आज मैं वरदान देने आई हूँ - Kabrau Mogal Dham

आज मैं वरदान देने आई हूँ

महाकाली कहती है मेरे बच्चे आज मैं तुमसे

एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण बात करने आई हूं

जो तुम नहीं जानते मेरे बच्चे बुरे कर्मों

का फल हमेशा बुरा ही होता है तुम्हें इस

बात पर विश्वास नहीं है तुम सोचते हो कि

बुरे लोग हमेशा खुश रहते हैं उनके साथ

हमेशा अच्छा होता है और अच्छे लोगों के

साथ हमेशा बुरा होता है किंतु तुम्हारी

सोच अनुचित है मेरे बच्चे प्रकृति किसी को

नहीं छोड़ती बुरे लोगों का पतन निश्चित

होता

है बस तुम उसे देख नहीं पाते किसी के धन

का पतन होता है तो किसी के मन का पतन होता

है तो किसी के संबंधों का पतन होता है तो

किसी के तन का पतन होता है मेरे बच्चे इसी

भाती उसका भी पतन शुरू हो गया है जिसने

तुम्हारे साथ छल किया है तुम्हारा अपमान

किया है मेरे बच्चे तुम सोचते हो उसे तो

कुछ भी नहीं हुआ वो तो अच्छा भला खुश है

धन धनवान से संपन्न है और मेरे पास कुछ भी

नहीं है सिवाय दुख दर्द के मेरे बच्चे खुश

दिखने और खुश होने में बहुत अंतर होता है

उसने तुम्हारे साथ ही बुरा नहीं किया

बल्कि अन्य लोगों का भी बुरा किया है अन्य

लोगों को भी दुखी पहुंचाया

है बल्कि अन्य लोगों को भी दुख पहुंचाया

है जिसका बुरा परिणाम वह भुगत रहा है उसके

पास धन तो है किंतु मानसिक शांति नहीं है

वह हर समय बेचैन रहता है उसके सारे संबंध

झूठे हैं

उसके उसे कोई भी प्रेम नहीं करता उसे कोई

भी प्रेम नहीं करता हर कोई

उससे अपना स्वार्थ चाहता है इसलिए वह मन

से अत्यंत दुखी

है

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