काली माँ का संदेश || - Kabrau Mogal Dham

काली माँ का संदेश ||

मेरे मंत्र जाप से बेशक मुझे प्रसन्न किया

जा सकता है मेरे दर्शन पाए जा सकते हैं

लेकिन मेरे ही मंत्रों को सिद्ध करके मेरे

बच्चों को परेशान करने का जुल्म जो भी

करेगा

ना उसका विनाश मेरे हाथों द्वारा तय है

इसलिए तुम घबराओ मत मेरे नाम पर तुम्ह जो

भी डरा रहा है तुम उसे माता द बड़ी

विनम्रता से हाथ जोड़कर बोलो और आगे निकल

जाओ तुम मेरे पुत्र मेरी पुत्री हो जो इस

सृष्टि की स्वामिनी है उसकी जहां से सबका

जन्म हुआ है और जहां अंत में सबको आना है

तुम उसके बच्चे हो तुम्हें ना घबराना है

ना डरना

है और साथ ही साथ जो तुम जैसे अन्य मासूम

मेरे

भक्त जो तुम्हारी ही तरह कभी कभी डर जाते

हैं ना उन्हें भी इस डर से उभारने में तुम

उनकी सहायता करो उनका मार्ग दर्शन करो

उन्हें सच्चाई से अवगत

कराओ तुम्हें मौत का खौफ नहीं होना चाहिए

बिल्कुल नहीं होना

चाहिए ऐसे कितने मौके ऐसी कितनी

परिस्थितियां आई थी जब शायद तुम्हें ऐसा

लगा था कि अब तो तुम्हारा अंत तय है पर

क्या वैसा हुआ नहीं ना इसलिए अब मौत से मत

ड मौत पर विजय पा चुके हो

तुम मैं खासकर अपने उन बच्चों को यह कहना

चाहती हूं कि जो अपने सही जीवन साथी के

तलाश में है तुम इधर उधर ढूंढने की

बजाय अपने पास

देखो वो कहीं और नहीं तुम्हारे निकट ही है

जिसे तुम दूर कहीं खोज रहे हो अगर तुम्हें

मेरे माध्यम से जवाब सुनना

है तो ध्यान करो मैं तुम्हें ध्यान में

आकर दर्शा जाऊंगी और थोड़ा सब्र रखना सही

समय आने पर विवाह भी अच्छे से संपूर्ण

होगा मेरे सारे बच्चों को धन प्राप्ति के

लिए इधर उधर ऐसा वैसा कोई उपाय करने की

बजाय मेरे ही स्वरूप मां लक्ष्मी और

नारायण की आराधना करते

हुए जो धन अभी मिला है उसका सम्मान करते

हुए अपने उस धन में से थोड़ा सा

हिस्सा दान पुण्य व भंडारे के नाम पर

निकालकर हर महीने रखना

चाहिए ज्यों ही तुम्हारा धन सही सही मार्ग

पर निवेश होना शुरू हो जाएगा ना

तुम्हारे पास कब अपार धन हो जाएगा इसका

तुम्हें अंदाजा भी नहीं और जो मेरे बच्चे

हैं वो कभी अपने आप को गरीब कह ही नहीं

सकते कहना ही नहीं चाहिए गरीब कहना पाप है

तुम्हारे पास जगत जननी का साथ है तो तुम

गरीब कैसे हुए मैं नहीं

मानती क्या इस समाज में तुम्हें कोई चीज

की कमी महसूस होती है तुम्हारी प्रतिष्ठा

पर कभी बात नहीं आती अब अंदर से जो भी

स्थिति

वह मेरे रहते सुधरी हुई है और जरूरत पड़ने

पर तुम्हारे मान सम्मान की रक्षा की मैं

कुछ भी लाकर तुम्हारे पास रख दूंगी तुमने

ही तो अपने जीवन की नैया को मेरे हाथों पर

सौपा है ना तो अपने आपको को गरीब लाचार ना

समझो ना कहो यह सोचना यह कहना भी पाप है

क्योंकि तुम मेरे पुत्र पुत्री

हो खुश रहो हमेशा खुश रहो और सुनो तुम्ह

आजादी है जैसे चाहो जो चाहो वैसे पहनो वो

पहनो वैसे जियो लेकिन जो भी करना उसका एक

तरीका होता है मान मर्यादा में रहते हुए

तुम्हे जो पहनकर जैसे रहना है तुम वैसे

रहो अपने लिए खुश रहने के लिए तुम्हे जो

कुछ भी करना पड़े ना तुम वो करो मैं

तुम्हारे साथ

हूं और तुमने मुझसे कहा था लेकिन मैं

तुम्हें स्वप्न दर्शन नहीं दे पा

उसके पीछे भी कारण है सही दिन मैं आऊंगी

तुम्हारे

पास पाछ दिनों के लिए इंतजार करो फिर

सामने सामने हमारी मुलाकात

होगी

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