कलकते में बैठी कालका - Kabrau Mogal Dham

कलकते में बैठी कालका

बोलिए सच्चे दरबार की जय

हो जय करामा कलकत्ते वाली का बोल सच्चे

दरबार की जय

हो कलकत्ते में बैठी काल का जोत जगह दिन

रात माई मेरी बिगड़ी बनावे

[प्रशंसा]

है कल मैं बैठी काल का जोत जग दिन रात माई

मेरी बिगड़ी बनावे

हे कल कते में बैठी काल का की

जगतरा आई मेरी बिगड़ी बड़ावे है हां

कलकत्ते में बैठी काल का जोत जगह दिन रात

माई मेरी बिगड़ी

बनावे

विषण रूप में जो भी धोके कर दे से कल्याण

माई मेरे काम बनावे

हे ण रूप में जो भी ो के कर दे से कल्या

मा मेरे काम

बवे री कलते में बैठी काल जो जग बनरा माई

मेरी बिगड़ी

[संगीत]

बनावे

च मुंडे रूप में जो ब माने कर दे पल में

इलाज माई तेरी शान निरा

है समुंद रूप में जो भी मांगे करके पल में

इला भाई तेरी शान निरा

है कलकत्ते में बैठी काल जोत जगह दिन रात

माई मेरी बिगड़ी बनावे

[प्रशंसा]

है कलकत्ती में जोत जग मां पटियाले में भी

धाम माइ रे खेल निराले है

कलकत्ते में जोति जग मा पटिया में

विधाई तेरे खेल निरा है हा कलकत्ते में

बैठी काल का जोट जग दिन रात माई री बड़

[संगीत]

[संगीत]

बना

[संगीत]

प्रंस भगत के संग संग चले रोब दिखावे मात

माई पटियाले

आली प्रं भगत के संग संग चाले रोप दिखावे

मेरी मां पट आड़ आड़ी है री कलकत्ते में

बैठी काल का जोत जग दिन रात माई मेरी

बिगड़ी बनावे

है कलते में बै ल का

जगरा भाई मेरी बिगड़ी बड़वे

है कलक के में बैठी काल का जो जगवा भाई

मेरी बड़ी

बड़वे

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