#काली चालीसा// मां दुर्गा की दूसरा रूप है महाकाली तो आई सुनते हैं काली चालीसा ????? - Kabrau Mogal Dham

#काली चालीसा// मां दुर्गा की दूसरा रूप है महाकाली तो आई सुनते हैं काली चालीसा ?????

मेरे प्यारे भाइयों बहनों साथ ही साथ

प्यारे भक्तों को भी मेरी तरफ से कोटि

कोटि प्रणाम तो आज का वीडियो है काली

चालीसा के ऊपर वीडियो बनाने वाली है तो आप

लोग सुनते जाएगा यदि कुछ भूल हो गया तो

हमें कमेंट भी कर सकते हैं तो आज काली

चालीसा की पात करने वाले है तो आप लोग

सुनते

जाएगा तो शुरू करते हैं ओम जयंती मंगला

काली भद्रा काली कपालिनी दुर्गा श्यामा

शिवा धात्री स्वाहा स्वाधा नमोस्तुते तो

आइए शुरू करते हैं काली चालीसा जय काली

कालीमाला हरना महिमा अगम अपार महिष्य

मर्दिनी कालिका देह

अभार रि मत मन मितावली मु माल गल सोहत

प्यारी अस्त भुजी सुखदायक माता दुत दलन जग

में बख्या फल विशाल मुकत छब छाजे करम शीष

शत्रु का साजे दूजे हाथ लिए मधु प्याला

हाथ तीसरी सोहत भाला छठ खपर खरगर पाछ छठ ु

सतु बल जासे सतम कदम असमत प्यारी शोभा

अद्भुत मात तुम्हारी अष्टम कर भक्तन वर

दाता जगन

जगत मन हरण रूप ये माता भक्तन में अनुर

भवानी निशधिनी रते ऋषि मुनि

ज्ञानी महाशक्ति अति प्रबल पुनीता तू ही

काली तू ही सीता पति रिनी हे जग पालक

कल्याण पापी कुल घाल शेष सुरेश ना पावत

पारा गौरी रूप धार एक बारा तुम समान दाता

नहीं दूजा विधिवत करे भक्त न

पूजा रूप भयंकर जब तुम धारा दुत दलन

किन्हे सहारा नाम अनेक मत तुम्हारे भक्त

जनों के संकट तारे कली के कष्ट कलेसन हरनी

भाबा भाई मोचन मंगल करनी महिमा अगम वेद यश

नारद सारद पर न पावे भू पर भार भार जब

भारी तब तब तुम प्रकट मतारी आदि अनादि अभय

वर दाता विष विदित भ संक राता कुसुम नाम

तुम्हारो लीहा उसको सदा अभ व दिहा ध्यान

धार शेत सुरेशा काल रूप लखी तुमरो

भेसा कलवा भैरव संग तुम्हारे अर हित रूप

भयानक धारी सेवक लंगूर रहत अघोरी चौ सद

योगन आज्ञाकारी रेता में रहित आई दशक अंधर

की सेना न साई खेला रान का खेल निराला भरा

मास मज्जा से प्याला रुद्र रूप लखी दाना

भाग क गवन भवन निज त्याग तब ऐसा तामस चार

आयो सुजन विजन को भेद बुलायो यह बालक लख

शंकर आई रहा रोग चरणन में थाई तब मुख जीवा

निकल जो आई यही रूप प्रचलित है

माई भरयो महिष सुर मद भारी पीर किए सक नर

नारी करुण पुकार सुनी भक्तन की पीर मिता

वन हित जन जन की तब प्रगति निजे सेन समता

नम परा मा महिष विजेता शम निसुम हन छन

माही तुम सम जग दूसरे कोई नाही नम मथन हरि

खल दल के सदा सहायक भक्त विकल के दिन

विहीन कर ते सेवा पावे मनवांछित फल मेवा

संकट में जो सुमिरन कर ही उनके कष्ट मा

तुम हार ही प्रेम सहित जो करती गावे भव

बंधन सो मुक्ति पावे काली चालीसा जो कोई

परही स्वर्ग लोक बिन बंधन चरी दय दृष्टि

से हेरो जगदंबा कहे करण मा कियो बलंबा

करहो मा तो भक्तन रखवाली जयती जयति काली

कंकाली सेवक दिन अनथ अनारी भक्ति भाव यति

शरण तुम

प्रेम सहित जो करे काली चालीसा पात तिनकी

पुरान कामना होयो सकल

जगत तो यह था काली चालीसा तो आज के लिए

इतना ही है जय माता दी जय

मकाल दूसरा वीडियो में काली माता के

नाम के ऊपर विवरण करूंगा तो आज के लिए

इतना ही है नमस्कार

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