कठिन समय में भी खुश रहो - Kabrau Mogal Dham

कठिन समय में भी खुश रहो

तपस्या तो सभी करते हैं किंतु केवल अपने स्वार्थ कोई भी ईश्वर को प्राप्त करने के लिए तपस्या नहीं करता कोई

भी तपस्या इसलिए नहीं करता किसकी भक्ति उसके आराध्या तक पहुंचा है पृथ्वी चाहते हो किंतु मृत्यु से मुक्ति

प्राप्त नहीं है सृष्टि ही जीवन प्रकाश आवश्यकता है तो अपने नेत्र खोलकर अंधकार संसार में उन्नति तभी संभव है यदि कोई बड़ा नहीं होगा तो कोई छोटा ही नहीं रह पाएगा शक्ति कैसे संतुलन को संतुलित रखना अनिवार्य है

क्योंकि संपूर्ण प्रवृत्ति व्यक्तिगत हो ओके गूगल अपने स्वार्थ जीतने की व्यवस्था से ग्रसित मनुष्य ससुराल में रहता है तो केवल जितना मलयालम कपट के माध्यम से ही क्यों ना एक दिन वो ब्रह्मलोक गया बड़ी चालाकी से उसने

ब्रह्मदेव से चारों वेद प्राप्त करने और जाकर समुद्र में छुप गया क्योंकि सारा ज्ञान वेदों में नहीं थे चलो अज्ञानता का अंधकार फैलता है बढ़ने लगता है भगवान विष्णु सब देख रहे थे 3:45 विलुप्त होने का भाई था ब्रह्मदेव स्टेशन

करता है वेदों के अभाव में पुनर्जन्म की प्रक्रिया को पुनः स्थापित करना अत्यंत कठिन प्राप्त करना अनिवार्य था विष्णु ने क्या किया भगवान विष्णु ने मत्स्य रूप धारण किया कोई एक मछली बन भगवान विष्णु बड़ी मछलियों

का भाई चलते हुए राजा सत्यव्रत अत्यंत दयालु और अपने महल में चिंटू रात भर में मछली इतनी बड़ी हो गई और उसका बड़ा आकार देखने के पश्चात कमंडल में से निकाल कर मटकी में डालने के पश्चात उसका आकार

किंतु उसी की रात उसका आकार इतना बड़ा हो गया हिंदू नदी में रखने के पश्चात पुणे और इतना बड़ा हो गया यदि उसे महासागर में नहीं रखा जाता 2017 से महासागर की ओर लगी क्योंकि राजा सत्यव्रत तपस्वी ज्ञानी कुछ साधारण मछली नहीं भगवान विष्णु राजा सत्यव्रत के उतरता से अत्यंत प्रसन्नता

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