कहानी ऐसी जो ईश्वर पर भरोसा करना सिखाये - Kabrau Mogal Dham

कहानी ऐसी जो ईश्वर पर भरोसा करना सिखाये

एक अंधेरे कमरे में चार मामबत्तियां जल रही थी पहले मोमबत्ती ने अपना परिचय दिया कि मैं विश्वास हूं दुनिया में

नहीं रहना चाहती क्योंकि आज के इस आधुनिक युग में नाम इंसानों के नाम तक ही सीमित वही आपको सबसे

ज्यादा पीड़ा देगी इसलिए मैं अपना जीवन या समाप्त करने जा रही हूं दूसरी मोमबत्ती रहती है कि मेरा नाम शांति है पूरी दुनिया में अशांति है जहां इतनी अशांति हो वह शांति नहीं रह सकती कहना चाहती हूं कि इस

दुनिया में अशांति रहेगी या फिर मैं रहूंगी साथ में नहीं रह सकते मुझे इस बात का पता है की अशांति हमेशा हर दिन बढ़ते जाएगी इसलिए मैं अपना जीवन को इसी वक्त ही समाप्त कर रही हूं यह कहकर वह बुझ जाती है

मोमबत्ती अपना परिचय देता है कि मेरा नाम प्रेम है मैं इस दुनिया से एक चीज सीखी है कि प्रेम लोग स्वार्थ के लिए करते हैं इंसान का स्वार्थ खत्म हो जाएगा उसे दिन प्रेम भी खत्म हो जाएगा प्रेम पाने के लिए मुझे किसी

अगले अच्छे युग में जन्म लेना पड़ेगा यह कलयुग मेरे लिए नहीं है यह कहकर वह भी पूछ जाति और अपना जीवन समाप्त कर देती है निष्कर्ष सच में दिल को छूने वालों में से एक कहानी है के समय इंसान के साथ कुछ

भी गलत हो जाता है तो तुरंत ही गलत निर्णय ले लेता है वह निराशावादी बन जाता है दूर जाना है तो हमें आशा की किरण हमारे जीवन जिस दिन आप आशावादी बन गए उसे दिन आपको विश्वास प्रेम और शांति सब प्राप्त हो

जाएगी रात के 2:30 बजे थे एक सेट को नींद नहीं आ रही थी घर में चक्कर पर चक्कर लगाया जा रहा था पर चैन नहीं पड़ रहा था ठक्कर वह घर से नीचे उतर आया अपनी कर निकली और शहर की सड़कों पर निकल

गया एक मंदिर दिखा तो सोचा थोड़ी देर इस मंदिर में जाकर भगवान के पास बैठा हूं प्रार्थना करता हूं तो शायद मन को शांति मिल जाए

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