कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने मोदी सरकार के व्हाइट पेपर की पोल खोल कर रख दी | - Kabrau Mogal Dham

कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने मोदी सरकार के व्हाइट पेपर की पोल खोल कर रख दी |

चार पांच दिन से अर्थव्यवस्था को लेकर
बड़े जोर शोर से चर्चा
है सरकार सीना ठोक के कुछ बातें कह रही है
हमने भी कुछ बातें कही है लेकिन असलियत यह
है कि अर्थव्यवस्था पर दो मत हो ही नहीं
सकते क्योंकि अर्थव्यवस्था को आंका

आंकड़ों से जाता है और आंकड़े झूठ नहीं
बोलते हैं
तो सबसे पहले तो सरकार ने फर्जी वाइट पेपर
लाने का काम किया और यह कितनी बड़ी

विडंबना है कि 10 साल सरकार में रहने के
बाद मोदी जी के पास अपने कार्यकाल का
रिपोर्ट कार्ड नहीं है वह 10 साल पहले की
सरकार के 10 साल के कार्यकाल
का लेखा जोखा लेकर आए

हैं यह कितनी बड़ी विडंबना है य आप लोग
खुद सोच सकते हैं 10 साल सत्ता में रहने
के बाद जब चुनाव के मुहाने पर आज सरकार

जोखा दे रही है अपना रिपोर्ट कार्ड दिखाने
की ना हैसियत है ना हिम्मत है और मैं कुछ
भी कहने से पहले इस मंच से एक बात खुली
चुनौती के रूप में कहती हूं अपने बनाए हुए
मानक पर अपनी डाटा रिगिंग पर हमारे और

अपने 10 वर्ष के एक साथ रख दीजिए दूध का
दूध और पानी का पानी हो जाएगा जनता को
निर्णय करने दीजिए लेकिन ऐसा करने की ना
हिम्मत है और ना हैसियत है सरकार में

लेकिन सबसे पहले मैं यह वाइट पेपर ऑफ लाइ
जिसको हम बोल रहे हैं इसमें हम सरकार का
काला कच्चा चिट्ठा भी अभी खोलेंगे लेकिन
यह जो सफेद पेपर लाया गया यह जो वाइट पेपर

लाया गया है इसमें सबसे बड़ी समस्या क्या
है ऐसे बहुत सारे जुमले सरकार के प्रवक्ता
सरकार के बेलगाम मंत्री
कुछ मंडली चरण चुंब कों की बोलती रहती है
आईटी सेल बोलती रहती है अगर यह वाइट पेपर

जो सरकार लाई है भाजपा के द्वारा आया गया
होता तो आप लोग भी इसको रद्दी के टोकरे
में फेंकने का काम
करते लेकिन षडयंत्र के तरीके से इसको
मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस की वैधता दी गई और

यह कितनी बड़ी विडंबना है कि सरकार जो
कंटिन्यूटी में होती है आपने मिनिस्ट्री
ऑफ फाइनेंस के अफसरों से वो पाप आया जो
इंडियन ब्यूरोक्रेसी में पहले कभी नहीं

हुआ है मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस के अफसरों
की वैधता ली गई इस पर उनको अपने ही किए
हुए पुराने काम को नकारना पड़ा और यह अंडर
माइनिंग ऑफ इंडियन ब्यूरोक्रेसी का इंडियन

लोकतंत्र का प्रजातंत्र में जिस तरह से
कार्य करती है ब्यूरोक्रेसी अफसरशाही उसका
पूरी तरह से अवमानना है दिस रियली
अंडरमाइंस इंडिया ब्यूरोक्रेसी बिकॉज यूर

मेकिंग ऑफिसर्स ऑफ द मि मिी ऑफ फाइनेंस
रिपुडिएट एंड रिजेक्ट देर ओन
वर्क 10 साल का फलसफा कुछ पॉइंट्स में
अंकित कर देती हूं और उसके बाद में डिटेल

में बात कर लेंगे बड़ी कोशिश की कर लेंगे
बड़ी कोशिश की गई सीरीज बदली गई पैमाना
बदला गया सब कुछ कर दिया गया उसके बावजूद
इस रिगिंग के इस षड्यंत्र के बावजूद

पैमाना बदलने के बावजूद
यूपीए के 10 वर्ष में जीडीपी ग्रोथ इनके
10 वर्षों से कहीं अधिक थी डेडल 10 वर्ष
की एवरेज जीडीपी ग्रोथ 6.7 पर थी इनकी 5.9
पर है जीडीपी ग्रोथ हमने इनको 6.7 पर पर

सौंपी थी 6 पर से नीचे उस जीडीपी ग्रोथ को
लाने का काम मोदी सरकार ने किया है इस
सरकार के कार्यकाल में आय घटी है उपभोग
घटा है निवेश घटा है बेरोजगारी बढ़ी है

महंगाई बढ़ी है आमदनी घटी लेकिन बचत खप गई
है देश पर कर्जा बढ़ा है रुपया गिरा है
पेट्रोल डीजल महंगा हुआ है सिर्फ जबानी
जमा खर्च सुना गया

है बेरोजगारी हमारे समय की शायद सबसे बड़ी
त्रासदी है लेकिन अगर आप बेरोजगारी में भी
युवा बेरोजगारी के आंकड़ों को देखिए तो यह
वाकई में टिकिंग टाइम बम है यह वह चिंता

का पैमाना है व यह चिंता का मानक है जो
हमारे डिविडेंड को डेमोग्राफिक डिविडेंड
को डिजास्टर में कन्वर्ट कर रहा है युवा
बेरोजगारी और इन सबके बारे में मैं अभी
थोड़ा डिटेल में बात करूंगी

आए शहरी लोगों की भी आय घटी है रूरल वेजेस
भी घटे हैं मनरेगा में ज्यादा खर्च क्यों
करना पड़ रहा है सरकार को क्योंकि
एग्रीकल्चर में जॉब्स बढ़ रही है किसी भी

डेवलपिंग इकॉनमी में अगर कृषि में जॉब बढ़
ती है और मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेस में
कम होती है जो हमारे यहां लगातार हो रहा
है पिछले कुछ सालों में यह चिंता का विषय

है आज एक डेवलपिंग इकॉनमी इंडिया में
मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेस की जॉब घट
रही है मैन्युफैक्चरिंग का शेयर जीडीपी
में घट रहा है मैन्युफैक्चरिंग का शेयर

वर्किंग पॉपुलेशन में घट रहा है यही हाल
सर्विसेस का है एग्रीकल्चर में जॉब बढ़
रही है ज्यादा से ज्यादा लोग अब खेती हर
मजदूरी करने

को मजबूर है
हाईएस्ट नंबर ऑफ फिगर्स 155 करोड़ लोग
रजिस्टर कर रहे हैं मनरेगा में मैंने जैसा
कि कहा निवेश भी गिरा है प्राइवेट निवेश

भी गिरा है वह सब इंडियन इंडस्ट्री के
टाइटंस जो टीवी पर 10 ऑन 10 सरकार को देते
हैं खूब चरण वंदन करते हैं पैसा लगाने को
नहीं तैयार है इनकी नीति में और एफडीआई भी

घटा है एफडीआई पर बड़ा सीना ठोका जाता था
3 साल से निरंतर एफडीआई गिर रहा है और
एफडीआई एज अ परसेंटेज ऑफ द जीडीपी और
एफडीआई एज अ परसेंटेज ऑफ ग्लोबल एफडीआई
फ्लो भी गिरा

है लगातार इस सरकार ने शिक्षा और
स्वास्थ्य पर पैसा कम खर्चा किया है और
असलियत यह है कि सरकार अभी भी समस्या
मानने को तैयार नहीं है मैं अब कुछ

क्रमवार तरीके से कुछ चीजों पर डिटेल में
थोड़ा सा बोल देती हूं मैंने कहा हर कोशिश
के बावजूद हर षड्यंत्र रचने के बावजूद
डेटा फजिंग के बावजूद सब कुछ करने के

बावजूद भी डिकेडल ग्रोथ 10 वर्ष की औसतन
ग्रोथ यूपीए की 6.7 पर थी इनकी 5.9 है यह
सब कुछ चाहकर भी मोदी सरकार झुठला नहीं
पाई और यूपीए में दो बड़ी चीजें हुई थी

2008 का इकोनॉमिक डिप्रेशन हुआ था और 2013
का टेपर टंट्रम हुआ था असलियत यह है
कि कोरोना पर हर बार ठीकरा फोड़ा जाता है
करोना आने के पहले इस देश की जीडीपी ग्रोथ

आधी हो गई थी और उसके आधे होने का कारण
नोटबंदी और विफल रूप से जो जीएसटी लगाया
गया वो था आपकी जानकारी के लिए याद दिला
दूं कि

2016 के बाद 2019 में जीडीपी ग्रोथ 3.9 पर
पर आकर गिर गई थी कोरोना का तब एक भी केस
नहीं आया था 45 वर्ष में सबसे ज्यादा तब
बेरोजगारी थी तो यह सरकार की विफल नीतियों
का प्रमाण है ठीकरा कोरोना पर ना फोड़ा

जाए और आज भी हमारी जो जीडीपी ग्रोथ रेट
है वोह 6 पर के आसपास है जो बड़ी इकॉनमी
है चाहे वो यूएस हो चाहे वो यूरोपियन
इकॉनमी हो वो पैंडम में जो उनको चोट

पहुंची जो पेंडम में क्षति हुई उनको
अर्थव्यवस्था में उसको दूर करके अब आगे
बढ़ चुकी है हम अभी भी 6 पर पर ग्रो कर
रहे हैं और किसी को भी मूर्ख बनाने का कोई

यहां पर मतलब नहीं है असलियत यह है कि
यूएस की इकॉनमी 21 ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी
है और अगर वह दोती पर पर भी ग्रो करती तब
भी हमसे कहीं ज्यादा ग्रो करती है हमारी
महज न ट्रिलियन से थोड़ी ज्यादा की इकॉनमी
है

कंजमपट्टी
पी ग्रोथ यूपीए के शासनकाल में हुई
कंजंपुरावैम
कंगी इत्यादि लगातार घट रहा है
कंजमेशन हमारी जीडीपी का 60 प्र हिस्सा है

असलियत यह है कि
कंजमेट होती जाती है पैसेंजर वेकल सेल चार
पहिया गाड़ी जो है वो ए रेट 4.6 पर से बढ़
रही है लेकिन टू व्हीलर की जो सेल है वह
मात्र 0.7 पर से बढ़ रही है यूपीए के

शासनकाल में यह 9 प्र से बढ़ती थी दोपहिया
वाहन लोअर मिडिल क्लास गरीब ग्रामीण
क्षेत्र में लोग खरीदते हैं उसकी ग्रोथ
मात्र 0.7 पर है जो यूपीए के शासनकाल में

% होती थी 1 प्र से कम की ग्रोथ है तो अभी
भी जो अमीर और गरीबी का फासला है व उपभोग
में भी आपको साफ झलक रहा है ग्रामीण
क्षेत्रों में एफएमसीजी की जो सेल है

साबुन तेल मंजन बिस्किट यह कम है और यह
कैसे पता चलता है आप एचयूएल हिंदुस्तान
यूनिलीवर को देखिए आईटीसी को देखिए
ब्रिटानिया को देखिए उनके सेल्स के फिगर

देखिए वह दिखाता है कि कैसे ग्रामीण
क्षेत्रों में लोग गरीबी और कम आय से जूझ
रहे और इसीलिए साबुन तेल मंजन इस तरह की
चीजें नहीं खरीद पा रहे अब बात करते हैं
जो मैंने बहुत गहन विषय यहां पर उठाया था

और व विषय है कृषि में नौकरियों का बढ़ना
और मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेस में नौकरी
का घटना कोई भी डेवलपिंग इकॉनमी किसी भी
फास्ट ग्रोइंग डेवलपिंग इकॉनमी में जहां

पर डेवलपमेंट की तरह इकॉनमी जाती है वहां
पर नौकरी मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेस में
बढ़ती है लोग कृषि से निकलकर उन क्षेत्रों
में जाते हैं क्योंकि कृषि की जो जॉब्स

होती है वो कम रिमुनरेटिव उसमें कम पैसा
कम आय होती है यह माना जाता है लेकिन
असलियत यह है कि इस सरकार के कार्यकाल में
पिछले 10 साल में कृषि की नौकरियां बढ़ी
है मैन्युफैक्चरिंग की घटी है सर्विसेस की

घटी है मैन्युफैक्चरिंग की एवरेज ग्रोथ
रेट 6 पर से कम रही है 10 साल में और
जीडीपी में उसका शेयर हमारे शासनकाल में
17 प्र था वह घट के 14 प्र हो गया है

मैन्युफैक्चरिंग में करीब 12 प्र से 125
प्र के करीब लोग एंगेज होते थे जॉब्स के
माध्यम से व महज 11 पर हो गया है इसी तरह
से सर्विसेस में भी जबरदस्त गिरावट आई है

और इसका पूरा पूरा प्रमाण यह है कि सरकार
को मनरेगा में इस बार के बजट में 26000
करोड़ अतिरिक्त खर्चा करने पड़े क्योंकि

को मजबूर हैं उनके पास नौकरी नहीं है
मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेस में अब ऐसा
क्यों हो रहा है ऐसा इसलिए हो रहा है
क्योंकि लोगों की आय नहीं बढ़ रही है

उपभोग क्यों कम है क्योंकि आय नहीं बढ़
रही है रूरल वर्कर के जो वेजेस हैं वह
सिर्फ और सिर्फ 1 प्र बढ़े हैं सरकार के
शासनकाल में मात्र 1 पर इंक्रीज इन रूरल

वेजेस पता नहीं किस मुंह से वित्त मंत्री
खड़े होकर कहती हैं रूरल वेजेस दुगने हो
गए हैं उन्हीं का डाटा और अभी मैं ये
जुमले के साथ समझा भी दूंगी कि कैसे
उन्हीं का डाटा प्रूफ करता है कि रूरल

वेजेस मात्र 1 पर बढ़े हैं अनइंप्लॉयमेंट
पर बात करना थोड़ा जरूरी है जैसा कि मैंने
कहा एक भी कोरोना केस आने से पहले 45 साल
में सबसे ऊंचे शिखर पर बेरोजगारी थी और
सबसे भयावह स्थिति यह हमारा आंकड़ा नहीं

है यह वर्ल्ड बैंक का डाटा है सबसे भयावह
स्थिति जो यूथ अनइंप्लॉयमेंट है उसको लेकर
है सीएमआई का आंकड़ा दीजिए तो यह कहते हैं
झूठा है यह आंकड़ा चलिए सीएमआई का आंकड़ा

नहीं देते हैं वर्ल्ड बैंक का आंकड़ा क्या
कहता है वर्ल्ड बैंक का आंकड़ा ये कहता है
कि 2004 से 14 के बीच में यूथ
अनइंप्लॉयमेंट
177.8 पर पर था और आज इस सरकार के 10 साल
के शासनकाल में करीब 25 प्र पर है यह मेरा

आंकड़ा नहीं है यह सीएमआई का डेटा नहीं है
क्योंकि सीएमआई का डाटा और भी बयाव है वह
44 प्र युवा बेरोजगारी बता रहा है वर्ल्ड
बैंक का आंकड़ा बताता है कि पिछले 10 साल
में औसतन यूथ अनइंप्लॉयमेंट 25 प्र रहा है
जो कि कभी 17 प्रतित होत
था

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