काली माँ का संदेश || - Kabrau Mogal Dham

काली माँ का संदेश ||

मैं ही अन्न पूर्णा ह जो इस पूरे सृष्टि

का पालन पोषण करती है यह अन्न पूर्णा देवी

यह काली यह महा सरस्वती यह वैष्णव महारानी

जब तुमसे प्रसन्न है तो क्यों खुद को कष्ट

पहुंचा रहे हो क्यों तुम्ह कड़े कड़े

उपवास करने कभी जल का त्याग कभी भोजन का

त्याग क्यों करना है ऐसा कुछ मत

करो प्रसन्न करने की बात करते हो जहा तुम

वहा तुम मेरे पुत्र पुत्री मेरे बच्चे

मुझे प्रसन्न क्या करेंगे वो तो मेरे दिल

के टुकड़े हैं मेरे बच्चों को जरूरत यह है

कि मुझ पर सिर्फ विश्वास रखना है एकदम धड़

विश्वास जो कभी ना

टूटे मेरे भजन गाओ मेरी चालीसा पढ़ो मेरे

मंत्र जाप करो मेरे समक्ष बैठकर बिना किसी

तंत्र मंत्र क्रिया के केवल शांति से

मुझसे बात करो अपनी बातें मेरे से रखो और

जो मैं कहूं वो सुनो

बस यह करो अपने शरीर को तकलीफ मत पहुंचाओ

तड़पाने का मेरा ना कभी उद्देश्य रहा है

और ना कभी रहेगा तुम्हें अपने शरीर का

हिफाजत करना चाहिए तुम्हें पता है

तुम्हारे उस शरीर को रचना करने के लिए

मैंने सारे कार्य को छोड़कर केवल तुम पर

ध्यान अग्रसर करके तुम्हे बनाया है तो यह

मेरी देन है मेरी जो भी देन है उसकी

तुम्हें हिफाजत करनी चाहिए ना कि तकलीफ

पहुंचाना चाहिए

और मैं बहुत प्रसन्न हूं तुमसे मैं

तुम्हारे साथ लगातार चल रही हूं अब बात

ऐसी है ना कि अगर मेरी आट मेरी घुंगरू या

मेरी कोई ध्वनि तुम्ह सुनाई दे देगी ना तो

तुम अभी घबरा जाओगे मेरी ऊर्जा से अभी

तुम्हारी ऊर्जा उस तरह से जुड़कर साथ में

चल नहीं पाएगी तुम अभी नादान भोले

हो और उतना साहस नहीं है अभी तुम में

इसलिए मैं तुम्हें साक्षात तरीके से नहीं

दिखा

लेकिन लगातार तुम्हारे कदम कदम पर मैं चल

रही होती हूं जहां मेरे कदम बढ़ते हैं वही

तुम जाते हो इसलिए आराम से रहो बेफिक्र

रहो तुम्हारे परिवार या तुम्हारे पर कोई

आफत नहीं आएगी मैं रक्षा कर रही

हूं और वैसे भी अभी तो मुझे ना तुमसे बहुत

सी बातें करनी है बहुत कुछ बताना है जीवन

को लेकर बहुत कुछ सिखाना है तु

जिस मार्ग पर मुझे ले जाना है तुम्ह वहा

मैं खुद हाथ पकड़ कर ले जाऊंगी तुमने वैसे

भी मेरे शरण में आने में थोड़ी देरी कर दी

कई समय से मुझे इंतजार था कब तुम आओगे अब

जाकर जब तुम आ गए सही जगह पर अपना ध्यान

मेरे चरणों में लगाए रखना और यह मानना कि

यह मा ना तुमसे बहुत प्रेम करती है और यह

मां का हृदय है ये कोमल है पत्थर हृदय

नहीं है तुम्हारी रक्षा होगी तुम जो रात

को रोते हो ना मैं परेशान होती हूं उससे

रोया मत करो तुम्हारा रोना तुम्हारे

शत्रुओं पर और भारी पड़ता

है तुम रोया मत करो सब ठीक हो जाएगा सब

ठीक होना शुरू हो गया

है बहुत निकटतम भविष्य में तुम्हें

कन्याओं को भोजन कराने का अवसर मिलेगा उस

अवसर को गवाना मत खुश

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