काली माँ का संदेश // आपकी दुआओं की शक्ति का असर हो रहा है जिससे उन सभी का दिमाग ब्लास्ट हो गया है - Kabrau Mogal Dham

काली माँ का संदेश // आपकी दुआओं की शक्ति का असर हो रहा है जिससे उन सभी का दिमाग ब्लास्ट हो गया है

जय मां भगवती आप सभी पर मां शल पुत्री की

कृपा सदा बनी रहे मां भगवती के प्रथम

स्वरूप मां शल पुत्री की पूजा के साथ ही

नवरात्रि वत प्रारंभ हो जाते हैं आज के इस

वीडियो में आप जानेंगे मां शल पुत्री की

पूजा कैसे की जाती है कौन भो मां अर्पित

है मां प्रि र कौन सा है मां शैलपुत्री की

पूजा विधि के साथ ही आज आप सुनेंगे मां

दुर्गा के नाम भी जो भी भक्त सच्चे मन

से नवरात्रि के दिनों में मां दुर्गा के

इन नामों का जाप करता है उनकी सारी

मनोकामनाएं मां दुर्गा की कृपा से

पूर्ण हो जाती हैं मां के इस ूप की सवारी

बैल है और उनके दाएं हाथ में त्रिशूल और

बाएं हाथ में कमल का पुष्प शोभायमान रहता

है मां शैलपुत्री की पूजा करने से कुंवारी

कन्याओं को मनचाहे पति की प्राप्ति होती

है मान्यता है कि पूर्व जन्म में

शैलपुत्री मां का नाम सती था देवी सती के

पिता दक्ष प्रजापति ने यज्ञ में भगवान शिव

का अपमान किया था जिससे नाराज होकर देवी

सती ने खुद को यज्ञ की अग्नि में भस्म कर

लिया था और उसके बाद फिर अगले जन्म में

देवी सती ने पर्वतराज हिमालय के घर पर

कन्या के रूप में जन्म लिया तभी से

मां दुर्गा शल पुत्री कहलाई कहते हैं कि

मां दुर्गा के इस रूप की पूजा करने से

वैवाहिक जीवन में खुशहाली पड़ती है मां शल

पुत्री की पूजा करने के लिए आपको सफेद

वस्त्र धारण करने चाहिए क्योंकि मां का

प्रिय रंग सफेद है वैसे आज के दिन आप मां

शैलपुत्री को लाल या गुलाबी रंग के पुष्प

भी अर्पित कर सकते हैं क्योंकि सभी

नवदुर्गा को लाल रंग अति प्रिय होता है

पूजा करने के लिए

सबसे पहले मंदिर की साफ सफाई करके मंदिर

में गंगाजल छिड़क करर अलग से एक चौकी की

स्थापना करके आपको उसके ऊपर लाल या सफेद

रंग का वस्त्र

बिछाना चाहिए फिर भगवान गणेश जी की मूर्ति

को सबसे पहले और उसके बाद मां दुर्गा की

प्रतिमा या तस्वीर की स्थापना करनी चाहिए

ध्यान रखें कि भगवान गणेश या फिर माता

दुर्गा की प्रतिमाओं को विराजित करने के

लिए आप उनके नीचे आसन जरूर दें आप पुष्प

का या फिर अक्षत का आसन लगा सकते हैं अब

सबसे पहले प्रथम पूजनीय भगवान गणेश जी को

स्नान कराकर या तस्वीर है तो गंगाजल का

छींटा लगाकर उन्हें वस्त्र जने अर्पित

करें

फिर उन्हें तिलक लगाएं पुष्प अर्पित करें

फिर मां दुर्गा को स्नान कराएं तस्वीर है

तो गंगाजल का छींटा अर्पित

करें फिर मां को वस्त्र अर्पित करें लहंगा

चुनरी अर्पित करें उहे तिलक लगाएं

श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें घी का एक

दीपक जलाए यदि आप कल कलश की स्थापना कर

रहे हैं तो कलश की स्थापना भी इस दिन करनी

चाहिए अखंड ज्योति यदि आप जलाना चाहते हैं

तो कितने दिन तक आप अखंड ज्योत जलाना

चाहते हैं इसका भी संकल्प आपको लेना चाहिए

शैलपुत्री माता की पूजा में आपको ज्यादा

समय इसलिए लगता है क्योंकि यह पहले दिन की

पूजा होती है और आपको बहुत सारे नियमों का

पालन इस दिन करना होता है कुछ बातें ऐसी

हैं जिनका विशेष रूप से ध्यान आज

के दिन रखना होता है जो लोग नवरात्रि के

पूरे उपवास रखना चाहते हैं वह इन उपवास को

किस प्रकार से रखना चाहते हैं जहार या

फलाहार ग्रहण करके या एक समय भोजन करके

क्योंकि जिनकी सामर्थ्य पूरे दिन उपवास

करने की नहीं है है वे रात को शाम की पूजा

करने के बाद एक समय शुद्ध सात्विक भोजन

ग्रहण कर सकते हैं बाकी श्रद्धालु अपनी

अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार इन व्रतों

को पूरी तरह से फलहार ग्रहण करके भी कर

सकते हैं फलहार आपको किस प्रकार का लेना

है कुछ लोग सेधा नमक का सेवन भी इन दिनों

करते हैं कुछ लोग केवल मीठा फलाहार

ही करते हैं तो जैसे भी नियमों का पालन आप

करना चाहते हो उसका संकल्प आप जरूर ले

अखंड ज्योत यदि आप नहीं जलाना चाहते हैं

पूरे नौ दिन तक और केवल घंटे के लिए

जलाना चाहते हो तो आप इस बात का भी संकल्प

ले सकते हैं संकल्प लेना इसलिए जरूरी होता

है कि जब संकल्प लेकर कोई पूजा की जाती है

तो आपकी कोई अभीष्ट मनोकामना है तो उसकी

पूर्ति में बहुत आसानी हो जाती है ऐसी

मनोकामना बहुत जल्दी पूरी हो जाती है जो

लोग किसी कारण से कलश की स्थापना नहीं कर

सकते हैं

वह बिना कलश स्थापना के भी नव दुर्ग बिका

का ध्यान करते हुए

ही सामग्री अर्पित करें मंत्रों का जाप

करें श्री दुर्गा सस्ती का पाठ करें और

फिर व्रत की कथा पढ़े और सुने सबसे अंत

में श्री दुर्गा चाली का पाठ करें और आरती

करके फिर मां को लौंग पान सुपारी इलायची

का भोग जरूर लगाएं माशल पुत्री को आज के

दिन सफेद रंग की वस्तुओं का भोग लगाना शुभ

रहता है जैसे कि आप बतासे या शक्कर का भोग

भी लगा सकते हैं इसके अलावा मौसमी फलों का

भी भोग माता को आप लगा सकते हैं भोग लगाने

के बाद सबसे अंत में जो भी भोग होता है

उसे प्रसाद रूप में परिवार के सभी सदस्यों

में जरूर बांटना चाहिए

और हाथ जोड़कर पूजा पाठ में हुई गलती के

लिए क्षमा याचना भी सच्चे मन से करनी

चाहिए अब जाने मां शैलपुत्री के पूजन

मंत्र और आरती के बारे में मां शैलपुत्री

की पूजा का मंत्र ओम देवी शैल पुत्रे नमः

प्रार्थना वंदे इच्छित लाभ च ्र कृत शेख

राम वृष रा शूल धराम शैल पुत्र यशस्विनी

स्तुति मंत्र वह देवी जो सभी प्राणियों की

स्वामी है पुत्री के रूप में स्थापित हुई

नमस्तस्ये नाम उ माय नमः श्रीय नमः

भरत नमः भद्र नमः सर्व नमः हे विजया नमः

जया नमः वन नमः उ सर्व कथ्य नमः उ गौर

नमः उ बरहा नमः कमल प्रियाए नमः सरस्वती

नमः कमला नमः मातंगे नमः अपरा नमः अज नमः

शकम भर नमः ओम शिवाय नमः यन नमः कुंडल नमः

वैष्णव नमः क्रियाए नमः इंद्रिय नमः

मधुमति नमः गिरिजा नमः शुभ गया नमः अंबिका

नमः तारायण महा पद्मावत नमः हंसाय नमः उ

पद्मनाभ सहोदर नमः अपर्णा नमः ललिता य नमः

धात्री नमः कुमारा नमः शिख वहिनी नमः

श्याम भव्य नमः सुमुख नमः मैत्र नमः

त्रिनेत्र नमः ओम विश्वरूप नमः आर्य नमः

राणा नमः हिकार नमः क्रोध नमः

सुदन

नम

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