महाकाली प्रकट हुई है

कि

नेत्र लाल विकराल पतन प्रबंधन महाकाली

कायल कर लें हार्मोन श्वेत माता काली का

यह ठंडक पर यह हाथ मुझे कह रही माता जो कि

देखता रूप का लिक्विड वाटर के मर जाता

सिंह गर्जना करें का मुद्दा

हात

शुक्रहीनता बोतल काली मार

रक्तपित्त निबंध

प्रेरक

झाल

शुक्राचार्य छात्रों ने बना दिया शमशाम

उठाता रखे बीच-बीच में सख्त बताता हूं

भक्तों सच बताता हूं मां काली प्राण

और दिखाता हूं मैं कथा सुनाता हूं

लेकिन

प्रॉब्लम है

[संगीत]

स्पेसिफिक

महाप्रलयंकारी संग्राम छिड़ जाता है फिर

भूमि व्रत की चील बन जाती है मस्सों

दुर्गा मां दुर्गा बनकर असुरों को काट रही

थी चंडी माता और उनकी चौसठ योगिनियां उन

असुरों का रक्त पीती जाती है ऐसे

महासंग्राम को देखकर रक्तबीज पाप करता है

माता काली घंटे के प्रहार से उसकी गर्दन

उड़ा देती है और उसका सारा रक्त थप्पड़

में भर कर दी जाती है भक्तों बाकी

योगिनियां रक्त की बूंदों को धरती पर

गिरने से पहले ही पी जाती हैं इस प्रकार

महापापी रक्तबीज का अंत हो जाता है बच्चों

को

धवन महाकाल धन लाभ कुमार देहात प्री

लॉक ओठ जैसा संघार किया

प्रॉफिट अग्नि में जल रहे गार्लिक माह रही

अवतार तीन लोक में मच जाता है भारी हाल

धार

तरह दुपता चाहत कि सुनाते हैं

क्रोध शांत करने वाली

सब्जियां आते हैं

लेट गए काली फिर हम छिप शंकर भगवान शंकर

की छाती पे माता पड़ जाता है

पापा को जाती है शांत मसाले सच बताता हूं

भक्तों सच बताता हूं

महाकाली का प्ले रुक प्राण और दिखाता हूं

मैं कथा सुनाता हूं

पर

[संगीत]

[संगीत]

क्रोध में थर-थर कांपती हुई काली माता

उक्त और भरते हुए चारों दिशाओं में डोल

रही है भगवान भोलेनाथ उनकी राह में लेट

जाते हैं माता महाकाली जी का पांव शंकर

भगवान की इच्छा थी पर पड़ जाता है भक्तों

को और माता तो बड़ा ही पछतावा होता है कि

भगवान भोलेनाथ की इच्छा थी पर मैंने पांव

रख दिया है के प्रायश्चित के स्वरूप माता

काली की जुबा दांतो तले आ जाती है भक्तों

को कथा लिखने में जो भी त्रुटि हुई हो मैं

सुखदेव आप सभी से क्षमा मांग रहा हूं एक

बार फिर बोलिए मईया महाकाली के

वॉइस मेल धब्बा सा प्रॉब्लम है

[संगीत]

मेरे चैनल

धुमे

झालकु

भेज सकते हैं

[संगीत]

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *