काली माँ का संदेश || - Kabrau Mogal Dham

काली माँ का संदेश ||

जो जगत की माता है वो मैं तुम्हारी

माता मुझ में प्रेम है करुणा है ममता है

तो तुम्हें ऐसा लग भी कैसे

गया कि तुम बस पूजा किए जा रहे हो और मैं

सुन नहीं रही ऐसी बात नहीं है अगर मैं

सुनती नहीं ना तो तुम्हारा दीपक इतनी देर

चलता नहीं अगर मैं सुनती

नहीं तो फिर तुम मेरे भजन नहीं कर पाते

मैं तुम्हें सुन रही हूं तुम्हें बुला रही

हूं तुमसे प्रेम कर रही हूं तुम्हारे

संघर्ष के इस दौर में तुम्हारा साथ दे रही

हू और तुम्हारे लिए अच्छे रास्ते निकाल

रही हू जहां से दोबारा पीछे मुड़कर

तुम्हें कभी देखना नहीं

पड़ेगा अब जाकर जो सद्बुद्धि तुम्हें

मिलेगी

ना जो अब तुम्हे मिलेगा वो पहले कभी ना

मिला

था हमेशा यह याद रखना कि मुझ तक पहुंचना

मुश्किल हो ही नहीं सकता मुझसे ही सबकी

उत्पत्ति हुई है इसलिए सब मेरे अंश है

मेरे बच्चों को कभी य नहीं सोचना चाहिए कि

मां तक पहुंचने का तरीका क्या

है और एक बात

सुनो जो भी तुम्हारे दुश्मन है ना जो

तुम्हें तंग कर

रहे उनसे तुम्हारी रक्षा करने के लिए ही

तो मैंने काली का रूप धारण किया है और और

इसलिए मैं क्रोधित हो जाती हूं मेरे क्रोध

का मतलब तुमसे क्रोधित नहीं होना है वो उन

लोगों से क्रोधित होना है जो पापी

है और उन लोगों का दुष्टों का संहार करने

के लिए ही मैंने यह रूप धरा इसलिए कभी

मेरे इस कालका रूप से डरो

म मैं तो मा हूं तुम्हारी लेकिन एक बात

हमेशा याद

रखो कि तुम जब भी मेरे पास आओगे ना जो भी

समस्या लेकर आओगे बस मेरे पास आने तक की

देरी है एक बार आओगे तो दोबारा आशीर्वाद

लेकर जाओगे वो समस्या मेरे चरणों में रह

जाएगी और तुम उससे मुक्त होकर

जाओगे इसलिए मेरे मंदिर आया

करो कभी मेरे

दरबार जिस दरबार में आना चाहो वहां तुम्हे

तो मैं बुला ही रही हूं सारे दरबार के

सारे द्वार तुम्हारे लिए खुले हैं मैं कब

से आशा लिए देख रही हूं कि तुम मेरे दर्शन

को आओगे पर तुम हो कि हर बार इधर उधर या

तो कभी घूमने ही चले जाते हो पर कभी कभी

तुम्हे मां का भी ख्याल आना चाहिए और यह

हमेशा स्मरण

रखो कि चाहे कुछ भी हो जाए कुछ भी इधर का

उधर हो जाए पर मैं तुम्हारे साथ ही

तुम्हारे साथ हूं और तुम्हारे साथ

रहूंगी मैं यह मानती हूं कि पूजा पाठ करते

हो और फिर भी कष्ट झेल र

लेकिन अब तो उन कष्टों का अंत होने का समय

आ गया है इसलिए अंत थोड़ा कठिन है क्योंकि

बदलाव हमेशा थोड़ा कठिन होता है पर जो बदल

कर आएगा उसम तुम्हारे हिस्से में खुशिया

ही खुशिया लिखी हुई है तुम मेहनत नहीं कर

पा रहे हो तुम कर पाओगे मैं शक्ति देने के

लिए ही तो तुम्हे बुला रही हूं तुम आओ एक

बार मेरे दरबार और फिर हर बार आओगे खुश

रहो

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